दीपावली पर उज्जैन की जनता का मुख्यमंत्री को संदेश- सियासत की आतिशबाजी बहुत देख ली, अब विकास के दीप जलते देखने हैं!
उज्जैन। दीपावली का पर्व है। घरों में दीये जल रहे हैं, बाजार रोशनी से नहा रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने गृह नगर उज्जैन में हैं। यह उनके अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल की तीसरे साल की दूसरी दीपावली है। जो गृह नगर में मनेगी।मगर इस दीप पर्व पर मध्यप्रदेश की सियासत के उन चेहरों की चर्चा भी जरूरी है, जिन्होंने पिछले दो वर्षों में विकास से ज्यादा मुख्यमंत्री की विदाई की तारीख जानने में दिलचस्पी दिखाई।
जब डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब शायद कुछ लोगों ने इसे अस्थायी व्यवस्था समझ लिया था। फिर हर महीने एक नई भविष्यवाणी शुरू हो जाती। मुख्यमंत्री दिल्ली गए नहीं कि परिवर्तन की पटकथा तैयार! दिल्ली से लौटे नहीं कि नई तारीखों पर चर्चा! विरोधी खेमे के राजनीतिक ज्योतिषियों ने तो मुख्यमंत्री की कुर्सी का भविष्य बताने में अपनी पूरी राजनीतिक ऊर्जा लगा दी। कुछ ने खुले विरोध का रास्ता चुना तो कुछ ने पर्दे के पीछे से हवा देने की कोशिश की। लेकिन हर बार उनकी राजनीतिक गणना गलत साबित हुई।दिलचस्प यह है कि जिन लोगों को मुख्यमंत्री की कुर्सी के नीचे राजनीतिक भूकंप दिखाई दे रहा था, उन्हें शायद यह अंदाजा नहीं था कि डॉ. यादव अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगे हैं। उन्होंने विरोधियों को जवाब देने के लिए शब्दों की आतिशबाजी नहीं की। बल्कि राजनीतिक धैर्य और संगठन के भरोसे से उनकी उम्मीदों के पटाखे फुस्स कर दिए।
लेकिन दीपावली पर सिर्फ विरोधियों की हार का जश्न मनाना ही पर्याप्त नहीं है। उज्जैन की जनता मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त करना चाहती है। अपने शहर को विकास की नई पहचान देने के लिए। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के नाम पर शहर में बड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़कें चौड़ी हो रही हैं, नए मार्ग बन रहे हैं, पुल और अधोसंरचना तैयार हो रही है। यह भी सच है कि इस समय विकास की कीमत जनता को रोजाना जाम, धूल, खुदी सड़कों और आवागमन की परेशानियों के रूप में चुकानी पड़ रही है। शहर के वर्तमान हालात से लोग परेशान हैं। इसे नकारा नहीं जा सकता।
लेकिन उज्जैन की जनता में एक उम्मीद भी दिखाई देती है। वह मान रही है कि आज जिन रास्तों पर परेशानी है, कल उन्हीं पर विकास की नई तस्वीर दिखाई देगी। अगली दीपावली तक उज्जैन का स्वरूप ऐसा हो कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु और पर्यटक अपने शहर लौटकर इस बदलाव की तारीफ करे। लोग कहें कि महाकाल की नगरी ने सिर्फ धार्मिक पहचान ही नहीं, विकास की नई मिसाल भी कायम की है। मुख्यमंत्री के लिए जनता की यह उम्मीद किसी राजनीतिक प्रशंसा से बड़ी है। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण समय पर पूरे हों, गुणवत्ता से समझौता न हो और जनता की वर्तमान परेशानियां कम करने के लिए प्रशासन संवेदनशील रहे।
विरोधियों को भी दीपावली के इस उजाले में एक बात समझनी चाहिए। राजनीति में दीये दूसरे के घर के बुझाने से अपना घर रोशन नहीं होता। जनता की अदालत में अंततः काम का हिसाब देना पड़ता है, कुर्सी की अफवाहों का नहीं।
डॉ. मोहन यादव के सामने अब सबसे बड़ा अवसर है। विरोधियों को जवाब देने का नहीं, उज्जैन को ऐसा बनाकर दिखाने का कि आलोचकों के पास भी तारीफ करने के अलावा कोई रास्ता न बचे।
इस दीपावली पर विरोधियों के लिए एक संदेश और जनता की एक उम्मीद है-
वे दो साल तक मुख्यमंत्री की विदाई के दीये गिनते रहे,
मोहन यादव उज्जैन के विकास के दीप जलाने में लगे रहे।
अब अगली दीपावली का इंतजार है। देखना यह है कि तब तक उज्जैन की तस्वीर कितनी बदलती है और विकास की रोशनी कितनी दूर तक पहुंचती है।