14 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
जन्मदिन की चर्चा...
पिछले सप्ताह एक युवा नेता का जन्मदिन जोर शोर से मनाया गया।यह नेता दिल से पँजाप्रेमी और व्यापार के हिसाब से कमलप्रेमी है। जन्मदिन पर इतने केक टेबल पर रखे थे कि काटने के तलवार का सहारा लेना पड़ा।इस कार्यक्रम के आयोजक के कारण ही B'Day चर्चा का विषय बन गया।खासकर कमलप्रेमियो और हिंदू संगठन के बीच।जिन्होंने इसका आयोजन किया था।उन पर गौ मांस पकाने के चलते रासुका लगी थी।देश का बल संगठन ने शहर बंद करवा दिया था।घर पर बुलडोजर भी चलाया गया था।यह घटना साल 2023 की है। उसके बाद वर्दी ने कार्यवाही की थी। मगर वक्त के साथ सब इसको भूल गए।रासुका से भी मुक्ति मिल गई। अब जन्मदिन पर यह यादे वापस ताज़ा हो गई है।जिससे हमको क्या लेना देना।क्योंकि कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना। इसलिए हम तो युवा नेताजी को अपनी तरफ से बधाई देते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते है ।
विनय न मानत जलाधि...
बाबा तुलसी की यह चौपाई तो याद ही होगी।उस वक्त ,जब प्रभु श्रीराम ने विनय के साथ समुद्र देवता से रास्ता मांगा था।तीन दिन तक गुजारिश की।नतीजा कुछ नहीं निकला।तब भय दिखाने पर ही काम हुआ था।संकुल के गलियारों में इन दिनों यह कहानी और भय बिनु प्रीत न होई गुसांई सुनाई जा रही है।इशारा उज्जवल जी की तरफ है।जो कि आमतौर पर विनय शैली में काम करवाते हैं।जो कि मातहतों को हजम नही होती है।तभी तो गुरु और शुक्र को उन्होंने चौपाई पर अमल किया।सिंहस्थ समीक्षा में ग्रामीण विकास विभाग को और शुक्रवार को दाल बिस्किट तहसील में सचिव -पटवारी को भय का सबक सिखाया।जो कि जरूरी है और हमेशा इस पथ पर चलते रहे कि शुभकामनाएं देते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं ।
इन सबके हामे नी बोलू...
अपने उज्जवल जी शुक्रवार को दौरे पर थे।दाल बिस्किट वाली तहसील के।जहाँ उनको एक वृद्ध महिला ने रोक लिया।सीधे उनसे कहा।म्हारे,तमारो फोन नम्बर दो।उज्जवल जी पूछा ,क्या परेशानी है।बताओ?तो जवाब मिला।इन सबके हामे नी बोलू।तो उज्जवल जी बगैर सवाल किए,तत्काल अपना नाम और नंबर खुद लिख कर दिया।यह भी एक अनोखी बात है।क्योंकि कोई भी आईएएस बनने के बाद अपना पेन दस्तखत/मार्क करने के अलावा नहीं चलाता है।फोन नम्बर लिखकर देना अपनी तौहीन माना जाता है।किंतु उज्जवल जी मिट्टी से जुड़े है। भले ही आईएएस अफसर है,मगर अपने पुराने दिनों को नही भूले है।तभी तो खुद लिखकर दे दिया।अब असली परीक्षा तब होगी।जब उस वृद्ध महिला ने अगर फोन किया और उसकी परेशानी को उज्जवल जी हल कर पाएं।जिसके लिए अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए, हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
जिंदगी में केवल SIR है
न दिन है न रात है न घर बार है/जिंदगी में केवल SIR है।यह स्लोगन हमें एक अधिकारी मैडम ने तब भेजा।जब उनसे यह पूछ लिया कि क्या हाल चाल है। उनके इस स्लोगन ने हर उस इंसान की पीड़ा व्यक्त कर दी।जो इन दिनों इस दर्द से गुजर रहे है।इसके बावजूद सभी टीम वर्क के साथ देर रात तक काम कर रहे है।फिर चाहे sdm हो ,तहसीलदार या बीएलओ।सभी को हमारी तरफ से सेल्यूट।इस एसआईआर की माथापच्ची के बीच बड़नगर तहसील में ससुर ने अपनी बहू का सहयोग करके नया इतिहास रच दिया है।मात्र 15 दिन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बहू ने लक्ष्य पूरा कर दिखाया।कारण ससुर खुद गाड़ी पर बैठाकर घर घर लेकर गए और एसआईआर कार्य पूरा कराया।जिसके चलते sdm ने दोनों का सम्मान किया।जिसके लिए एसडीएम और टीम को हम बधाई देते हुए चुप हो जाते हैं।
विकासपुरुष से भी आगे...
