तिरुपति की तर्ज पर महाकाल में होगा विकास
मंदिर समिति से अलग 2 से 3 ट्रस्ट बनाने पर विचार कुछ सालों में उज्जैन के बाहर भी हो सकते हैं महाकाल दर्शन
प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर को अब आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम की तर्ज पर विकसित करने की कवायद शुरू की जा रही है। हाल ही में जिले के आला अधिकारियों ने तिरुपति मंदिर का दौरा किया और वहां की व्यवस्थाओं का गहराई से अध्ययन किया। योजना है कि तिरुपति की तरह ही महाकाल मंदिर में अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग ट्रस्ट का निर्माण किया जाए। इससे दानदाताओं को भी सुविधा होगी और श्रद्धालुओं को भी बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी।
हाल ही में संभागायुक्त आशीष सिंह के साथ कलेक्टर रोशन सिंह, निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा, यूडीए सीईओ संदीप सोनी और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने तिरुपति मंदिर का दौरा किया। तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम ट्रस्ट के सदस्यों और अधिकारियों से वहां कि सारी व्यवस्थाएं समझीं। तिरुपति मंदिर में मंदिर समिति के अधीन कई ट्रस्ट हैं जो अलग-अलग काम करते हैं। दर्शनार्थियों के लिए बनने वाले गेस्ट हाउस अलग ट्रस्ट चलाता है और लड्डू प्रसादम का काम अलग ट्रस्ट देखता है।
इसके अलावा वॉलिंटियर ट्रस्ट, अन्नक्षेत्र, शिक्षा वगैरह के लिए भी अलग-अलग ट्रस्ट हैं। इससे मंदिर को मिलने वाले दान का सही हिसाब किताब रखने में भी आसानी होती है और ये भी स्पष्ट रहता है कि मंदिर में किस काम के लिए कितना फंड उपलब्ध है।
संभागायुक्त आशीष सिंह के अनुसार, तिरुपति मंदिर की आय इन सभी ट्रस्ट से होती है। कुल मिलाकर मंदिर के पास इस समय लगभग 5100 करोड़ की संपत्ति है। महाकाल मंदिर में भी दर्शनार्थियों की संख्या और दानदाताओं की बढ़ती आस्था को देखते हुए एक से अधिक ट्रस्ट बनाए जा सकते हैं। इससे जिस दानदाता को मंदिर में जिस काम के लिए दान देना हो, वो उस ट्रस्ट को दान दे सके। अभी गेस्ट हाउस निर्माण और वॉलिंटियर ट्रस्ट पर विचार किया जा रहा है।
इसी तरह तिरुपति मंदिर में विशेष दर्शन से अच्छी आय होती है। महाकाल मंदिर में गर्भगृह में पेड दर्शन की व्यवस्था बनाकर मंदिर की आय बढ़ाई जा सकती है। प्रशासन इस पर विचार कर रहा है।
गौरतलब है कि तिरुपति मंदिर देश के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर में रोजाना 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार रोजाना 3 करोड़ से ज्यादा का दान मंदिर को अलग-अलग मदों में प्राप्त होता है। तिरुपति की तरह ही ट्रस्ट देश के अन्य शहरों में भी मंदिर निर्माण कर रहा है ताकि लोगों को एक से ज्यादा जगह भगवान व्यंकटेश के दर्शन मिल सकें। इस समय देश में लगभग दो दर्जन तिरुपति मंदिरों का या तो निर्माण चल रहा है या योजना पर काम चल रहा है।
जिला प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि तिरुपति की तर्ज पर ही अन्य शहरों में भी महाकालेश्वर मंदिर का निर्माण किया जाए। अगर ऐसा हुआ तो कुछ सालों में आपको उज्जैन के बाहर भी बाबा महाकाल का आशीर्वाद मिल सकेगा।
हरी झंडी...
श्रीनिवासा गोविन्दा व्यंकटेशा गोविंदा की यात्रा से लौटकर संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने जो कुछ भी देखा और अनुभव किया।उसकी पूरी जानकारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को विस्तृत दी है।मुख्यमंत्री ने उनकी बात को गम्भीरता से लिया है। श्री सिंह ने मुलाकात ने बताया कि.. दूरदर्शी मुख्यमंत्री श्री यादव ने महाकाल के लिए इस तरह के कुछ ट्रस्ट बनाने की मंजूरी दी है।शुरुआत में गेस्ट हाउस और महाकाल सेवक(वालियन्टर) बनाने के लिए जल्दी ही रूपरेखा बनाकर काम शुरू किया जाएगा।उसके बाद बाकी पर काम शुरू होगा। यहाँ लिखना जरूरी है कि परम पूजनीय सर संघ चालक मोहन भागवत भी अपनी एक उज्जैन यात्रा के दौरान मंदिर के नाम पर ट्रस्ट बनाने के लिए अपनी सहमति दे चुके हैं।