24 नवम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
भवन को हटाने की कोशिश...
दमदमा विकास भवन से लेकर संकुल के गलियारों में चर्चा है। एक भवन और दुकान को हटाने की। भवन का सीधा संबंध ग्रामीण विकास से है। जिसके करीब ही एक रिसोर्ट बना है। अपने पँजाप्रेमी होटल वाले भिया का। उनकी इच्छा है। 20 साल पुराना पंचायत भवन और दुकान हट जाए। इससे उनका फायदा होगा। क्योंकि भूमि का मामला है। लंबे समय से कोशिश जारी है। जबकि सामने स्थित होटल संचालक इसके विरोध में है। इंदौर रोड का मामला है। यह वही पँजाप्रेमी नेताजी है। जिन्होंने मिशन 2023 में विकास पुरुष को चुनौती दी थी। मगर स्वजातीय है। तो इसका फायदा उठाकर कोशिश कर रहे है। देखना है कि सफलता मिलती है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
माननीय की चेतावनी...
अपने एक कमलप्रेमी माननीय की चेतावनी चर्चा का विषय बन गई है। खासकर, अपने कमलप्रेमियो के बीच। जिन्होंने सार्वजनिक मंच से खुलकर बोल दिया। अगर फिर ऐसा हुआ। तो वह अखबार की होली जला देंगे। मतलब सार्वजनिक रूप से जलाएंगे। मगर कमलप्रेमी सवाल खडे कर रहे है। क्या वाकई कमलप्रेमी संगठन के मुखपत्र को जलाने की हिम्मत अपने माननीय डॉ साहब में है। यह कानाफूसी इन दिनों जिले की तहसील बदबू वाले शहर में सुनाई दे रही है। इसके पीछे कारण माननीय को लेकर छप रही खबरों को लेकर है। जिससे डॉ साहब परेशान हो गए है। उनको लगता है कि खबरें भ्रामक और निराधार है। इसलिए उन्होंने निशाना साधा है, पूर्व माननीय पर। कुल मिलाकर लडाई आपसी जलन और प्रतिस्पर्धा की है। इसमे कमलप्रेमी संगठन का मुखपत्र जलाने की बात ने आग पकड ली है। देखना यह है कि अपने माननीय डॉ साहब, इस चेतावनी पर कब खरे उतरते हैं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
मैडम के नाम पर....
संकुल भवन में चर्चा है। यहाँ पदस्थ एक मैडम की। जिनको लेकर चर्चा आम है। मैडम ईमानदारी की मिसाल है। इसके बाद भी आने वालों फरियादी को बख्शा नहीं जाता है। मैडम की सहायक भी एक मैडम है। जो कि बाकायदा खुलकर कहती है। मैडम जी का हिस्सा दो, फिर खुद के लिए भी डिमांड करती है। यह देखकर फाइल उठाकर ले जाने वाला भी हाथ फैला देता है। ताजा किस्सा है। यह कहकर डिमांड की गई। एस आई आर के काम मे लगे लोगो को भोजन के पैकेट भिजवाने है। मेरी जेब से थोडी दूंगी। बेचारे..क्लाइन्ट ने मजबूरी में अपनी जेब ढीली करी। ऐसा हम नहीं कह रहे है, बल्कि संकुल में बैठने वाले और मैडम के कार्यालय में आने वाले कह रहे है। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस, अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
खुशबू ने दस्तक दी तो...
शायर ताहिर फराज का बेहतरीन अशआर है। खुशबू ने दस्तक दी तो अहसास हुआ/घर के दरों दीवार पे कितना जाला है...! जल्दी ही एमआर 5 मार्ग से गुजरने वालो को अब खुशबू का अहसास होगा। जबकि अभी तक इस रोड से गुजरने पर नाक पर रुमाल रखना पडता था। कारण..कचरे का ढेर। जिसके चलते आसपास के रहवासी परेशान थे। अब अपने एंग्रीमैन ने इस क्षेत्र का नक्शा और आबोहवा बदलने की ठान ली है। तभी तो दिन रात काम चल रहा है। कचरे के ढेर की जगह एक सुंदर बगिया बनाने का। इस काम को जल्दी से जल्दी पूरा करने के निर्देश है। जिसके लिए एंग्रीमैन अग्रिम बधाई के हकदार है। बाकी जब काम पूरा हो जाएगा और इस मार्ग से कभी गुजरे तो फराज साहब के अशआर को याद जरूर कर लेने का अनुरोध करते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
उम्मीद की किरण जिंदा रखे...