कमलप्रेमियो में इन दिनों एक लिखित आदेश की चर्चा जोरों पर है।आदेश कमलप्रेमी संगठन के ग्रामीण मुखिया का है।जिसको कमलप्रेमी विकास पुरुष से भी आगे की संज्ञा दे रहे है।उदाहरण विकासपुरुष का ही कमलप्रेमी दे रहे है।जो सर्वोच्च पद पर विराजमान है।मगर अपने शहर और संगठन मुख्यालय को आज भी महत्व देते है।जब मौका मिला,कार्यालय आते है।किंतु ग्रामीण मुखिया को फुर्सत नही मिलती है।उस पर साप्ताहिक कैलेंडर निकाल दिया है।सोम से शनि तक कौन ,मुख्यालय पर हाजिर रहेगा।मगर खुद को इससे अलग रखा है।मतलब उनसे मिलना है तो बदबुवाले शहर ही जाना होगा।तभी तो कमलप्रेमियो में यह बोला जा रहा है।भले ही लेटरबाज़ जी कुछ नहीं करते थे, मगर हर रोज आते थे।जबकि नए मुखिया, जो विकास पुरूष के राजनीतिक सखा है।वह विकास पुरूष से भी आगे निकल गए है।कमलप्रेमियो की बात में दम है।मगर जैसे कमलप्रेमी बात करके चुप है,वैसे हम भी केवल लिखकर ,अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
उम्मीद जी से गुहार...
संकुल के तीसरे माले पर विराजमान अपने उम्मीद जी सबकी परेशानियों का निराकरण करते है।उनके पास कोई भी पहुँच जाएं, सबको न्याय मिलता है।लेकिन उनके अधीन काम करने मातहत किससे गुहार लगाएं।जिससे इन सभी को उस छह फुटिये से मुक्ति मिल सके,जो सभी को परेशान करता है।बेचारे... उम्मीद जी को शिकायत भी नहीं कर सकते है।वह तो अपने उम्मीद जी ने इस छह फुटिये को मुँह नही लगाया है।तो थोड़ा बहुत मातहत बोल भी रहे है।वर्ना, पिछले मुखिया ने ऐसा मुँह लगा रखा था कि कोई भी मातहत कुछ नहीं बोलता था।छह फुटिये की सेवा शुरुआत से लेकर अभी तक की यात्रा पर एक शिकायत भी चुप को मिली है।गुमनाम शिकायत में इनकी नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए गए है। गैर विभाग का कर्मचारी होकर राजस्व विभाग में इंट्री होना ,गलत तरीके से पदोन्नति लेना,आर्थिक लाभ उठाना,आदि की तथ्यों सहित यह शिकायत है।फिलहाल सभी मातहतों की गुहार है।छह-फुटिये से मुक्ति दिलाओ ।फैसला अपने उम्मीद जी को लेना है और हमको आदत के अनुसार बस चुप रहना है।
बबली-फोन-प्रोटोकॉल...
