27 अप्रैल 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
उधारीलाल की किस्मत...
तो आखिरकार पँजाप्रेमी से कमलप्रेमी बने अपने उधारीलाल जी की किस्मत से छीका फूट गया। उनका अपने विकासपुरुष ने ख्याल रखा। क्योंकि विकासपुरुष के इशारे पर ही उन्होंने कमलप्रेमी बनना स्वीकार किया था। तब उधारीलाल जी ने गुहार लगाई थी। भाई साहब मेरा ख्याल रखना। विकासपुरुष ने वादा कर दिया था। अब मौका मिलते ही आयोग का सदस्य बना दिया है। हालांकि कमलप्रेमियों का कहना है। झुनझुना थमाया है।मगर हमारी सोच अलग है। नी मामा से काणे मामा अच्छे!कुछ तो मिला। जिसके लिए हम अपने उधारीलाल को बधाई देते हुए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
विकास की राह में स्थगन...
पत्रकार कालोनी रविशंकर नगर के बाद अब हरिराम चौबे मार्ग को 2 दर्जन रहवासी स्टे लेकर बैठ गए है।मार्ग चौड़ीकरण के खिलाफ। इधर एलिवेटेड ब्रिज को लेकर इंदौर गेट वालो ने भी मोर्चा खोल लिया है। यह सब भी माननीय न्यायालय की शरण मे चले गए है। यहाँ उनको कितनी रिलीफ मिलेगी?फैसला वक्त करेगा। मगर यह सच है कि विकास की राह में स्थगन रोड़ा बनने वाला है। कारण -माननीय न्यायालय ने इन सभी फरियादी को शिवाजी भवन भेजा था। समय निर्धारित करके। इस दौरान शिवाजी भवन को निराकरण करना था। किंतु निराकरण तो दूर किसी ने सुना तक नहीं। नतीजा- अब पहले स्टे खारिज कराओ-फिर बुलडोजर चलाओ की नोबत बन गई है। देखना यह है कि हरिराम चौबे मार्ग चौड़ीकरण का सपना पूरा होता है या नहीं। तब तक जैसे जनता चुप है,वैसे हम चुप हो जाते हैं।
मैडम से दुःखी..
दमदमा के ग्रामीण विकास के मातहत आज भी अपनी चटक मैडम जी नहीं भूल पा रहे है। जब वह पदस्थ थी। तब भी उनका टेरर बरकरार था। आज भी उतना ही है। तभी तो एक जनपद के मुखिया अपनी चरित्रावली (सी आर) के लिए परेशान हो रहे है। मैडम जी से कई दफा निवेदन कर चुके है। मगर जनसुनवाई में आमजनता की मदद करने में अव्वल मैडम जी अपने पुराने मातहत की गुहार पर कोई सुनवाई नहीं कर रही है। जबकि ईमानदारी की मिसाल जनपद मुखिया, अपने विकासपुरुष के स्वजातीय है। इसके बाद भी दुःखी है। मुखिया को कुछ समझ नहीं आ रहा है। कैसे इस काम को पूर्ण करवाएं। इसलिए चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
पॉड कास्ट के कारण चर्चा...
सुर्खियों में रहने के लिए राजनीतिक सेवक इन दिनों सोशल मीडिया पर ज्यादा निर्भर रहते है। पिछले दिनों बिहारी तेजस्वी यादव का एक पॉड कास्ट रिलीज हुआ। जो इन दिनों शिवाजी भवन में हर किसी की जुबान पर है। कारण चप्पल है। जिसकी कीमत 12 हजारी है। कोई विदेशी कंपनी है। BIRKENSTOCK ।जिसकी चप्पल बिहारी नेताजी पहनते हैं।शुभांकर मिश्रा ने चप्पल को लेकर सवाल कर लिया। कीमत पूछी। जवाब मिला।500 की है। मगर पॉड कास्ट संचालक ने पोल खोल दी। जिसके बाद नेताजी खिसिया कर रह गए। इस पॉड कास्ट को देखकर अपने शिवाजी भवन वाले खुलकर बोल रहे है। अपने एंग्रीमैन क्या तेजू भिया से कम है क्या? उनकी पसंद भी वही है। जो बिहारी नेताजी की है। एंग्रीमैन के मातहत इससे खुश है। तो हम भी उनकी खुशी में शामिल होते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
निविदा निकल गई मगर..
