16 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
बधाई-बधाई-बधाई ...
हमारे पाठकों को याद होगा। हमने इसी कालम में लिखा था। 2 आईएएस अधिकारी तीसरी दफा साथ जन्मों के बंधन में बंधने वाले है। दोनों आईएएस बाबा की नगरी में पदस्थ रह चुके है। इनमें से एक आईएएस पिछले दिनों सात जन्मों के बंधन में बंध गये। जिसके लिए हमारी तरफ से बधाई। ताज्जुब की बात यह है। आईएएस महोदय ने इस खुशी के अवसर पर अपने भरोसेमंद लिपिक को तो आमंत्रित किया। जो कि बाबा की नगरी में उनके खास सेवक रहे है। किन्तु अपने ही जिले के कप्तान को आमंत्रित नहीं किया। ऐसी चर्चा उस जिले में सुनाई दे रही है। जो कि राजधानी से लगा है। कप्तान को नहीं बुलाने के पीछे क्या कारण है। इसका किसी को पता नहीं है। तो सब चुप है। इसलिए हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
घर पहुंच सेवा ...
अपने विकासपुरूष ने सोमरस बिक्री पर शहरी क्षेत्र के अंदर ताले लगवा दिये। बढिया काम किया। किन्तु जैसा की होता है। पीने वाले रास्ता खोज ही लेते है। मुनाफा कमाने वाले भी कोई ना कोई रास्ता निकाल लेते है। ऐसा हम नहीं, बल्कि अपनी वर्दी ही दबी जुबान से बोल रही है। जो बार बंद हो गये है। उनमें से कुछ चुपचाप चालू हो गये है। शर्त यही है कि पीने वाले को अपना मोबाइल काउंटर पर जमा करना होता है। जो पीने के शौकीन है, वह मोबाइल से दूर होने की तपस्या तो कर ही लेता है। इसके अलावा कुछ फोन नंबर है। जिन पर कॉल करके घर पहुंच सेवा उपलब्ध है। वर्दी तो यही बोल रही है। सच भी बोल रही है। मगर हमको चुप ही रहना है।
बिल्ली की परीक्षा आसान ...
शीर्षक पढ़कर हमारे पाठकों के ध्यान में शायद कहावत याद आये। दूध की रखवाली बिल्ली से। मगर हमारा इशारा उस बिल्ली की तरफ नहीं है। दरअसल हम CAT (द कॉमन एडमिशन टेस्ट) की बात कर रहे है। आईआईएम द्वारा यह परीक्षा आयोजित की जाती है। जिनका रूझान गणित व तर्क की तरफ हो। उनके लिए यह परीक्षा बांए हाथ का खेल है। इसमें अपनी चटक मैडम जी अव्वल है। तभी तो वह बोल उठी। एक बैठक में। उस वक्त, जब वह जल गंगा मिशन की रैटिंग के आंकड़ों मं उलझी हुई थी। आंकड़ों की माथापच्ची और रैटिंग के फार्मूले से मैडम जी चकरघिन्नी हो रही है। नतीजा उन्होंने बोल दिया। इससे ज्यादा तो CAT की परीक्षा आसान थी। जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। मगर सभी चुप रहे। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
काम करो- बहाने मत बनाओं ...
अपने उज्जवल जी के आगमन से अधिकारी वर्ग में खुशी की लहर है। पहली खुशी तो इसी बात की है। लंबी-लंबी उबाऊ बैठकों का दौर खत्म हो गया है। अब 60 से 120 मिनिट में सब निपट जाता है। दूसरी खुशी बैठक में उज्जवल जी फालतू की बकवास नहीं करते है। मतलब सीधी बात- नो बकवास। तीसरी खुशी ... कोई डाट-फटकार नहीं। सधे हुए लहजे में अपनी बात कहना उनकी आदत है। जैसे अपने चुगलखोर जी को कहा। काम करो... बहाने मत बनाओं। चुगलखोर जी याद तो होंगे। आजकल महिदपुर में पदस्थ है। महाज्ञानी है। वेद-उपनिषद-गीता-रामायण-कुरान के उदाहरण देकर अपनी बात रखते है। दूसरों को ... मोह माया में क्या रखा है। ज्ञान देते है। मगर खुद हर काम के लिए फिक्स रेट करके रखते है। हरे रंग के कागज मिलने पर ही काम करते है। यही चुगलखोर जी, उज्जवल जी के सवाल पर अपना ज्ञान बघारने लगे थे। किन्तु उज्जवल जी अपने चुगलखोर जी से ज्यादा ज्ञानी निकले। सीधे कह दिया। काम करो... बहाने मत सुनाओं। जिसे सुनकर चुगलखोर जी चुप हो गये। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
मैडम की डिमांड ....
