01 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

01 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

 MRP बनाम MSP....

ठंड ने धीरे धीरे जोर पकड लिया है। ऐसे में सोमरस की खपत बढना भी शुरू हो गई है। इस धंधे में अवैध बिक्री पर रोल बहुत रहता है। जिस पर रोक लगाने के लिए सोमरस वाली वर्दी हमेशा तत्पर रहती है। जो इन दिनों लगातार छापे मार कर इनको पकड रही है। जिसके लिए इस वर्दी टीम को बधाई। मगर इसी टीम का एक काम ओर भी है। वह है दुकानों से मिलने वाले सोमरस की बिक्री मूल्य पर नजर रखे। निर्धारित मूल्य से ज्यादा कीमत पर दुकानदार वसूली न करे। जिसके लिए नियम भी बना है। हालांकि नियम तो यह भी है। अगर ग्राहक मांगे तो बिल भी दे। लेकिन बिल मांगने पर दुत्कार मिलती है। कारण एमआरपी और एमएसपी से ज्यादा मूल्य पर सोमरस बेचा जा रहा है। जो कि उपभोक्ता संरक्षण नियम का उल्लंघन है। उम्मीद है कि सोमरस की वर्दी इस पर भी ध्यान देगी। हम तो बस यह अनुरोध कर सकते है। बाकी उनकी मर्जी है और हमको आदत के अनुसार चुप रहना है।

प्रथम का दु:ख...

आ बैल मुझे मार। इस  कहावत का अर्थ तो हमारे सभी पाठकगण जानते है। इस पीडा से इन दिनों अपने प्रथम सेवक गुजर रहे है। जिन्होंने पिछले दिनों न जाने किस की सलाह पर एक सम्मेलन आयोजित कर लिया था। 1971 से लेकर वर्तमान तक के नगरसेवकों और प्रथमसेवको का। एक बढिया होटल में। जिसमें भोजन प्रति प्लेट 1 हजारी था। इसके लिए उन्होंने शिकार के रूप में स्मार्ट निखट्टू को चुना था। मगर दाव उल्टा पड गया। निखट्टू जी ने नियम कायदों का हवाला देकर गेंद वापस प्रथम सेवक के पाले में डाल दी थी। जिसके बाद करीब ढाई पेटी के लिए प्रथम सेवक और उनकी केबिनेट को अपनी अपनी जेब ढीली करनी पडी है। नतीजा वह दु:खी है। क्योंकि किसी ने उनका साथ नही दिया। संगठन और प्रशासन ने भी। जबकि वह शहर के प्रथम सेवक है। इसलिए वह दु:खी है। अपनी पीडा को कई जगह जाहिर कर चुके है। जिसमे हम कर क्या सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

गृह नगर में सुनवाई नहीं...

आम जनता के लिए साप्ताहिक जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन की सुविधा है। मगर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर किससे सुनवाई करे। जिससे अपने हक की मांग पूरी हो सके। ऐसी चर्चा संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है। इशारा अपने अट्टू जी की तरफ है। जो कि एक अदद घर के लिए परेशान है। वो भले ही दूसरे के घर से कब्जा हटवाने की ताकत रखते है। मगर उनको अलाट शासकीय भवन पर उनसे बहुत जूनियर वर्दीधारी को नही हटा पा रहे है। हालाकि उम्मीद जी और उज्ज्वल जी को गुहार लगा चुके है। कब्जाधारी ज्यादा चतुर है। पहले शर्त रखी। मुझे दूसरा अलाट करवा दो। वो काम हो गया। उस मकान में निर्माण कार्य भी इच्छानुसार करवा दिया। अब उसकी अजीब शर्त है। बाथरूम छोटा है। इसलिये खाली नहीं करूंगा। इतना ही नहीं जब दवाब बनाया जाता है तो वह अपनी 7 जन्मों की साथी को आगे कर देते है। ऐसे में संकुल के गलियारों में चर्चा है। जब विकासपुरुष के गृहनगर में एक अपरकलेक्टर कि सुनवाई नहीं हो रही है, तो फिर कहाँ होगी? इस चर्चा में दम है, किन्तु चुप रहना ही हमारा धर्म है।

पायलट का जलवा...

