13 अप्रैल 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
मुझे थोड़ी पता था,वरना......
यह घटना हेलीपेड की है। मगर डोंगला की नहीं, बल्कि स्थायी हेलीपेड की। जो पुलिस लाइन पर बना है। उस दिन की। जब अपने विकासपुरुष वापस लौट रहे थे।बनारस के लिए निकलना था।उनका हेलीपेड पर इंतज़ार हो रहा था। अपनी बहन जी,दालवाले नेताजी और बाकी कमलप्रेमी प्रतीक्षा कर रहे थे। दोपहर का समय था। अचानक सायरन का शोर सुनाई दिया। जिसे सुनकर इंतजार करने वाले तपती धूप में शामियाना छोड़कर बाहर आकर खड़े हो गए। कुछ पल बाद एक गाड़ी आकर रुकी। जिसमें से उतरे अपने अल्फा जी। जिनको देखकर अपने दालवाले नेताजी चुप नहीं रह पाए। उन्होंने कह दिया। अरे आप-सायरन को सुनकर हमकों लगा कि नेता जी आ गए। अपने अल्फा जी चुप नहीं रहे। उन्होंने भी प्रतिउत्तर दिया। मुझे क्या पता था...वरना बंद करके आता। जिसे सुनकर अपने दालवाले नेताजी चुप हो गए। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
अकाउंट हैक-बैठक स्थगित-मैडम का सवाल....
अपनी चटक मैडम के साथ ज्यादती कर दी। एक अनजान हैकर ने। उसने उस वक्त अकाउंट पर धावा बोला। जब मैडम जी सप्ताह की बैठक ले रही थी। उसी समय सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लिया। जिसके बाद बैठक में मौजूद कई अधिकारियों को डिमांड के संदेश आने लगे।25 -हजारी। जिसे देखकर सब हैरत में पड़ गए। वजह साफ थी। मैडम जी सामने थी और डिमांड के msg आ रहे थे। किसी ने हिम्मत करके बताया। फिर तत्काल बैठक स्थगित हुई और तकनीकी अपराध रोकने वाली वर्दी को बुलाया गया।जिन्होंने संदेशों पर रोक लगाने की पुरजोर कोशिश की। मगर 24 घण्टे तक msg आते है। इधर सोमवार वाली बैठक अगले दिन हुई। जिसमें ग्रामीण विकास की आईएएस मैडम ने अपनी चटक मैडम जी से सवाल कर लिया। आप भी ग्रामीण सेवा कर चुकी हैं। आप ही बता दे कि यह काम कैसे होगा?आपने भी किया होगा। उसी तरीके से इस काम को कर लेंगे। जिसके बाद अपनी मैडम जी चुप हो गई।तो फिर हमारी तो आदत ही है चुप रहना।
हवा जी की कुर्सियां हवा में...
शिवाजी भवन के गलियारों में इन दिनों ऊपर लिखी बात सुनाई दे रही है। जिसमें निशाने पर अपने हवाबाज जी है।मामला स्टोर से जुड़ा है। जहां से सप्लाई होती है। कुर्सी सप्लाई से जुड़ी एक निविदा निकली थी। जिसे जोड़तोड़ करके एक ऐसे शख्स के नाम पर लिया गया। जो दिखावे के लिए था।पर्दे के पीछे हवाबाज जी थे। जिन्होंने अपने सुपुत्र के लिए कवायद की थी। मगर मुसीबत तब हो गई। जब अपने एंग्रीमैन ने स्टोर के उस बाबू को हटा दिया। जो कि अपने अश्वत्थामा के चेले है। इनका नाम राजस्थान के शहर अजमेर में री जोड़ने से क्लियर हो जाता है।इनके हटने से सप्लाई और भुगतान में रुकावट खड़ी हो गई है।तभी तो हवा जी की कुर्सियां अब हवा में लटकी नज़र आ रही है।चर्चा तो यही है। बाकी अंदर का सच अपने एंग्रीमैन-हवाबाज जी और हटाए गए बाबू को पता है और हमकों आदत के अनुसार चुप रहना है।
भाग्यशाली जिज्जी...