हेडिंग हमारे पाठकों को अटपटी लगेगी।मगर तीन घटना को जोड़कर यह शीर्षक लिखा है। अब सीधे मुद्दे पर आते है।
1 -अपनी बंटी-बबली की जोड़ी से तो मंदिर वाले सभी परिचित है।इनके लिए हमेशा एक ई-कार्ट सुरक्षित रहती है।जिसका उपयोग कोई और नहीं कर सकता है।शायद शुक्रवार को उनके वाहन को एक वर्दीधारी अधिकारी ले गए।इधर उसी वक्त बंटी-बबली को मंदिर के अंदर जाना पड़ा।मगर आरक्षित वाहन गायब था।अपनी बबली जी को पैदल चलना पड़ा।नतीजा..बाकी ई -कार्ट चालकों को उनका गुस्सा झेलना पड़ा।
2- मंदिर जाने वालों को शायद याद होगा।त्रिनेत्र के सामने से चढ़ाई करके भारत माता मंदिर से गुजरना पड़ता है।जो कि एक पॉवर फुल ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है।इस रास्ते को बंद करने का प्रयास अपने फटाफट जी ने किया।बस,फिर क्या था।फोन घनघना उठे।उच्च स्तर से।नतीजा: एक फोन आया और रास्ता बंद करने का प्रयास असफल हो गया।
3-अपने फटाफट जी ने एक और नवाचार करने की कोशिश की ।प्रोटोकाल ऑफिस को बदलने की।जो वीआर के समीप था। उसको त्रिनेत्र लेकर आ गए।मगर व्यवस्था सुधरने के बदले गड़बड़ा गई।परिणाम:दो कदम आगे-चार कदम पीछे वाला सामने आया।अब वापस प्रोटोकॉल को पुरानी जगह शिफ्ट करने के आदेश हो गए है।अब पक्का हमारे पाठकों को बबली-फोन-प्रोटोकॉल की हेडिंग समझ आ गई होगी।इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
112 की ड्यूटी...
अपने कप्तान जी इन दिनों चर्चाओं में है।हाथोंहाथ वर्दीधारी को पुरस्कार देने के लिए।मगर किसी को अगर सज़ा मिले, तो किसी को पता नहीं चलता।पिछले सप्ताह एक थाना प्रभारी को उन्होंने सुबह सुबह सज़ा सुना दी।वह भी उस वक्त,जब वह सेट पर अपराध की जानकारी ले रहे थे।यह डेली-रूटीन है।इस दौरान एक थाना प्रभारी से उन्होंने सवाल किया।रात्रि गश्त में कौन था? जवाब मिला कि पूछकर बताता हूँ।यह सुनकर कप्तान आश्चर्य में पड़ गए।बस,फिर क्या था।तत्काल सज़ा सुना दी।अनोखी सज़ा।एक थाना प्रभारी के लिए ऐसी सजा शर्मनाक होती है।कप्तान ने आदेश दिया कि आज पूरे आठ घण्टे की ड्यूटी डायल 112( पहले 100 थी) गाड़ी में बैठकर करोगे।वर्दीधारियों में जिसके बाद चर्चा है।ऐसी सज़ा आजतक किसी थानाप्रभारी को नहीं मिली है।अब यह थानाप्रभारी कौन है?जिसकों यह सजा मिली।इसको लेकर वर्दी चुप है।तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
सामान की पैकिंग...
कोई भी अधिकारी कब अपना सामान पैक करता है! इस सवाल का सबसे आसान जवाब यही है।जब उसको लगता है कि रवानगी पक्की है।उदयन-मार्ग पर बने सरकारी बंगलों से निकलकर यह चर्चा,संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है।दबी जुबान से कर्मचारी बोल रहे है। पिछले हफ़्ते अहिल्या नगरी से मैडम का आगमन हुआ था। जिन्होंने अपनी देखरेख में कुछ सामान को इस तरीके से पैकिंग के निर्देश दिए।जैसे साहब का ट्रांसफर पक्का हो गया है। अब इसमें कितना सच -झूठ है। नए साल तक सब क्लियर हो जाएगा।तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
दोनो हाथ में लड्डू..
