18 मई 2026 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

18 मई 2026 (हम चुप रहेंगे)

और जाकर गाड़ी में छुप गए
पंजाप्रेमियो ने संकुल का घेराव किया था। यहाँ वर्दी ने इस कदर व्यवस्था की थी। रोकने के लिए। अगर कोई पँजाप्रेमी उड़ कर भी जाता तो उसको पकड़ लिया जाता। एक नेत्री जरूर बेरिकेड्स पर चढ़ कर कूद गई। तो वर्दी की लाठी की गूंज 100 मीटर दूर तक सुनाई दी। जहाँ कुछ पँजाप्रेमी नेता खड़े थे। लाठी की आवाज जैसे ही इस पँजाप्रेमी नेता को सुनाई दी। उन्होंने वहां मौजूद सबको छोड़ा और सीधे दौड़ लगाई। उस तरफ नहीं ,जहाँ घटना हुई थी। उस तरफ दौड़े,जहाँ उनका वाहन खड़ा था। उसका दरवाजा खोला और अंदर बैठ गए। कुछ देर बाद माहौल शांत हुआ तो वापस आ गए। उनको देखकर अब पँजाप्रेमी नेता लोग मजे ले रहे है। अब सवाल यह है कि यह कौन थे?जो गाड़ी में छुप गए थे। तो यह वही है। जिन्होनें उस समाज का चुनाव जीता है। जिससे हमेशा शहर का प्रथमसेवक चुना जाता है। ऐसा हमारा नहीं, बल्कि उन पंजाप्रेमियो का कहना है। जो इस घटना के चश्मदीद गवाह है। बाकी हमारा तो काम बस चुप रहना है।

सुर्खियों में रहने की कला...
अपने चरणलाल जी की राजनीति के मंझे हुए कलाकार है। कब -कहाँ-कौनसा कदम उठाया जाए। ये उनके साथ रहने वाले पँजाप्रेमी साथी भी नही जानते हैं। दमदमा पंचायत भवन से ही उन्होंने इस कला में पीएचडी कर ली थी। रविवार को किसान आंदोलन में जो  वर्दी के पैर पड़ने की नोटंकी दिखाई। वह कोई पहली दफा नही की है। ऐसे कई किस्से जगजाहिर है। बंद कमरे में एक आलाधिकारी की चरण वंदना भी कर चुके है। सार्वजनिक जीवन में तो चरण वंदना की उनको आदत है। तभी तो ऐसा कर कर के माननीय बन गए है। जबकि उनके साथ रहने वाले मुंगेरीलाल जी इस कला को अभी तक नही सीख पाए है। कारण उनका अपनी बॉडी है। जो इसकी इजाजत नहीं देती है।बहरहाल रविवार को यह नोटंकी करके चरणलाल छा गए। लेकिन उनके करीबी दोस्त यह सब देखकर शायर अफशर माहरीदी का शे'र याद कर रहे है।

सवाल यह नहीं, रखते हैं आप दो चेहरे।
मलाल ये है कि दोनों खराब रखते हैं।

अपने पंजाप्रेमियो की बात में दम है।मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

एंग्रीमैन का न्याय...
राजा विक्रमादित्य अपने न्याय के लिए आजतक याद किए जाते है। अपने एंग्रीमैन ने भी पिछले दिनों कुछ ऐसा न्याय किया है। जो चर्चा का विषय बन गया है। इस न्याय में शिवाजी भवन के 2 अधिकारी और ठेकेदार को 6 पेटी का फ़टका अपनी जेब से लगा है। अंदरखाने की खबर है। जयसिंह पूरा चौड़ीकरण में एक मकान का मुआवजा 26 पेटी बना था। मकान मालिक तोड़ने को तब राजी हुआ। जब एंग्रीमैन ने वादा कर दिया। 26 पेटी मिलेंगे। काम शुरु कर दो। मकान तोड़ने का काम शुरू हुआ। इधर फाइल चली। भवन अधिकारी ने इसको घटा कर 20 पेटी कर दिया। इसकी खबर जैसे ही मालिक को लगी। काम बंद कर दिया। एंग्रीमैन फिर पहुंचे। कारण पूछा।तो 6 पेटी क्षति की कहानी सामने आई। बस फिर क्या था। एंग्रीमैन में विक्रमादित्य की आत्मा समा गई। मौके पर ही न्याय सुना दिया। अब अपनी जेब से 6 पेटी दोगे। जिसके बाद भवन मुखिया-सहायक यंत्री और ठेकेदार ने 2-2 पेटी अपनी -अपनी जेब से ढीली करके मामला खत्म किया। जिसके बाद जिनकी जेब ढीली हुई वह अब एंग्रीमैन को विक्रमादित्य बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