संकुल के गलियारों में गुरुवार की बैठक में अपनी जिज्जी नजर नहीं आई। जबकि पूरा राजस्व अमला मौजूद था। सभी ने शालीनता के शब्दबाण भी सुनें। केवल अपनी जिज्जी को छोड़कर। तो सुगबुगाहट शुरू हो गई। दबी जुबान से । जिज्जी चतुर है। उनको अंदाज़ा था।आज पक्का फटकार मिलेगी।इसलिए कोई बहाना बनाकर अवकाश पर चली गई। अब संकुल के गलियारों में चर्चा हो तो चुप तक भी पहुँच ही जाती है। ऐसा ही हुआ। तो पता किया। जिज्जी कहाँ थी। नतीजा -माननीय न्याय देवता के समक्ष उपस्थित थी।देवीआहिल्या नगरी में। मतलब -जिज्जी भाग्यशाली थी। शब्दबाण से बच गई। जिसकों लेकर उनके साथीगण उनको अब*भाग्यशाली* जिज्जी की उपाधि से नवाज रहे है।जिसमें हम क्या कर सकते है।बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।।
होम मिनिस्टर अतिथि
हेडिंग पढ़कर गलत अंदाजा नहीं लगाए। हमारा इशारा शासन वाले गृह मंत्री की तरफ बिलकुल नहीं है। हम तो उस होम मिनिस्टर की बात कर रहे है। जो सभी के घर में होती हैं। जिनकों गृह लक्ष्मी भी कहते है। इनका सरकारी कामों में अतिथि बनना बहुत रेयर देखने को मिलता है। अपने उम्मीद जी,उज्ज्वल जी,कप्तान जी ने भी पद पर रहते कभी ऐसा नहीं किया।मगर अपने निखट्टू जी ने यह कर दिखाया। होम मिनिस्टर से दीप प्रज्वलन करवा दिया। जबकि मुख्य अतिथि अपनी बहन जी थी। ऎसा हम नहीं कह रहे है, बल्कि स्मार्ट भवन के गलियारों में काम करने वाली मातृ शक्ति का कहना है।लेकिन हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
मतदाता होते तो दौड़ कर जाते..
दाल बिस्किट वाली तहसील में इन दिनों यह कटाक्ष किया जा रहा है।निशाने पर है क्षेत्र के माननीय। जो घटना स्थल पर अगले दिन पहुँचे थे। कारण -दीपक-कमल कार्यक्रम में बिजी थे। इसलिए उस जगह नहीं गए। जहाँ उज्ज्वल जी ,कप्तान जी सहित पूरी टीम लगी थी। मासूम बच्चे को बोरिंग होल से निकालने के लिए। खुद अपने विकासपुरुष लगातार अपडेट ले रहे थे। मगर क्षेत्र के माननीय गायब थे। जबकि दीपक-कमल कार्यक्रम भी खत्म हो गया था। उसके बाद माननीय अज्ञातवास चले गए। ऐसा तहसील के कमलप्रेमी बोल रहे है और यह कटाक्ष कर रहे है। मतदाता होते तो तत्काल जाते। अब हम अपने कमलप्रेमियों की जुबान तो पकड़ नही सकते हैं। इसलिए हम खुद ही चुप हो जाते हैं।
अजीब नियम .....
