13 अक्टूबर 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

13 अक्टूबर 2025 (हम चुप रहेंगे)

अनुमति बनाम गिफ्ट...

पिछले दिनों अपने फटाफट जी ने अचानक आरती अनुमतियां रदद् कर दी थी। जिस दिन यह हुआ। उसी दिन देश के प्रमुख उधोगपति घराने की कम्पनी से कोई आया था। इस घराने के मुखिया मुम्बई में विशाल अट्टालिका में निवास करते है। उनकी भी अनुमति रद्द हुई थी। मगर पॉवरफुल है। तो कंपनी के इंदौरी मुखिया ने एक फोन करके रात 2 बजे इंट्री करवा दी। जिसके बाद मामला हाई लेबल तक गया! ऐसा क्यों हुआ? इसकी पडताल करने 3 सदस्यीय दल संकुल आया। जो कि एक वजनदार गिफ्ट लाया था। अधिकारी से मिला। अपनी पीडा सुनाई और गिफ्ट दिया। अधिकारी ने क्या आश्वासन दिया होगा? कयास लगाया जा सकता है। दल वापस लौटा और गिफ्ट तत्काल वाहन में रखवा दिया गया। जिसकी चर्चा संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है। मगर इस पॉवरफुल ग्रुप की अनुमति अब आगे बनेगी या नहीं? फैसला वक्त करेगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मैडम पर एफआईआर...

अपने संकुल में एक मैडम पदस्थ थी। जिनका फिर विंध्य इलाके में तबादला हो गया था। जब वह यहां पदस्थ थी। तब वह चन्दा करके अपना जन्मदिन मनाने के कारण सुर्खियों में आ गई थी। चन्दा मैडम की बातों में ईमानदारी का हमेशा जिक्र होता था। जिसे सुनकर हमको लगता था कि क्या यह संभव है। कारण..मैडम का विभाग बगैर लेन-देन के चलता ही नहीं था। किन्तु वह हमेशा ईमानदारी का राग अलापा करती थी। मगर विंध्य पहुँचते ही खुलासा हो गया। 45 खोखे की धान खरीदी कांड में उनकी भूमिका संलिप्त पाई गई। नतीजा..चन्दा मैडम पर भी एफआईआर हो गई। करवाने वाले वर्तमान में सीपीआर है। चन्दा मैडम की जगह संकुल में आई मैडम भी इन दिनों चर्चाओं में है। उनके खिलाफ भी माहौल बन गया है। जल्दी ही एक बडा मामला सामने आ सकता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

हवा के दवाब की कमी...

अपने विकास पुरुष का उडन खटोला इन दिनों एयर-प्रेशर की कमी से जूझ रहा है। शुक्रवार को जब बदबू वाले शहर की तहसील में उतरा, फिर उडा, तो यह देखने वालों ने महसूस किया। देखने वालों का कहना है कि जमीन से 10 फीट की ऊंचाई पर पहुंच कर 30 से 40 सेकंड के लिए पीछे की तरफ झुक गया था। इस पर मोहर शनिवार की सुबह 9 बजे लग गई। जब विकास पुरुष के आने से पहले उडन खटोला चालू किया गया। चेक किया गया कि एयर प्रेशर ठीक बन रहा है। अंदर कुछ लोग भी बैठाए गए थे। 30 मिनिट तक जमीन पर खडे उडनखटोले की पंखुडी फुल स्पीड पर चलाई गई। मतलब कोई गडबडी तो थी। अब वह पूरी तरह दूर हुई या नहीं? हमको पता नहीं है। हम तो विकास पुरुष से उडनखटोले को बदलने की गुहार करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

एक दिन इंतजार करोंगे...

विकास पुरुष के टप्पा कार्यालय आने से पहले की घटना है। मतलब गुरुवार की। जब हेलीपेड का निरीक्षण करने अपने उज्ज्वल जी और कप्तान जी पहुँचे थे। क्षेत्र के माननीय अपने पिस्तौल कांड नायक भी मौजूद थे। तब अचानक उन्होंने बडे कॉन्फिडेंस से यह बोला। एक दिन में भी उडनखटोले से आऊंगा और आप दोनों इंतजार करेंगे। यह सुनकर वहाँ मौजूद बाकी सभी आश्चर्य में पड गए, अपने कप्तान और उज्ज्वल जी ने या तो सुना नही, या फिर सुनकर चुप रह गए। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

ग्रीन रूम के 15 मिनिट...

