आयुक्त की कार्यशैली ने जनता का दिल जीता...

आयुक्त की कार्यशैली ने जनता का दिल जीता...

उज्जैन।ज्यादा समय नहीं हुआ।जब आयुक्त नगर निगम बनकर अभिलाष मिश्रा आए थे।तब उन्होंने आते ही स्वच्छता को लेकर जो कदम उठाए।जो टेरर दिखाया।एक को बांस उठाकर चटकाया था।तब यह चर्चा आम थी।आयुक्त के मिजाज और कार्यशैली से हड़ताल हो सकती है।मगर इस आईएएस को पता था।वह क्या कर रहे हैं और इसके परिणाम क्या होंगें।तभी तो कल तक जिस कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे थे।दिवाली की सुबह उठकर जब शहर के मुख्य मार्ग 

चकाचक मिले तो नजर और नजरिया दोनो बदल गए।क्योंकि आयुक्त की कार्यशैली ने जनता का दिल जीत लिया।

2017 बेच के आईएएस अभिलाष मिश्रा ने देशभर में पांचवी रेंक हासिल की थी।मूलतः इलाहाबाद(अब प्रयागराज) के निवासी हैं।तो रामायण की चौपाई ..विनय न मानत जलाधि जड़..गए तीन दिन बीति/बोले राम सकोप तब,,भय बिनु होई न प्रीति..से खूब वाकिफ है।यही वजह थी कि भय की कार्यशैली आते ही शुरू कर दी थी।एक सीएसआई की सेवा समाप्त कर दी।कारण..सफाई में लापरवाही।इसके पहले ट्रेंचिंग ग्राउंड निरीक्षण में एक को चटकाया था।बिल्कुल एंग्रीयंगमैन की भूमिका में।उस वक्त उज्जैनी माहौल के हिसाब से यह सब गलत लग रहा था।किन्तु आयुक्त मिश्रा आने वाले दिनों के लिए जमीन तैयार कर रहे थे।उनका मकसद अब साफ साफ नजर आ रहा है।अगले साल जब स्वच्छता पुरस्कार की दिल्ली से घोषणा हो,तो उज्जैन किसी विशेष केटेगरी में नहीं, बल्कि टॉप पर रहकर पुरुस्कार हासिल करे।जिसकी शुरुआत दिवाली की रात से हो चुकी है।जब अधिकांश मुख्य मार्ग से रात में फोड़े गए फटाकों की गंदगी सुबह 4 बजे हटाना शुरू हो गई थी।खुद अभिलाष मिश्रा मैदान में उतरे थे।पूरी योजना के साथ।सफाई मित्रों से बातचीत करते रहे।फ़ोटो भी खिंचवाए,उनका हौसला बढ़ाया।यहाँ यह लिखना जरूरी है कि

इंदौर में यह आमबात हो सकती है।

मगर उज्जैन के इतिहास में ऐसा पहली दफा हुआ है।जब रात का कचरा सुबह होने तक साफ हो गया।वरना दिवाली के बाद सफाई होने में 2 से 3 दिन लगते थे।

शहर के कई मार्ग पर चारों तरफ गन्दगी नजर आती थी।कोई पूर्ववर्ती आयुक्त ने आजतक यह हौसला नही दिखाया कि सफाई मित्रों को भरोसे में लेकर उनको देर रात काम पर लगा दे।वैसे भी सफाईकर्मी संगठन की अपनी मोनोपॉली बरसों से चली आ रही है।जिसको तोड़ने की हिम्मत कोई आयुक्त नहीं कर पाया।लेकिन इलाहाबादी मिश्रा इसमे कामयाब रहे।उन्होंने वह कर दिखाया,जो आजतक किसी आयुक्त ने करना तो दूर,इसके लिए सोचा भी नहीं।यही वजह है कि यह लिखना पड़ रहा है कि.. आयुक्त की कार्यशैली ने जनता का दिल जीता...