आज के माहौल में अगर कोई आम इंसान यह सोचकर आए कि वह आसानी से भस्म आरती अनुमति बनवा लेगा? तो यह उसकी मूर्खता है। उसे या तो पॉवर का उपयोग करना होगा या फिर जेब ढीली। आमजन तो बस जेब ढीली कर सकता है। क्योंकि वह पॉवर-हीन होता है। इसमे भी अब एक नया नियम लागू हुआ है। करने वाले अपने फटाफट जी है। जिनके पास दोपहर में मंदिर से बनने वाली अनुमति की सूची जाती है। जिसे वह देखते है।फिर उस सूची पर उनकी कलम चलती है। कुछ नाम काट दिए जाते है।जिसके बाद अनुमति जारी होती है। जबकि पॉवर वालो को बगैर अनुमति के ही प्रवेश मिल जाता है। जैसे शनिवार सुबह की आरती में एक फ़िल्म अभिनेत्री सहित 5 को प्रवेश दिया गया। खुद एक सहायक प्रशासक लेकर गए थे। जबकि रविवार सुबह की आरती में 150 लोगो को अनुमति बगैर इजाजत दी गई। ऐसी मंदिर के गलियारों में चर्चा है। चुप के सूत्र भी पुष्टि कर रहे है। मगर हम कर कुछ नहीं सकते है।क्योंकि हम भी आम इंसान है।इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
तीन दर्जन पेज की रिपोर्ट...
तो आखिरकार वह लिफ़ाफ़ा खुल गया है। जिससे अपने अश्वत्थामा के भविष्य का फैसला होना था। जांच समिति ने उनको दोषी पाया है। आरोप कोई ज्यादा गम्भीर नहीं है। बस,अपनी मातहत साथी का हाथ पकड़ने,घर पर मीटिंग में बुलाने,प्रपोज करने और missing-u का मैसेज डालने का आरोप साबित हुआ है।ऐसी चर्चा राजधानी के उस विभाग में है। जिसको यह जांच प्रतिवेदन मिला है।उस विभाग के हमारे सूत्र ने स्वीकार किया है। रिपोर्ट मिल गई है।मगर इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई होगी? इसका अंदाजा केवल इस तथ्य से लगाया जा सकता है। 1 साल पहले वर्दी ने प्रकरण कायम किया था। किन्तु कोई सख्त कदम अपनी वर्दी उठा नहीं पाई है। उल्टा सलाहकार पद के लिए आरोपी ने आवेदन कर दिया है। जबकि आमजनों को यही पता है। कानून के हाथ लंबे होते है। अब देखना यह है कि कानून के लंबे हाथों से अपने अश्वत्थामा कैसे बचते हैं?सलाहकार बनते है या नहीं?तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
हीरो का आगमन...
हीरो केवल रील लाइफ वाले पर्दे पर ही नहीं होते हैं। कुछ रियल लाइफ में भी होते है। जो सिंहस्थ जैसे आयोजन सफलता से करवा देते है। 2004 के सिंहस्थ के हीरो का एक बार फिर आगमन हुआ है।वर्दीधारी यह हीरो इस दफ़ा संभाग -प्रभारी बनकर आए है। जो अपने अनुभव से वर्दी को हीरो बनने का प्रशिक्षण देंगे। जिसके लिए उनकों अग्रिम शुभकामनाएं। लेकिन अंदरखाने की एक खबर यह भी है। 2004 के हीरो इस जुगाड़ में भी हैं। प्रदेश की वर्दी के टॉप बॉस की कुर्सी पर अगला नम्बर उनका हो ! फैसला महाकाल और विकासपुरुष करेंगे। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
विकासपुरुष का विजन....
अपने विकासपुरुष का विजन समझने के कमलप्रेमियों को सात जन्म भी कम पड़ सकते है। उनकी दूरगामी सोच अकल्पनीय है। जैसे 2028 के चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय होना। तभी तो उन्होंने पिछले सप्ताह 4 कमंडल के पदाधिकारियों को राजधानी बुला लिया। उनके लिए समय निकाला। बैठक ली। विषय पन्ना प्रमुख था।सभी को समझाया। आज से लेकर 2028 तक कैसे काम करना है। तभी तो बैठक से लौटे कमलप्रेमी उनके विजन का गुणगान कर रहे है।कमलप्रेमियों की बात में दम है, मगर आदत के अनुसार चुप रहना हमारा धर्म है।
शालीनता के शब्दबाण..
