11 मई 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
विकासपुरुष की कृपा दृष्टि होगी या....?
निगम-मंडलों -प्राधिकरणों में नियुक्ति का दौर शुरू हो चुका है। दवाई के धंधे से पनपे मास्साब अब ईंट-सरिया-सीमेंट की बिल्डिंग बनाने का काम करेंगे।विकासपुरुष ने उनको मंडल का मुखिया बना दिया है। पदभार भी संभाल लिया है। मगर अपने मेट्रो गली के नेताजी का भविष्य अब क्या है। यह सवाल कमलप्रेमी उठा रहे है। तभी तो विकासपुरुष की कृपा दृष्टि का इंतज़ार हो रहा है।मेट्रो गली नेताजी को उम्मीद है। कुंभ मेले वाली कुर्सी फ़िलहाल खाली है और उनकी यह आखिरी पारी है। 2 साल के लिए ही सही। विकासपुरुष की नजरें इनायत हो जाए तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी। इसके लिए मेट्रो नेताजी ने बिसात भी बिछा दी है। देखना यह है कि सफलता मिलती है या नहीं? तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
420 की चर्चा...
शीर्षक पढ़कर हमारे पाठकगण पक्का यही अंदाजा लगाएंगे। किसी के साथ ठगी हुई है और मामला वर्दी से जुड़ा है। जिसमें कोई फरियादी ने शिकायत दर्ज कराई है।लेकिन उनका यह कयास गलत है। यहाँ इशारा 4 पेटी और 20 हजारी वसूली करने का है। जिले की सभी तहसीलों से 60-60 हजारी की वसूली की गई है। करने वाले सरकारी लोग ही है। जो कि आडिट करने आए थे। मुआवजे वितरण का। मई के प्रथम सप्ताह में। टीम ने सीधे राजस्व अधिकारियों के समक्ष डिमांड रख दी। बेचारे राजस्व अधिकारी क्या करते। मजबूर थे। तो चंदा करके 420 की डिमांड पूरी की। ऐसी चर्चा सभी तहसील के राजस्व अधिकारी कर रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
फिर अपना क्या है...
ओम प्रकाश वाल्मीकि की एक कविता है। चूल्हा मिट्टी का/मिट्टी तालाब की/तालाब ठाकुर का/भूख रोटी की/रोटी बाजरे की/बाजरा खेत का/खेत ठाकुर का/बैल ठाकुर का/हल ठाकुर का/हल की मूठ पर हथेली अपनी/फ़सल ठाकुर की/कुआँ ठाकुर का/पानी ठाकुर का/खेत-खलिहान ठाकुर के/गली-मोहल्ले ठाकुर के/ फिर अपना क्या? यह कविता इन दिनों शिवाजी भवन के गलियारों में सुनाई दे रही है। जिसमें इशारे पर है अपने इन्दौरीलाल जी। जिन्होंने सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी/अस्थायी कामों को लेकर योजना बनाने में दिन -रात एक किया। उम्मीद जी और उज्जवल जी का भी फुल सपोर्ट था।कई खोखो की योजनाएं तैयार हुई। जिसमें पानी की लाइन-सड़क-बिजली-टॉयलेट सहित कई काम शामिल है। मगर जब काम का मौका आया। तो ठाकुर के रूप में अपने एंग्रीमैन आगे आ गए। मतलब यह कि अब यह सारे काम शिवाजी भवन करेगा।फैसला बड़े साहब का है। जिस पर सहमति की मोहर उम्मीद जी ने भी लगा दी है। अब देखना यह रोचक होगा। विकास भवन के नए मुखिया और उनका मंत्रिमंडल इन कामों को वापस लेने के लिए कितना जोर लगा पाता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
वही हँस कर कहा होता...