गाडी का ड्राइवर मामूली इंसान होता है। मगर उडनखटोले को उडाने वाले कीमत ज्यादा होती है। तभी पिछले दिनों एयर स्ट्रीप पर विवाद खडा हो गया। उस वक्त जब छतीसगढ के पूर्व मुखिया का आगमन हुआ था। इसके लिए 11 इनोवा गाडियों का काफिला लगा। पिता-पुत्र दोनों आए थे। महाकाल दर्शन के लिए आए थे। जब उनका काफिला रवाना हो गया। तब पायलट की डिमांड आई। दर्शन करने जाना है। जिसके लिए गाडी चाहिये। बस इस डिमांड से प्रोटोकॉल में हडबड़ी मच गई। कई जवाब दिए गए। उसके बाद क्या हुआ। हमकों पता नहीं। इसलिए चुप हो जाते हैं।

सफल सर्जरी...नेक्सस तोडा

अपने शिवाजी भवन के मुखिया एंग्रीमैन को लख लख बधाई। जिन्होंने एक ऐसे नेक्सस  को तोड दिया। जो पिछले कई बरसो से मुफ्त का चंदन-घिस मेरे नंदन के नाम पर घर बैठे वेतन ले रहा था। सफाईकर्मी के नाम पर। इसमे शिवाजी भवन के अधिकारियों सहित नगरसेवकों का  समूह  शामिल था। अपनों को उपकृत करने का यह गोरखधंधा लंबे समय से जारी था। जिसको एंग्रीमैन ने पकड लिया। तभी तो एक सीएसआई की सेवा समाप्त की थी। जिससे हडकंप मच गया। सफाई कामगारों से बन्दी लेने वाले एकजुट हो गए। चेतावनी ओर धमकी दे डाली। आदेश वापस लो। एंग्रीमैन उनसे ज्यादा चतुर निकले। उन्होंने शर्त तो मान ली। आदेश भी कर दिया। मगर फिर अपनी चतुराई दिखाई। 6 झोन के सभी मुखियाओं को इधर-उधर कर दिया। जिससे कि शिवाजी भवन को फर्जी हाजिरी से आर्थिक हानि होने वाला घोटाला रुक जाए। यह गंदा काम नीचे से लेकर ऊपर तक फैला हुआ है। इसको संरक्षण देने वालो में कई सम्मानीयगण शामिल है। जिनको हर महीने उनका हिस्सा मिल जाता था। इसको एंग्रीमैन ने तोडकर सब सेटिंग बिगाड दी है। अब यह देखना रोचक होगा कि आगे जेब गर्म करने के लिए क्या कदम उठाया जाएगा। तब तक हम आदत अनुसार चुप हो जाते है।

10 पेटी का खेला...

अपने एंग्रीमैन ने सफाई के नाम पर चल रहे फर्जीवाडे का खेल तो पकड लिया। फिर खेल करने वालो की अदला-बदली करके इसे फिलहाल तो रोक दिया। मगर वह मेले में दुकान आवंटन में हुए खेल को नही रोक पाए। रोकते भी कैसे? उनको भनक तक नहीं लगी। राजस्व वालो ने खेल कर दिया। केवल मुखिया को 10 पेटी का लाभ मिला है, तो बाकी टीम ने भी कोई कसर नहीं छोडी होगी। धरातल पर काम करने वाली टीम कोई मूर्ख तो है नही। उसको भी अपनी जेब गर्म करने का तरीका आता है और बेहतर आता है। अगर आवंटन की जांच बारीकी से करवाई जाए, तो इसका खुलासा हो सकता है। ऐसा हम नहीं बल्कि शिवाजी भवन में बैठने वालों का कहना है। मगर हमारा तो काम बस आदत के अनुसार चुप रहना है।

दिल तो पागल है...

एसआरके की मूवी पाठकों ने देखी होगी। जिसका गीत दिल दीवाना है। यह गीत इन दिनों राजधानी के वल्लभ भवन में सुनाई दे रहा है। इशारा एक आईएएस अधिकारी की तरफ है। जो कि केंद्र से लौटकर आए है। इनके अंडर में कई नगरीय क्षेत्र आते है। जिनमें पदस्थ एक अतिसुन्दर मैडम भी है। जो कि पहले पशुपतिनाथ नगरी में पदस्थ थी। फिर वह अपने लटके-झटके के दम पर उस जगह की नगरीय मुखिया बन गई। जहाँ पर हल्के हरे रंग के कागजों की बरसात होती है। इसमें आईएएस अफसर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अब इस योगदान का कर्ज चुकाने की बारी आ गई है। तो देश की राजधानी में आयोजित कांफ्रेंस की आड में कर्ज की वसूली की जा रही है। तभी तो बल्लभ भवन में दिल दीवाना सुनाई दे रहा है। हमारा यह इशारा आईएएस लॉबी समझ गई होगी। इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

चतुर बाबू...

हमारे पाठकगण यह कतई अंदाजा नहीं लगाए। हम किसी सरकारी विभाग के बाबू की चतुराई को लिख रहे है। सरकारी बाबू की बात अलग होती है। वह हर मुसीबत का कोई रास्ता निकालने में माहिर होते है। लेकिन कलमकारों की संस्था के हमारे तभी तो उन्होंने ऐसा तरीका खोजा। जिससे एक तीर से तीन शिकार हो गए। पहला दो विरोधी संस्थाओं को जड से खत्म कर दिया। दूसरा अपने स्थान को बरकरार रखा। भले अब वह दो नम्बरी पोजिशन पर है। तीसरा 2028 के लिए अपनी छवि और जलवा बनाए रखने का जुगाड कर लिया। तभी तो कलमकारों में अपने चतुर बाबू के दिमाग की चर्चा दबी जुबान से सुनाई दे रही है। जिसमे दम है। इसलिए हम तो नए मुखिया और डमी बाबू सहित सभी सदस्यों को बधाई देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

कब मिलेगी स्वीकृति....

