25 मई 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
लड्डू की जांच...
शीर्षक पढ़कर सभी के दिमाग मे यही ख़याल आएगा। बाबा महाकाल के प्रसिद्ध लड्डू गुणवत्ता की जांच हो रही है? मगर ऐसा बिल्कुल भी नही है। प्रसिद्ध लड्डू को लेकर चल रहे खेल का खुलासा भी जल्दी करेंगे। फिलहाल यह लड्डू जांच उगरानी-वसूली से जुड़ी है।जिसका सीधा संबंध शिक्षा विभाग से है।लड्डू और मिठाई जैसे कोडवर्ड के माध्यम से वसूली होती थी। इसका खुलासा हुआ तो उज्ज्वल जी की अनुशंसा पर दमदमा के सोलहवें तीर्थंकर ने जांच बिठा दी है। जांच डिप्टी कलेक्टर को दी गई है। जिनकों संकुल में ज्ञापन -अधिकारी बोला जाता है। अब देखना यह है कि उगरानी करने वाले अधिकारी को जांच में दोषी पाया जाता है या निर्दोष ? इसका फैसला भी किसी शायर के अशआर से किया जा सकता है।रिश्वत के भी दो पहलू हैं/ लोगे तो फसा देगी- दोगे तो छुड़ा देगी...!बाकी पाठकगण समझदार है और हमकों आदत के अनुसार बस चुप रहना है।
स्मार्ट पंडित से प्रॉब्लम...
अपने स्मार्ट पंडित को हमारे पाठक भूले नहीं होंगे? कभी बाबा की नगरी में केवल सीईओ थे। फिर अपनी लच्छेदार भाषा शैली में जादू चलाया। तो शिवाजी भवन के मुखिया बन गए। इसके बाद अचानक उनका जादू टोना उतर गया।तो लूप-लाइन में पोस्टिंग हो गई। परिवहन विभाग में वनवास भोगा। देवीआहिल्या नगरी में। तब तक अखिल भारतीय सेवा में आ गए।फिर उन्होंने जादू टोना किया। नतीजा वर्तमान में अपने मंद-मुस्कान जी के अधीन काम कर रहे है। उनके पास पानीदार विभाग है। इसी का संकट है। अहिल्या नगरी में। तभी तो पूरा विपक्ष एक सुर में मांग कर रहा है। स्मार्ट पंडित को हटाओ। गुहार मंद -मुस्कान से लगाई है। इस बीच सोशल मीडिया पर अभियान शुरू हुआ है। गुजारिश की गई। इनको फोन लगाए- जिम्मेदारी का अहसास कराए। देखना यह है कि स्मार्ट पंडित को हटाने का सपना पंजाप्रेमियो का कब पूरा होता है? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
हाजिर हो...
शीर्षक पढ़कर ही पढ़कर हमारे पाठकगण समझ गए होंगे। हमारा इशारा किसकी तरफ है। मगर जिस जगह अपने उम्मीद जी को मंगलवार के दिन तलब किया गया था। वहाँ भले ही हाजिर-हो की आवाज भले सुनाई नही दी। मगर माहौल बिल्कुल वही था। पेशी थी।दूषित जल कांड में हुई मौतों पर। इसके अगले दिन अपने इन्दौरीलाल जी की पेशी थी। जो गए तो मगर बयान दर्ज नही हुए। तो शुक्रवार को फिर गए थे। अंदरखाने की खबर है। जो जांच आयोग बना है। वहाँ से आदेश निकला है। पिछले 10 साल में पदस्थ रहे आयुक्त और अपर आयुक्त सभी की पेशी होगी। जिसमें से उम्मीद जी के बयान हो गए है। अपने नंबर -1 और टर्मिनेटर मैडम को भी तलब किया गया है। नंबर-1 आजकल सरकारी भोंपू के बॉस है। सबको अपने अपने कार्यकाल का ब्यौरा देना होगा। अपने उम्मीद जी और इन्दौरीलाल तो जवाब दे आए हैं। बाकी किस किसका नम्बर आता है और जब रिपोर्ट आएगी।तब किस -किस पर गाज गिरेगी। फैसला 90 दिनों बाद होगा।तब तक इंतजार करते हुए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
खास के लिए कटौती...
