04 मई 2026 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

04 मई  2026 (हम चुप रहेंगे)

जलाधारी का दान रंग लाया...
बाबा अंगारेश्वर आस्था औऱ विश्वास रखने का फल मिलता है। हालांकि इसके पीछे इंसान को अपनी मेहनत भी करनी पड़ती है। तभी बाबा की कृपादृष्टि होती है और इंतजार करना होता है। जैसे कि इन दो बाल सखा ने किया। 2022 के चुनाव से पहले बाबा को चांदी की जलाधारी अर्पित की थी। जिसके बाद चुनाव जीतकर एक मित्र तो सूबे के मुखिया बन गए। दूसरे अभी अभी विकास भवन के मुखिया बने हैं। हालांकि उनकों यह पद 4 साल पहले ही मिल जाता?सब कुछ तय हो गया था। मगर चुप में यह खबर छपने से खेल बिगड़ गया था। विरोधी सक्रिय हो गए थे। जिसका हमकों खेद है। लेकिन अब बाबा और विकासपुरुष की मेहरबानी से सफलता मिल ही गई। जिसके लिए हम दिल से बधाई देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

बस डीपीआर तैयार करवा दो
विकास भवन के नव नियुक्त मुखिया ने पदभार संभालने के बाद उदबोधन दिया। जिसमें उन्होंने मंच से कहा। हाइनेस का नाम लेकर। उनके द्वारा प्रस्तावित मकोडिया आम-कानीपुरा रोड जल्दी बनवा कर देंगे। शायद नए मुखिया को पता नहीं है। इस रोड को लेकर सभी प्रक्रिया पूरी हो गई है। निविदा निकली-खुल भी गई। मगर ठेकेदार को 1200 मीटर सड़क की डीपीआर आजतक नहीं मिली है। जो कि सबसे पहले तैयार होती है। अगर नए मुखिया केवल डीपीआर दिला दे, तो उनकी कही बात सही साबित हो जाएगी। रोड़ जल्दी बन जाएगा। देखना यह है कि शिवाजी भवन पर वह कितना प्रेशर डाल पाते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

डिजाइन बदलने की तैयारी...
भविष्य के बड़े साहब (फिलहाल ACS) शनिवार को आए थे। बैठक ली,दौरा किया,काम देखे।फिर लौट गए। उनसे एलिवेटेड ब्रिज को लेकर प्रभावित जनता ने मुलाकात भी की। अपना दुखड़ा भी सुनाया। जिसके लिए वह पहले से ही तैयार थे। क्योंकि अपने उम्मीद जी ने पहले ही ब्रिज को लेकर अवगत करा दिया था। साहब ने जनता को आश्वासन दे दिया। मेरे नालेज में है।कुछ करूँगा। इसमे अंदरखाने की खबर यह है। उम्मीद जी ने पहले ही निर्माण एजेंसी के कार्यपालन यंत्री से जानकारी ले ली थी। क्या कुछ परिवर्तन करके एलिवेटेड ब्रिज बनाया जा सकता है। जवाब मिला-डिजाइन बदलकर काम हो सकता है।इससे सांप भी मर जाएगा और लाठी भी नहीं टूटेगी।बोला तो यही जा रहा है। बाकी महाकाल और विकास पुरुष की मर्जी है और हमकों आदत के अनुसार चुप रहना है।

भुगतान नहीं तो काम नहीं...
मंदिर के सुप्रसिद्ध लड्डू प्रसाद बनाने वाले वेंडर ने करीब 10 दिन पहले अपना काम बंद कर दिया है। ऐसा मंदिर के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है। कारण-लंबे समय से भुगतान रोक रखा था। अपने फ़टाफ़ट जी को इतनी फुर्सत ही नहीं मिल रही थी। वह चेक पर हस्ताक्षर कर पाते। वेंडर गुहार लगाते-लगाते थक गया। पिछले 2 दशक से यह वेंडर लड्डू बनाकर दे रहा था। आखिरकार उसने काम बंद कर दिया। जिसके बाद मंदिर और सुरक्षाकर्मियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। जो अब लड्डू बना रहे है। इस बीच यह चर्चा जोरों पर है। भले ही फटाफट जी को चेक पर साइन करने का समय नही मिला,मगर वेंडर को करीब 10 पेटी का जुर्माना वसूल करने वाले नोटिस पर हस्ताक्षर करने का वक्त मिल गया। अब अपनी लाज बचाने के लिए यह दावा किया जा रहा है। वेंडर लड्डू में घी का प्रयोग ज्यादा करता था। इसलिए हटाकर जुर्माना लगाया गया है। लेकिन यह बात मंदिर वालों के गले नहीं उतर रही है। लेकिन इस सच को बोले कौन? नतीजा सब सच जानते हुए भी चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

