08 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

08 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

किसने बना दिया तुमको...

घटना उस सम्मेलन की है। जो पिछले सप्ताह सम्पन्न हुआ। 22 जोडो को आशीर्वाद देने संतो को बुलाया गया था। इनकी बैठक व्यवस्था की जिम्मेवारी अपने स्मार्ट निखट्टू जी को सौपी गई थी। कुर्सियां भी लग गई थी। मगर दूसरे लोग आसीन हो गए। अपने निखट्टू जी बस खुद को स्मार्ट दिखाने में लगे रहे। संतो का आगमन हुआ और कुर्सियां भरी दिखी। तो इस व्यवस्था को संभालने वाले अपने गोल-मटोल जी का पारा चढ गया। जो कि जायज था। निखट्टू जी को देखकर उन्होंने कह दिया। किसने बना दिया तुमको डिप्टी कलेक्टर! यह सुनकर अपने निखट्टू जी चुपचाप हो गए। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मावा नगरी में चर्चा...

यह तो सभी को पता है। बदबूवाले शहर का रास्ता मावा नगरी से होकर जाता है। इस नगरी में पिछले सप्ताह वर्दी ने एक कार पकडी थी। जिसमें विशेष वर्ग के युवक सवार थे। पेट्रोल पंप से गाडी को पकडा था। जिसकी तलाशी में मादक पदार्थ मिले थे। लेकिन पकडाते ही युवकों ने फोन करके एक शख्स को बुला लिया। जिसके बाद तोल -मोल का खेल शुरू हुआ। जनचर्चा है कि मादक की जगह कच्ची सोमरस रखने पर बात बन गई। लेकिन इसके लिए मात्र 20 पेटी खर्च करनी पडी। वर्दीधारी हमारे भरोसेमंद सूत्र का कहना है। एमडी पकडने की यह घटना करीब 10 से 12 दिन पुरानी है। एमडी को सोमरस में तो बदल दिया गया। मगर जिस धारा में मामले को दर्ज किया गया। उसमे फिलहाल आरोपी जमानत की कोशिश में लगे हुए है। ऐसी चर्चा मावा नगरी निवासियों में जमकर सुनाई दे रही है। सच-झूट का फैसला जांच करवाकर कप्तान ले सकते है और हम बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

हाइनेस को भी झूठा जवाब...

अपने हाइनेस ने पिछले दिनों एक पत्र लिखा था। स्वास्थ्य मुखिया को। जिसमे उल्लेख किया था। एक शख्श को स्थापना शाखा से हटाने का। जिसको हटाने के लिए पत्र लिखा। वह मलेरिया का कर्मचारी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉ साहब का प्रिय कमाऊ है। इसलिए उसको अभी तक तो नही हटाया गया है। जबकि हाइनेस को बता दिया कि आदेश का पालन कर दिया है। इधर अंदर खाने की खबर है। प्रदेश के स्वास्थ्य मुखिया भी किसी का अटैचमेंट नही कर सकते है। लेकिन चरक के मुखिया ने इस नियम की भी धज्जियाँ उडा रखी है। अटैचमेंट के नाम पर जेब गर्म करने का धंधा खूब बढिया चल रहा है। हींग लगे न फिटकरी-रंग (हल्का हरा) भी चोखा आता है। ऐसी चर्चा चरक के गलियारों में सुनाई दे रही है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

...जो हमने दावत की!

किसी शायर ने अदावत पर खूब लिखा है। गौर फरमाएं। ये भी एक बात है अदावत की/ रोजा रक्खा जो हमनें दावत की। इन दिनों यह शेर अपने पँजाप्रेमी सुना रहे है। निशाने पर अपनी पँजाप्रेमी बुआ जी है। जिन्होंने एक दावत का आयोजन किया था। अवसर था राष्ट्रीय पँजाप्रेमी यूथ विंग की मुखिया के आगमन का। अपनी बुआ जी ने पोस्ट अपलोड कर दी। मेरे निवास पर रात 9 बजे मुखिया आएगी। भोजन भी करेंगी। करीब आधा दर्जन पँजाप्रेमी नेत्री ओर 100 युवा घर पहुँच गए। इंतजार हो रहा था। फ्लाइट अहिल्या नगरी उतरे। जो कि 8:20 पर उतरी। किन्तु उन्होंने बुआ जी की दावत को तवज्जों नही दी। बाबा की नगरी आई। दर्शन किए। वापस लौट गई। तभी तो पँजाप्रेमी ऊपर लिखा अशआर सुना रहे है। कुछ अदावत रखने वाले तो दिल के अरमा आंसुओं में बह गए.. तक बोल रहे है। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं

डांसिंग कार में पकडे गए...