हर अधिकारी का कोई न कोई एक मातहत विशेष महत्व रखता है। जिसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।अपने एंग्रीमैन के लिए भी एक सहायक यंत्री का महत्व है। इस यंत्री की पिछले दिनों अपनी बहन जी ने जमकर लू उतार दी। कारण उनकी कार्यशैली। मलबा हटाकर नाली पर स्लैब डालनी थी। इन्होंने बगैर मलबा हटाए काम कर दिया।वह भी उस क्षेत्र में, जहाँ विकासपुरुष बरसो से निवास कर रहे है। चौड़ीकरण का काम चल रहा है। रहवासियों ने बहन जी को शिकायत दर्ज कराई। फिर उपयंत्री को बुलाया गया। उसको गलती बताई। उन्होंने जेसीबी बुलाकर नाली पर लगी स्लैब को हटा दिया। सफाई करवाई। जिसके बाद खास सहायक यंत्री को तलब किया गया। जमकर लू उतारी। फटकार के बाद यंत्री महोदय ने अपनी इज्जत उतरने का राग एंग्रीमैन को सुनाया।
नतीजा-कुछ दिन बाद एंग्रीमैन ने एक सहायक यंत्री और एक उपयंत्री का 1-1 महीने का वेतन काटने का आदेश सुना दिया। इसके बाद फटकार खाने वाले अधिकारी जी खुश है। ऐसा शिवाजी भवन वाले बोल रहे है। इसमे सच-झूट कितना है। फैसला चुप के पाठक खुद कर लें, क्योंकि हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
आत्मविश्वास...
अपने हाइनेस के आत्मविश्वास की दाद देनी होगी। उनको माननीय बने मुश्किल से ढाई साल हुआ है। इस दौरान कई दफा विवाद में आ चुके हैं। इसके बाद भी उनका आत्मविश्वास आजकल सातवें आसमान पर है। तभी तो सिंहस्थ दौरे में खुलकर बोले। तब जब कुंडली दिखाने की बात चल रही थी। जोगी बाबा ने साफ कह दिया। मुझे इसमे मत घसीटो। उसके बाद हाइनेस ने बताया। मेरी कुंडली में 4 दफ़ा माननीय बनने का योग है। उसके बाद दौरे में शामिल बाकी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में चर्चा है। यह कॉन्फिडेंस है या ओवर कॉन्फिडेंस? इसका सही जवाब तो अपने हाइनेस ही दे सकते है। हम तो बस आदत के अनुसार बस चुप रह सकते हैं।
भड़ास निकाल लो-चुप मत रहो..
ऊपर लिखी नसीहत उसी दौरे में दी गई। जिसमें हाइनेस ने अपना आत्मविश्वास व्यक्त कर रहे थे। सलाह दी गई अपने प्रथमसेवक को। देने वाले अपने हाइनेस ही थे। जिन्होंने उस वक्त यह नसीहत दी। जब प्रथमसेवक ने कहा कि मेरे कोई काम नहीं हो रहे है। बस फिर क्या था। हाइनेस ने उनको सांत्वना देते हुए कहा। मेरे भी नहीं होते है। मगर हमकों दिखाना चाहिए। काम हो रहे है-अफसर सुनते हैं। ज्यादा है तो विकासपुरुष को बोलो। अपनी भड़ास निकाल लो। दिल में गुबार मत रखो।मैं तो यही करता हूं। अब देखना यह है कि प्रथमसेवक इस सलाह को कितनी गम्भीरता से लेते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
दवाब की रणनीति...