कूटरचना साबित-FIR की सिफारिश
अपने मंद-मुस्कान जी को पाठकगण भूल गए होंगे।कभी शिवाजी भवन के मुखिया थे। हाल फिलहाल दूषित जल कांड के बाद देवीआहिल्या नगरी में पदस्थ है। उनके कार्यकाल का मामला है।जो अब जाकर वर्दी के पास गया है।PHE की निविदा में कूटरचना हुई थी। दो सदस्यों ने जांच की थी।आरोप साबित हुआ था। आरोपी उस वक्त शिवाजी भवन के मुख्य खजांची थे। मगर पॉवरफुल थे।आराधना तक का वरदहस्त था। इसलिए fir का सिफारिशी पत्र राजधानी में दबा दिया गया था। अब यह पंप- कांड दबी फाइलों से निकालकर एंग्रीमैन की सिफारिश पर वर्दी के पास पहुँचा है। 5साल बाद। 30 दिन वर्दी को दिए हुए है।मगर अभी तक तो कुछ भी नही हुआ है। आगे होगा या नहीं? कुछ कह नहीं सकते हैं। इसलिए आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

परिवहन मुखिया को खतरा किससे
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट अपलोड हुई थी। जो बाद में हटा ली गई। मगर पोस्ट अपलोड होते ही जिस जिस ने उसको देखा। यह सवाल करने लगा? आखिर परिवहन विभाग के बॉस को किससे खतरा है। जो उनकी सुरक्षा के लिए आधा दर्जन बॉडीगार्ड तैनात है। हालांकि यह सुरक्षाकर्मी निजी है। अपलोड पोस्ट में मुखिया अपने परिवार के साथ किसी समारोह में डिनर का लुत्फ उठा रहे थे। लेकिन उनसे 10 फीट की दूरी पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को देखकर हर कोई हैरत में था। सुगबुगाहट यह भी है कि कुछ महीने पहले परिवहन मुखिया ने अपनी सुरक्षा को लेकर एक आवेदन  कप्तान को दिया था। मगर सरकारी सुरक्षा नहीं मिल पाई।तो मुखिया ने खुद सुरक्षा जुटा ली। मगर खतरा किससे है। इसको लेकर परिवहन विभाग के सभी बंदे चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

कानून मुट्ठी में-अधिकारी जेब में...
सफल कॉलोनाइजर वही माना जाता है।जो ऊपर लिखी लाइन पे अमल करता हो। बदबूदार शहर के एक हुंडी व्यापारी/कॉलोनाइजर है।जो लोकतंत्र के तीन प्रहरी को आगे की जेब मे रखते हैं।जबकि चौथे प्रहरी को पीछे की जेब में। उनको वाटिका शब्द से ज्यादा मोहब्बत है। इसलिए बिल्कुल सीधा-सादा- सिंपल फार्मूला अपनाते हैं। ऐसी जगह जमीन खरीदते हैं। जिसके आस पास सरकारी जमीन हो। फिर धीरे से वह जमीन वाटिका में शामिल हो जाती है।इस दफा तालाब से लगी भूमि हथिया ली है।जिसमें ग्राम देवता-गिरदावर से 8 हजारी मैडम भी शामिल हैं।जिनको अब प्रतिवेदन देना है।सर्वे नम्बर 1380 का यह मामला है।जिसका कुल रकबा 2011 में 2.132 है. था।लेकिन वर्तमान खसरे में 2.242 है ,हो गया है। यह सब हुंडी व्यापारी के "कानून मुट्ठी में -अधिकारी जेब में रखने का कमाल है।देखना यह है कि 8 हजारी मैडम का प्रतिवेदन क्या बोलता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

देखना-रोबोट रास्ता नहीं भटक जाए
ACS साहब शनिवार को आए थे।सिंहस्थ समीक्षा बैठक कर वापस लौट गए। साहब ने बैठक में प्रस्तुत आपदा-प्रबंधन योजना पर जोरदार तंज कसा। जब उनके समक्ष यह प्रस्ताव आया। आपदा के लिए टेंडर जारी करके किसी कम्पनी को ठेका दे देंगे। यह सुनकर साहब चकर घिन्नी हो गए।उन्होंने पलट कर कहा। ये कैसे संभव है। आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी तो सरकार की होती है। इसे निजी हाथों में कैसे सौप सकते हो। इसके साथ वह यह कहने में भी नहीं चूके। जो रोबोट फायर के लिए खरीद रहे हो। उसको पहले चेक कर लेना। ऐसा नहीं हो कि उसको जाना कही ओर हो और वह रास्ता भटक कर नदी के घाट पहुँच जाए।साहब ने इस बात को इतने रोचक अंदाज में बोला कि बैठक में मौजूद सभी हँसने पर मजबूर हो गए। ऐसा बैठक में मौजूद हमारे सूत्र का कहना है। देखना यह है कि 140 खोखे की आपदा प्रबंधन योजना में अब क्या क्या परिवर्तन होता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मेरी पसंद...
कुछ और सबक़ हम को ज़माने ने सिखाए
कुछ और सबक़ हम ने किताबों में पढ़े थे

❗हस्तीमल हस्ती❗