12 मई 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
दुश्मनी ...
शायर बशीरबद्र ने खूब लिखा है। दुश्मनी जमकर करो लेकिन यह गुंजाइश रहे/ जब कभी हम दोस्त बन जाये तो शर्मिदा ना हो...। इन दिनों यह अशआर अपने कमलप्रेमी गुनगुना रहे है। इशारा हाइनेस और पहलवान की तरफ है। दोनों ही कमलप्रेमी है। एक वक्त था। जब पहलवान का एकछत्र राज था। मगर अब एकांतवासी है। कही नहीं बुलाया जाता है। तो अपनी पीडा सोशल मीडिया पर उजागर करते है। ताजा मामला फिजियो सेंटर शुभारंभ का है। आयुर्वेद भवन में। जहां पर उनको निमंत्रण तक नहीं दिया गया। नतीजा पहलवान ने वीडियों अपलोड कर दिया। जिसमें वह कह रहे है। पहली फिजियों मशीन मैने दी थी। 7 पेटी कीमत वाली। अब नई मशीन आई है। जिसका शुभारंभ अपने हाइनेस ने किया। मगर मुझको निमंत्रण तक नहीं दिया। जिसके लिए उनको धन्यवाद। तभी तो कमलप्रेमी डॉ. बशीरबद्र को गुनगुना रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
याचिका ...
150 खोखे की कीमत वाली जमीन के मामले में याचिका दायर हुई है। यह वही जमीन है। जिसे कमलप्रेमी माननीय और पंजाप्रेमी नेता की साझेदारी में खरीदा गया था। नामांतरण भी हो गया था। मगर शिकायत के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने नामांतरण रद्द कर दिया था। अब इस मामले में एक खबरची ने जनहित याचिका लगा दी है। जिसके बाद यह चर्चा आम है। 150 खोखे बाजार मूल्य की जमीन अब खटाई में पड गई है। देखना यह है कि मामला कैसे सुलझता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
सलाहकार बदलो ...
अपने प्रथमसेवक सीधे मानुष है। हर प्रहार सहन कर लेते है। जैसे अभी-अभी शिवाजी भवन में सदन के अंदर कटाक्ष किया गया। पंजाप्रेमी नेताजी ने। सीधे बोल दिया। अपने सलाहकार बदलो। इशारा गंभीर बीमारी और बूटी प्रेमी नगरसेवक की तरफ था। आसंदी पर अपनी बहन जी मौजूद थी। जिन्होंने प्रथमसेवक को सहारा दिया। बहनजी ने पंजाप्रेमी नेताजी को रोका। सीधे कहा। यह विषय सदन का नहीं है। प्रथमसेवक वक्त आने पर खुद ही सलाहकार बदल लेंगे। वह खुद समझदार है। बहनजी के सहयोग से प्रथमसेवक के चेहरे पर मुस्कान आ गई। किन्तु वह पलटकर कुछ नहीं बोले। चुप रहे। तो हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
निगाहें ....
अपने स्मार्ट पंडित की कुर्सी पर सबकी निगाहें है। हर कोई जुगाड में लगा है। पंडित जी को खिसकाकर खुद आसीन हो जाये। अंदरखाने की खबर है। अपने फटाफट जी और चटक मैडम जी की दिली इच्छा है। वह शिवाजी भवन के मुखिया की कुर्सी पर विराजमान हो जाये। मगर अपने पंडित जी तो फेविकोल का जोड साबित हो रहे है। देखना यह है कि आखिर किसको सफलता मिलती है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
फटाफट .....
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। जिसमें इशारा कार्यशैली की तरफ है। अपने फटाफट जी की। जो कि इन दिनों किसी भी फाइल पर दस्तखत करने से बच रहे है। हर प्रकार की फाइल। ना काम की और ना भुगतान की। सभी फाइले लंबित है। जिनके रूकने से मंदिर के गलियारों में यह बोला जा रहा है। करूं की ना करूं, कैसे करूं, क्यों करूं, मैं ही क्यों करूं..? तभी तो मंदिर में अपने फटाफट जी को लेकर हर कोई बोल रहा है। वैसे तो हर काम फटाफट करने को कहते है। लेकिन जब खुद की बारी आती है तो कलम रूक जाती है। मंदिरवालों की बात में दम है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
भाई...