अपने ताऊ जी याद है। वही बदबूदार शहर वाले। जो कि अपने राजनीतिक विजन के कारण आज एक प्रदेश के प्रथम नागरिक हैं। सहज-सरल मगर हमेशा विवादों से दूर रहते है। सार्वजनिक जीवन हो या राजनीति। कभी कोई ऐसा काम नहीं करते जिससे छबि पर दाग लगे। मगर इस दफा चूक गए। एक ऐसे व्यक्ति के घर चले गए। जिस पर इन दिनों सरकारी जमीन पर कालोनी काटने का दाग लगा हुआ है। बाकायदा शिकायत हुई है। जांच दल बना है। मगर जांच करने वाले प्रतिवेदन बना-बना कर फाड़ रहे है। पेश नही कर रहे है। इस बीच में अपने ताऊ जी को बुलाकर प्रेशर बनाने की फ़ोटो सोशल मीडिया पर अपलोड की गई है।
ऐसा अपने कमलप्रेमियों का कहना है। क्योंकि ताऊ जी पहली दफा ऐसे शख्स के घर गए है। जिस पर दूसरी बार दाग लगे है। जबकि ताऊ जी ऐसे इंसान से दूर की दुआ सलाम रखते हैं। जिस पर कोई जांच चल रही हो! तभी तो कमलप्रेमी सवाल उठा रहे है। ताऊ जी को किसने धोखे में रखकर दागी के साथ डिनर टेबल पर बैठा दिया? जिसका जवाब तस्वीर में है,मगर मुँह से कोई नहीं बोल रहा है। सब चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
आपदा में अवसर......
सरकारी मशीनरी का सीधा फार्मूला है। जो ऊपर की हेडिंग है। इसमे यह पीएचडी होते है। 11वर्षीय बालिका की मौत इसका प्रमाण है। घटना हुई तो समिति बना दी। जैसे अपने पाटला जी और बाकी को यह पता ही नहीं था। कितने अवैध चल रहे है? सबको पता है। तभी तो उनके 7 लोग इस काम में लगे संचालकों से लगातार वसूली करते आ रहे थे। इन सातों के नाम क वि आ आर प्र वि भा से शुरू होते है। इनको सब पता था। कहाँ-क्या चल रहा है। जेब गर्म हो रही थी। इसलिए किसी को चिंता नहीं थी। खुद पाटला जी को लेकर चर्चा है। बाल्यकाल अवकाश के लिए उनके रेट फिक्स है। मात्र 12 हजारी। रिलीव करने के लिए 2 हजारी। ताज्जुब की बात यह है। अवैध अस्पताल की जांच दल में शामिल एक शख्श का कानीपुरा रोड पर अस्पताल है। जांच दल की वसूली की खबरे भी स्वास्थ गलियारों में सुनाई दे रही है। आखिर आपदा में अवसर का मौका कौन छोड़ता है। तभी तो यह मांग की जा रही है। अपने उज्ज्वल जी से। दल ने अभी तक जो ताले लगाए हैं। उनके लिए एक दल किसी डिप्टी कलेक्टर की अगुवाई में बनाया जाए। ताकि दूध का दूध-पानी का पानी हो सके?वरना जितने भी सील हुए है। वह कुछ दिनों बाद नाम बदलकर फिर इस गंदे धंधे में लग जाएंगे। जैसा नानाखेड़ा स्तिथ अस्पताल का हुआ था। घटना हुई। सील हुआ। नाम बदला। फिर चालू हो गया। देखना यह है कि अपने उज्ज्वल जी अब क्या कदम उठाते हैं। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मैडम का दवाब...
