जिस मंदिर के व्यवस्थापक कलेक्टर: उसी जमीन पर अतिक्रमण ... !

जिस मंदिर के व्यवस्थापक कलेक्टर: उसी जमीन पर अतिक्रमण ... !

उज्जैन।  जिस मदनमोहन मंदिर के व्यवस्थापक खुद उज्जैन कलेक्टर है। उस मंदिर की जमीन पर बगैर किसी अनुमति के दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि नगर परिषद के सीएमओ ने पत्र लिखकर जवाब दिया है। शिकायत होने के बाद। जिसमें उन्होंने साफ-साफ लिखा है कि ... यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आता है।

मामला उन्हेल का है। जहां पर उज्जैन के मदनमोहन मंदिर के स्वामित्व वाली जमीन है। नये बस स्टेंड पर। जहां पर करीब 1 दर्जन दुकाने बनकर तैयार हो गई है। इसकी शिकायत जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर हुई थी। शिकायत अनिल कपासिया द्वारा की गई थी। जिसके बाद होना तो यह था कि निर्माण कार्य रोका जाता। मगर नगर परिषद उन्हेल के सीएमओ कैलाश वर्मा ने तहसीलदार रामविलास को जो लिखित में जवाब दिया है। वह हास्याप्रद है।

जरूरत पडने पर ...

सीएमओ नगर पालिका के पत्र क्रं. 507 / निर्माण शाखा / 2025 / दिनांक 28 अप्रैल 25 में साफ-साफ लिखा है। 20 सालों से नये बस स्टेंड पर हाथ ठेले वाले अस्थाई दुकाने लगा रहे है। वही लोग अपने निजी खर्च से दुकाने बना रहे है। नगर परिषद ऐसा कोई निर्माण नहीं कर रही है। इसलिए यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आता है। भविष्य में अवश्यकता पडऩे पर शेड हटा दिया जायेगा। यह पत्र तहसीलदार को लिखा है। जिसकी एक प्रति एसडीएम नागदा ब्रजेश सक्सेना को भी भेजी गई है।

चुभता सवाल ...

सीएमओ के इस जवाब के बाद उन्हेल में चर्चा आम है। जब निर्माण होते हुए देखकर भी रोका नहीं जा रहा है। तो बाद में आवश्यकता पडने पर बगैर किसी विवाद के दुकाने हटाना क्या संभव होगा? उस वक्त तो धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव शुरू हो जायेगा। जिसके चलते दुकाने हटाना असंभव होगा।

सशर्त जमीन दी थी ...

विदित रहे कि न्यायालय कलेक्टर उज्जैन के पत्र क्रं. कलेक्टर / रीडर/ 1/2017 /84 दिनांक 14 फरवरी 2017 को मदनमोहन की जमीन सशर्त दी गई थी। नगर परिषद उन्हेल को। नये बस स्टेंड के निर्माण हेतु। अस्थाई अनुमति दी गई थी। शर्त यह थी कि ... भूमि के स्वामित्व में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस जमीन का वाणिज्यिक उपयोग नहीं किया जायेगा। आवश्यकता पडने पर शासन भूमि वापस लेगा और कोई मुआवजा नहीं देगा।

इनकी हैं दुकाने ...

उन्हेल में यह चर्चा आम है। जिन 12 दुकानों का निर्माण हुआ है। उनके अघोषित मालिक महेश, शांतिलाल, राजू, राजाराम, जगदीश, नागेश्वर, अनिल, मुकेश, प्रकाश, सांची, सुरेश व रफीक के नाम शामिल है।