प्रथमसेवक के टोपीबाज़..
अपने प्रथमसेवक के सलाहकार की अनोखी आदत है। वह जब -जब किसी निजी काम से अवकाश लेकर जाते है। तो वहाँ से शिवाजी भवन के किसी भी अधिकारी/इंजीनियर/ठेकेदार को फोन करते है। फिर सभी को यह कहानी सुनाते हैं। मैं यहाँ बाहर आया हूँ। एक मुसीबत आ गई है। मदद करो। डिमांड करते है। हल्के हरे रंग वाले कागजों की। कोई न कोई को फांस ही लेते है। मांग ज्यादा की नहीं होती है। 1 से 5 अंक के बीच की होती है।जबकि उनका वेतन सवा पेटी के करीब है। हमेशा टोपी पहनते हैं। इसलिए शिवाजी भवन वाले इनको टोपीबाज़ कहने लगे हैं। इन दिनों अवकाश पर है। तो अपनी आदतानुसार फिर वही कर रहे है।उनकी इस कार्यशैली से पिछले सभी प्रथमसेवक औऱ शिवाजी भवन के मुखिया परिचित है। जिनमें उम्मीद जी,उज्ज्वल जी और अपने एंग्रीमैन भी शामिल है।मगर कोई कुछ नहीं बोला और ना कोई बोलेगा। इसलिए हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

अफसर है घूसखोर और जल्लाद है तबीब...
ऊपर लिखी लाइन मशहूर शायर अदम गोंडवी की है।इसमे तबीब के मायने इलाज करने वाला है। घूसखोरी का उदाहरण तो पिछले सप्ताह ही हमनें लिखा था। आडिट करने आए दल की 420 डिमांड का। इस दफा तबीब का कारनामा पढ़िए। ताज़ी घटना है। 11 वर्षीय बालिका की ऑपरेशन के दौरान मौत। जिस तबीब ने यह कृत्य किया। वह खुद ऐसे सरकारी पद पर विराजमान है। जिसके आदेश पर पूरा तंत्र चलता है। उसी के हाथ से मौत हुई। तब उनको कुछ महसूस नहीं हुआ। किन्तु जब पोल खुली,वर्दी ने पकड़ा और श्रीकृष्ण जन्म स्थली जाने की नोबत आ गई। तो तबीब साहब का दिल भी धड़कने लगा और भर्ती भी हो गए। दूसरे तबीबो ने भी साथ दिया औऱ जल्लाद तबीब को इतना गम्भीर बता दिया कि कृष्ण जन्म स्थली जाने से बच गए। अब इसके लिए दोषी कौन?फैसला पाठकगण खुद अपने दिल पर हाथ रखकर कर लें। वरना अदम साहब को याद करते हुए हमारी तरह चुप रहे।

कप्तान की ढील...
अपने कप्तान जी यूँ तो कानून का पालन करवाने में सख्त माने जाते है। मगर मंदिर के आसपास लग रही अवैध दुकानों को लेकर उनकी ढील समझ से परे है। जबकि सड़क -सुरक्षा बैठक में उज्ज्वल जी साफ निर्देश दे चुके है। दुकानें नहीं लगना चाहिए। किन्तु हर रोज मेला लगता है।इस पर रोक लगाने का काम वर्दी का है। अगर वर्दी ठान ले तो मजाल है।परिंदा भी पर मार सके। तो सवाल यह खड़ा हो रहा है?आखिर क्या मजबूरी है। जबकि इसी जगह दीवार गिरी थी। 3 की मौत हुई थी। थ्री -स्टार पर गाज गिरी थी। इसके बाद भी हालात जस के तस है। तो अंदरखाने की खबर है। मामला दुकानदारो से होने वाले आर्थिक लाभ से जुड़ा है। 500 की वसूली प्रति दुकान। प्रतिदिन। दुकानों की संख्या कोई माई का लाल नहीं बता सकता है।तभी तो वर्दी की इतनी ढील मिली हुई है। इसमे मंदिर के एक अधिकारी भी शामिल है।  उनमें आज भी वर्दी वाली ठसक बरकरार है। उन्होंने ही इस अघोषित आमदानी का बीड़ा उठाया हुआ है। मंदिर में यह चर्चा आम है। देखना यह है कि अपने कप्तान जी इस गंदा है-पर धंधा है ,पर आखिर कब शिकंजा कसते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

