26 मई 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
खुशी और गम ...
प्रदेश के 2 आईएएस इन दिनों खुशी और गम के दौर से गुजर रहे है। यह खुशी और गम सात फेरो के बंधन से जुड़ा है। दोनों आईएएस में अजीब समानता है। दोनों तीसरी दफा सात जन्मों के बंधन में बंधने का ख्वाब देख रहे है। जिसमें से एक आईएएस को खुशी है। क्योंकि उनका सपना जल्दी ही पूरा हो सकता है। जबकि दूसरे आईएएस के लिए गम का माहौल है। कारण ... दूसरी शादी का बंधन गम दे रहा है। अलग होने वाले कागजात पर मैडम जी दस्तखत करने को तैयार नहीं है। इसीलिए तो आईएएस लाबी में खुशी और गम की चर्चा है। ताज्जुब वाली बात यह है। दोनों ही आईएएस बाबा की नगरी में पदस्थ रह चुके है। मगर यह कौन है? इसको लेकर हम अपनी आदत के अनुसार चुप रहेंगे।
वैनिटी वेन ...
अभी तक फिल्म स्टारों के लिए ही वैनिटी वेन बनती थी। फिल्म स्टार ही इसका उपयोग करते थे। लेकिन अब जल्दी ही अपने विकासपुरूष के लिए वैनिटी वेन उपलब्ध होगी। जो कि हेलीपेड से लेकर कार्यक्रम स्थल तक आसानी से लेकर जाई जा सकती है। देवी अहिल्यानगरी में पहली दफा वैनिटी वेन बनकर तैयार हुई है। बिलकुल लक्झरी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो बाबा की नगरी में भी यह मौजूद रहेंगी। देखना यह है कि वैनिटी वेन यहां तैयार होगी या अहिल्या नगरी से बनकर दान में आयेंगी। फैसला वक्त करेंगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
व्यंग्य या मजाक ...
सीएस हो, एसीएस हो, पीएस हो या फिर कलेक्टर। यह भी हमारे जैसे इंसान होते है। जो हंसी-मजाक-व्यंग्य करने में पीछे नहीं रहते है। घटना देवी अहिल्या नगरी की है। जहां पर केबिनेट बैठक हुई थी। बैठक के बीच में भोजन चल रहा था। आलाधिकारियों के लिए राउंड टेबल लगी थी। एक टेबल पर एसीएस स्तर के अधिकारी थे। दूसरी टेबल पर अपने उम्मीद जी आदि मौजूद थे। लंच सर्व करने वालो का पूरा ध्यान उम्मीद जी की टेबल पर था। जिसे एक एसीएस ने महसूस कर लिया। लंच करके एसीएस उठे और उम्मीद जी के पास से गुजरे। तो उन्होंने मजाकिया व्यंग्यात्मक शैली में कह दिया। यहां की सारी हवा तो कलेक्टर की तरफ ही बह रही थी। जैसे ही एसीएस ने यह मजाक किया। बेचारे उम्मीद जी बस यही बोल पाये। अरे नहीं सर... ऐसा कुछ भी नहीं है। हालांकि बाद में उम्मीद जी ने चिंता जताई। कहीं वास्तव में कोई चूक तो नहीं हुई है। किन्तु एसीएस साहब ने मजाक ही किया था। यह पता चलने पर अपने उम्मीद जी ने चैन की सांस ली और चुप हो गये। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
इंतजार ...
दमदमा के गलियारों में बैचेनी से इंतजार हो रहा है। राजधानी से निकलने वाली सूची का। यह तय माना जा रहा है। चटक मैडम जी की कार्यशैली से विकासपुरूष परिचित हो गये है। जिसके बाद मैडम का नाम सूची में शामिल कर लिया गया है। चर्चा यह है कि चटक मैडम जी को उस जिले में मुखिया बनाकर भेजा जा रहा है। जहां पर सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर बन रहा है। इसी जिले में अभी-अभी चटक मैडम जी के पडोसी अधिकारी को भी भेजा गया है। अपने कप्तान जी भी इस जिले में पदस्थ रह चुके है। मगर अडचन अपने श्रीमंत जी से है। उनके चंबल इलाके में पदस्थापना में उनकी मर्जी चलती है। वैसे भी दमदमा के मातहत, मैडम के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल चुके है। उनकी अपमान जनक शब्दावलि को लेकर। ज्ञापन तक बनाकर मैडम जी को सुना चुके है। अब देखना यह है कि दमदमा की ख्वाहिश अपने विकासपुरूष पूरा कब करते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
बांस पर बांस ...
