09 मार्च 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
कुछ नहीं बोलूंगा...
शीर्षक पढ़कर यह कत्तई अंदाजा नहीं लगाए। हम अपने चुप रहने की इशारा कर रहे है। हमारा इशारा तो अपने कमलप्रेमियो के बीच चल रही चर्चा की तरफ है। जो यह कह रहे है। अपने हाइनेस ने अब चुप रहने का प्रण लिया है। कारण -गुरुवार को उपचुनाव कराने की धमकी देना और फिर उसी दिन सर्किट हाउस पर फिर उनका आक्रोश जाहिर करना।वह भी दालवाले नेताजी के सामने। जो कि विकासपुरुष के करीबी है। जिन्होंने ऊपर तक हाइनेस की नाराजगी पहुँचा दी। नतीजा अगले दिन राजधानी में तलब कर गया। संगठन ने अपने तरीके फटकार लगाई। जिसके बाद हाइनेस ने जो बयान दिया। जो ऊपर लिखा है।
जिसके बाद अपने कमलप्रेमी मरहूम शायर ताहिर फ़राज का अशआर गुनगुना रहे है।
जब भी बोलना वक्त पर बोलना
मुद्दतो सोचना मुख़्तसर बोलना।
कमलप्रेमियो की बात में दम है और वक्त की नजाकत के हिसाब से सही है। शायद तभी आज विकासपुरुष की गेर में वह नजर नहीं आए। जबकि वह जब -जब विकासपुरुष आए, नजर आते थे। ऐसा हम नहीं कमलप्रेमी बोल रहे है। जिनकी जुबान तो हम पकड़ नहीं सकते है। तो अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मंगलकामना बनाम शुभकामना...
अपने विकासपुरुष की भाषा पर गजब पकड़ है। अगर कोई उनको शब्दो की पहेली में उलझाकर भरमाने की कोशिश करे। तो वह तत्काल ही उसको सही कर देते है।जैसे शनिवार की शाम को हुआ। हेलीपैड पर उड़नखटोला उतरा। हमेशा की तरह अपने अल्फा जी,डेल्टा जी,उज्ज्वल जी,कप्तान जी ने गुलदस्ते देकर स्वागत किया। इसी दौरान किसी आलाधिकारी ने उनको मंगलकामना दी। जिसे सुनकर अपने विकासपुरुष ने तत्काल पलट कर कहा। शुभकामनाएं भी दे सकते हो।विकासपुरुष की हाजिरजवाबी से मंगलकामना बोलने वाले अधिकारी थोड़ा झेंप गए। मगर विकासपुरुष ने जब जोरदार ठहाका लगाया। जिसके बाद सभी ने इसमे साथ दिया। लेकिन मंगलकामना बोलने वाले को सबक दे दिया। उम्मीद है कि आगे से वह अपने विकासपुरुष कुछ भी कहने से पहले अल्फ़ाज़ तोल कर ही बोलेंगे। बाकी हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
उज्ज्वल जी का व्यंग्य
अपने उज्ज्वल जी की मोहक मुस्कान से तो सभी परिचित है।मगर उनकी व्यंग्यात्मक शैली का कोई तोड़ नही है। इतने प्यार से चुटकी लेते है।सामने वाला मुस्कराने के अलावा कुछ भी नही कर पाता है। सोमवार की शाम यही हुआ। राजधानी से acs साहब आए थे। दिन भर घूमे। वाहन के सारथी थे अपने इन्दौरीलाल। 36 दुकानों का दौरा करने पहुँचे। जहाँ पर इंग्लिश गीत बज रहे थे। acs साहब ने सवाल कर लिया।अंग्रेजी गीत क्यों? जवाब उज्ज्वल जी ने दिया। निशाना साधा इन्दौरीलाल पर। यही बजवाते है इंग्लिश गाने। जिसे सुनकर acs साहब मुस्कुरा दिए और इन्दौरीलाल जी झेंप गए।रही उज्ज्वल जी की बात। तो उन्होंने यह बात मुस्कुराते हुए ही बोली थी।जिसमे व्यंग्य भी था। अब इन्दौरीलाल जी इस पर क्या सफाई देते। तो वह चुप रहे, तो हम भी चुप हो जाते हैं
किसकी बुद्धि है यह....