अपने भाई को तो कोई भी समझा सकता है। यह नसीहत दे सकता है। कोई ऐसा काम नहीं करना। जिससे बड़े भाई को माफी मांगनी पड़े। लेकिन जोरू के भाई को कोई कैसे समझाये। जो स्कूल में जाकर पूरे स्टाफ को अनाप-शनाप बके। बेल्ट उतारकर मारने की बात कहें। इस दौरान महिला स्टाफ भी मौजूद था। घटना करीब 15 दिन पुरानी है। स्कूल संचालक पेशे से चिकित्सक है। जोरू के भाई की हरकतों से पूरा स्टाफ विद्रोह पर उतर आया। लिखित में आवेदन बनाया गया। सभी ने हस्ताक्षर किये। इधर घटना का पता चलते ही चिकित्सक महोदय ने सार्वजनिक माफी मांगी और मामले को शांत किया। ऐसा हम नहीं बल्कि स्कूल के शिक्षक और चिकित्सक वर्ग कह रहा है। घटना सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
तेवर ...
जिले के मुखिया फुलफार्म में है। बगैर किसी भेदभाव के सभी के कामों की समीक्षा कर रहे है। भले किसी को बुरा लगे। आदेश/ निर्देश की अवेहलना उनको पसंद नहीं है। तभी अपनी चटक मैडम जी को बोल दिया। वह भी सबके सामने। सोमवार वाली बैठक में। मैंने बोला था-तो आना चाहिये-अगली बार ध्यान रखे। उन्होंने ऐसा क्यों बोला। तो कारण यह है। अभी तक ग्रामीण क्षेत्र के अधिकारी मजे मार रहे थे। साप्ताहिक बैठक से दूर रहते थे। चटक मैडम जी का वरदहस्त था। मगर अब नये मुखिया ने आदेश दिये है। सभी को हाजिर रहना है। इसके बाद भी पिछले सोमवार को कोई हाजिर नहीं हुआ। बस फिर क्या था। मुखिया जी ने बगैर लिहाज पाले सख्ती से कह दिया। अगली बार ध्यान रखे। वह अगली बैठक आज होगी। देखना यह है कि अधिकारीगण हाजिर होते है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कदम ...
गुडवर्क के लिए पहला कदम उठाना पडता है। फिर रास्ते खुद-ब-खुद बनते जाते है। किसी शायर ने कहा भी है। मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल की ओर/ लोग मिलते गये और कारवां बढता गया...। जिले के नये मुखिया ने भी कुछ ऐसा ही किया है। एक ऐसा कदम उठाया है। जो कि बहुत पहले उठाया जाना था। मगर देर आये दुरूस्त आये। इशारा लैंडपुलिंग योजना की तरफ है। नये मुखिया ने इस योजना को लेकर किसानों के दिल में समाया भय मिटाया है। जिसके लिए उन्होंने ग्रामदेवताओं की बैठक ली। उनको समझाईश दी। गांव-गांव जाकर किसानों को योजना का असली मकसद बताये। उनके इस कदम से किसानों में भय खत्म हुआ है। जिसके लिए उनको इस अच्छे काम की बधाई देते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
आश्चर्य में ...
जिले के नये मुखिया, फटाफट जी और इंदौरीलाल शनिवार को मंदिर पहुंचे। रात 8 बजे करीब। गेट नं. 4 से निकलकर हरसिद्धि मंदिर वाली सड़क पर चले। जहां पर पानीपुरी से लेकर सभी प्रकार का बाजार लगा हुआ था। यह देखकर नये मुखिया आश्चर्य में पड गये। वजह ... यह वही जगह है। जहां दीवार गिरी थी। 2 लोग मर गये थे। खूब हंगामा मचा था। एक थाना प्रभारी को हटाया गया था। तब निर्देश निकाले गये थे। इस मार्ग पर अब कोई भी दुकाने नहीं लगेंगी। कुछ दिन तक सख्ती रही। फिर वही ढर्रा शुरू हो गया। दुकाने लगवाओं-माल कमाओं। जिसमें मंदिर-मीडिया-वर्दी सभी शामिल है। अब नये मुखिया ने खुद यह नजारा देख लिया है। देखना यह है कि वह क्या कदम उठाते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
सेल्यूट ...
वर्दी को अनगिनत सेल्यूट। जिसने लव जिहाद के मामले में तत्परता से कार्रवाई की। कप्तान और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है। मगर एक गुजारिश-इल्तजा- विनती अपने कप्तान जी से है। वह यह है कि आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटाये। खासकर तकनीकी सबूत। ताकि जब मामला अदालत में जाये। तो कोई भी साक्ष्य के आभाव में बरी ना हो जाये। वरना वर्दी की पूरी मेहनत पर पानी फिर जायेंगा। इस कांड की जांच दूध का दूध- पानी का पानी की तर्ज पर होनी चाहिये। इतना भरोसा हम वर्दी से करते है। इसलिए एक बार फिर वर्दी को सेल्यूट करके, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।