एक बार फिर हम अपने पाठकों को बदबू वाले शहर लेकर चलते है। जहाँ अपनी 8 हजारी मैडम के दवाब की चर्चा राजस्व वाले कर रहे है। मामला वही सरकारी जमीन को लेकर हुई शिकायत का है। जिसके लिए राजनीतिक दवाब बनाया जा रहा है। शिकायत होने पर जांच शुरू हुई थी। 3 महीने होने वाले है। प्रतिवेदन नही बना है। अंदरखाने की खबर है। जांच दल प्रतिवेदन बनाता है। मगर फिर उसको फाड़ना पड़ता है। कारण-जैसा प्रतिवेदन चाहिए। वैसा बनाया,तो जांच दल पर तलवार लटक जाएगी। इस बीच शिकायत करने वाले ने एक नई शिकायत अपने उज्जवल जी को ई-मेल के माध्यम से भेज दी है। जिसमें 6 बिंदु उल्लेखित है। लास्ट बिंदु में 8 हजारी मैडम पर आरोप लगाते हुए हटाने की मांग की गई है। देखना यह है कि अपने उज्जवल जी क्या एक्शन लेते है। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
समन्वय की कमी...
अपने एंग्रीमैन खुश है। होना भी चाहिए। हींग लगे न फिटकरी की तर्ज पर 800 खोखे का काम मिल गया है। जिसके लिए चुप की तरफ से बधाई। उनको और पर्दे के पीछे भूमिका निभाने वाले को। उम्मीद भी है कि समय पर काम पूरा होगा। मगर जो काम वर्तमान में चल रहे है। उसमें समन्वय की कमी नजर आ रही है। एक उदाहरण काफी होगा। जैसे हांडी में पकने वाले चावल में से एक चावल उठाकर देखा जाता है। सेंट्रल कोतवाली के समीप ओपन नाली निर्माण होना था। ठेकेदार को किसने निर्देश दिए। पाइप लाइन डाल दो। उसने पालन किया। 50 मीटर लाइन डाल दी। फिर नया आदेश जारी हुआ। पाइप लाइन हटाकर ओपन नाली बनाओ। ठेकेदार बिफर गया। उसने पाइप लाइन में खर्च हुई राशि की डिमांड कर दी। करीब 5 पेटी। जिसके बाद शिवाजी भवन में चर्चा है। अगर यही हाल रहा-समन्वय नहीं रहा। तो सिंहस्थ मेला में पानी-सीवरेज का काम सही होगा या आखरी वक्त तक इसे हटाओ-उसे लगाओ चलेगा? सवाल तो लाख नही करोड़ टके का है। मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप रहना है।
ख़याली पुलाव...
अपने कमलप्रेमियों के पास आजकल ज्यादा कुछ काम बचा नहीं है। तो एक दूसरे को निपटाने में लग जाते है। उसमें कुछ ख़याली-पुलाव पकाने लग जाते है।हालांकि यह पुलाव है ख़याली-मगर इसका स्वाद इतना चटपटा और जायकेदार बना देते है। कि कमलप्रेमियों में कुछ लोग इसको सच मान लेते हैं और समझदार इस चर्चा को ख़याली पुलाव। जैसे बदबूदार शहर के अपने दस -नंबरी जी के वाहन को लेकर पके पुलाव की महक। अपने दस -नम्बरी जी मुखिया बने। तो उन्होंने भी परंपरा का पालन किया। नया बड़ा वाहन खरीदा। इसके पहले अपने दालवाले नेताजी ने भी खरीदा। पूर्ववर्ती मुखिया लेटरबाज़ जी,जुगाड़ू लाल जी ने भी यही किया था। खैर,परम्परा का निर्वहन करते समय फ़ोटो खिंची। जिसमे एक शख्स मौजूद था। काफी संप्पन -मगर संगठन में उनको कोई बड़ा पद नही मिला है। लेकिन वह दौड़ में है। युवा कमलप्रेमी संस्था के लिए। तभी तो ख़याली पुलाव पका रहे है। दबी जुबान से बोल रहे है।वाहन गिफ्ट करने का लाभ भविष्य में पक्का है। अब हम अपने कमलप्रेमियों के इस ख़याली पुलाव की सोच पर अंकुश तो लगा नहीं सकते है। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मेरी पसंद
उस पेड़ से किसी को, शिकायत न थी मगर,
वह पेड़ सिर्फ़ बीच में आने से कट गया।
@"मुनव्वर राना"