राजधानी से पधारे acs साहब उस वक्त दंग रह गए। जब वह कोयला फाटक पर निरीक्षण कर रहे थे।तब उन्होंने जो देखा। उस पर नाराजगी जाहिर करी। साहब ने इंजीनियरिंग का वह कमाल देखा। जिसकी उनकों कतई उम्मीद नहीं थी। पानी और सीवरेज का लाइन एक साथ। उस तुर्रा यह कि पानी की लाइन नीचे और उसके ऊपर सीवर लाइन। जबकि ऐसा होना नही चाहिए। या तो दोनो लाइनों में अंतर होना चाहिए,या फिर पानी की लाइन ऊपर। वजह सीवर लाइन कभी भी ब्लॉक हो सकती है ,फट भी सकती है।जिसके पानी मे मिलने की संभावना निकट भविष्य में हो सकती है। भागीरथ पूरा कांड इसका प्रमाण है। साहब ने सवाल खड़े कर दिए।ड्राईंग भी देखी। लाइन करीब 300 मीटर डाली जा चुकी है। साहब की नाराजगी देख एंग्रीमैन ने मोर्चा संभाला। उन्होंने आश्वासन दिया। दोनो लाइन अलग अलग की जाएंगी। मगर लाख टके का सवाल है। आखिर यह बुद्धि किसने लगाई? इस पर शिवाजी भवन मौन है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
उप चुनाव करवा लो...
गुरुवार का दिन पिपलीनाका रहवासियो के दर्द -डर-पीडा का रहा। बकौल मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र का एक अशआर है। जिसमें बस्तियां जलाने का जिक्र है। उसमें थोड़ा फेरबदल करते हुए एक दुःखी रहवासी ने हमकों लिखकर भेजा।
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नही खाते बुलडोजर चलाने में।
इस डर से पीड़ितों ने अपने क्षेत्र के माननीय हाइनेस का घेराव कर दिया। जमकर नारेबाजी ओर हंगामा किया। जनता का हक है। जिसको जिताया,उसको ही पकड़ेंगे। हाइनेस ने प्रशासन पर आरोप लगा दिया। विकासपुरुष को गलत जानकारी देकर भ्रमित करने का। इसके साथ ही यह भी बोल गए। उपचुनाव करवा लो । इसका क्या अर्थ निकाला जाए। क्या अपने हाइनेस ने इस्तीफा देने का मन बना लिया है। अगर रहवासियों की मांग नही मानी गई। तो वह इस्तीफा दे देंगे? क्या यह संभव है? या फिर उन्होंने विकासपुरुष को चुनौती दी है! ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि हाइनेस के करीबियों का कहना है। फैसला वक्त करेगा। तब तक हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
मुझे कुछ पता नहीं चलता....
अपने हाइनेस बहुत ज्यादा ही असहाय महसूस करने लगे हैं।तभी तो प्रशासन की आड़ लेकर कही और निशाना साध रहे है। ठीक महाभारत के युद्ध की तरह।जिसमें भीष्म पितामह को मारने के लिए किन्नर की आड़ ली गई थी। गुरुवार की दोपहर सर्किट हाउस में ऐसा ही हुआ। उस वक्त जब पिपलीनाका रहवासियों के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत चल रही थी। दालवाले नेताजी भी मौजूद थे। बातचीत खत्म हो गई थी। उसके बाद हाइनेस फट पड़े।बोलने लगे। मेरी विधानसभा में एलिवेटेड ब्रिज ,सहित कई निर्माण कार्य स्वीकृत हो जाते है।मगर मुझे कोई खबर ही नहीं होती है।उनका गुस्सा प्रशासन पर था,मगर निशाना कही और था। जो सबको समझ आ रहा था। उज्जवल जी,इन्दौरीलाल, दालवाले नेताजी सब समझ रहे थे। इसलिए सब चुप रहे। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
C N D पर एक्शन
पिछले सप्ताह चुप ने एक मुद्दा उठाया था। cnd को लेकर। जिसमें चल रहे जेब गर्म करने का खुलासा किया था। इस पर एक्शन हुआ है। अपने एंग्रीमैन ने अब निर्देश दे दिए है। रीगल टाकीज का मटेरियल हो या किसी अन्य जगह का। सब नरेश जीनिग में एकत्रित होगा। संबंधित उपयंत्री की जिम्मेदारी तय कर दी है। मटेरियल सही सलामत पहुँचे। मटेरियल की समय समय पर नपती भी होगी। खुद एंग्रीमैन की मौजूदगी में होगी। इसमे अगर गड़बड़ी निकली तो उस उपयंत्री की खैर नहीं होगी।जिसके लिए एंग्रीमैन को हम साधुवाद देते हुए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
जादूगर उम्मीद जी
मैं कैसे गुफ्तगू से गैर को अपना बनाता हूँ।
यहाँ आओ,इधर बैठो,तुम्हें जादू सिखाता हूँ
यह अशआर हमनें अपने उम्मीद जी की कार्यशैली ओर बातचीत के लहजे को लेकर चुप में लिखा था।तब जब वह जिले के मुखिया थे।अब संभाग के बॉस है। मगर अब भी कुछ बदला नहीं है। जैसे कि इंसान की फितरत होती है। पद बढ़ता है तो अहम भी आ जाता है। मगर उम्मीद जी आज भी जादूगर है। तभी तो जब राजधानी से बड़े साहब ने ई-ऑफिस को लेकर नाराजगी जताई। संभाग को फिसड्डी बताया। जिसे चुप ने उठाया। तो जादूगर ने जादू दिखाया।24 को प्रशिक्षण दिलाया। 25 से आदेश लागू। अब ई -ऑफिस से ही फाइल स्वीकार ओर स्वीकृत होगी।24घण्टे के अंदर अमल ।वह भी शासकीय कार्यालयों में। ऐसा काम तो जादूगर ही कर सकता है। अब देखना यह है कि अगली वीसी में उनका यह जादू किस नम्बर पर आता है। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
दुश्मनी लाख सही...
