उस दौर में ‘पिटाई’… इस दौर में ‘प्यार’ से शिक्षा, और परिणाम वही शत-प्रतिशत

उस दौर में ‘पिटाई’… इस दौर में ‘प्यार’ से शिक्षा, और परिणाम वही शत-प्रतिशत

उज्जैन। शिक्षा का स्वरूप बदल गया है। कभी गुरु के हाथ में छड़ी होती थी, आज उसी हाथ से दुलार और स्नेह बरसता है। कभी डर से पढ़ाई होती थी, अब बच्चों को समझाकर, हौसला देकर, आत्मविश्वास जगाकर पढ़ाना पड़ता है।

युग बदल गया है, पर गुरु की तपस्या नहीं बदली।

अनुशासन की जगह अब धैर्य ने ले ली है।

मार-डांट की जगह मुस्कान और प्यार ने।

और फिर भी, नतीजा—शत-प्रतिशत सफलता।

इसी अद्भुत धैर्य और मेहनत को नमन करने का अवसर आ रहा है 5 सितम्बर को।जब उज्जैन के 1850 शिक्षकों में से 1114 गुरुजन सम्मानित होंगे। ये वही शिक्षक हैं जिन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा में सौ प्रतिशत परिणाम देकर जिले का नाम रोशन किया है। पिछले वर्ष जिले का परीक्षा परिणाम 60% था, और इस बार छलांग लगाकर सीधे 80% तक पहुँचा है।

यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हर गुरु की तपस्या, हर शिक्षक की साधना और हर बच्चे के सपनों की पूर्ति है।जिला शिक्षा अधिकारी आनंद शर्मा भी गर्व से कहते हैं—हमारे गुरुओं की मेहनत ही है, जिससे यह उपलब्धि संभव हुई। 1114 शिक्षकों का यह सम्मान, वास्तव में पूरे जिले के लिए गौरव है। 5 सितम्बर को कालीदास मुक्ताकाशी मंच पर होने वाला यह समारोह, केवल एक कार्यक्रम नहीं होगा—यह गुरु-शक्ति का उत्सव होगा। इसमें अतिथि जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे और वेधशाला पर आधारित 15 मिनट की फिल्म भी दिखाई जाएगी, जिसका लोकार्पण हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया है।