पहला सुख निरोगी काया वाले विभाग के गलियारों में चर्चा है।जब मुखिया ही दोनो हाथ मे लड्डू लेगा,तो बाकी मातहत भी अनुसरण करेंगे।तभी तो मातहत बोल रहे है।मगर खुलकर नही बल्कि दबी जुबान से।
उन्होंने अगर अपनी निजी गाड़ी खुद के लिए सरकारी ठप्पा लगवा कर दोहरा लाभ लिया है।तो हमने अपने वाहन को लगवाकर क्या गलत किया है।इसमें इशारा अपने पाटला जी की तरफ है।जो खुद का निजी वाहन टैक्सी के रुप मे उपयोग कर रहे है।जिसका खर्च शासन के खजाने से हर महीने वसूल कर रहे है।मतलब हींग लगे न फिटकरी की तर्ज पर।इतना ही नही अटैचमेंट के नाम पर अलग जेब गर्म कर रहे है।जबकि वीसी में राजधानी में बैठे अफसरों को बोल चुके है।अटैचमेंट खत्म कर दिया है।लेकिन एक संविदा लैब टेक्नीशियन को अटैच करने का मामला शिकायत के रुप मे उज़ागर हो चुका है।कारण जिस मैडम से 50 हजारी लेकर जेब गर्म की,उसका वेतन 6 महीने से नही निकला है।उसने सब जगह लिखित में शिकायत कर दी।जिसके बाद वेतन आहरण के लिए अपने पाटला जी ,दवाब बना रहे है।देखना यह है कि उज्ज्वल जी तक पहुँच चुके इस मामले में उनको सफलता मिलती है या नही? तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
लापरवाही में अव्वल
वैसे तो कायदा यह कहता है।विकास पुरूष के गृह नगर में विकास से जुड़े विभागों को काम में अव्वल रहना चाहिए।मगर उल्टा हो रहा है। लापरवाही में अव्वल की होड़ मची है।वह भी सिंहस्थ से जुड़े कामों में।करीब आधा दर्जन विकास विभागों के प्रमुख नियम की अनदेखी कर रहे है।नियम यह है कि निर्माण कार्य की प्रोग्रेस को सरकारी पोर्टल पर हमेशा अपलोड करना है।
लेकिन किसी को इसके लिए फुर्सत नही है।अपने उम्मीद जी कई दफा ताकीद कर चुके है।जो हफ्ते में तीन दिन 2028 की समीक्षा करते है।हालांकि उन्होंने तो जनता भी प्रगति-रिपोर्ट देख सकें, इसका दावा किया था।मगर सरकार को ही देखने के लाले पड़ रहे है।ऐसे में अब लास्ट अवसर दिया गया है।लापरवाही करने वालो को।वरना नोटिस और कार्यवाही होगी। देखना यह है कि विभाग प्रमुख इसके बाद भी सुधरते है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
अंदरखाने की खबर...
हमारे पाठकों ने ऊपर लिखी लाइन अकसर पढ़ी होगी। हम ख़बरची इसको लिखकर खुश होते है।मगर असली अंदरखाने की खबर वही होती है।जिससे की आर्थिक फायदा हो।जैसे कि ग्रीन फील्ड रोड को बनाने की खबर।यह अंदरखाने की खबर अपने ढीला-मानुष को बहुत पहले से थी। तभी तो उन्होंने इसका फायदा उठाया।कमलप्रेमी संगठन के मुखिया रहते हुए।जहाँ से यह मार्ग गुजरने वाला था।वहाँ उनकी जमीन थी।मगर कृषि भूमि थी।उन्होंने अंदरखाने से मिली खबर के बाद पिछले साल इन्ही दिनों भूमि को व्यवसाय में परिवर्तन करवा लिया।जिसका फायदा अब होगा।मुआवजा जो मिलेगा,वह जोरदार और लाभदार होगा।जबकि बाकी अन्नदाताओं को कृषि वाला ही फायदा होगा।ऐसा अपने कमलप्रेमी बोल रहे है।मगर हमको आदत के अनुसार चुप रहना है।
मेरी पसंद
मैंने बदतमीज लोगों से तमीज सीखी है
बेअदब लोगों से अदब सीखा है
और बहुत बोलने वाले लोगों से
चुप रहना सीखा है |