किसी शायर ने खूब कहा है।
ना तेरी शान कम होती ना रुतबा ही घटा होता
जो गुस्से में कहा तुमने वही हँस के कहा होता
यह शे'र चुप को बघेलखंड के एक पत्रकार साथी ने भेजा। जिसके पीछे कारण बाबा की नगरी में पदस्थ रहे अपने इंद्र जी है।वाचालता उनकी जिव्हा पर हमेशा विराजमान रही है। जबकि होना यह चाहिए।
जब भी बोलना वक्त पर बोलना
मुद्दतों सोचना मुख्तसर बोलना
मगर अपने इंद्र जी ने कभी यह सबक नहीं सीखा। जिसके चलते अब वह सुर्खियों में।अपने मातहतों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाने के लिए। वह भी पहले ही दिन।जिसका वीडियो भी वायरल हुआ है। जिसमें उनकी टोन को लेकर मातहतों में आक्रोश पनप गया। हालांकि कोई विवाद ज्यादा बढ़ता। उसके पहले ही चतुर इंद्र जी ने मातहतों के साथ बैठक कर ली और फिलहाल आग पर पानी छिड़क दिया है। मगर यह समझौता कब तक कायम रहेगा? इस पर इंद्र जी को जानने वालों का साफ कहना है। कुदरत को न पसंद है सख्ती बयान में/पैदा हुई न हड्डी इसलिए जुबान में। देखना यह है कि इंद्र जी इस सलाह पर कितना और कब तक अमल करते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
रणनीति तैयार-आदेश का इंतज़ार
आगामी कुछ दिनों में जिले के 3 अधिकारियों की रवानगी हो सकती है। जिसमें 2 अधिकारी शिवाजी भवन के और 1 स्मार्ट भवन का है। स्मार्ट भवन से अपने निखट्टू जी की कार्यशैली से सभी आलाधिकारी परेशान है। इसलिए इनका जाना पक्का माना जा रहा है। जबकि शिवाजी भवन से अपने हवासिंह जी और जय महाकाल बोलने वाले अधिकारी का नाम शामिल है। जय महाकाल के नाम से चर्चित अधिकारी (आईएएस) बन चुके हैं। उनकी कार्यशैली भी सबको साथ लेकर चलने की है। इसलिए उनकों संभवतः अपनी मनपसंद जगह मिल जाए। अब बाकी दो को हटाने की रणनीति किसने तैयार की होगी? यह हमकों लिखने की जरूरत नहीं है। शिवाजी भवन के सभी लोग समझदार हैं। इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते है
बीमारी का नया नाम...
शिवाजी भवन की बीमारी नाम के नगरसेवक को हर कोई जानता है। फ़टे में टांग अड़ाना उनकी आदत है। अभी अभी उन्होंने मंडी के पिछवाड़े तरफ चीन की दीवार खड़ी करवा दी। जिससे व्यापारी वर्ग आक्रोश में आ गया। तो सभी ने मिलकर पहले अपने हाइनेस और फिर नव नियुक्त मंडल मस्साब से गुहार लगाई।हाइनेस के सामने तो यह तक बोल गए। आस्तीन में ...पाल रहे हो। जिसे सुनकर अपने हाइनेस ने चुप्पी साधे रखी। इसके अलावा व्यापारियों ने अपनी बहन जी को भी शिकायत दर्ज कराई है।इधर इन सब बातों को दरकिनार करके अपने हाइनेस अपने आप में खुश है। जुलूस में डांस करना,डमरू बजाना और मस्त रहने की आदत डाल ली है। तभी तो उनके करीबी किसी शायर का शे'र उनकों लेकर सुना रहे है।
आप जिस हाल में,जिस रंग में है खुश रहिए
सोचियेगा तो जमाने में है आजार बहुत।
अपने हाइनेस के करीबी कमलप्रेमियों की बात में लॉजिक है।इसलिए हम भी इसको मानते हुए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
10 नम्बर की बधाइयां...
आमतौर पर टॉप -10 की सूची में टॉप-3 रहने वालों को बधाइयां मिलती है। मगर बदबू वाले शहर के कमलप्रेमी बिलकुल अलग और भोले-भाले है। वह 10 नंबर को अलग चश्मा लगाकर देखते हैं। जिसमें उनको शून्य नजर नहीं आता है। केवल 1 नजर आता है। जिसे फर्स्ट मानते हुए वह बधाई देने लगते है। यही हो भी रहा है। कमलप्रेमी मुखिया को सोशल मीडिया पर जमकर बधाइयां दी जा रही है। जबकि असली में नंबर 10 है। तभी तो पुराने कमलप्रेमी अपने समय की फ़िल्म 10-नम्बरी के गीत को गुनगुना रहे है। कहत कबीर सुनो भई साधो/बात कहूँ मैं खरी/दुनिया एक नम्बरी/तो मैं दस नम्बरी। अब कमलप्रेमियों की जुबान तो हम पकड़ नहीं सकते है। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
जलकर तो आप दीजिए..
भले ही शिवाजी भवन के एंग्रीमैन आमजनों से जलकर की वसूली सख्ती से कर लेते हैं। मगर मंदिर से करीब डेढ़ खोखे की वसूली आजतक कोई नहीं कर पाया है।शुक्रवार की रात को अपने उज्जवल जी,एंग्रीमैन, फटाफट जी और इन्दौरीलाल ने 180 मिनिट का दौरा किया। इस दौरान फौव्वारा देखकर जलकर वसूली की बात निकल गई। एंग्रीमैन ने आग्रह किया। जिसे सुनकर फटाफट जी ने तर्क दिया। वसूली तो शिवाजी भवन से होनी चाहिए। कारण इनका जल महाकाल को अर्पित होता है। पहले नियम भी था। राशि दीजिये-एक लोटा जल अर्पण कीजिए। इस हिसाब से अगर गणित लगाए तो उल्टा इन पर वसूली निकलती है। यह सुनकर अपने उज्ज्वल जी मुस्कुरा दिए और एंग्रीमैन भी यह तर्क सुनकर आखिर क्या बोलते? तो वह भी स्माइल देकर चुप हो है। तो फिर हमारा तो काम ही चुप रहना है।
भय बिनु होई न प्रीति...
इसमे कोई शक नहीं है। अपने उज्ज्वल जी सहज-सरल है। मगर भय होना भी जरूरी है। उनको रामचरित मानस की चौपाई याद दिलाने की जरूरत है। आखिर बाबा तुलसी ने लिखी है। जो सबको पता है। इसलिए सीधे मुद्दे की बात लिखते है। शुक्रवार की रात जब मंदिर का दौरा किया। तब मंदिर के आसपास दुकानों का मेला लगा था।जबकि उज्ज्वल जी तीन दफ़ा नाराजगी के साथ निर्देश दे चुके है। यह बंद होना चाहिए! मगर इस धंधे से होने वाली अवैध कमाई में मंदिर-वर्दी-शिवाजी भवन का भी हिस्सा होता है। इसलिए तो आजतक अंकुश नहीं लगा है। तभी तो मंदिर में चर्चा है। भय बिनु प्रीति न होय गुसाईं। बात सच है और फैसला उज्ज्वल जी को लेना है।हमकों तो बस चुप रहना है।
कौन सी लैब की रिपोर्ट है...
अपने उम्मीद जी हर रोज सुबह निकलते है। 2028 के चल रहे निर्माण कार्य देखने। शनिवार की कान्ह का दौरा किया। जहां उन्होंने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाया। जल संसाधन के मुखिया ने जवाब दिया। लैब रिपोर्ट के अनुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य है। तब उम्मीद जी ने उनको फटकार लगा दी। पूछ लिया। कौन सी लैब है? जो इस निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण बता रही है। क्योंकि उम्मीद जी के पास जो रिपोर्ट है। उसमें गुणवत्ताहीन कार्य की पुष्टि हुई है। तभी तो उम्मीद जी ने बोल दिया। मुझे भी बताना वो कौनसी लैब है? उम्मीद जी के तेवर देखकर मुखिया चुप हो गए। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है |
जमीन की जांच ..