हमने लिखा था। इसी कॉलम में, इसी महीने। इशारा बिरयानी नेताजी की तरफ था। जिसमें उल्लेख किया था। धार्मिक यात्रा से लौट आये नेताजी जल्दी ही बांस पर बांस फंसायेगें। कारण ... युवा पंजाप्रेमी संस्था के चुनाव होने वाले है। 3 दावेदार मैदान में थे। एक का समर्थन अपने छोटा बटला जी कर रहे थे। पर्दे के पीछे से। उनके समर्थक को उम्र वाली शर्त के साथ चुनौती दी गई है। नियमानुसार उम्र 35 के अंदर होना चाहिये। किन्तु इनकी ज्यादा है। कागजात ऊपर भेज दिये है। दूसरे दावेदार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज है। उसका भी खुलासा कर दिया है। तीसरे दावेदान होटल वाले भय्या के समर्थक है। इन्ही को बिरयानी नेताजी का समर्थन है। हालांकि एक डमी उम्मीदवार भी खडा किया गया है। बिरयानी नेताजी ने । मगर डमी में कोई दम नहीं है। इस डमी के लिए मंगलवार को एक बैठक बुलाई थी। नेताजी ने। जिसमें युवा तो नहीं पहुंचे, मगर 40 बुजुर्ग नेता पहुंच गये। इतनी घटनाएं होने के बाद पंजाप्रेमी बोल रहे है। अब बांस पर बांस चढ गया है। पंजाप्रेमियों की बात सच है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
गेंद ...
अपने स्मार्ट पंडित से एक बात सीखने लायक है। अपनी तरफ आई गेंद को दूसरे पाले में कैसे डाला जाये। इशारा उस विभागीय जांच की तरफ है। जिसका बंद लिफाफा अब वर्दी को दिया गया है। मानसिक उत्पीडन वाला। नियमानुसार विभागीय जांच से वर्दी का कोई लेना-देना नहीं होता है। वर्दी अपने यहां दर्ज प्रकरण की खुद विवेचना करती है। मगर शिवाजी भवन पर दबाव था। जांच रिपोर्ट दो। जिज्जी ने बनाकर भेज दी। बगैर दबाव के। स्मार्ट पंडित ने वर्दी तक पहुंचा दी। किन्तु इस रिपोर्ट से वर्दी को रत्ती भर का फायदा नहीं होने वाला। जिन धाराओं में प्रकरण दर्ज है। उसका जांच रिपोर्ट से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं बन रहा है। उस पर कोढ में खाज वाली बात यह है। मामला माननीय न्यायालय तक पहुंच गया है। ऐसे में असली मुसीबत वर्दी पर आनी है। जिसने जल्दबाजी दिखाई। परंतु स्मार्ट पंडित ने खुद का बचाव कर लिया है। गेंद अपने पाले से वर्दी के पाले में डाल दी है। देखना यह है कि अब वर्दी क्या कदम उठायेंगी। इधर कुंआ उधर खाई है। ऐसे में चुप रहने में ही अपनी भलाई है।
अंडगा ...
अपने विकासपुरूष की दिली ख्वाहिश है। बाबा की नगरी में उद्योग और निवेश खूब फले-फूले। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहे है। मगर लालफीताशाही और नौकरशाही अंडगा डाल रही है। ऐसी संकुल के गलियारों में चर्चा है। जैसे एनओसी देने में आनाकानी की जाती है। देने वाले अधिकारी 3-3 दिन तक आफिस नहीं आते है। सप्ताहंत में मुख्यालय छोड़कर चुपचाप निकल जाते है। फायर की एनओसी देने वाले शिवाजी भवन के अधिकारी ने 30 हजारी रेट फिक्स कर दिये है। बदबू वाले शहर की एक कंपनी से अनुमति देने के नाम पर 3 एसी लगवा लिये गये है। दाल बिस्किट वाली तहसील के माननीय कई दफा फोन कर चुके है। पेट्रोलपंप की एनओसी के लिए। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ताज्जुब की बात यह है। अंडगा डालने वाले अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी है। जिन पर अंकुश लगाना मुश्किल है। इसीलिए यह भी चर्चा है। उनकी रवानगी संभाग के ही किसी जिले में हो सकती है। फैसला विकासपुरूष को करना है। तब तक आदत के अनुसार हमको चुप ही रहना है।
लूपलाइन ...
पद पर रहते हुए भी लूपलाइन जैसा महसूस करना? ऐसा इन दिनों तीसरे माले के मुखिया महसूस कर रहे है। संकुल के थर्ड फ्लोर पर तो यही चर्चा है। ताजा इशारा अभी-अभी राजधानी में संपन्न हुई बैठक की तरफ है। जिसमें विकासपुरूष, बड़े साहब सहित आलाधिकारी मौजूद थे। बाबा की नगरी से जिले के नये मुखिया, स्मार्ट पंडित, इंदौरीलाल और अहिल्यानगरी से उम्मीद जी गये थे। बैठक सिंहस्थ 2028 को लेकर थी। इस बैठक में सभी जानकारी उम्मीद जी और जिले के मुखिया ने दी। अपने तीसरे माले के मुखिया चुपचाप बैठे रहे। एक शब्द भी नहीं बोले। तभी तो अधिकारीगण बोल रहे है। लूपलाइन-लूपलाइन। जो कि सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
गुहार ...