21 नवंबर को एक खबर प्रकाशित की थी। तिरुपति बालाजी का अधिकारियों का दौरा। जिसमे मंदिर की व्यवस्था सुधारने को लेकर ट्रस्ट बनाने का उल्लेख था। इस खबर को लेकर हमारे कई पाठकों ने आपत्ति जताई। संदेश भी निजी तौर पर भेजे। सबका कहना था। कुछ नहीं होगा। सरकारी धन पर अधिकारीगण इंजॉय करने जाते है। लौटकर कुछ नहीं करते है। ऐसे कई दौरे हो चुके है। जनप्रतिनिधियों के भी दौरे हुए है। मगर आजतक कुछ नहीं बदला है। तो अभी दौरा करके आई टीम क्या कर लेगी? पाठकों का आक्रोश जायज है। हमने खुद कई दौरे की रिपोर्ट प्रकाशित की है। कोई बदलाव नहीं आया। मगर उम्मीद कभी नहीं छोडनी चाहिए। हम भी भगवान से अगर कोई एक मनोकामना पूरी नही हो, तो दूसरी के लिए गुहार लगाना बंद नहीं करते है। पांचो उंगलियां एक जैसी नहीं होती है, वैसे ही हर अधिकारी नही होता। जो केवल बोल-बच्चन हो। कुछ जो ठान लेते है, उसको करके दिखाने की हिम्मत भी रखते है। बशर्त कोई राजनीतिक दवाब न आए या तबादला न कर दिया जाए। वर्तमान में जो टीम है। संभाग आयुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा, मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक और उविप्रा सीईओ संदीप सोनी। अगर सिंहस्थ तक रहे तो महाकाल मंदिर के ट्रस्ट भी बनेंगे और बदलाव भी व्यवस्था में नजर आएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो पाठकों से वादा है। हम चुप रहेंगे कालम लिखना हम बंद कर देंगे। यहां यह हम पाठको को बता दे कि पहली दफा ऐसा हुआ है। जब अधिकारियों का दल अपने निजी खर्च से दौरा करके आया है। सरकारी धन का उपयोग नही किया है। इसलिए उम्मीद की किरण को जिंदा रखें, क्योंकि हर रात के बाद सुबह होती है। बाकी क्या लिखें, इसलिए चुप हो जाते हैं।
जमकर ट्रोल हुए....
सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट अपलोड करने से पहले जरूर सोचना चाहिए। इस पर क्या प्रतिक्रिया होगी। देखने और पढने वालों की। यह चूक अपने हाइनेस से हो गई। उन्होंने एक पोस्ट अपलोड की थी। कार्यकर्ताओ ने स्वागत किया। एक्ट वापस लेने पर। इसको अन्नदाताओं की संघर्ष समिति ग्रुप में किसी ने डाल दिया। बस फिर क्या था। अन्नदाताओं ने जमकर उन पर निशाना साधा। सदन में दिए गए वक्तव्य तक को लिख दिया। मेरी विधानसभा में आता है.. आपको क्या दिक्कत है। अन्नदाताओं ने पोस्ट पर जमकर भडास निकाली। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस, आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
रसिया कमलप्रेमी नेता...
