खुला चैंबर, खुली लापरवाही… और किस्मत से बच गया बड़ा हादसा!

सांध्य प्रकाश विशेष

खुला चैंबर, खुली लापरवाही… और किस्मत से बच गया बड़ा हादसा!

उज्जैन। बरसात के मौसम में जिला प्रशासन लगातार पुल-पुलियाओं और जलभराव वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग, संकेतक और सुरक्षा इंतजाम के निर्देश दे रहा है। लेकिन शहर के बीचों-बीच लाल दरवाजा से महाकाल मंदिर जाने वाले मार्ग पर जैन लस्सी के सामने लगभग 30 से 40 फीट गहरा खुला चैंबर प्रशासनिक दावों की हकीकत बयान करता नजर आया।
सोमवार रात यह खुला चैंबर किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। स्थानीय नागरिकों और हितेश(मोनोपाल) ने समय रहते एक ब्लैक बोर्ड रखकर लोगों को सावधान किया, जिससे राहगीरों को रोका जा सका। हितेश के अनुसार, हम खुद भी उसमें गिरते-गिरते बचे। भगवान महाकाल की कृपा रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।"
तस्वीर में साफ दिख रहा है कि रात के अंधेरे में यह खुला गड्ढा आसानी से दिखाई नहीं देता। यदि कोई दोपहिया वाहन या पैदल श्रद्धालु इसमें गिर जाता, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।
अब सवाल यह है कि जब कलेक्टर लगातार खतरे वाले स्थानों पर संकेतक, जंजीर और बैरिकेड लगाने के निर्देश दे रहे हैं, तो महाकाल मार्ग जैसे अतिसंवेदनशील रास्ते पर 40 फीट गहरा खुला चैंबर किसकी नजर से ओझल रहा?
क्या जिम्मेदार विभाग किसी हादसे का इंतजार कर रहा था? अगर स्थानीय नागरिक सतर्कता नहीं दिखाते, तो क्या आज किसी परिवार में मातम होता?
यह घटना केवल एक खुला चैंबर नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद उस खुले छेद की भी याद दिलाती है, जहां आदेश तो ऊपर से निकलते हैं, लेकिन नीचे तक पहुंचते-पहुंचते जिम्मेदारी का ढक्कन गायब हो जाता है।
उम्मीद की जानी चाहिए कि संबंधित विभाग तत्काल इस चैंबर को सुरक्षित करेगा और यह भी तय करेगा कि ऐसी लापरवाही दोबारा किसी की जान पर भारी न पड़े।