23 मार्च 2026 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

23 मार्च 2026 (हम चुप रहेंगे)

1 महीने का वेतन काटो....
सिंहस्थ के कामों को लेकर उम्मीद जी और उज्ज्वल जी अब ज्यादा सख्त हो गए है। जरा सी लापरवाही-पूरे महीने का वेतन कटवा सकती है। पिछले दिनों स्थाई  कामो के अलावा अस्थाई कामों को लेकर भी बैठक हुई। कहाँ -कहाँ अस्थाई काम होना है। उसकी रूपरेखा बनाने पर जोर दिया गया।मतलब कच्ची सड़क-समतलीकरण आदि। बारिश खत्म होने के बाद इस पर कार्य शुरू होगा। इस बैठक में एक कार्यपालन यंत्री मैडम की कार्यशैली पर सवाल उठे। अपने उम्मीद जी ने बगैर देर किए निर्देश दिए। इनका 1 महीने का वेतन काट लिया जाए। जो कि करीब डेढ़ पेटी बनता है। देखना यह है कि मैडम जी ,इससे बचने के लिए क्या जुगाड़ लगाती है।तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

अजब-गजब-राजनीति...
राजनीति को समझना आमजनता के लिए दुश्वार है। इसमे कभी भी-कुछ भी हो सकता है। जैसे गुरुवार की शाम को हेलीपेड पर हुआ। पिछले कुछ दिनों से अपने हाइनेस बयानबाज़ी के कारण अलग -थलग नजर आ रहे थे। मंगलवार को जब विकासपुरुष आए थे। तब उन्होंने स्वागत तो किया था विकासपुरुष का। अंगवस्त्र पहनाकर। मगर तब वह खुद ही झेंपे हुए थे। इसलिए ज्यादा खुश नहीं थे। विकासपुरुष ने भी कोई बात नहीं की थी। मगर जब गुरुवार को दोनो मिले। तो विकासपुरुष ने खुद फोटोग्राफर बुलवाया।जिसके बाद  एक तस्वीर सामने आई। जिसमें दोनों एक दूसरे का हाथ थामे जोरदार ठहाका लगा रहे है। उनके समीप दालवाले नेताजी भी इसमे साथ दे रहे है। दो दिन के अंदर यह नया अंदाज राजनीति के असली रंग को उजागर कर रहा है।इसके पीछे की क्या कहानी है। यह तो ठहाका लगाने वाले दोनो मान्यवर ही जानते हैं। मगर इतना जरूर अपने कमलप्रेमी बोल रहे है। इसी दिन सुबह कमलप्रेमी मुख्यालय पर एक घटना हुई थी। जिसमें हाइनेस ने अपने वजनदार जी को खूब खरी -खोटी सुनाई थी और शाम को ठहाका लगाते दोनो नजर आएं।यही राजनीति का असली चेहरा है।अपने कमलप्रेमियो का तो यही कहना है। मगर हमको आदत के अनुसार बस चुप रहना है।

भूख है तो सब्र कर,रोटी नहीं तो...
हिंदी के ग़ज़लगो स्व.दुष्यंत ने एक अशआर 1975 में लिखा था। आपातकाल के दौरान। 
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ
आजकल दिल्ली में है जेर-ए-बहस ये मुद्दआ
यह अशआर इन दिनों अहिल्या नगरी संभाग के एक जिले में खूब चर्चा का विषय है। कारण-अपनी चटक मैडम जी का बयान है। जो उन्होंने गैस किल्लत के चलते दे दिया। उन्होंने रोटी-पराठे से तौबा करने की अपील कर डाली।ताकि ईंधन की बचत हो।मगर मैडम जी की यह सलाह शायद जनता को पसंद नहीं आई। जिसके बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रहार हुए। यह जनता है। किसी ने तारीफ करी तो किसी ने तंज कसा। अब जनता की जुबान तो पकड़ नहीं सकते है। क्योंकि यह वही जनता है। जो आपातकाल में यह नारा लगा चुकी है। सिंहासन खाली करो-जनता आती है। तो ईंधन बचत की सलाह पर तो कुछ भी लिख/बोल सकती है। जिस पर हमारा तो क्या  किसी का  भी हक़ नहीं बनता है। क्योंकि अब  आपातकाल नही लोकतंत्र है। तो हम भी उस जिले की जनता का सम्मान करते हुए, आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