5 साल में एक दफा करने वाले विभाग का मामला है। जो वोटिंग करवाता है। इस विभाग में ठेकेेदार अभी-अभी बदला है। जबकि 15 से 20 कर्मचारी पिछले कई सालों से काम कर रहे है। अब इन कर्मचारियों को हटाने का फरमान हो गया। तो बेचारे ठेकेदार से मिले। अपना रोना रोया। मजबूरी बताई। तो नई जानकारी सामने आई। कर्मचारियों को कहा गया। अगर काम करना है तो प्रति व्यक्ति 20 हजारी चुपचाप देने होंगे। यह मैडम की डिमांड है। तभी काम कर पाओंगे। कर्मचारियों ने डिमांड सुनकर रणनीति बनाई। सभी एकजुट होकर मिलने गये। अपने फटाफट जी से। मकसद था। अपनी प्रॉब्लम बताना। किन्तु कर्मचारियों को मिलने नहीं दिया गया। टरका दिया गया। ऐसी चर्चा संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है। लेकिन वह मैडम कौन है। जिसने यह डिमांड की है। इसको लेकर सब चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
3 हजारी स्टेटस ...
डिजीटल युग है। 1 से 5 सेकेंड में राशि किसी को भी भेजी जा सकती है। भेजने के बाद स्क्रीन शॉट आता है। उसका ध्यान रखना जरूरी है। वरना राशि भेजने का शॉट, स्टेटस पर लग जाता है। जिससे भद पिट सकती है। जैसे अपनी पंजाप्रेमी बुआजी के साथ हुआ। वह भी उस दिन जब पंजाप्रेमी पर्यवेक्षक आई थी। एक ब्लॉक में बैठक लेने जा रही थी। उसी वक्त अपनी बुआजी ने अपने एक खास बंदे को यह राशि डाली थी। जिसको लेकर पंजाप्रेमी बोल रहे है। यह भुगतान मीटिंग में भीड जुटाने के लिए दिया गया था। ताज्जुब की बात यह है। बुआजी को पता ही नहीं चला। भुगतान का शॉट उनका स्टेटस बन गया है। बस फिर क्या था। पंजाप्रेमियों ने तत्काल स्टेटस को सेव कर लिया। शॉट ले लिए। फिर किसी ने फोन किया। तब जाकर अपनी बुआजी ने स्टेटस हटाया। जिसके बाद यह पूरी कहानी पंजाप्रेमी चटकारे लेकर सुना रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
चरणलाल जी भारी ...
पंजाप्रेमियों में संगठन चुनाव को लेकर रायशुमारी चल रही है। शहरी क्षेत्र में हो गई है। ग्रामीण में शुरू हुई है। शहरी क्षेत्र के पंजाप्रेमियों में चर्चा है। चरणलाल जी अपने बिरयानी नेताजी पर भारी पड गये है। बिरयानी नेताजी ने जिन-जिन पंजाप्रेमियेां में हवा भरी थी। दावेदारी के लिए। फोन लगवाये थे। पंजाप्रेमियों को। इनका नाम लेना है। उन्होंने मौका देखकर पाला बदल लिया। क्योंकि चरणलाल जी ने बसवाले नेताजी का नाम आगे बढाने पर जोर दिया। कुछ समझौते भी हुए। नतीजा बाजी चरणलाल जी के हाथ में रही। यह तय माना जा रहा है। वर्तमान मुखिया, बसवाले नेताजी ही, भविष्य के मुखिया होंगे। तभी तो पंजाप्रेमी, बिरयानी नेताजी पर चरणलाल जी भारी का राग अलाप रहे है। पंजाप्रेमियों का राग भारी सही साबित होगा या नहीं? फैसला वक्त करेंगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
हिम्मत को सेल्यूट ...
सेल्यूट-सेल्यूट-सेल्यूट। अपने फटाफट जी को। जिन्होंने हिम्मत दिखाई। नोटिस जारी करने की। वह भी एक ऐसे अखबार समूह को। जो कि सबसे बडा समूह है। मई माह के दूसरे सप्ताह में नोटिस जारी किया गया था। जिसमें एक खबर का हवाला देते हुए आपत्ति जताई गई। खबर को बिना वैध आधार के प्रकाशित करने का हवाला देकर अनुरोध किया गया। भ्रामक समाचार के खिलाफ कार्रवाई करके अवगत कराये। नोटिस सीधे राजधानी में बैठे समूह के मुख्य कर्ता-धर्ता को दिया गया है। जिसकी एक कॉपी शहर के कर्ता-धर्ता को भी दी गई है। मंदिर के गलियारों में तो यही चर्चा है। तभी तो सभी मातहत अपने फटाफट जी की हिम्मत को सेल्यूट कर रहे है। देखना यह है कि समूह की तरफ से क्या जवाब आता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
खुशी से पागल ...
आमतौर पर विकासपुरूष के गृहनगर में पदस्थ अधिकारी खुद को खुशकिस्मत मानते है। उनकी यही इच्छा होती है। यही पर पदस्थापना रहे। मगर एक जनपद सीईओ इसके विपरीत सोचते है। तभी तो जैसे ही उनका तबादला आदेश आया। वह खुशी में पागल हो गये। अपनी खुशी जाहिर करने में पीछे भी नहीं रहे। उन्होंने अपनी खुशी बैठक में जाहिर की। जिनका तबादला हुआ है। वह दाल-बिस्किट वाली तहसील में पदस्थ थे। उनके सभी साथीगण, उनकी इस खुशी को देखकर यही बोल रहे है। खुशी में पागल हो गये है। साथियों की बात में दम है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
करंट जाने से पहले ...