किसी शायर ने लिखा था। क्या लिखा था। वह आप पढ़ ही लेंगे।
मगर हम उस अशआर में हाथ मिलाने की जगह ताली शब्द का उपयोग कर रहे हैं।
दुश्मनी लाख सही रिश्ता न खत्म कीजिए।
दिल मिले या न मिले ताली बजाते रहिए।
अब सीधे मुद्दे पर आते है। विकासपुरुष ने एस्टोटर्फ स्टेडियम का शिलान्यास किया। मंच पर कई माननीय मौजूद थे। अपने वजनदार जी भी थे। विकासपुरुष का उदबोधन चल रहा था। उन्होंने इस सौगात को लेकर आग्रह किया। जोरदार ताली बजाकर इसे स्वीकार करें। मंच ओर सामने मौजूद सभी ने उनका कहना माना। जोरदार ताली बजाकर समर्थन दिया। मगर अपने वजनदार जी ने अपने हाथों को बांधकर रखा। तभी तो अपने कमलप्रेमी ऊपर लिखा शे'र सुना रहे है। जो कि वक्त की नजाकत के हिसाब से सटीक भी है। अब उज्जैन को मिली सौगात में भी दुश्मनी दिखाना। क्या जायज है। फैसला हमारे पाठकगण खुद कर ले। क्योकि हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
प्रोटोकॉल से ज्यादा जरूरी डांस
जब विकासपुरुष खुद मंच पर मौजूद हो। तब प्रोटोकॉल का पालन करना हर अधिकारी का फर्ज बनता है। मगर जब रंग की बौछार हो-दिल मे उमंग हो-और उस पर पेट के अंदर का रस उछाल मारे। तब प्रोटोकॉल अपने आप भूलने में आ जाता। जैसे अपने निखट्टू जी को आ गया। तभी तो मंच पर अपने पसंदीदा गीत पर ठुमके लगाते नजर आए। जो उन्हें पहचानते हैं। वह उनका यह रंग देखकर दंग रह गए। वजह प्रोटोकॉल था। लेकिन निखट्टू जी को इसकी कोई परवाह नहीं थी। उन पर तो ग़ैर का रंग चढ़ा था। जिसके लिए कोई कुछ नहीं कर सकता था। इसीलिए तो उनकी मस्ती देखकर सब चुप रहे। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
मेरी पसंद...
आज उज्जैन के उभरते कवि राहुल शर्मा से इत्तफाकन मुलाकात हुई।उन्होनें मुझे लिफ्ट दी। ऑफिस तक छोड़ा। तब उन्होंने कुछ मुक्तक सुनाकर मुझे खूब हंसाया। मुझे तो यह पंसद आए। शायद आपको भी पसंद आए। तो पढ़कर आनंद लीजिए। अगर दिल और दिमाग को गुदगुदाए तो उनको इस नंबर 91791-12130 पर बधाई जरूर दें। बाकी हम चुप ही रहेंगे,आप मुक्तक पढ़कर मजा लीजिए।
जीवन में अपनी आजादी को यूं घटा लिया ।
सिंगल का टैग माथे पे था वो हटा लिया।
दर्शन कराऊंगा में तुझको चांदी द्वार से।
ये बोल बोल कर उसे मैने पटा लिया।।
भाई साहब का मंदिर पे जाके कॉल ना लगा।
चौखट का छोड़ो बैरीकेट का प्वाइंट ना लगा।
उस दिन से ही मुझे वो छोड़कर चली गई
Birth day पे जबसे उसका प्रोटोकॉल ना लगा।।
माथे पे महाकाल का आशीष तान लो।
मै सत्य कह रहा हूं मेरी बात मान लो।
उज्जैन वाले सीधे सादे इतने में खुश है।
बस दस बांध दीजिए और दस की छान लो।
महंगा है प्यार ये हवाई अड्डे की तरह।
हर दिन रहेगा तेरा हैप्पी बर्थडे की तरह ।
चाहते हुए भी छोड़ पाऊंगा ना मैं तुझे।
दिल में रहेगी टाटा वाले गड्ढे की तरह ।
जीवन में ही तू एकमात्र है मेरा मिशन।
राधा तुझे बनाऊं बनूं मैं तेरा किशन।
लेकिन ये तेरे बाप भाई बीच में खड़े।
लड़की है तू या भस्म आरती की परमिशन।