निर्माण कार्य को लेकर यह साधारण नियम सुनाई देता है। पहले डीपीआर तैयार की जाती है। फिर बाकी प्रक्रिया। मगर एक मामले में इसके उलट हुआ है। मामला 1200 मीटर बनने वाली सड़क से जुड़ा है। जिसको लेकर निविदा तक निकल गई है। लेकिन इस सड़क की डीपीआर अभी तक रेडी नही हुई है। ऐसी चर्चा शिवाजी भवन के गलियारों में सुनाई दे रही है। इशारा मकोडियाआम से कनीपुरा को जोड़ने वाली सड़क का बताया जा रहा है। सूत्र भी इसकी पुष्टि कर रहे है।डीपीआर के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस जो आदत है। उसके अनुसार चुप रह सकते हैं।
24×7 का दावा...
प्रशासन का यह दावा है। सिंहस्थ के निर्माण कार्य 24 घण्टे सातों दिन चल रहे है। उम्मीद जी,उज्ज्वल जी,एंग्रीमैन और इन्दौरीलाल हर दिन साइट भ्रमण भी कर रहे है। ये बड़े लोग कभी झूट नहीं बोलते हैं।मगर प्रथमसेवक और जनता अलग राग अलाप रही है। सवाल उठा रही है। अगर जो दावा किया जा रहा है,वह सच है तो फिर मलबा हर जगह नजर क्यों आ रहा है? 24×7 की कहानी किसी के गले नही उतर रही है। ऐसे में प्रशासन को क्या ऐसा नहीं करना चाहिए। जितनी साइट निर्माणाधीन है। वहां सीसीटीवी लगाकर एक कंट्रोल रूम बना दे। आसानी से नजर आ जाएगा। कौन ठेकेदार मूर्ख बना रहा है और कौन काम वाकई कर रहा है। वैसे भी प्रशासन ने जनवरी में दावा किया था। सिंहस्थ के कामों को लेकर कुछ चौराहों पर एलईडी लगेगी। जिसमें काम का नाम-लागत-कब खत्म होगा आदि का उल्लेख होगा और आमजनता आसानी से हर काम से वाकिफ होगी। यह दावा भी आजतक मूर्तरूप नही ले पाया है। ऐसे में 24×7 के दावों पर यकीन नहीं होना,मानवीय प्रकृति है। फैसला प्रशासन को लेना है। दाव पर विकासपुरुष की छबि लगी है और हमकों आदत के अनुसार चुप रहना है
आईएएस साहब की भड़ास...
संकुल के गलियारों में सुगबुगाहट है।एक आईएएस की भड़ास की।कई फरियादियों ने इसकी पुष्टि की है। साहब के पास जमीनी विवाद के प्रकरण आते है।तो लोग जुगाड़ लगा कर मिलते भी है। कुछ सिफारिश के साथ जाते है। इनके साथ साहब का व्यवहार भड़ास वाला होता है। जब साहब अपनी भड़ास निकालते हैं। तब उनका शब्दों पर काबू नहीं रहता है। हालांकि अनर्गल भाषा नही बोलते है। मगर ऐसी -ऐसी उपाधियों से सामने वाले को नवाज देते है। जिससे कि फरियादी को समझ आ जाता है। साहब मखमल में लपेट कर प्रहार कर रहे है। उनकी इस शब्दावली के कई शिकार हो चुके है। यह वही आईएएस अफसर है। जिनकी हेलीपेड पर अपने पिस्तौल कांड नायक ने जमकर मिट्टी-पलीत की थी।साहब के इस व्यवहार के पीछे उनकी अपनी पीड़ा है। वह दर्द यह है कि अभी तक वह किसी जिले के मुखिया नहीं बन पाए हैं। जबकि उनकी बेच के एक साथी चौथी दफ़ा जिले की कमान संभाल रहे है। तभी तो साहब सिफारिश लेकर आए शख्स पर भड़ास निकालने का कोई अवसर नहीं छोड़ते है।ऐसा हम नहीं, संकुल वालों का कहना है। मगर हमकों तो अपनी आदत के अनुसार बस चुप ही रहना है।
इसलिए LIVE बंद किया...
