19 जनवरी 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
मेरा हाल पूछते रहना...
मुझसे ना करो बात तो कोई बात नहीं
गैरों से मगर हाल मेरा पूछते रहना
यह अशआर इन दिनों वर्दी वालों के बीच सुनाई दे रहा है। मगर बाबा की नगरी में नहीं, बल्कि पशुपतिनाथ की नगरी में। जहाँ के कप्तान जी और कद्दावर खजांची नेताजी के बीच अबोला चल रहा है। नेताजी सूबे के खजांची है।अधिकतम राजधानी में ही रहते है। पिछले कप्तान जी से उनकी ठन गई थी।तो पॉवर दिखाकर रवानगी करवा दी थी। जिसके बाद उम्मीद थी कि नए कप्तान जी से सेटिंग जम जाएगी।मगर उल्टा हुआ। नए कप्तान कभी बाबा की नगरी में रह चुके है।उनकी कार्यशैली से हम वाकिफ है। पुलिसिंग के मामले में कठोर है। हस्तक्षेप ज्यादा पसंद नहीं करते है। तो अपने हिसाब से तीन स्टारधारियो की पोस्टिंग कर दी। जो कि खजांची जी के समर्थकों को पसन्द नहीं आई है। उन्होंने अपने आका से गुहार लगाई।मगर कप्तान जी टस से मस नहीं हुए है। नतीजा अब एक -दुसरे से कुट्टी हो गई है। तभी तो वर्दीधारी ऊपर लिखा शेर गुनगना रहे है।जिसमे हम क्या कर सकते है।बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं
बदले -बदले से हाइनेस....
अपने हाइनेस का भाषण सुनने वाले आश्चर्य में है।जो उदबोधन उन्होंने बुधवार की रात महाकाल उत्सव में दिया ।करीब 15 मिनिट से ज्यादा समय लिया।जिसमे अपने विकासपुरुष की आन-बान-शान में जो कसीदे विकास की आड़ में गढ़े है। उसको सुनकर हर कमलप्रेमी यही बोल रहा है।बदले बदले से हाइनेस।कुछ कह रहे है।देर आए दुरुस्त आए।मतलब..शरणम हो गए है। इस उदबोधन में उन्होंने अपने उम्मीद जी और उज्ज्वल जी को लपेट लिया।खुलकर कह दिया। यह दोनों भी कभी कभी अपने विकासपुरुष के सवाल का जवाब नहीं दे पाते है।इतने ज्ञानी है डॉक्टर विकासपुरुष। ताज्जुब की बात यह है कि पूरे उदबोधन को अपने विकासपुरुष खामोशी से सुनते रहे।कोई हाव-भाव -मुस्कान उनके फेस पर नहीं थे। ऐसा हमारा नही ,देखने वालों का कहना है।हमारा तो काम बस आदत के अनुसार चुप रहना है।
कहाँ आग लगी थी..
किसी शायर ने क्या खूब लिखा है।
इस वक्त वहाँ कौन धुंआ देखने जाएं
कल अखबार में पढ़ लेंगे कहाँ आग लगी थी
इन दिनों संभाग के एक जिले की आईएएस मैडम को यह शेर कुछ ज्यादा पसंद आ गया है। तभी तो वह हर रोज सामने रखी जाने वाली पेपर कटिंग्स पर एक्शन ले रही हैं। जिस विभाग की खबर जरा भी नेगेटिव आई,उसके मुखिया की खैर नहीं। सीधे हड़का देती हैं।बेचारे सभी विभाग प्रमुख दुःखी है।उस पर सप्ताह में तीन दफ़ा बैठक बुलाती है।जिसमे हर उस प्रमुख की हाजरी अनिवार्य है।खासकर राजस्व की। इसके अलावा हर रोज वीसी अलग लेती है। जिसके बाद निर्देशो का पालन करने का वक्त ही नहीं मिल रहा है। तभी तो उस जिले के विभाग मुखिया ऊपर लिखा शेर अपने दर्द को हल्का करने के लिए सुना रहे है।मातहतों का दर्द हम कम नही कर सकते है।
बस , एक सलाह देते है। गोल्ड और अपनी सेव के लिए प्रसिद्ध वहाँ पदस्थ अधिकारीगण याद रखें।अच्छे-बुरे दिन जल्दी गुजर जाते है।बाकी हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
आखिर थप्पड़ किसने खाए..