विकासपुरूष के शहर में रहते हुए यह उम्मीद की जाती है। ऊर्जा विभाग से। लाइट गुल नहीं हो। मगर उर्जा वाले सुधरने को तैयार नहीं है। तभी तो गुरूवार की रात, जब विकासपुरूष का काफिला गुजर रहा था। कोयलाफाटक क्षेत्र से। तब अचानक ही स्ट्रीट लाइट से लेकर हर घर की बत्ती गुल हो गई। करीब 5 मिनिट तक अंधेरा रहा। सवाल यह है कि जब सूबे के मुखिया मौजूद है। तब ऐसा हो सकता है। तो उनकी गैरमौजूदगी में तो जनता के भाग्य में परेशान होना ही लिखा है। विकासपुरूष से गुहार है। ऊर्जा वाले की लगाम कसी जाये। ताकि व्यवस्था सुधर जाये। मानसून का मौसम आने वाला है। देखना यह है कि विकासपुरूष आम जनता की इस परेशानी का निराकरण करते है या नहीं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कोई नहीं आयेंगा ...
वैसे कभी होता नहीं है। ना ही कभी देखने या सुनने में आया। अपने विकासपुरूष जब-जब बाबा की नगरी में आते है। उनके काफिले में वाहनों की भरमार रहती है। अभी जब वह आये थे। कारकेड में खूब वाहन थे। जगह-जगह मंच थे। जनता ने उनका जोरदार स्वागत किया। यह बिन बुलाई भीड़ थी। जिसे देखकर प्रशासन भी हैरत में था। सब कार्यक्रम निपटाकर विकासपुरूष वीआईपी गेस्ट हाऊस पहुंचे। कुछ देर रूके। फिर निकले। मगर इस दफा काफिले में केवल 3 गाडिया थी। बाकी सभी को रोक दिया गया। यह कहकर कि ... यहीं इंतजार करो। जिसके बाद तीनों वाहन कहां गये। किसी को कुछ पता नहीं है। 25 मिनिट में विकासपुरूष वापस आ गये। जिसके बाद दबी जुबान से चर्चा है। आखिर किससे मिलने गये थे। अपने गुरूजी से या फिजियों डॉक्टर से। पता किसी को नहीं है। इसलिए सब चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
प्रस्ताव ...
कमलप्रेमी मुख्यालय पर अभी एक बैठक हुई। कोर ग्रुप की। जिसमें विकासपुरूष भी मौजूद थे। दालवाले नेताजी ने एक प्रस्ताव रखा। जिसमें बुद्धि भ्रष्ट का उल्लेख था। प्रस्ताव सीधा था। बुद्धि भ्रष्ट को संगठन से बाहर का रास्ता दिखाया जाये। बात तो वर्दी तक रिपोर्ट कराने की हुई। किन्तु संगठन की बदनामी होती। इसलिए बाहर निकालने का प्रस्ताव रखा। जिस पर फिलहाल मोहर नहीं लगी है। ट्रांसफर- पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा हुई। जिसमें निशाने पर शिक्षा मुखिया थे। मुख्य मुद्दा बुद्धि भ्रष्ट का था। जिन्हें संगठन की तरफ से भस्मार्ती अनुमति का काम मिला था। पिछले दिनों रंगे हाथों पकड़ा गये थे। 7 हजारी वसूली की थी। सबूत भी मिल गये। दालवाले नेताजी ने तत्काल राशि वापस करवाई थी। चर्चा है कि मति भ्रष्ट की संपत्ति जांच भी गोपनीय तरीके से करवाई गई है। तभी तो उनको बाहर का रास्ता दिखाने का प्रस्ताव आया है। देखना यह है कि कब मोहर लगती है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
नियम ...
तो आखिरकार नियमों का पालन करते हुए 2 मकानों को तोड दिया गया। बढिया काम किया। अपने नये मुखिया, इंदौरीलाल और शिवाजी भवन की पूरी टीम ने। बधाई की हकदार है। हालांकि समुदाय के धर्मगुरू ने रात 3 बजे तक पूरी कोशिश की। तोडफोड रूक जाये। मगर नियम का पालन किया गया। अब बात नियम की है। तो मावानगरी में नियम का पालन करने में क्या रूकावट आ रही है। जहां पर मंदिर की जमीन पर एक दर्जन दुकाने बन चुकी है। बाकी 12 और बनाने की तैयारी हो रही है। इसको लेकर शिकायत भी हुई है। नोटिस भी जारी किया गया। काम तत्काल रोका जाये। लेकिन सबकुछ कागजों पर ही हो रहा है। एसडीएम ने तहसीलदार को- तहसीलदार ने पटवारी को नोटिस देकर कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। अवैध निर्माणकर्ता खुश है। कारण ... एक माननीय की मर्जी से ही यह सबकुछ हो रहा है। इसलिए सब चुप है। तो हम भी नियम-वियम भूलकर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
चलते-चलते ...
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। एक नोटिस की। जिसकी पुष्टि कोई नहीं कर रहा है। नोटिस 16 बिदूंओं वाली शिकायत पर दिया गया है। मामला वैदिक संस्थान से जुड़ा हुआ है। देखना यह है कि दिये गये नोटिस पर कार्रवाई होती है या नहीं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।