I -PAD को दफन कर दिया...
जब -जब विकासपुरुष आते हैं। vip गेस्ट हाउस में जाते है।तब बाहर उम्मीद जी,अल्फा जी,हिटलर  जी,उज्ज्वल जी,कप्तान जी,एंग्रीमैन, इन्दौरीलाल ,जय महाकाल आदि इंतज़ार करते है। उस समय इन सभी का दिल इंतज़ार करते हुए आँखों मे धड़कता है। किसी शायर ने लिखा भी है। बजाए सीने के आँखों में दिल धड़कता है/ ये इंतज़ार के लम्हें अजीब होते है । ऐसे ही इंतज़ार के पलों की यह घटना है। जब  अपने उम्मीद जी ने इन्दौरीलाल जी को छेड़ दिया। यह सवाल पूछकर। आज i-paid पर क्या योजना दिखाने वाले हो?इस पर इन्दौरीलाल जी जवाब दिया। मैंने i-pad को जमीन में गाढ़ दिया है। जिसे सुनकर अपने जय-महाकाल जी ने बोल दिया। यह बात जगजाहिर है। ये जो भी योजना बनाकर दिखाते हैं। डिजाइन तैयार करते है। निविदा निकालते हैं। बाद में उसे किसी और विभाग को थमा दिया जाता है। यह सुनकर अपने उज्जवल जी बचाव में आगे आए। अपने इन्दौरीलाल जी के। उन्होंने कहा कि क्यों जले पर नमक छिड़क रहे हो। ऐसा इन सभी में शामिल चुप के सूत्र का कहना है। मगर हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

उम्मीद जी का गुस्सा..
जिस तरह हमकों लिखते हुए भी विश्वास नहीं हो रहा है। उम्मीद जी और गुस्सा। वैसे ही हमारे पाठकों को भी पढ़कर भरोसा नहीं होगा? कारण- उम्मीद जी की बैठक में व्यंग्य-तंज-प्रहार तो हमेशा होता है। मगर उनको कभी भी बैठकों में गुस्सा आया हो। ना कभी देखा-ना कभी सुना। मगर शुक्रवार को अलग नजारा था। 2028 कार्यो की समीक्षा कर रहे थे। शुरुआत होते ही पहला निशाना एक कार्यपालन यंत्री बने। जो कि हेलीपेड बना रहे है। जिसकी गुणवत्ता को लेकर उम्मीद जी ने सस्पेंड करने तक की बात कह दी। इसके बाद उस विभाग के sdo को तत्काल रवाना किया। जाकर देखें। गुणवत्ता और फिर रिपोर्ट करें। अगला शिकार सड़क बनाने वाला विभाग था। जो सिक्स लेन इंदौर रोड बना रहा है। उसको भी फटकार लगा दी। एक विशेष जगह वापस निर्माण करने के आदेश दिए। सारांश यह है कि उस दिन उम्मीद जी का यह रूप देखकर हर कोई अचंभित था। तभी तो बैठक के बाद सहमे अधिकारी कवि गुलज़ार  की कविता ...
बूँद बराबर बौना -सा भन्नाकर लपका/पैर के अँगूठे से उछला/ टखनों से घुटनों पर आया/पेट पे कूदा/नाक पकड़ कर/फन फैला कर सर पे चढ़ गया गुस्सा.!
याद कर रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

