स्मार्ट नहीं निकले सिटी के पौधे, बिना पानी सूख गए

स्मार्ट नहीं निकले सिटी के पौधे, बिना पानी सूख गए

उज्जैन। उत्कृष्ट उन्नत उज्ज्वल उज्जैन, ये उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का स्लोगन है।पढ़ने में कितना अच्छा लगता है और गर्व महसूस होता है।हमारा उज्जैन स्मार्ट सिटी शहर कहलाता है।मगर जब कार्यालय जाओ तो वहाँ लगे पौधे देखकर खुद पर खुन्नस निकालने का मन करता है।भरोसा अगर नहीं हो तो इन दो तस्वीरों को जरा गौर से देखें।काफी समय पहले हरियाली दिखाने के लिए इनको लगाया गया था।इन पर राशि भी खर्च की गई होगी।सरकारी काम है,कोई जनसेवा का नहीं।जो मुफ्त में होगा।

सबसे ऊपर लगी तस्वीर को देखे।जिसके आगे गाजर घास ने अपना डेरा जमा लिया है।जबकि स्मार्ट सिटी में कोई सफाई कर्मचारियों की कमी नहीं है।मगर जब खुद सीईओ संदीप शिवा का इस तरफ ध्यान नहीं जाता है, तो सफाईकर्मी को क्या गरज पड़ी है।आश्चर्य कि बात यह है कि दिवाली अभी अभी गई है।यह वह त्योहार है।जिसमे हर जगह सफाई होती है।

अब इस तस्वीर को देखिए।पानी के अभाव में पौधों की यह हालत हो गई है।जबकि स्मार्ट सिटी लिमिटेड शहर को उत्कृष्ट-उन्नत-उज्ज्वल बनाने का दावा करती है।शहर कितना स्मार्ट हुआ है।इस विषय पर फिलहाल खाक डालते है।क्योंकि यह प्याज के छिलके निकालने वाला काम है।

हर दो दिन में बैठक..

उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड कार्यालय कोई जंगल मे नहीं बना है।सिंहस्थ 2016 के पहले इसका निर्माण हुआ था।संकुल के बिलकुल नजदीक बना है।जहाँ पर हर दूसरे दिन बैठक होती है।संभाग आयुक्त ,कलेक्टर, निगमायुक्त, जिपं सीईओ सहित पुरा प्रशासनिक अमला मौजूद रहता है।मगर कोई भी कभी यह नहीं देखता है कि पौधे पानी की कमी के कारण दम तोड़ रहे है।बस,सब अपने अपने वाहन से उतरकर, सीधे दूसरी मंजिल पहुँच जाते है।बैठक खत्म होते ही गाड़ी में बैठकर फुर्र हो जाते है।वैसे भी इनसे ज्यादा जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी सीईओ संदीप शिवा की बनती है।मगर उनको रियल लाइफ के काम से ज्यादा सोशल- रील लाइफ से लगाव ज्यादा है।