विकासपुरुष का वैसे तो हर प्रोजेक्ट इस शहर के लिए जरूरी है। मगर उनके एक प्रोजेक्ट को नौकरशाही ने नाम दिया है। ड्रीम -प्रोजेक्ट। जो हरियाखेडी के नाम से जाना जाता है। यह योजना 2024 से अटकी पडी है। एक बार निविदा भी निकली। मगर रद्द करनी पडी। इस योजना से सिंहस्थ में पानी की कमी नहीं होगी। 24 महीने में इसे पूरा करना है। मगर अभी तक केबिनेट तक योजना नही पहुँची है। 1000 खोखे की इस योजना में सबसे जरुरी काम नई पाइप लाइन डालना है। टाटा के सीवरेज लाइन डालने का परिणाम हम सभी को पता है। इस योजना के तहत कई किलोमीटर की पाइप लाइन डल पाएगी? इसके अलावा कुछ पुरानी टंकिया डिस्मेंटल होगी और नई बननी है। जबकि समय बहुत कम बचा है। ऐसे में संशय उठना लाजिमी है? फिलहाल तो अपने एंग्रीमैन इस योजना पर अभी अभी राजधानी होकर आए है। अब केबिनेट की स्वीकृति का इंतजार है। अनुमति मिलते ही काम शुरु होगा। तब अग्निपरीक्षा शुरू होगी उम्मीद जी, उज्ज्वल जी और एंग्रीमैन की। जिनको 2027 तक इसे हर हाल में पूर्ण करवाना होगा। तब जाकर विकासपुरुष का सपना पूर्ण होगा। जिसका फैसला वक्त करेगा। तब तक हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है

एक और सौगात...

जल्दी ही अपने पडोसी जिले को एक नई सौगात मिलने वाली है। वह भी 1500 खोखे की। विकासपुरुष ने एक विदेशी कम्पनी को अपने विजन से कायल कर लिया है। बाबा वैजनाथ की नगरी में यह उद्योग लगेगा। यह वह कम्पनी है जो फ्रेंच फ्राइज-पोटैटो बाइट-स्माइल-आदि का निर्माण करती है। इस कंपनी के आने से इस क्षेत्र का आलू और ज्यादा प्रसिद्ध होगा। सब कुछ तय हो चुका है। जिसमे अपने मृदभाषी जी की भूमिका सराहनीय है। इतंजार अब इसका है कि कंपनी को जल्दी से अलॉटमेंट लेटर मिल जाए। राजधानी से संकेत है कि अगले 10 दिनों में यह काम हो जाएगा। एमपीआरडीसी के गलियारों में तो यही चर्चा है। बाकी बाबा बैजनाथ की मर्जी है। हम तो बस बैजनाथ नगरी के निवासियों को शुभकामनाएं देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

चरणलाल जी के नाम पर...

राजनीति में अक्सर आकाओं के नाम पर उगरानी की जाती है। इस काम मे उनके मुंह लगे छर्रे ही समर्थक को चूना लगाते है। शिकार बनते है पद की इच्छा रखने वाले समर्थक। ऐसे ही एक पद अभिलाषी को 20 हजारी का झटका दे दिया। ब्लॉक अध्यक्ष बनवाने के लिए मुलाकात के नाम पर। मगर मुलाकात नही करवाई और न राशि लौटाई। इधर पँजाप्रेमी दबी जुबान से भावी ब्लॉक प्रमुख के नाम ले रहे है। जिसमे संचित शर्मा, रहीम लाला, अभिषेक लाला, बबलू खींची के नाम शामिल है। सतीश मरमट के नाम पर संशय बरकरार है। इसी तरह गब्बर ठाकुर और उमेश वर्मा के बीच ग्रामीण ब्लॉक के बीच रस्साकशी है। देखना यह है कि पँजाप्रेमी जो नाम बता रहे हैं। वह बन पाते है या नहीं। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मेरी पसंद ...

कुछ लोग है जो सिक्के उछालते है।

उनके भी अपने अपने मुगालते है।।

हमको तुम्हारी वफादारी नही चाहिए,

हम बचपन से ही कुत्ते पालते है।

तुम क्या खाक जहर दोंगे मूझे,

हम आस्तीन में सांप पालते है।।

उनको मेरे जेहन में रहना नही है,

हम भी उन्हें दिल से निकालते है।।

मेरे फैसले को कोई मानता नही है,

सबकी अपनी अपनी अदालते है।।

प्रकाश त्रिवेदी

वरिष्ठ पत्रकार उज्जैन