बडी प्यारी गजल है। हर आदमी में होते है दस -बीस आदमी/जिसको भी देखना कई बार देखना...! ऐसा ग्रामीण क्षेत्र के कमलप्रेमी बोल रहे है। एक पोस्ट पर लिखी कमेंट पढऩे के बाद। कमेंट यह है कि बुडा होने में अभी समय है। हालांकि जिन्होंने कमेंट किया उनकी खुद की उम्र 60 से ऊपर है। उन्होंने बुडा होने का कमेंट एक खूबसूरत महिला की तस्वीर पर किया है। एफबी पर एक ग्रुप ..अच्छे विचार (पारिवारिक ग्रुप) के नाम से बना है। ऐसे कई फेक ग्रुप संचालित है। महिला ने पोस्ट पर स्पेशल लिखा है। बुडी हो गई हूं, लेकिन .....मन करता है। जिस पर रसिया कमलप्रेमी नेताजी ने अपनी भावना व्यक्त कर दी है। यह नेताजी कभी दमदमा की पढाई-लिखाई वाली समिति के मुखिया रह चुके है। इसलिए कमलप्रेमी चटकारे ले रहे है और हम तो बस दिल तो बच्चा है, वाली हरकत मानकर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
हाइनेस की पाठशाला...
अभी पिछले दिनों अपने उज्ज्वल ने एक पाठशाला शुरू की थी। उन विद्यार्थियों के लिए। जो कि जीवन में पढक़र आगे बढने की लालसा रखते है। खुद उज्ज्वल जी ने क्लास ली थी। यह नवाचार तारीफ योग्य है। इसी तरह की पाठशाला अपने हाइनेस ने भी शुरू की है। जिसमे वह जिंदगी के अनुभव से क्या सीखा जा सकता है। परिवार का जीवन मे क्या महत्व है। राजनीतिक जीवन मे कैसे आदर्श स्थापित किए जाना चाहिए.. आदि विषय पर। एक पाठशाला लग चुकी है। माधव कालेज में। जल्दी ही दूसरी भी लगेगी। अच्छा प्रयास है। जिसके लिए अपने हाइनेस को इस नवाचार की बधाई देते हुए, हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
सपने में दिखती है...
हेडिंग पढकर पाठकगण शायद यह सोचें। हम उस गाने की बात कर रहे है। सपने में दिखती ..ओ..कुडी मुझे सपने में दिखती है। मगर यहाँ सपने कोई कुडी (लडकी) नही दिख रही है, बल्कि एसआईआर के आवेदन नजर आ रहे है। उन सभी राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को। जो पिछले 25 दिनों से इस काम मे लगे है। लास्ट डेट 4 दिसंबर के डंडे ने दिन का चैन-रात की नींद हराम कर दी है। सुबह 8 से रात 1 बजे तक तहसील औऱ एसडीएम कार्यालय में काम चल रहा है। जो 4-5 घण्टे की नींद मिल रही है। उसमें भी सुकून की नींद के बदले एसआईआर के ही सपने आ रहे है। ताज्जुब की बात यह है। 4 दिसम्बर की लाठी तान कर बैठे अधिकारियों ने फार्म 10 तारीख तक उपलब्ध करवाए है। इस शिकायत पर किसी का ध्यान नही है। बस..फरमान जारी कर दिया है। अगर 4 तक काम पूरा नही हुआ। तो दंड मिलना पक्का है। जिसको लेकर हर किसी को सपने आ रहे है। देखना यह है कि इन बुरे सपनों से आखिर कब मुक्ति मिलती है। तब तक हम इन सभी के दु:ख को अपना मानते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
विस्तार का फार्मूला कौनसा होगा...
कमलप्रेमी संगठन में यह तय हो गया है। अगले महीने विस्तार होना है। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरे आ सकते है। कुछ पुराने चेहरों को सत्ता से संगठन का रास्ता दिखाया जा सकता है। किसको सत्ता में रखना है.. किसको संगठन में। इसका फार्मूला क्या होगा? अब इस पर कयास लगाए जा रहे है। अगर अपने विकास पुरुष को बिहार चुनाव का ईनाम दिया जाता है। तो गुजरात पैटर्न पर ही विस्तार होगा। मतलब सभी के इस्तीफे लिए जा सकते हैं? उसके बाद विकासपुरुष उन राजनीतिक दोस्तों को बॉय-बॉय कर सकते है, जो दिखाते तो दोस्ती है,मगर पीठ के पीछे लगातार षडयंत्र रचकर दिल्ली तक शिकायत करते रहते है। इनकी रवानगी पक्की हो जाएगी। अगर गुजरात फॉर्मूला लागू नहीं किया तो भी दोस्ती का दिखावा करके, रंजिश रखने वालों का कद का घटना पक्का है। जिसका अब कमलप्रेमियो को इंतजार है। तो हम भी इंतजार करते हुए, आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
अंदर की अनुमति नहीं है...