करीब 15 दिन पुरानी घटना है।जो अब कमलप्रेमियो ने हमकों सुनाई है। घटना एक्सीडेंट से जुड़ी है और घटना स्थल अपने हाइनेस के निवास के पीछे वाली गली है। दो पक्षों में एक्सीडेंट हो गया। फिर जैसा होता है। तू-तू-मैं-मैं हुई। एक पक्ष ने युवा कमलप्रेमी संगठन के युवा नेता को फोन किया।घटना बताई।नेताजी तत्काल हाजिर हो गए।यह सोचकर उनका जलवा है।मगर सामने वाला पक्ष इनको नही जानता था। जब नेताजी ने अपना पॉवर दिखाने की कोशिश करी। तो सामने वाले ने उनको ही दो-तीन थप्पड़ चटकाने में एक पल की देरी नही लगाई।बेचारे..युवा नेता जी सकपका गए।हालांकि बाद में अपनी इज्जत बचाने के लिए नेताजी ने खुद समझौता कर लिया। कारण..वर्दी तक जाते तो खुद की बेइज्जती होती। ऐसा यह नजारा देखने वालों का कहना है।मगर किसको थप्पड़ पड़े। यह नाम अभी बताने को हमारा सूत्र राजी नहीं है।इंतजार करने को बोल रहा है।कारण..वीडियो बना है।जो कि बतौर सबूत चुप को मिलेगा।जिसने बनाया है।वह अभी डरा हुआ है।किंतु जल्दी ही वीडियो मिलते ही हम नाम उजागर करेंगे।अगर हमकों मिला तो।तब तक आदत के अनुसार हम चुप हो जाते है
शर्मिंदा न हो...
शायर बशीर बद्र का यह शे'र तो सभी को याद होगा। यह अशआर राजनीति करने वालो पर ज्यादा फिट बैठता है। जो एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी के बाद भी मिलते है। शुभकामनाएं देते हैं।चेहरों पर कोई शिकन नहीं दिखाई देती है।जैसे पिछले बुधवार की शाम को देखा गया।हेलीपेड पर।विकास पुरुष उड़नखटोले से उतरे। उनका स्वागत करने वालो में अपने हाइनेस और प्रथम सेवक भी शामिल थे।दोनो इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में है। इसके बाद भी हेलीपेड पर कोई दुश्मनी जैसा नजारा नही था।उल्टा ठहाका लगा।जब हाइनेस ने बधाई दी।शादी की सालगिरह की।अपने विकास पुरूष को। तब विकासपुरुष ने पलट कर कहा। तमारा कितना साल हुई गया ।जिसे सुनकर हाइनेस एक पल को हिचकिचा गए।यह सुनकर बगल में खड़े अपने बाबा मंगल ने तत्काल चुटकी ली। उन्होंने कहाँ.. ये तो बहुत पीछे ( हालांकि उन्होंने कुछ और शब्द बोला था) है।उस शब्द को सुनते ही विकासपुरुष ने तत्काल बाबा को रोक दिया और फिर तीनो ने जोरदार ठहाका लगाया।मंदिर में भी विकासपुरुष ने हाइनेस का ध्यान रखा।दो दफ़ा पूछा।विधायक जी कहाँ है। तभी तो कमलप्रेमी को शायर जनाब बद्र याद रहे है।जिन्होंने लिखा है।
दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी दोस्त बन जाएं तो शर्मिंदा ना हो..
और राजनीति का पहला सबक ही यही होता है।न स्थाई दोस्ती-न स्थाई दुश्मनी। बाकी हमकों चुप ही रहना है
बीमारी हटाओ- संगठन बचाओ...