हालांकि यह घटना पडोसी संभागीय मुख्यालय की है। मगर इस घटना के हीरो का ताल्लुक बाबा की नगरी से भी है। जो कभी लाइन के सूबेदार हुआ करते थे। उनका तकिया कलाम था। जलती लकडी मत उठाओ। लम्बे समय तक पदस्थ रहे फिर अहिल्या नगरी की लाइन के बॉस हो गए। यह खुद देर रात की चेकिंग के शिकार हो गए। वह भी अपनी एक मित्र के साथ। उस वक्त जब कार खडी हुई थी। मगर डांस (हिल-ढुल)कर रही थी। रात के गश्तीदल ने पहले वीडियो बना लिया। फिर दरवाजा खटखटाया। तो रंगे हाथ पकडे गए साहब ने उल्टा रौब जमाया। बस फिर क्या था। आपस मे तू -तू-मैं-मैं से बढकर बात क्षेत्र के थाना प्रभारी तक पहुँची और वीडियो भी। जिसके बाद डांसिंग कार के हीरो साहब की घिग्घी बंध गई। परिचय दिया। वर्दीधारी साहब हूँ। बस फिर क्या था। मामला वर्दी की इज्जत का था। तो आपस मे सुलट गया। वीडियो डिलीट का भी दावा किया गया। जिसमें कितना सच है। वर्दी ही बता सकती है। बाकी हम आदत के अनुसार चुप रहेंगे।

सख्ती दिखानी होगी...

नया साल आने में कुछ ही दिन शेष बचे है। फिर सिंहस्थ के लिए मात्र 24 महीने। इसमें भी मानसून के 6 महीने घटा दो तो केवल 18 महीने। 2028 के लिए विकास पुरुष ने नेतृत्व वाली टीम तो सही चुनी है। उम्मीद जी,उज्ज्वल जी, एंग्रीमैन वाली। मगर इनके अंडर में ग्राउंड लेबल पर काम करने विभागों के मुखिया डफर है। हफ्ते में 3 दिन मंगल-गुरु-शनि के दिन समीक्षा होती है। सिंहस्थ से जुडे कामों की। गुरु को लोनोवि सिंहस्थ विंग का नम्बर था। जिसको एलिवेटेड ब्रिज बनाना है। निकास और इंद्रानगर से। तो कंसल्टेंट के साथ विभाग ने प्रजेंटेशन दिया। जो कि बकवास की श्रेणी का था। कोई सर्वे नही किया गया। शहर के रास्तों को घूमकर नहीं देखा गया। प्रेक्टिकल परेशानी पर गौर नहीं किया गया। बस लेपटॉप पर अधूरे ज्ञान के साथ बना दिया गया। जिसे देखकर जब सवाल खडे हुए। तो विभाग के मुखिया बगले झाँकने लगे। 900 खोखे का यह प्रोजेक्ट है। केंद्रीय मंत्री स्वीकृति दे चुके है। अब ऐसी योजना बनाने वालों पर विकास पुरूष ने अगर सख्ती अभी से नही दिखाई। तो आगे क्या होगा? यह अपने विकासपुरुष, हमसे बेहतर जानते और समझते है। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है

ठीक से काम करो...

शायद हमारे पाठको को बहुत पहले दिखाए जाने एक विज्ञापन की चर्चित लाइन याद होगी। पूरे घर के बदल डालूंगा। लाइट के एक बल्व का यह विज्ञापन था। इसका प्रयोग पिछले दिनों अपने विकासपुरुष ने किया। उस वक्त जब वह बैठक ले रहे थे। अपनी विधानसभा के नगरसेवकों की। विषय था मतदाता गहन परीक्षण सूची का। दोपहर 3 बजे बैठक बुलाई थी। इसमे उन्होंने पहले तो सबसे काम की प्रगति पूछी। फिर सबको सही तरीके से काम करने की सलाह दी। अंत मे उन्होंने उदाहरण दिया। पिछली बार डेढ दर्जन बदले थे। इस बार कही पूरे 2 दर्जन नही बदलना पड जाएं। तभी तो नगरसेवकों में उस विज्ञापन की चर्चा सुनाई दे रही है। पूरे घर के बदल डालूंगा। विकासपुरुष की बात से हम भी सहमत है। जो काम नहीं कर सकता-वह घर बैठे। अब देखना यह है कि कितने नगरसेवक इस कसौटी पर खरे उतरते हैं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मैं आईएएस से भिड लिया था....

