21 जुलाई 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
फाइल गायब ...
सरकारी विभागों में अकसर ऐसा होता है। जब कोई फाइल मुसीबत बन जाती है। फिर या तो गायब कर दी जाती है, या फिर अचानक उस कमरे में आग लग जाती है। ऐसा आरटीओ कार्यालय-कोठी महल पर हो चुका है। अभी-अभी वर्कशॉप में आग लगी है। मगर हम बात कर रहे है। संकुल भवन की। जहां दूसरे माले पर फटाफट जी का कार्यालय है। इस कार्यालय से एक रासुका से जुड़ी फाइल गायब हो गई है। फाइल की खोजबीन इसलिए हुई। क्योंकि विधानसभा के मानसून सत्र में एक सवाल लग गया है। जिसके चलते फाइल की खोजबीन हुई। तब जाकर फाइल गायब होने का खुलासा हुआ है। अब देखना यह है कि सवाल का जवाब कैसे दिया जाता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
पार्टी बनाम समाज ...
हरदा कांड को लेकर कमलप्रेमी संगठन के एक प्रवक्ता की जमकर फजीहत हो गई। बेचारे ... पार्टी के पक्ष में बयान दे गये। बस फिर क्या था। सोशल मीडिया पर, उनकी हर पोस्ट पर इतने व्यंग्य और तीखे प्रहार शुरू हुए। प्रवक्ता जी की बोलती बंद हो गई। बानगी देखिए... गद्दार... डीएनए टेस्ट कराओं से लेकर समाज के लिए कलंक तक की उपाधि उन्हें दे दी गई। यह प्रवक्ता महाकाल नगरी के निवासी है। दरबार स्टाइल में कपड़े पहनते है। किन्तु हरदा कांड के बाद समाज ने इनका अघोषित बहिष्कार कर दिया है। अब देखना यह है कि समाजजनों को प्रवक्ता जी कैसे मनाते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
श्रीमंत और विकास गुट ...
कमलप्रेमी संगठन के मुख्यालय पर हाथापाई की नौबत आ गई। घटना बुधवार दोपहर की है। जिसमें श्रीमंत और विकास गुट के दो समर्थक भिड गये। भिडने वालों में एक वर्तमान में उपाध्यक्ष है। जबकि दूसरे 14 महीने की पंजाप्रेमी सरकार में रासुका के चलते जेल जा चुके है। दोनों के बीच पहले तो तू-तू-मैं-मैं हुई और फिर हाथापाई की नौबत आ गई। देखने वालो का कहना है कि उपाध्यक्ष ने अपने समर्थकों को भी बुला लिया था। यह हाथापाई, लडाई में तब्दील होने ही वाली थी। तभी अचानक बीच-बचाव करने दो कमलप्रेमी आ गये। जिन्होंने इस होने वाली लडाई को रोक दिया। यह घटना उस वक्त हुई थी। जब अपने दालवाले नेताजी मुख्यालय से चले गये थे। नजारा देखने वाले कमलप्रेमी तो यही बोल रहे है। अब देखना यह रोचक होगा कि श्रीमंत व विकास गुट के बीच हुई हाथापाई पर अपने दालवाले नेताजी कोई एक्शन लेते है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कमीशन की हरियाली ...
हरियाली का मौसम है। चारों तरफ खुशनुमा बहार है। पौधारोपण किया जा रहा है। हर कोई हरियाली को देखकर प्रसन्न है। लेकिन उदयन मार्ग स्थित एक विभाग में ज्यादा ही खुशी का मौसम है। यह खुशी हरियाली को लेकर नहीं है। यह तो उन हल्के हरे रंग के कागजों की खुशी है। जो कि कमीशन में मिल रहे है। तभी तो इस विभाग में पौधों की हरियाली की जगह कमीशन की हरियाली की चर्चा सुनाई दे रही है। वह भी 10 से 20 प्रतिशत की। हरियाली वाले विभाग की वर्दीवाले तो यही कह रहे है। बात सच भी है। मगर हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
हम तो अंदर जायेंगे ...
घटना सावन के प्रथम सोमवार की है। जिसको लेकर मीडिया में चर्चा है। अलसुबह की घटना है। अपने 2 नंबरी इंदौरी नेताजी का आगमन हुआ था। हर सावन में आते है। पिछले कई सालों से। रात के करीब 3 बजे के पहले। सीधे चुपचाप मंदिर में जाते है। गर्भगृह में जल चढाकर चुपचाप निकल जाते है। इस प्रथम सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। किन्तु इस दफा उनके साथ कुछ और साथी थे। अपने फटाफट जी ने संदेश भिजवाया। केवल एक की अनुमति है। यह सुनकर अपने 2 नंबरी नेताजी ने संदेश लाने वाले को अपनी स्टाइल में समझा दिया। फिर सभी को लेकर अंदर गये। मीडिया तो यही बोल रही है। तभी मंदिर के गलियारों में चर्चा है। समरथ को नहीं दोष गुसांई... और चुप रहने में ही है हमारी भलाई।
बहुत देखे आपके जैसे ....
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। बहुत देखे आपके जैसे। यह संवाद दूरभाष पर हुआ है। बुधवार के दिन। राज्य प्रशासनिक सेवा की एक अधिकारी और शोध संस्थान के मुखिया में। यह वही मुखिया है। जिनके खिलाफ शिकायत हुई थी। जिसके बाद जांच समिति भी बनी है। 3 सदस्यीय। मगर अभी तक कोई रिजल्ट नहीं आया है। इस बीच बहुत देखे आपके जैसे.... घटना हो गई है। इसके अगले दिन मुखिया को नोटिस भी जारी हुआ है। अब यह देखना रोचक होगा? आपके जैसे बहुत देखे ... को मैडम जी कितनी गंभीरता से लेती है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
गर्व है उज्जैन को ...