अंदरखाने की खबर है। होटल में हुए कांड की। 27 हजार 500 से जीता हूँ।बोलने वाले अपने हाइनेस थे। अपने दालवाले नेताजी ने तत्काल जवाब भी दे दिया था। इस दौरान शिवाजी भवन की बीमारी भी मौजूद थी।जिनके मुंहलगे ख़बरची है।उन्होंने तत्काल उनको संदेश कर दिया। होटल आ जाओ। मसाला है। ख़बरची वहाँ पहुँचते। उसके पहले ही हाइनेस ने एक बात मंच से औऱ बोल दी।जो कहीं नहीं छपी। बीमारी को माफ कर दो-युवा नेता है। जनता के पक्ष में आवाज़ उठाता है।यह बात उन्होंने प्रथमसेवक को इंगित करके कही थी। तब इसका अर्थ वहाँ कोई नहीं समझा। इस दौरान हाइनेस ने बीमारी के पक्ष में वहाँ मौजूद नगरसेवकों से हाथ भी खड़े करवा लिए थे। उसी दिन प्रथमसेवक -मंत्रिमंडल की बैठक थी। उधर बैठक शुरू हुई-इधर 9 नगरसेवकों ने अपनी बहनजी से मुलाकात की। सबकी एक मांग थी। बीमारी को हटाओ-संगठन बचाओ। बहनजी की सलाह थी।दालवाले नेताजी के पास जाओ-वहाँ गुहार लगाओ। सब सलाह मानकर पहुँच गए। दालवाले नेताजी ने फोन लगा दिया । प्रथमसेवक को।जिन्होंने हाइनेस का सहारा लिया।आवाज उठाने वाले नगरसेवकों को हाइनेस के अधिकृत ऑफिस आने का आग्रह किया।मगर कोई नहीं गया। इस बीच यह भी सूत्र कह रहे है। अपने बीमारी जी ,बाकायदा स्क्रिप्ट लिखकर खबरचियों को देते है। जिसके बाद उसी खबर को जस का तस प्रकाशित कर दिया जाता है। पता नहीं इसमे कितना सच-झूट है। बहरहाल होटल कांड की आड़ लेकर बीमारी फिलहाल बच गई है।अगर यह बवाल नहीं होता तो विकेट पक्का था। अपने कमलप्रेमी तो यही बोल रहे है। हमने भी जो सुना ,वह लिखकर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मंच से झलकी पीड़ा...
शनिवार को एक दमदमा विकास विभाग का एक कार्यक्रम था।अपने पिस्तौल कांड नायक की विधानसभा के एक गाँव मे।साढ़े सात खोखे से होने वाले विकास कार्यों का भूमि पूजन। ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री मौजूद थे। जब उन्होंने बोलना शुरू किया। तो उनकी पीड़ा शब्दों के जरिए बाहर आ गई।गौर कीजिए उनकी पीड़ा पर।पांच दफ़ा दिल्ली के भवन में बैठ चुका हूं। केंद्र का नेतृत्व कर चुका हूं । पहली दफा प्रदेश का माननीय हूँ। उनकी बातों का सीधा अर्थ यह था। प्रमोशन होना था मगर डिमोशन कर दिया गया। मंच पर अपने वजनदार जी भी थे।उनकी मौजूदगी तो समझ में आती है।मगर ग्रामीण के कार्यक्रम में पहली दफा अपने हाइनेस भी नजर आए।जो कि सबकी नज़रों का केंद्र थे।उनके अलावा बदबुवाले डॉ साहब,अपने बड़बोले नेताजी मौजूद थे।इनमे से हाइनेस जी फिलहाल खुद को इन दिनों उपेक्षित महसूस कर रहे है।देखना यह है कि विरोधी ग्रुप अब आगे क्या कदम उठाता है।तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
निखट्टू-अटापट्टू-महानामा...
शीर्षक में यह तीन नाम है।पहले नाम को स्मार्ट भवन के गलियारों में आसानी से सुना जा सकता है।बाकी के दो नाम लंका के क्रिकेट खिलाड़ी के है। इन दिनों यह तीनों नाम स्मार्ट गलियारों में सुनाई दे रहे है। क्यो ओर किसलिए। तो याद दिलाते है। टीम चयन के दौरान हुई घटना की। जब टीम में अटापट्टू की वापसी हुई। तो रोशन महानामा को टीम छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।क्योकि वह सीनियर थे।कप्तान के दावेदार थे। इस घटना को स्मार्ट मातहत वित्तीय अधिकार से जोड़ रहे है। जो कि एक खोखे के है। बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो गया है। बस अपने उज्ज्वल जी के साइन का इंतजार है। अगर अधिकार मिल गए तो अपने निखट्टू जी तैयार है। इस पॉवर की धुंआधार बैटिंग के लिए।जिसमें उनको महारथ हासिल है।अब यह देखना रोचक होगा कि अपने उज्जवल जी,साइन करके महानामा बनते है या निखट्टू जी को इंट्री ही नहीं देते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
निरीक्षण के परिणाम..