आम भक्तगण को लाइव दर्शन से दूर करने की असली कहानी -मंदिर वालों की जुबानी अब सुनाई दे रही है।जिसके पीछे मकसद केवल आय बढ़ाना है। ठीक किसी फिल्म के निर्देशक की तरह। अगर उसकी फ़िल्म ओटीटी पर आ गई।तो थियेटर में देखने कौन जाएगा? यह फैसला भी इसी को ध्यान में रखकर लिया गया। उस वक्त जब फटाफट जी सहित एक दल दक्षिण भारत गया था। उस मंदिर की व्यवस्था देखने। जहाँ सबसे ज्यादा दान आता है और भक्तगण मुंडन करवाकर आते है। उस दौरान पता चला। इस मंदिर में live बंद कर दिया है। ताकि भक्तगण ज्यादा आए। यह आईडिया अपने फटाफट जी को रास आ गया। लौटकर उन्होंने इस अमल कर दिया। जबकि अपने विकासपुरुष की दिली इच्छा जगजाहिर है। जो जनता दर्शन को आती है। उसे कम चलना पड़े-सुलभ दर्शन हो और live दर्शन का भी लाभ मिले। मंदिर के निरीक्षण में उन्होंने अपनी इच्छा भी जाहिर की थी। तब ,जब उनके निर्देश पर सुलभ सुविधा को बनने से रोक दिया गया था। इसके बाद अगर केवल आय ही मकसद बचा है।तो विकासपुरुष-भक्तगण-जनता क्या कर सकते है। बस हमारी तरह चुप रह सकते हैं।
पकड़े भी गए-और फेमस भी..
शिवाजी भवन में इन दिनों यह कटाक्ष सुनाई दे रहा है। जो कि चुप द्वारा उजागर की गई कमीशन की खबर के बाद बोला जा रहा है। यह तंज कसने वाले खुद अपने एंग्रीमैन है। जिन्होंने संबंधित अधिकारी को बोला है। चोरी करी-पकड़े गए और फिर फेमस भी हो गए। एंग्रीमैन ने ऐसा बोला या नहीं?यह तो केवल वही जानते है। लेकिन अब उक्त अधिकारी को देखकर, बाकी मातहत तो यही दबी जुबान से बोल रहे है। अब मातहतों की जुबान तो हम पकड़ नही सकते है। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
मेरी पसंद
मरहूम शायर डॉ सागर आजमी का अशआर है।
जब हाथ में कलम था तो अल्फ़ाज़ ही ना थे
अब लफ़्ज़ मिल गए तो मेरे हाथ कट गए
यह शे'र इसलिए लिखने पर मजबूर हैं। क्योंकि पाठकगण को अब वह चटपटा मसाला पढ़ने को नही मिल रहा है। जिसकी उनको आदत हो गई है। कारण - चुप का यह लेखक एक्सीडेंट से पीड़ित है। कॉलर बोन टूटी हुई है।जिसके चलते गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध है। इसी कारण से कही पर भी जा नही सकते है और जब तक फील्ड में नही जाओ। अंदर की खबरें बाहर नहीं आती है। इसलिए आगामी 15 मई तक के लिए अपने सभी पाठकगण से माफी चाहते है, क्योंकि पाठकगण फोन करके शिकायत दर्ज करवा रहे है। हम उनकी भावना की कद्र करते है। चुप को इतना स्नेह-प्यार देने के लिए। बस ,जरा सा इंतज़ार और कर लीजिए? 8 फरवरी के बाद से कई पाठकगण मजा नहीं आ रहा की आपत्ति जता चुके है। तभी हम यह बताने पर मजबूर हुए है। तो अपनी दुआओं में याद रखें। बाकी हम अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहेंगे।