29 जून 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
ग्रामदेवता की कश्मीर यात्रा...
जिले के एक ग्रामदेवता की निजी यात्रा इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है। कोई यात्रा पिछले बरस की बता रहा तो कोई ताज़ा यात्रा। इस यात्रा में उनकी एक फोटो देखने में आ रही है। जिसमें वह बोटिंग का आनंद उठा रहे है। मगर साथ में उनकी एक महिला मित्र भी है। जो कि उनकी सहायक के रुप मे हल्के का काम भी देखती है। कल तक यह महिला सहायक बीपीएल श्रेणी का जीवन बसर करती थी। मगर जब से ग्रामदेवता प्रसन्न हुए है।जमकर तरक्की कर ली है।मगर यह ग्रामदेवता कौन है?यह बताने को कोई राजी नहीं है। बस इतना इशारा कर रहे है कि उक्त देवता इन दिनों पिस्तौल कांड नायक के क्षेत्र में पदस्थ है। हमारा तो बस बाकी ग्रामदेवताओ से हाथ जोड़कर अनुरोध है। वह इसे पढ़ने के बाद हमें फोन लगाकर जानकारी नहीं मांगे! कारण पता होता तो हम खुलकर लिख देते। उम्मीद है अनुरोध स्वीकार करेंगे?बाकी आदत के अनुसार हम चुप रहेंगे।
मोबाइल पर प्रतिबंध...
जिसने भी बाबा महाकाल का नंदी हॉल देखा है। वहाँ दीवार पर एक पोस्टर लगा है। मोबाइल पर प्रतिबंध। इसका पालन आमजनता से करवाया जाता है। लेकिन एक शख्श ऐसा भी है। जो वीआइपी का प्रोटोकॉल देखता है।इसलिए उसके लिए नियम अलग है। वह मंदिर के पट खुलने से पहले ही नंदी हॉल में जाता है। जब वहां कोई नहीं होता है। बंद पट को छूकर और नंदी बाबा को प्रणाम करते हुए वीडियो बनवाता है। यहां तक भी ठीक है। मगर सोशल मीडिया पर उसे अपलोड भी करता है।आश्चर्य यह है अगर कोई आमभक्त ऐसा करे तो उस पर कार्यवाही हो जाती है। लेकिन इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। अपने फटाफट जी भी लाचार है तो हम किस खेत की मूली है जो रुकवा देंगे। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
1 प्रतिशत अलग देना होगा
इसमे कोई शक नहीं है। अपने एंग्रीमैन ने शिवाजी भवन में काम करने वालों को टाइट कर रखा है। दिन-रात काम पर लगा रखा है। मगर वह भुगतान के बदले अतिरिक्त कमाई पर अंकुश नहीं लगा पाए हैं। तभी तो एक अधिकारी इतने हवा में उड़ रहे है कि जो उनका नियमित 1 प्रतिशत है। उसके बदले अतिरिक्त 1 प्रतिशत की डिमांड करते है। जब ठेकेदार इस पर राजी होता है। तभी उनकी तरफ से फाइल आगे बढ़ती है। ऐसी चर्चा शिवाजी भवन के गलियारों में सुनाई दे रही है।बेचारे ठेकेदार किस से गुहार लगाए। तालाब में रहकर मगरमच्छ से बैर कर नहीं सकते है। इसलिए चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
गनमैन का जलवा...
वर्दीधारी गनमैन को मासिक वेतन अधिकतम कितना मिलता है। 40 हजारी। क्या इस वेतन में कोई गनमैन अगर अवकाश पर घूमने जाएं। तो वह किस होटल में रुकना पसंद करेगा।कम से कम 4 स्टार या 5 स्टार में तो नहीं रुकेगा? जहाँ कमरे की कीमत ही 10 -20 हजारी से ज्यादा होती है। अब अगर ऐसे होटल में एक गनमैन रुके,सोशल मीडिया पर स्विमिंग पूल सहित कई तस्वीरे अपलोड करें। तो मंदिर के गलियारों में सवाल उठना लाजिमी है। जबकि वहां और भी गनमैनो की ड्यूटी है। मगर वह अपना जीवन यापन वेतन पर कर रहे है। मगर जो फाइव स्टार में ठहर रहा है। उसकी काबिलीयत केवल इतनी है। उन पर सुरक्षा अधिकारी की विशेष कृपा है। अधिकारी जी के दर्शन पॉइंट संभालते है। तभी तो इस योग्य है कि एक से एक होटल में रुकने की हैसियत रखते है। इसके लिए भक्तों को वीआईपी दर्शन करवा देते है। अब प्रसन्न भक्त अगर खुशी से कुछ दान दे तो स्वीकार करना धर्म है। ऐसा हम नहीं, बल्कि मंदिर में मौजूद उनके साथीगण ही बोल रहे है। बाकी समझदार को इशारा काफी है और हमकों चुप ही रहना है
चांदी तो चांदी है...
अपने उज्ज्वल जी इतिहास रच दिया है।पहली दफा जिले के मुखिया उज्ज्वल ने उस चांदी पर प्रहार किया है। जिसका सीधा संबंध आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ा है।मिठाई पर चांदी का बरक लगाकर बरसों से खिलवाड़ किया जा रहा है। किसी ने इस पर रोक नहीं लगाई। अपने उज्ज्वल जी ने सख्ती दिखाई है।उसके लिए बधाई।मगर उस चांदी का क्या होगा? जो मासिक बंदी के रूप में कूटी जाती है। उन दुकानों से जो नमकीन खाद्य पदार्थ बनाते है।क्या कभी उनकी गुणवत्ता की कोई जांच होती है। खुले आसमान के नीचे भट्टी में तलते हुए अगर उस खाद्य सामग्री को देख लो। तो खाने का मन नही होगा। लगाम केवल चांदी बरक पर नहीं बाकी पर भी लगाने की जरूरत है। खासकर मासिक चांदी कुटाई पर। इस पर अगर अंकुश लगे तो ही चांदी अभियान सफल होगा। बाकी हमकों आदत के अनुसार चुप रहना है
नया वोटर आया है...
अपने विकासपुरुष को मौका मिलना चाहिए। हास्य रस वह पैदा कर देते है। जैसे हेलीपेड पर किया।उड़नखटोले से उतरते ही। पहले अल्फा जी,फिर उम्मीद जी, उज्ज्वल जी ,हिटलर जी और कप्तान ने गुलदस्ता भेंट करके बधाई -बधाई दी। विकासपुरुष ने बधाई स्वीकार करते हुए कहा..नया वोटर आया है। उनका आशय अपने दादा जी बनने पर था। उनके वोटर शब्द को सुनकर जोरदार वहाँ मौजूद अपने इन्दौरीलाल सहित सभी ने ठहाका लगाया। तो हम भी नए वोटर के लिए शुभकामनाएं देते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
कैमरे पर नजर...
पंजाप्रेमियो के राजासाहब आए थे। बाबा के दरबार मे भी गए। श्रद्धा से शीश झुकाते नजर आए। जिसकी तस्वीरे सोशल मीडिया पर अपलोड हुई। दो तस्वीरे पंजाप्रेमियो में चर्चा का विषय बन गई। अपने चरणलाल जी और मुंगेरीलाल जी की। जिन्होंने हाथ तो जोड़ रखें है। मगर बाबा के बदले दोनो कैमरे की तरफ देख रहे है। जिसके बाद अपने पंजाप्रेमियो मे चर्चा है। महाकाल के दरबार मे भी कैमरे की तलाश-हाथ बाबा के आगे,नजर फोटोग्राफर पर। अब अपने पंजाप्रेमियो की जुबान तो हम पकड़ नहीं सकते हैं। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
15 दिन का वेतन रोका..
अपने उज्ज्वल जी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जागरूक हैं। तभी तो महीने में दो दफ़ा निरीक्षण करने पहुँच ही जाते है। निर्देश देते है। लेकिन अपने गीतकार पाटला जी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह इस कान से सुनते हैं-दूसरे कान से निकाल देते है। तभी तो उज्ज्वल जी ने दो दफ़ा 7-7 दिन का वेतन काटने के आदेश जारी कर दिए। जिसके बाद यह चर्चा सुनाई दे रही है। जितना वेतन कटा है,उससे ज्यादा कमाई तो पाटला जी एक दिन में कर लेते है। बात सही भी है। अपने उज्ज्वल जी इससे ज्यादा कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते है। वेतन कटने से उनकी सेहत पर रत्ती भर असर नहीं पड़ता है। अब देखना यह है कि उज्ज्वल जी ऐसा क्या करते है, जिससे पाटला जी पर असर हो?तब तक हम चुप हो जाते हैं।
खंडन का कारण...
मंदिर के सूचना तंत्र ने एक समाचार जारी किया। जिसको सीधी भाषा में खंडन बोला जाता है। जिसको पढ़कर चुप ने खोजबीन की। तो अंदरखाने से वह सच निकलकर सामने आया। जिसकी किसी को भनक भी नहीं लगी। मगर उससे पहले उस घटना पर गौर करें। जिसमे देश का बल ने आंदोलन किया था। मंदिर के गेट पर। नतीजा बवाल खड़ा हो गया। उच्च स्तर तक। इसमें कोढ़ में खाज वाली नोबत तब आ गई। जब अपने फटाफट जी ने मुंहलगे खबरचियों को यह आंकड़ा बता दिया। इनके कारण मंदिर को 26 पेटी का नुकसान हुआ है। इशारा फ्री -दर्शन और अनुमति की तरफ था। खबरें बाजार में आ गई। तब राजधानी तक मामला गर्मा गया। फिर ऊपर से फरमान आया। अपने उम्मीद जी और उज्ज्वल जी को। इस आग पर पानी डालो। जिसके बाद गोपनीय बैठक हुई। उनके साथ जिन्होंने प्रदर्शन किया था। रास्ता निकाला गया। खंडन जारी करें। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है। अगर खंडन जारी नहीं होता तो फटाफट जी की रवानगी की तैयारी हो गई थी। तभी तो खुद को बचाने के लिए भ्रामक खबरों से बचे का सहारा लेकर विज्ञप्ति जारी की गई। अब हमारे पाठकों को समझ आ गया होगा। खंडन का कारण आखिर क्या था। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
556 वीआईपी फ्री...
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। जिसमें इशारा अलसुबह की आरती की तरफ है। जिसका नियम है कि आरती में शामिल होने के लिए भुगतान करना जरूरी है। मगर पिछले दिनों 556 वीआईपी ने फ्री में इस सुविधा का लाभ उठाया। वह भी नंदी हॉल में बैठकर। ऐसी चर्चा मंदिर के गलियारों में सुनाई दे रही है। अब इसमें कितना सच है-कितनी अफवाह। इसका फैसला हमारे पाठकगण अपने स्व-विवेक से खुद कर लें। क्योंकि हमकों तो अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
अनुभव कार्यशाला...
2016 के सिंहस्थ में पदस्थ रहे अधिकारियों का जमावड़ा शनिवार को एक होटल में था। इसे अनुभव कार्यशाला का नाम दिया गया। इसमें अपने चाचा चौधरी जी सहित सभी पुराने चेहरे नजर आए। अपने विकासपुरुष ने शुभारंभ किया। कार्यशाला का मकसद 2028 को लेकर था। तो चुप को भी दो अनुभव याद आ गए। अनुभव पढ़ने के पहले बता दे। कमलप्रेमी हो चुके अपने चौधरी जी ही इस कार्यशाला के सूत्रधार थे। अब पढिये वह 2 अनुभव। जो 2016 में इस कालम में लिखे गए थे।
1- सिंहस्थ शुरू होने के पहले ही कार्य प्रगति को लेकर हंगामा खड़ा हो गया था। अपने मामा जी के निर्देश पर 5 प्रमुख सचिव ने अपना डेरा डाल दिया था। तब रामघाट पर एक प्रमुख सचिव(जो इन दिनों दिल्ली में है) और बाबा की नगरी में मुखिया रह चुके है। वह भड़के हुए थे। तभी तो रामघाट पर निरीक्षण के दौरान आक्रोश व्यक्त करते हुए यह बोल गए थे। सब तुम्हारे कारण हुआ है। चूड़ियां पहना देना चाहिए तुमकों। यह सुनकर आज की कार्यशाला के सूत्रधार भड़क गए थे। उन्होंने ऊपर तक शिकायत करने की धमकी दी थी।मगर प्रमुख सचिव ने उनकी धमकी को हवा में उड़ा दिया था।
2 - यह घटना मेला कार्यालय की है। दिन रात मेहनत कर रहे अधिकारियों की बैठक थी। तत्कालीन आयुक्त बैठक में निर्देश देकर निकले थे। इस बैठक में वह सभी शामिल थे। जो अब आईएएस अफसर बन गए है। आयुक्त के बाद अपने चाचा चौधरी जी ने बैठक ली। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा बोल दिया। जो रहस्यमय -मुस्कान को चुभ गया। बस ..फिर क्या था। उन्होंने अपने पैर से जूता निकालकर टेबल पर रख दिया था। यह देखकर चौधरी जी तत्काल मीटिंग छोड़कर निकल गए थे। अब ये अनुभव तो किसी ने शेयर नहीं किए होंगे?इतना हमकों भरोसा है। तो हमनें कर दिए । बाकी हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
माननीय का टिवट..
पिछले दिनों नशा निरोधक दिवस था। तब एक माननीय ने सोशल मीडिया पर टिवट किया। संदेश सकारात्मक था। मगर उनके संदेश के बाद खुसुर-फुसर शुरू हो गई। वजह माननीय खुद इस आदत के शिकार है। उनको लेकर यह आमधारणा है। सुबह बाबा की बूटी-दोपहर में चिलम-और शाम को सोमरस उनकी दिनचर्या में शामिल है। अब इस धारणा में कितनी सच्चाई है। यह तो माननीय जाने या उनके क्षेत्र की जनता। मगर सोशल मीडिया पर उनके संदेश को लेकर खूब मजे लेकर दबी जुबान में यह बोला जा रहा है।पर उपदेश कुशल बहुतेरे। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है
मेरी पसंद...
तुम कहते हो तुम्हें बारिशें पसंद है।
लेकिन जब बारिशें होती हैं तो तुम सर पर छतरी ले लेते हो।
तुम कहते हो कि तुम्हें सूरज पसंद है। लेकिन जब वो सर पर होता है तो तुम छांव तलाश करते हो।
तुम कहते हो कि तुम्हें हवाएं पसंद है। लेकिन चलती है तो खिड़की बंद कर लेते हो।
मुझें डर लगता है जब तुम मुझसे कहते हो।
तुम्हें मुझसे मोहब्बत है।
तहजीब हाफी