सेल्यूट- बधाई-शुभकामनाएं। वह भी अनगिनत। अपने स्मार्ट पंडित और उनकी पूरी टीम को। जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में वह काम कर दिखाया। जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। 3 से 10 लाख वाली कैटेगरी में प्रथम पुरूस्कार ले आये। वह भी देश की प्रथम नागरिक से। इतना ही नहीं। प्रथम नागरिक ने अपने उद्बोधन में उज्जैन का उल्लेख करते हुए, सफाई-मित्र सम्मेलन का जिक्र किया। ऐसा पहली दफा हुआ है। जब देश की प्रथम नागरिक ने खुलकर यह बोला है कि ... पिछले साल मैने महाकाल मंदिर में सफाई की थी। इस दौरान प्रदेश के प्रथम नागरिक और अपने विकासपुरूष ने भी झाडू लगाई थी। अब जब उज्जैन को पुरूस्कार मिला, तो महामहिम का उज्जैन को याद करना, वाकई गर्व की बात है। जिसके लिए बधाई-सेल्यूट- शुभकामनाएं देना हमारा फर्ज है। बाकी तो हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
अनोखा सफाई मित्र ...
आज के इस दौर में कोई जरा भी सामाजिक कार्य करे। तो वह अपनी फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करता है। या फिर अखबारों में नाम और फोटो छपवाता है। किन्तु एक युवक अनोखा सफाई मित्र है। जो खुद की गाडी से विश्वविद्यालय परिसर में अलसुबह घूमता है। हरी ड्रेस पहने। चेहरे पर नकाब लगाए। हर रोज, बगैर किसी नागा के। परिसर में फेके गये कूडे-कचरे को पोलिथीन बैग में भरता है। हर रोज का यह नियम है। अगर कोई नाम पूछे तो हाथ जोड लेता है। बस अपना काम निस्वार्थ भाव से करता है। ऐसे अनोखे सफाई मित्र का भी सम्मान होना चाहिये। ऐसी गुहार हम अपने विकासपुरूष और स्मार्ट पंडित से करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
गलियारों में चर्चाएं ...
1. अपने उज्ज्वल जी के पहले किसी ने भी चटक मैडम के कामों की कभी समीक्षा नहीं की। किसी ने भी भौतिक सत्यापन के लिए मैडम के साथ दौरा नहीं किया। मगर पिछले सप्ताह उज्ज्वल जी ने यह कदम उठा लिया। नतीजा ... दमदमा वाले बोल रहे है। चटक मैडम जी की चमक अब खत्म हो गई है। बात सच है। मगर हमको चुप ही रहना है।
2. अपने उज्ज्वल जी कई मोर्चो पर जूझ रहे है। मगर सबसे खतरनाक मोर्चा फटाफट जी वाला है। जिनकी फटफटिया कैसे दौड़े ? इसको लेकर अलग से उज्ज्वल जी को मेहनत करनी पड रही है। किन्तु फटफटिया, स्टार्ट होकर भी उस गति से नहीं दौड रही है, जिसकी उम्मीद उज्ज्वल जी को है। तभी तो संकुल से लेकर मंदिर वाले ऐसा बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
3. तीसरे माले की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इस महीने के अंतिम दिन फेयरवेल पक्की है। मगर उनकी जगह कौन आयेगा? इसको लेकर असमंजस बरकरार है। हालांकि सभी को यह उम्मीद है कि देवी अहिल्यानगरी से उम्मीद जी आयेंगे? किन्तु फैसला अपने विकासपुरूष करेंगे। जिसका सभी को इंतजार है। तो हम भी इंतजार करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
4. सावन के महीने में भक्तों की भीड उमड रही है। हर रोज हजारों भक्त आ रहे है। इसमें से अधिकांश भक्त वीआईपी प्रोटोकॉल का लाभ उठा रहे है। जबकि कौन प्रोटोकॉल का पात्र होगा। इसको लेकर नियम निर्धारित है। फिर भी हर कोई प्रोटोकॉल ले रहा है। इसके पीछे क्या राज है। कहीं वापस अपनी-अपनी जेब गर्म करने का धंधा तो शुरू नहीं हो गया है। वैसे भी सावन माह में रेट डबल हो जाते है। मंदिर वाले तो यही बोल रहे है। मगर हमको चुप ही रहना है।
5. अपने इंदौरीलाल जी की विशेषता है। मृदभाषी है और अपनी आवाज से हर किसी को वशीभूत कर लेते है। किन्तु एक अधिकारी पर उनका जोर और जादू नहीं चलता है। वह नाम है अपने चुलबुल पांडे जी का। जो कि अपने इंदौरीलाल के हत्थे ही नहीं लगते है। ऐसा हम नहीं, बल्कि विकास भवन वाले बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
6. अभी पिछले सप्ताह राजधानी से एसीएस साहब आये थे। जो कि बैठक में खुलकर बोलते है। बगैर किसी लाग-लपेट के। बैठक चल रही थी। किसी अधिकारी ने कह दिया। हम तो एक साल में ही सडक बना देंगे। यह सुनकर एसीएस साहब ने तंज किया। देखना ... इतनी जल्दी भी मत बना देना कि सिंहस्थ के पहले ही उखड जाये। वरना फिर से बनवानी पड़ेगी। एसीएस साहब का व्यंग्य सुनकर अधिकारी मुस्कुराए और फिर सब चुप हो गये। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
मेरी पसंद ...
एक अधिकारी ने पिछले सप्ताह एक अशआर सुनाया। हमको तो पसंद आया। आपको पसंद आता है या नहीं। पढक़र मजा लीजिए... शाख से टूटकर हरा होना/ इसको कहते है बेवफा होना...।