हेडिंग पडकर हमारे पाठकगण यह अंदाजा नही लगाए। हम अपनी तारीफ में कसीदे पड रहे है। हमारी क्या बिसात। किसी आईएएस से भिड जाएं। अदने से कलमकार है। आईएएस तो दूर की बात हम किसी बाबू का कुछ नहीं बिगाड सकते है। आईएएस से भिडने की बात तो संकुल के एक बाबू, दम ठोककर कहते है। खुद की तारीफ में। हालांकि इसके नतीजे में बाबू को ग्रामीण इलाके में सजा काटनी पडी थी। फिर वापस लौट आए है। दूसरे माले पर अपने अट्टू जी के सामने वाले कमरे में विराजमान है। आजकल इतने पॉवर में है कि अपने लिए एक सहायक भी रख लिया है। जो कि निजी है। इसको वेतन कहाँ से मिलेगा इस पर भी सवाल खडे हो रहे है। इससे ज्यादा चिंताजनक सवाल गोपनीयता और ऊपरी  इंकम  को लेकर सुनाई दे रहा है। दबी जुबान से यह बोला जा रहा है। जिस मावे को ईमानदार टीम के मुखिया  पकडते हैं। प्रकरण बनाते है। उन मामलों में आईएएस से भिडने की बात कहने वाले बाबू ना केवल गोपनीय फाइल तक दिखा देते है, बल्कि जुर्माना कम करवाने के नाम पर सेटिंग भी कर लेते है। जिससे अपने ईमानदार टीम के मुखिया भी पीडित है। ताज्जुब की बात यह है कि अट्टू जी को यह सब जानकारी है। मगर वह चुप है। तो हम भी उनकी तरह चुप हो जाते हैं।

गुणवत्ता नहीं तो नोटिस पक्का....

अपने उम्मीद जी की बैठकों से कोई चुटीली खबर भूसे के ढेर से सुई तलाश करना है। सप्ताह में तीन दफा 2028 को लेकर बैठक लेते है। मजाल है कोई गुस्सा-फटकार उनकी बोलचाल में आ जाएं। हमारे सूत्र भी रटा-रटाया जवाब देते है। उम्मीद जी की बैठक में चुटकी की उम्मीद मत रखा करो। मगर शनिवार को हुई बैठक में उनका मौनव्रत आखिर टूटा। मगर गुस्से के बदले नसीहत वाले रुप में। दरअसल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए अलग-अलग टीम बनी है। उनको उन्होंने साफ लफ्जों में समझा दिया। अगर गुणवत्ता परखने में लापरवाही हुई तो अगली बार से नोटिस का जवाब देने को तैयार रहना। इतना कहकर वह चुप हो गए और हम उनको इतना बोलने के लिए साधुवाद देकर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

अगर यह घटना रात में होती....

बाबा महाकाल जो करता है। भले के लिए करता है। तभी तो चिंतामन मार्ग पर बने शोध संस्थान में घटना दिन के वक्त घटी। जहाँ पढने वाले छात्रों को कीडे वाली चनादाल परोस दी गई। दाल बनाने वाले खानसामा ने बगैर देखे दाल बनाई और तपेले पर ढक्कन रखकर गायब हो गया। भोजन के वक्त जब बच्चों को दाल परोसी गई। तो खुलासा हुआ। हंगामा मच गया। खानसामा गायब था। घटना पिछले महीने की है। जिसकी शिकायत हुई। फिर सहायक प्रशासक बंटी जी ने खानसामा को नोटिस थमा दिया है। जवाब मांगा है। अब सोचिए अगर घटना अगर रात के भोजन में होती? यह सवाल इसलिए कि संस्थान में अकसर रात के समय लाइट गायब रहती है। तो अंधेरे में कीडे नजर ही नहीं आते। ऐसे में आगे क्या होता? कल्पना करने में ही दिल घबराता है। इसीलिए तो शुरुआत में लिखा। बाबा महाकाल जो करते है,अच्छा करते है। जिसके लिए हम बाबा के चरणों मे शीश झुकाते हुए, आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

दिल्ली में शिकायत...

देश की राजधानी के उच्च सदन में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। विषय प्रोटोकॉल उल्लंघन है। दर्ज करवाने वाले अपने वजनदार जी है। उनका तर्क है। केंद्र की योजना से स्वीकृत वाणी के शुभारंभ पर उनको प्रोटोकॉल नहीं दिया गया। निमंत्रण पत्र में उनका नाम नहीं था। इस शिकायत को उच्च सदन की समिति ने गम्भीरता से लिया है। शिकायत की एक कॉपी प्रदेश के बडे साहब को प्रेषित की है और कार्यवाही का अनुरोध किया है। अब यह देखना रोचक होगा कि आगे क्या होगा। तब तक हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

तनातनी की चर्चा...