सबसे कठोर प्रहार इंसान शब्दबाण से करता है। गोली का घाव भर जाता है..शब्दवाण का नही। इस पर पूरी तरह से अमल करते गुरुवार को उज्जवल जी नजर आए। मासिक राजस्व समीक्षा की बैठक में।उनके शालीन शब्दबाण ने किसी को नहीं छोड़ा।sdm -तहसीलदार सभी को शालीनता के शब्दो से फटकार लगाई। तराना तहसीलदार और कोठीमहल sdm को छोड़कर।मगर किसी पर भी ऐसा शब्दबाण नही चलाया।जिससे किसी को ऐसा घाव लगे कि जो कभी न भरे उन्होंने मातहतों की पीड़ा को भी समझा। वर्कलोड को भी महसूस किया। इस लिए सभी को एक समान सलाह दी। पेंडिंग केस की समीक्षा भी नियमित करें। बैठक के एक दिन पहले तैयारी ना करें। लाख टके की सलाह यह थी। बाबुओं के भरोसे ना रहे। उज्ज्वल जी के इन शालीनता भरे शब्दबाण सुनकर हमकों किसी शायर का शेर याद आ गया। जिसे लिखकर हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कुदरत को ना पसंद है सख्ती बयान में
पैदा हुई ना इसलिए हड्डी जुबान में।
पंचक्रोशी मार्ग पर डम्फर
यह तस्वीर पंचक्रोशी मार्ग की है। जो कि शनिवार की है। इन दिनों हजारों श्रद्धालु यात्रा पर है। जो कि सड़क के किनारे भी आराम करते है।ऐसे में डंफर के आवागमन पर रोक लगनी चाहिए। डंफर एक पँजाप्रेमी नेताजी की है। जिनकी खनिज की खदान पिंगलेश्वर मंदिर से आगे एक ग्राम में है। ताज्जुब इस बात का है। वर्दी की मौजूदगी के बाद भी पँजाप्रेमी नेताजी बेरोकटोक डंफर दौड़ा रहे है। अगर कोई हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? यह वर्दी को सोचना होगा, क्योंकि हमकों तो चुप ही रहना है।
मन डोला रे-डोला रे...
यह गीत किस फ़िल्म का है। हमकों पता नहीं है। मगर इन दिनों यह संकुल-विकास और शिवाजी भवन के गलियारों में सुनाई दे रहा है। निशाने पर अपने इशारा जी है। जो बैठक लेने आए थे। सिंहस्थ में आमजन के लिए परिवहन सुविधा की। जिसके लिए देश की राजधानी से आई कम्पनी ने प्रजेंटेशन दिया। इस कंपनी का सीधा संबंध अपने इशारा जी से है। तभी तो तीनों गलियारों में मन डोला रे-डोला रे-गीत सुनाई दे रहा है। इस बैठक में इशारा जी सहित उम्मीद जी,अल्फा जी,उज्जवल जी,डेल्टा जी,हिटलर जी,एंग्रीमैन औऱ इन्दौरीलाल आदि मौजूद थे। अब सवाल यह है कि यह गीत क्यों सुनाई दे रहा है।तो संकेत उस मॉल की तरफ है। जिसको 5 खोखे जुर्माना का नोटिस थमाया गया है। ऐसे में राजधानी की कंपनी को लेकर आना मनडोला गीत के माध्यम से अपने इशारा जी की मन की बात को उजागर कर रही है। दबी जुबान से तो यही चर्चा है। देखना यह है कि उनके मन की मनोकामना पूरी होती है या नहीं?तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मेरी पसंद
उसने अफ़सर बन जाने पर माँ को अनपढ़ बोला है
माँ ने गहने गिरवी रख कर जिसकों पढ़ने भेजा था