घटना शुक्रवार की है। विकास पुरुष मंच पर विराजमान थे। पिस्तौल कांड नायक भाषण दे रहे थे। वजनदार जी का नंबर आने वाला था। तभी अचानक अपने विकास पुरुष एकदम  तेजी से उतरे और सीधे ग्रीन रूम के अंदर चले गए। अंदर वाले कमरे में। दरवाजा बंद करवा दिया। उनके पीछे उज्जवल जी और कप्तान जी भी भागे। जो बाहर सोफे पर बैठ गए। अंदर विकास पुरुष फोन पर बात करते रहे। देश की राजधानी से कॉल आया था। 15 मिनिट बाद बाहर आए। ऐसा यह नजारा देखने वालों का कहना है। मगर हमको तो बस चुप ही रहना है

नाम मे क्या रखा है...

चाचा विलियम शेक्सपियर का कथन है। नाम मे क्या रखा है। मगर जब मामला न्याय प्रिय राजा की पदवी का हो और पदवी ही गलत लिखी गई हो। तब यह कथन गले नही उतरता है। जैसे सम्राट को गलत लिखा गया। वह भी उस विश्व विद्यालय द्वारा। जिसका अभी अभी शुक्रवार की शाम को नया नामकरण हुआ। करने वाले अपने विकास पुरुष थे। किसी का ध्यान नहीं गया। जबकि एक से बढकर एक हिंदी के विद्वान वहाँ पदस्थ है। मगर काम के बदले चापलूसी में लगे रहते है। तभी तो आखरी शब्द के नीचे हलंत लगा दिया। तस्वीर देखकर खुद फैसला कर लें। बाकी हमको चुप ही रहना है

छक्का लगने का इंतजार...

शिवाजी भवन के गलियारों में इंतजार हो रहा है। आखिर कब छक्का लगता है। क्योंकि चौका तो लग चुका है। यहां इशारा झोन की तरफ है। पिछली दफा चौका मारकर सीएसआई को लाइन के बाहर किया जा चुका है। अब निशाने पर 6 नम्बर वाले हैं। जिनकी एक भी लापरवाही उनको स्टेडियम से बाहर का रास्ता दिखा देगी। तभी तो सिक्स लगने का इंतजार हो रहा है। हालांकि हडताल के संकेत दिए थे। चौका लगने के बाद। मगर भैरवगढ वाले सफाई नेता से बातचीत के बाद मामला सुलट गया है। मगर हालात इशारा कर रहे है। शिवाजी भवन के मुखिया छक्का लगाने के मूड में है। फैसला वक्त करेगा। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

19 पेज का नोटिस...

शिवाजी भवन से नोटिस जारी हुआ है। पूरे 19 पेज का। वह भी कानूनी सलाह के बाद। 14 दिन का समय दिया है। उस कंपनी को, जो सीवरेज लाइन के काम को कई सालों से लटका रही है। इधर 2028 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। शिवाजी भवन को खून के आंसू ला देने वाली कंपनी को अब हटाने की तैयारी है। मगर अब हटाया तो क्या होगा? क्या कोई अल्टरनेट कम्पनी तैयार है? जो उसी दर पर काम करेगी, जो निर्धारित है। या फिर नया टेंडर होगा। अगर टेंडर हुआ तो काम 4 से 5 महीना बाद ही शुरू होगा। जबकि 2028 को देखते हुए हर दिन और हर घण्टा कीमती है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इसको लेकर सब चुप है। तो हम भी चुप हो जाते है।

आमने -सामने की लडाई...

अभी अभी जनधन पर धर्म की आड में फिल्म सिटी घूम कर लौटे हैं अपने प्रथम सेवक। उनके साथ उनकी केबिनेट और परिजन भी थे। बहाना सफाई और धर्म था। खैर जिस सफाई व्यवस्था में शिवाजी भवन को प्रथम पुरस्कार मिला। उसकी बारीकी सीखने गए थे। जहाँ की एक तस्वीर खिंचवा कर साबित कर दिया। यात्रा सफल रही। वाकई सफल भी रही। रामोजी सिटी घूम लिए। मुफ्त का चंदन..की तर्ज पर। बधाई। वापस लौटकर बैठक हुई। जिसमें ग्रांड होटल पर आमने सामने आ गए। जमीन किसकी है? इसकी जांच करवा ली। आबादी दर्ज है। जिस पर आपत्ति ली। प्रस्ताव आया कि शासन अधिग्रहित भी कर सकता है। जवाब आया, फिर प्रस्ताव क्यो लाए। अधिग्रहण कर ले शासन। प्रथम सेवक के इस उत्तर के बाद, शिवाजी भवन के मुखिया तमतमाये हुए है। लडाई आमने -सामने की हो गई है। जिसका नतीजा क्या होगा? आने वाला वक्त करेगा। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