मंदिर के गलियारों में चर्चा आम है। अपने फटाफट जी और इन्दौरीलाल जी के मधुर संबंध में दरार पड गई है। इसके पीछे कोई निजी वजह नहीं है। बस निर्माण कार्य की गुणवत्ता को तनातनी है। फटाफट जी ने भुगतान करने से मना कर दिया है। जो कि करीब कई खोखो से ऊपर का बताया जा रहा है। इन्दौरीलाल जी का तर्क है। कार्य गुणवत्तापूर्ण है-जबकि फटाफट जी की निगाह में गुणवत्ताहीन है। इसके अलावा अपने एंग्रीमैन ने भी लगभग पौने तीन खोखे का बिल थमाया है। पानी की वसूली का। जिसके चलते बात अपने उज्ज्वल जी तक पहुँच गई है। इसीलिए उज्ज्वल जी शनिवार को मंदिर भी गए थे। अपनी आंखों से सच-झूट का निरीक्षण करने। इस बीच एक खबर यह भी मंदिर में उड रही है। अपने फटाफट जी मंदिर की रोज-रोज आने वाली परेशानियों से परेशान हो चुके हैं। तो वह खुद अब देवी अहिल्या नगरी जाने का मन बना चुके है। सम्भवत: नए साल के आगमन से पूर्व वह विदाई ले लेंगें। बाकी बाबा महाकाल की मर्जी के अनुसार हमकों तो चुप ही रहना है।

आईपीएस को फटकार...

वीआईपी सम्मेलन में भीड को संभालते हुए एक आईपीएस का पारा कई दफा चढ गया। उन्होंने कई बार वर्दी का रौब दिखा दिया। इसे अपुन तो इंसान की स्वाभाविक प्रक्रिया मानते है। लगातार दवाब में कोई भी ऐसा कर सकता है। मगर विकासपुरुष के साथ खडे किसी इंसान को हटाना,यह स्वाभाविक नहीं माना जा सकता है। मगर ऐसा हुआ। अफसर के सिर पर न जाने कौन सी मातारानी सवार थी। वह भी शाम को होटल के कार्यक्रम में। मंच पर तस्वीर वीवीआईपी खिंचवा रहे थे। तभी इस वर्दीधारी अफसर ने एक का हाथ पकडकर हटा दिया। बस फिर क्या था। विकासपुरुष ने अपने अंदाज में अफसर को फटकार लगा दी। मंच से हटाने को कह दिया। तब अपने कप्तान ने मोर्चा संभाला। अपने जूनियर को अलग ले गए। नसीहत दी। जूनियर की समझ में आ गया। उसके बाद से मनोरंजन जी बिलकुल चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है

रवानगी की चर्चा...

हमको पता नहीं है कि इन बातों में कितनी सच्चाई है। मगर यह दबी जुबान से बोला जा रहा है। अपने अल्फा जी अब बाबा की नगरी से जाने का मन बना चुके है। अब वह राजधानी जाना चाहते है। इसी तरह की बात स्मार्ट निखट्ट जी को लेकर सुनाई दे रही है। मगर उनकी रवानगी के पीछे कारण उनकी इच्छा नहीं, बल्कि कार्यशैली है। काम से ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना उनकी पहली पसंद है। इसलिए उनको भी हटाया जा सकता है। अब इस चर्चा के सही -गलत पर तो मोहर अपने विकास पुरुष ही लगा सकते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

बडे साहब का सवाल.....

वीआईपी सम्मेलन में राजधानी से सबसे बडे साहब आये थे। भले ही अल्प समय के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने एक सवाल किया। सवाल अपने उज्ज्वल जी को लेकर था। काम कैसा कर रहे है, तो बडे साहब को हम बता देते है। आमजनता के लिए उज्ज्वल जी उदारमना है। अभी अभी उन्होंने एक दृष्टिहीन परिवार की परेशानी सुनते ही तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। शासन का मकसद भी यही है। सरकारी और विकास के काम तो चलते ही रहेंगे। आम जरूरतमंद को तत्काल सहायता मिलना ही अच्छा काम माना जाता है। इसके अलावा उज्ज्वल जी ने उन छात्रों का भी सोचा। जो बडे होकर आईएएस आईपीएस बनने का सपना देखते है। मगर मार्गदर्शन के आभाव में पिछड जाते है। उज्ज्वल जी ने इसकी शुरुआत की है। संकल्प क्लब के नाम पर। हर रविवार इसकी क्लास लगती है। ऐसा पहली दफा हुआ है। अब शायद बडे साहब को उज्ज्वल जी की यह कार्यशैली पसंद आए। यह उम्मीद रखते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मेरी पसंद ....

 खरीद रहा हूं कुछ सर्दियों के कपडे

..... सुनों......!!!

....रंग तुम्हारे होंठो का लूं या तुम्हारे गालों का ....