निशाने पर इन्दौरीलाल जी..
रामायण के पात्र अंगद की तरह पैर जमाकर बैठे अपने इन्दौरीलाल जी को अब घेरा जा रहा है।वह भी बड़ी चतुराई से। अभी तक तो उनकी तूती बोलती थी। जिस काम को लेकर वह प्रोजेक्ट बना दे। उस पर मोहर लग ही जाती थी। लेकिन अब माहौल बदल गया है। अभी -अभी उनसे सीवर-पानी की योजना छीन ली गई है। जबकि इन्दौरीलाल ने इस पर खूब मेहनत की थी। यह घटना भी तब हुई है। जब विकास भवन में सभी नियुक्ति हो गई।जिसके मुखिया अपने विकासपुरुष के बालसखा बने है। उसके बाद भी इन्दौरीलाल को ठेंगा दिखा दिया गया है।
तभी तो आजकल अपने इन्दौरीलाल खिन्न है। ताज्जुब की बात यह है। काम छीनकर शिवाजी भवन को सौंप दिए है। जो कि पहले ही 2028 के कामों से ओवरलोड है। विकासपुरुष के ड्रीम प्रोजेक्ट हरियाखेड़ी पर ही संकट के बादल बरकरार है। जो 2028 की प्रथम वरीयता में शामिल है। इधर इन्दौरीलाल को घेरने के लिए घर में नहीं है खाने को-अम्मा चली बुलाने को  जैसी कहावतों का सहारा लेकर राजधानी से खबरें प्लांट हो रही है। अब यह देखना रोचक होगा। चतुर इन्दौरीलाल अपना अंगद का पैर जमाएं रखते है  या नही । तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है

हेलीपेड पर हुआ फैसला...
शुक्रवार को जब अपने विकासपुरुष राजधानी लौट रहे थे।तब हेलीपेड पर एक बड़ा फैसला हो गया। हालांकि विकासपुरुष ने यह कहा कि -पहले अवलोकन कर लिया जाए। फिर फैसला करें। मगर अपने उम्मीद जी ने साफ कर दिया। सीवरेज और पानी का काम शिवाजी भवन करेगा। मतलब एंग्रीमैन को जिम्मेदारी सौंप दी। जिसके चलते शनिवार को प्रथमसेवक मंत्रिमंडल की बैठक आहूत की गई। मगर बैठक में बात बनने के बदले बिगड़ गई। मंत्रिमंडल ने सिरे से प्रस्ताव खारिज कर दिया। वजह - इन्दौरीलाल की योजना है- वही इस पर काम करें।
अब देखना यह है कि अपने उम्मीद जी ,जिनकों लेकर यह बात जगजाहिर है। 
मैं कैसे गुफ्तगू से गैर को अपना बनाता हूँ
यहां आओ, इधर बैठो,तुम्हें जादू दिखाता हूँ
कौन सा जादू दिखाते हैं। हालांकि मंत्रिमंडल के विरोध का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। क्योंकि फैसला  पहले ही उच्च स्तर पर हो चुका है। बल्कि एंग्रीमैन टेंडर जारी करने की ओर अग्रसर है। प्रत्याशा शब्द का उपयोग करके काम शुरू हो जाएगा। अब असली फैसला तो प्रथमसेवक मंत्रिमंडल को लेना है और हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

अग्रिम बधाई...
अपने उज्ज्वल जी बाबा की नगरी का नाम रौशन करने वाले है। वह भी राष्ट्रीय स्तर पर।जिसके लिए वह शुक्रवार को देश की राजधानी गए थे। प्रजेंटेशन देने।E Governance पर। उनकी मेहनत और बाबा महाकाल की कृपादृष्टि रही तो पुरुस्कार मिलना पक्का है। जिसके लिए हम भी प्रार्थना करते है और अग्रिम बधाई देते हुए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

इस सप्ताह लग सकती है मोहर
अपने विकासपुरुष इस सप्ताह मोहर लगा सकते है। मंत्रिमंडल की बैठक में। प्रस्ताव बनकर पहुँच चुका है। जिसमें मेला कार्यालय का विधिवत शुभारंभ और नियुक्ति होनी है। करीब 100 से ज्यादा विभिन्न विभागों से अधिकारी/कर्मचारियों को पदस्थ किया जाएगा। मानसून शुरू होने से पहले मेला कार्यालय पूरी तरह शुरू हो सकता है। बस विकासपुरुष की मोहर का इंतजार हो रहा है।तो हम भी  इंतजार करते हुए ,आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

मेरी पसंद
मेरे बगैर तुम जी नहीं पाओगे
ये कहने का हक सिर्फ पैसे को है
अहमद खान