कार्यशैली से दु:खी... 

अन्नदाता दु:खी है। वह विकास के लिए अपनी भूमि देने को तैयार है। मगर उसके बदले मुआवजा नगद की उम्मीद रखता है। मामला जीवन खेडी में बनने वाली 100 फीट चौडी सडक का है। जिसे तीन विभाग बना रहे है। निगम/लोनिवि और उविप्रा। शिवाजी भवन मुआवजा राशि दे रहा है। लोनिवि ने कोई निर्णय नहीं लिया है। जबकि उविप्रा ने टीडीआर (हस्तांतरणीय विकास अधिकार) देने का फैसला ले लिया है। इसके कारण ही अन्नदाता दु:खी है। वह नगद में मुआवजा चाह रहा है।  मगर अपने इन्दौरीलाल जी टीडीआर देने पर अडे है। जबकि 2028 के लिए केवल ढाई साल शेष है। ऐसे में सभी काम कैसे पूरे होंगे? इसकी चर्चा विकास भवन से शिवाजी भवन तक सुनाई दे रही है। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

वो जब गुस्से में बोलता है...

शराफत का पता चलता है उसकी/वो जब गुस्से में भरकर बोलता है..! डॉ नवाज देवबंदी का यह अशआर इन दिनों कमलप्रेमियो की जुबान पर है। क्यो और किस लिए? तो थोडा दिमाग पर जोर देना होगा। पिछले सप्ताह एक वीडियो वायरल हुआ था। एक मंच से सर्वोत्तम जी के गुस्से का। तमतमाते हुए। माइक से नाराजगी वाला। जिसके बाद कमलप्रेमी सोच में पड गए। सवाल करने लगे। क्या सर्वोत्तम जी का यह व्यवहार उचित था? वह तो सामने वाले की विनम्रता थी। हँसते मुस्कुराते हुए माफी मांग ली और क्लियर भी कर दिया कि गलती आपके करीबी की है। सूचना कर दी थी। इसके बाद भी आक्रोश प्रकट करना उनके पद और गरिमा के विपरीत है। तभी तो कमलप्रेमी ऊपर लिखा शेर दबी जुबान से सुना रहे हैं। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

दूध हमारा-नाम तुम्हारा...

एक त्यौहार आता है। जिसमें जुलूस निकाला जाता है। इसमें शर्बत वितरण का ज्यादा महत्व होता है। गुलाबी रंग का शर्बत वितरित किया जाता है। जो कि दूध -पानी और बर्फ डालकर बनाया जाता है। इसके लिए दूध की व्यवस्था संकुल से होती है। ऑफ द रिकार्ड में। इस साल दूध 45 हजारी का दिया गया था। पिछले कई सालों से यह परम्परा चल रही है। किसने इसकी शुरुआत की। क्यो हुई। किसी को नहीं पता। मगर इस बार संकुल के गलियारों में इसकी खूब चर्चा है। दूध हमारा-नाम तुम्हारा। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस,अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

जनहित में गुहार
यह तस्वीर घांस मंडी चौराहे की है।सेठी नगर जाने वाले मार्ग की।पूरी बारिश के दौरान सड़क ऐसी थी।अब बारिश जा चुकी है।स्पीड ब्रेकर के कारण अक्सर वरिष्ठ नागरिक दुपहिया वाहन से संतुलन खो देते है।कोई संभल जाता है तो कोई गिर जाता है।सिंहस्थ के करोड़ो के काम चल रहे है।अगर उम्मीद जी,उज्जवल जी एक इशारा कर दे।तो इस मार्ग की हालत सुधर सकती है।मात्र 15 फीट लंबाई के गड्ढे को भरना है।हम केवल गुहार कर सकते है और आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

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