एक रिटार्यड आईएएस है। साप्ताहिक कॉलम रविवारीय गपशप में मजेदार किस्से/ अनुभव लिखते है। इस रविवार के अंक में उन्होंने लिखा। रिटार्यड आईएएस ऐसा होता है। जैसे बिना बिजली के तार वाला करंट। कुछ ऐसा ही अगले महीने के अंतिम दिन होने वाला है। जब तीसरे माले के मुखिया अफसर नहीं रहेंगे। मतलब बिना करंट वाला तार हो जायेंगे। तभी तो उन्होंने करंट जाने से पहले अपनी जुगाड शुरू कर दी है। जैसे पिछले दिनों विकासपुरूष आये थे। तो पूरे दिन उनके काफिले में शामिल रहे। मात्र 30 मिनिट को गायब हुए थे। उनकी मंशा रिटायरमेंट के बाद इसी नगरी में बसने की है। मकान भी खोज रहे है। अपने विकासपुरूष से जुगाड में है। धर्मस्व में कोई पद मिल जाये। अब यह बात और है कि वह पद पर रहते हुए 15 खोखा राशि धर्मस्व की लैप्स कर चुके है। देखना यह है कि करंट जाने से पहले उनको सफलता मिलती है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
वाह नेताजी वाह ...
घटना शिप्रा तीर्थ परिक्रमा की है। जहां मंच पर अपने स्मार्ट पंडित का सम्मान हुआ। हालांकि उज्जवल जी और कप्तान का भी सम्मान हुआ। लेकिन विकासपुरूष के करीबियों की टीम ने जो प्यार अपने स्मार्ट पंडित पर लुटाया। वह देखने लायक था। दिन में विकासपुरूष ने गेस्टहाऊस में शॉल-श्रीफल से सम्मान किया था। शाम को मंच पर हुआ। जिसे देखकर एक वर्दीधारी की टिप्पणी थी। वाह नेताजी वाह। जो कि बिलकुल सटीक है। क्योंकि स्मार्ट पंडित इन दिनों वाकई नेतागिरी स्टाइल में आ गये है। जबकि मानसून ने आहट दे दी है। शहर की नालियां साफ होना बाकी है। पिछले दिनों जरा सी बारिश में नालियां लबालब हो गई थी। सडकों पर पानी भरा गया था। अब देखना यह है कि अपने स्मार्ट पंडित कब नेतागिरी का चोला उतारकर अपना मूल काम करते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
उज्जवल जी का जादू ...
शनिवार को भीषण गर्मी थी। इसी दिन दूसरे माले पर एक बैठक थी। कृषि उत्पादन से जुड़ी। राजधानी से एसीएस साहब आये थे। संभाग स्तरीय बैठक थी। इसलिए जरूरत से ज्यादा भीड थी। वैसे तो यह बैठक करवाने की जिम्मेदारी अपने तीसरे माले के मुखिया की है। मगर वह केवल अतिथि बनकर रह जाते है। नतीजा अपने उज्जवल जी के मत्थे जिम्मेदारी थी। इधर भीषण गर्मी से एसीएस साहब परेशान हो रहे थे। नतीजा ... उज्जवल जी ने अपनी कार्यशैली का जादू दिखाया। एक फोन घुमाया। हाथों-हाथ 2 टॉवर एसी लगवाकर एसीएस साहब को राहत दिलवाई। तब कहीं जाकर यह बैठक हो पाई। जिसके लिए उनको बधाई। बाकी हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
अवैध दुकान बिकी .....
मावा नगरी में जनप्रतिनिधियों और माननीय की शह पर बनी एक अवैध दुकान बिक गई है। एक नगरसेवक ने 7 पेटी लेकर अपनी दुकान का सौदा कर दिया है। कुल 22 दुकाने मंदिर की जमीन बनाई गई है। इस जमीन के व्यवस्थापक अपने उज्जवल जी है। अवैध दुकानों को लेकर विकासपुरूष तक शिकायत राजधानी में हो चुकी है। कुल 3 नगरसेवकों ने रियायती दर पर दुकाने ली है। जिसमें से एक नगरसेवक ने बेच भी दी है। कारण ... मामला जल्दी ही उच्च न्यायालय तक पहुंचने वाला है। जिसमें पार्टी उज्जवल जी भी बनेंगे। इसीलिए बुलडोजर चलने से पहले ही सौदा कर दिया है। ऐसी चर्चा मावा नगरी के कमलप्रेमियों के बीच सुनाई दे रही है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
गुहार ...
पंजाप्रेमियों में संगठन चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। हर जिले में प्रभारी बनाकर भेजे गये है। ऐसी ही एक प्रभारी अल्पसंख्यक वर्ग से है। जो कि आगे जिला-पीछे किला जिले की प्रभारी बनकर आई है। अपने संभाग का ही पडोसी जिला है। मैडम जी की इच्छा है। भस्मार्ती में शामिल होने की। किन्तु तमाम कोशिश के बाद भी उनकी गुहार पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसा अपने पंजाप्रेमी बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।