इन दिनों एक जमीन की जांच गोपनीय तरीके से की जा रही है। करने वाले है तो वर्दीधारी। मगर ये लोग खाकी नहीं पहनते हैं। आमजन जैसे कपड़े पहनते हैं। लेकिन इनकी जांच आर्थिक मामलों से जुड़ी रहती है। बहुत बारीकी से इनकी जांच चलती रहती है। फिर जब खुलासा होता है तो हड़कंप मच जाता है। जिसने गड़बड़ी की होती है। उसकी जिंदगी तबाह हो जाती है। एक जमीन की खरीदी के मामले में ऐसी ही खोजबीन अंदर ही अंदर चल रही है। ऐसा हम नहीं बल्कि अपने कमलप्रेमी दबी जुबान से बोल रहे है। लेकिन जमीन कौन सी है। इसको लेकर कोई मुँह खोलने को तैयार नहीं है। बस इतना इशारा जरूर कर रहे है। जमीन उस जिले के जाने वाले रास्ते पर है। जिसको आगे जिला-पीछे किला के नाम से जाना जाता है। अब किसी पाठकगण की समझ में यह इशारा आ जाए, तो हमकों भी समझाएं। कारण-हम समझ नहीं पाए है। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
कुंडली दिखवा लीजिए
एक आईएएस अफसर के कार्य मे एक के बाद एक बाधा आती ही जा रही हैं। जो कि पानी से जुड़ी हुई हैं। याद कीजिए। दूषित जल कांड। जिसमें 17 मौत हो गई थी। नतीजा उनको अपने पद से हाथ धोना पड़ा था। उसके बाद उनको घूमने -फिरने वाले विभाग का मुखिया बना दिया। नया पद संभालने के बाद आग की घटना हो गई। बाबा पशुपतिनाथ की नगरी में। हालाकि कोई हादसा नही हुआ था। मगर घटना तो हुई थी।अब ताज़ा घटना फिर हो गई। जो पानी से जुड़ी है। क्रूज तेज लहरों में पलट गया। जिसमें एक माँ -बेटे की मौत के बाद सामने आई तस्वीर ने सबको झकझोर दिया। इस घटना के बाद आईएएस लॉबी में चर्चा है। आईएएस अफसर को अपनी कुंडली एक दफा किसी जानकार को जरूर दिखानी चाहिए और महामंगल अंगारेश्वर की पूजा जरूर करनी चाहिए। बात में दम है। मगर आदत के अनुसार चुप रहना ही हमारा कर्म है।
चुलबुल जी की वापसी...
अपने चुलबुल पांडे जी की वापसी हो गई है। पिछले साल ही सेवा से मुक्ति मिली थी। मगर मोह से खुद को मुक्त नहीं कर पाए। तो संविदा पर आ गए। हमारे पाठकगण शायद उनकों भूल गए होंगे। तो याद दिला देते है। एक वक्त था। जब अपने चुलबुल जी 3-3 मलाईदार पद पर विराजमान थे। स्मार्ट भवन-विकास भवन और मंदिर में। इन तीनों जगह इनकी मर्जी से पत्ता भी नहीं हिलता था। अपने उम्मीद जी और उत्तम जी के प्रिय शिष्य की गिनती में शामिल है। अब यह बड़े भवनों के निर्माण में सलाहकार की भूमिका निभाने आए है। अभी -अभी उज्जवल जी के साथ निर्माणाधीन नवीन संकुल का निरीक्षण करके गए है। उनके आगमन से सबसे ज्यादा खुशी ठेकेदारों में है। इसकी क्या वजह होगी? हमसे बेहतर हमारे पाठकगण समझते हैं। इसलिए हम तो सबकी खुशी में शामिल होते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
ध्यान दीजिए एंग्रीमैन जी..
पिछले महीने अपने विकासपुरुष ने लोकार्पण किया था। 18 खोखे से निर्मित सड़क का। जिस शाम लोकार्पण था। जोरदार हरियाली नजर आ रही थी। ऐसा महसूस हो रहा था। इंद्रलोक कारीडोर बन गया है। सीधी भाषा मे स्वर्गलोक जैसा नजारा था। पौधों से खुशुब आए। इसके लिए विशेष तौर पर स्प्रिंकलर से छिड़काव किया गया था। मगर हालात उलट है। पेड़-पौधे-घास पानी के अभाव में सूख गए हैं। अपने एंग्रीमैन से गुहार है। इस पर ध्यान दे। बाकी हमकों चुप ही रहना है।
जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
ज़फ़र सहबाई❗