2028 को लेकर निर्माण कार्य प्रगति पर है।हफ्ते में तीन दिन समीक्षा भी होती है। जिसमें उम्मीद जी,हिटलर जी,उज्जवल जी समीक्षा करते है। निर्माण विभाग से ज़ुड़े अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत प्रगति की। इसके अलावा 10 और 25 तारीख को इंस्पेकशन टीम के आने का पक्का है। जो अभी-अभी आई थी। उसने निर्माण कार्य देखकर रिपोर्ट बनाई।6 कमियां रेड कलर से अंकित की है।हम केवल सीवरेज फेज -2 ग्रामीण और शहर फेज-1-3 और अमृत पर लिखी टिप्पणी का जिक्र कर रहे हैं।क्योकि दोनो में समानता है।सीवर चेम्बर में दरार-बदलना जरूरी-सड़क कटिंग के चलते दरारे पैदा हुई-पुनर्स्थापन की सलाह-सीवर चेम्बर के फूटरेस्ट में भी दरारे लिखा है। अब फैसला उम्मीद जी और उज्ज्वल जी को करना है।कितनी सख्ती कितनी नरमी का।हमकों तो बस चुप रहना है।
शर्म से झुक जाता है..
इन दिनों अपने पँजाप्रेमी एक शेर हमकों सुना रहे हैं। पहले उसको पढ़े फिर जो कुछ भी आगे पढ़ेंगे।तो खुद पाठकगण समझ जाएंगे कि शे'र वाकई सही है या गलत। गौर फरमाएं...
सर मेरा शर्म से कुछ और भी झुक जाता है
आप जब जब भी मेरे सर की कसम खाते हैं
हमारे पँजाप्रेमी समझ गए होंगे।इशारा किस तरफ है।सीधे अपने चरणलाल जी की तरफ। जो कि कसम खाने में पीएचडी है। तभी तो पँजाप्रेमी दबी जुबान से बोल रहे है।बाबा की नगरी में होने वाले पंजाप्रेमियो के आंदोलन में उतने एक्टिव नजर नहीं आते अपने चरणलाल जी ।जितना अहिल्या नगरी के आंदोलन में एक्टिव दिखते हैं। तभी तो बाबा की नगरी में घण्टा आंदोलन औपचारिक हो जाता है।कुछ मुखर होकर बोल रहे है। अब हम केवल पँजाप्रेमी नही है,बल्कि पंजा-कमलप्रेमी अघोषित रूप से हो गए हैं। इन पंजाप्रेमियो की बात में कितनी सच्चाई है।इसका फैसला पंजाप्रेमियो के विवेक पर छोड़ते हुए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
चाचा विधायक है...
ओटीटी पर एक सीरियल आया था।बहुत पहले। चाचा..विधायक है मेरे! यह देश की आन-बान-शान बन चुके इंदौरी भाई जाकिर का पहला कदम था। स्टैंड अप कॉमेडी में। उनके इस शो के नाम का फायदा एक संयुक्त कलेक्टर मैडम उठा रही हैं। यह मैडम संभाग के पड़ोसी जिले में पदस्थ है।इसको आगे जिला-पीछे किला नाम से जाना जाता है। जिले की मुखिया आईएएस मैडम है। जो कि काफी सख्त मिजाज है।मगर एसडीएम मैडम के आगे लाचार है।हालांकि आईएएस मैडम ने एक साल तक एसडीएम मैडम को लूप लाइन में रखा।मगर फिर क्षेत्र के माननीय गुणावद जी ने दवाब बनाकर शहरी क्षेत्र में पदस्थ करवा दिया।बस उसके बाद तो मैडम जी की लॉटरी लग गई।खुद हर मामले की डील करती है।अगर कोई शिकायत की धमकी दे ।तो कह देती है।चाचा विधायक है।ऐसी चर्चा राजस्व विभाग के मातहतों और फरियादियों के बीच सुनाई दे रही है। मगर जिनको तकलीफ है।वह चुप है, तो हमकों भी अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना हैं।
विश्व सम्राट बनांम क्रिकेट सम्राट...