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। एक पॉवरफुल नेताजी को रोकने की। जो कि गर्भगृह में जाकर दर्शन करने का मन बना कर आए थे। बाकायदा ग्रीन रूम से धोती शोला पहनकर आए थे। उनका रौब ऐसा है कि कोई भी उनको रोक नहीं सकता है। कई सालों से वह जब भी मन होता है। अंदर जाकर दर्शन करते है। यह घटना दोपहर की है। मगर इस दफा उनको रोक दिया गया। जिसके बाद उनका गुस्सा होना स्वाभाविक था। उन्होंने वह दिखाया। राजधानी तक फोन गया। लेकिन अनुमति नही मिली। जिसके बाद यह नेताजी वापस ग्रीन रूम की तरफ चले गए। फिर अचानक न जाने उनके दिल ने क्या सलाह दी। वह वापस आए। नंदी हॉल में लगभग 30 मिनिट तक ध्यान मुद्रा में बैठकर पूजा करते रहे। उस समय जिन्होंने उनको देखा, उनका कहना है। कमलप्रेमी नेताजी के चेहरे पर खतरनाक आक्रोश नजर आ रहा था। पूजा खत्म होते होते उनके फेस की रंगत में फर्क आ गया था और शांति दिखने लगी। अब लाख टके का सवाल यह है। आखिर किस पॉवरफुल नेताजी को रोका गया था? इसको लेकर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। ज्यादा पूछो तो हमकों चुप रहने का इशारा कर देते है। तो हम इशारे का सम्मान करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
सर्द रात में अगर गर्म मिल जाए...
कल्पना कीजिए। इस ठंड के दौरान अगर आप को रात्रि डयूटी कर रहे हो। वह भी पूरी रात जागकर।उस पर एक जगह नहीं बैठना है। 2 पहिया वाहन पर घूमना है। ऐसे में देर रात को गरमा गरम चाय उस पॉइंट पर मिल जाए। जहाँ ड्यूटी कर रहे हो। तो कितना मजा आ जाएगा। इन दिनों वर्दी वाले यह खुशी महसूस कर रहे है और अपने कप्तान को साधुवाद दे रहे है। वाकई कप्तान ने वर्दी की सर्दी के दर्द को समझा और निदान किया है। इसके अलावा कंट्रोल रूम पर पूरी रात चाय मुफ्त मिलेगी। इसके लिए हम भी कप्तान को बधाई देते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
इन दिनों सबसे महत्वपूर्ण काम चल रहा है। एसआईआर का। जिसमे 2003 की मतदाता सूची से पहचान करनी है। जिसके लिए voters.eci.gov.in बेवसाइट का सहारा लेना हर बीएलओ की मजबूरी है। मगर इसे ओपन करने पर अपने क्षेत्र का मतदान केंद्र तलाश करना, भूसे के ढेर में सुई ढूंढना है। ग्रामीण क्षेत्र में तो गांव के नाम से मतदान केंद्र और सूची खोजी जा सकती है। मगर उत्तर और दक्षिण में मतदान केंद्र की तलाश करो तो UJJAUN लिखा आता है। जिसे बीएलओ उज्जौन बोल रहे है। इस कारण दु:खी और परेशान है। जानकारी के लिए 2003 में उत्तर में 158 और दक्षिण में 191 मतदान केंद्र थे। जो वर्तमान में 500 के करीब हो चुके है। तभी तो हर अधिकारी/कर्मचारी अपना यह दुखडा सुना रहा है। हम भी सुन ही सकते है, कर कुछ नहीं सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
मेरी पसंद
मैं मोम था मुझे काफी था धूप में रखना।
दु:ख इस बात का है मुझे आग भी लगाई गई।