जगविदित है।बाबा महाकाल विश्व के नहीं अंनत ब्रह्मांड के सम्राट है।शनिवार की सुबह क्रिकेट सम्राट बाबा के सामने नतमस्तक थे। निश्चय ही बाबा उस वक्त मुस्कराए होंगे। महान सिकंदर और पौरस जब मिले थे।तब एक बात दोनों में हुई थी। एक सम्राट को दूसरे का स्वागत सम्राट जैसा करना चाहिए। यह मंशा शायद क्रिकेट सम्राट की भी होगी और कृपालु बाबा ने इसे सुनी भी होगी। क्रिकेट सम्राट के आने की खबर चुनिंदा को थी।जिन्होंने इस मौके का फायदा उठाया। फोटोशूट का।जो जायज भी है।मगर यहीं से एक सवाल मंदिर के गलियारों में शुरू हुआ।अपने फटाफट जी को लेकर।फोटोशूट के लिए अलसुबह आ गए। हमारी भी ओकात होती तो जाते? मगर नहीं थी और ना होगी।फटाफट जी की हैसियत थी।वह मौजूद थे।लेकिन पद और ड्यूटी के कारण। जिसके बाद मंदिर वाले सवाल उठा रहे है। साहब जैसे शनिवार को आए,वैसे ही 7-14-21-28 दिनों में अचानक चक्कर मार लिया करो। सब अपने मातहतों के भरोसे छोड़ रखा है।कभी आमजन की तरह व्यवस्था पर नजरें-इनायत करो। इसी की जिम्मेवारी शासन ने देकर भेजा है।ऐसा भी नही है। फटाफट जी बिल्कुल नहीं आते है। 30-31 दिन में से एक दफा पहुँच जाते है।कंट्रोल रूम में बैठकर निकल जाते है।ऐसा मंदिर वालो का कहना है। तभी तो जनहित में उनसे सवाल किया जा रहा है?वह अपने जमीर को टटोले?जैसे शनिवार को अलसुबह आए।वैसे बीच बीच मे कभी अचानक आ जाएं।उनके लिए उठाया गया सवाल सही है या नहीं?इसका निर्णय उनकों ही लेना हैं।क्योंकि हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
विस्फोट की सुगबुगाहट...
सत्तादल से जुड़े कुछ अनुसांगिक संगठन के अंदरखाने से खबर निकलकर आई है। दर्शन व्यवस्था को लेकर अंदर ही अंदर चिंगारी सुलग रही है। मंदिर के गलियारों में सुगबुगाहट है। जल्दी ही कोई विस्फोट(आंदोलन) हो सकता है।जिसकी तैयारी गोपनीय स्तर पर चल रही है। कोई खुलकर नहीं बोल रहा है। मगर हमारे भरोसेमंद इसी तरफ इशारा कर रहे है।इतना जरूर बोल रहे है कि इस विस्फोट के लिए उच्च स्तर से भी अनुमति ले ली गई है। मगर किसकी अनुमति ली गई? इसको लेकर सब ने चुप्पी साध रखी है। कोई भी मुँह खोलने को तैयार नहीं है। बस एक बात ज्यादा ज़ोर देने पर जरूर बोल देते है। इस विस्फोट से किसी अधिकारी का विकेट आसानी से चटक सकता है। फैसला वक्त करेगा। विस्फोट होगा या शांत कर दिया जाएगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
तीन दफ़ा बोल दिया...
अपने विकासपुरुष की नजरें सब कुछ भांप लेती है। वह अगर मंदिर जाते है। भ्रमण करते है। तो उनकी नजरें इधर -उधर वह देख लेती है।जो अफसर नहीं देख पाते है।उदाहरण के तौर पर अन्नक्षेत्र को जाने वाली सड़क।जिसको बने ज्यादा समय नहीं हुआ है।मगर वह खराब हो गई है।जिसको लेकर विकासपुरुष ने उज्ज्वल जी को निर्देश दिए थे।जाहिर है कि उज्ज्वल जी ने इसके बाद स्मार्ट निखट्टू जी को आदेशित किया होगा।जिसके बाद भी काम नही हुआ। तो शनिवार की बैठक में शांतप्रिय उज्ज्वल जी उखड़ गए। तभी तो उनके मुंह से वह शब्द निकले।जो इस कालम का शीर्षक है।किंतु जनता सवाल है। जो अधिकारी अपने विकास पुरुष के आदेश पालन नही कर सकते है, वह आमजन की क्या सुनते होंगे? ऐसे निखट्टू जी की आखिर इस शहर को जरूरत क्या है? ऐसा निवेदन विकासपुरुष से करते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मेरी पसंद...
इस दफा मेरी पसंदीदा शायरा अंजुम रहबर साहिबा की ग़ज़ल के दो अशआर...
सच बात मान लीजिए चेहरे पे धूल है
इल्जाम आईनों पे लगाना फिजूल है
जब मिला है जख्म का तोहफा दिया मुझे
दुश्मन जरूर है वो मगर बा-उसूल है
जिंदगी रही तो अगले सोमवार फिर मिलेंगे,वर्ना हमेशा के लिए बिल्कुल चुप रहेंगे।