मैडम की हिम्मत ..
यह घटना मंगलवार की है। स्थान हेलीपेड है। प्रदेश के प्रथमसेवक का आगमन हो चुका था। wellcome के बाद उनका काफिला सर्किट हाउस पहुँच गया।अब इंतजार अपने विकासपुरुष का हो रहा था। दोनो हाथों की उंगलियों की गिनती भर कमलप्रेमी स्वागत के लिए मौजूद थे। सुरक्षा के लिहाज से एक वर्दीधारी राजपत्रित मैडम जी अलर्ट थी। उड़नखटोला उतरा। पहले स्वागत उम्मीद जी,अल्फा जी,उज्ज्वल जी ,कप्तान जी ने किया। इधर अंदर जाने के लिए सभी कमलप्रेमी तैयार थे। जिसमें दालवाले नेताजी ,अपनी बहन जी आदि शामिल थे। ड्यूटी कर रही मैडम ने सबको रोक दिया। बस दालवाले नेताजी को इजाजत दी। यह देखकर अपने दालवाले नेताजी का पारा चढ़ना स्वाभाविक था। उन्होंने वही किया। जो संगठन के मुखिया को करना चाहिए। उन्होंने रास्ता रोकने वाले बेरिकेट को ही एक झटके में गिरा दिया। यह देखकर एक एडिशनल एसपी ने दौड़ लगाई। मामला समझा और सबको विनम्रता के साथ अंदर जाने के लिए कहा। ऐसा यह नजारा देखने वाले हमारे विश्वसनीय वर्दीधारी का कहना है। मगर हमकों तो आदत के अनुसार बस चुप ही रहना है

बंद कमरे में निर्देश...
मंगलवार को जब विकासपुरुष आए थे। तब उन्होंने वीसी के पहले बंद कमरे में 10 मिनिट चर्चा की। इस चर्चा में उम्मीद जी,उज्ज्वल जी,कप्तान जी,एंग्रीमैन, बहन जी और दालवाले नेताजी शामिल थे।विषय 2028 था। 50 किमी सड़क बनाने के निर्देश दिए। मुवावजा ज्यादा मिले किसानों को। इसका विशेष ध्यान रखें। अपने उम्मीद जी ने इसकी जिम्मेदारी ली है। पिछला अनुभव कड़वा रहा है। सरकार को पीछे हटना पड़ा था। इसलिए अब उम्मीद जी सड़क निर्माण से पहले उन किसानों से बैठक करेंगे। जो इससे प्रभावित होने वाले हैं। मुआवजा राशि ज्यादा देने के आदेश पहले ही विकासपुरुष ने दे दिए है। अब देखना यह है। कब किसानों की बैठक बुलाई जाती है और अन्नदाता जादूगर उम्मीद जी के जादू से कितना प्रभावित होते है। फैसला आने वाला समय करेगा। तब तक चुप रहना हमारे लिए अच्छा होगा।

मुख्यमंत्री कैसा हो....
यह कोई हमारा सवाल नहीं है? जिस पर पाठकगण सोचे कि चुप कोई सर्वे कर रहा है। यह तो एक नारा है। जो बुधवार रात में अपने हाइनेस की विधानसभा में लगा।इस नारेबाजी से उनका कोई लेना-देना भी नहीं है।दरअसल नारा लगाने वाले पँजाप्रेमी थे। जो कि पूर्व मंत्री बाबा साहब के आगमन से उत्साहित थे। पूर्व मंत्री अपने मुंगेरीलाल जी के निवास पर गए थे। तब मुंगेरीलाल के किसी समर्थक ने नारा लगा दिया। उनको खुश करने के लिए। हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो-बाबा साहब जैसा हो! जैसे ही यह नारा लगा। तत्काल बाबा साहब पलटे। उन्होंने नारा लगाने वाले के मुँह पर हाथ रख दिया। जिसके बाद सभी पँजाप्रेमी समझ गए और चुप हो गए। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं |

बिना बल का एसपी
हेडिंग पढ़कर चुप के पाठकगण यहीं अंदाजा लगाएंगे। हम पुलिस की तरफ इशारा कर रहे है। लेकिन हम तो आगजनी होने पर इसको बुझाने का काम करने वाले विभाग की बात कर रहे है। जिसमें एसपी का पद होता है। इस पद पर अपने स्मार्ट पंडित विराजमान है। देवीआहिल्या नगरी में। जो कि कहने को एसपी है। लेकिन अमला शून्य है। मतलब सीधी भाषा में बिना फ़ौज के सरदार है। अभी अभी जब आग से 6 लोगों की मौत हुई। तो उनका यह राज खुला। असली सरदार तो एक आईएएस है। जिन पर  अपने मंद-मुस्कान जी मेहरबान है। तभी तो अपने इशारा जी के आदेश के बाद भी स्मार्ट पंडित को केवल सरदार बना दिया, फ़ौज नही दी। कारण- मंद मुस्कान जी ने सिफारिश सीधी भर्ती आईएएस की थी। मगर अपने पंडित जी ने जुगाड़ लगाकर अपना नाम जुड़वा लिया था। जनवरी में आदेश हुआ था। मलाईदार विभाग है। इधर घटना के बाद फायर बिग्रेड 90 मिनिट देरी से अलग पहुँची। जिस पर अपने विकासपुरुष ने सवाल भी उठाया। मंद-मुस्कान जी के सामने। उन्होंने क्या जवाब दिया। इसका तो पता नहीं चला है। मगर देवीआहिल्या नगरी में यह चर्चा है कि मंद-मुस्कान जी ने राजधानी के बड़े-साहब से यह जरूर कहा है।वह अहिल्याबाई नगरी में कम्फर्ट महसूस नहीं कर रहे है। इधर जल्दी ही सूची भी जारी होना है। देखते है आगे क्या होता है। तब तक बिना अमले के एसपी के दुःख को समझते हुए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

डर का अहसास दिखा..
अपने एंग्रीमैन और इन्दौरीलाल दोनो निडर होकर काम करते है। तोड़फोड़ करनी हो , कार्यविभाजन या फिर कुछ भी काम हो। दोनो की कार्यशैली समान है। डरते नहीं हैं। जैसे पिछले दिनों शिवाजी भवन में कार्यविभाजन कर दिया। ऊपर से नीचे तक। हालांकि एंग्रीमैन के इस कदम से नाराजगी भी उभरी। किन्तु उन्होंने लोड नहीं लिया। इन्दौरीलाल भी लोड नही लेते है। मगर यह दोनो गुरुवार की शाम को डर के शिकार हो गए। कारण-मौसम का मिजाज था। बारिश के चलते दिल में धुकधुकी और चेहरे पर ख़ौफ़ नजर साफ आ रहा था। वजह- दोनो के कार्यक्रम प्रभावित हो रहे थे। दोनो को यह डर तब तक बना रहा। जब तक बारिश बंद नही हुई। बंद होते ही दोनो ने बाबा का आभार जताया और चेहरे से डर गायब नजर आया। ऐसा दोनो पर नजर रखने वाले हमारे सूत्र का कहना है। लेकिन हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

ताला तोड़ा फिर अंदर गए...
हिंदू नववर्ष गुड़ीपड़वा के अलसुबह की यह घटना है। जब संघ से जुड़े दो संगठन ने आक्रोश जताया। इन संगठनों के करीब 100 सदस्य हर साल गुड़ीपड़वा पर अलसुबह की आरती में जाते है। इस दफ़ा भी पहुँच गए। मगर अनुमति केवल 14 की बनी थी। जिनको गेट नंबर 1 से प्रवेश मिल गया। बाकी सभी शंख द्वार पर इंतजार कर रहे थे। जब कोई सुनवाई नहीं हुई। तो द्वार पर लगा ताला-तोड़ दिया और सभी अंदर जाकर नंदी हॉल में बैठ गए। नारेबाजी भी हुई और विवाद भी। इस दौरान मंदिर का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। कुछ वर्दीधारी थे। मगर चौकी से जुड़े। इसके पहले मंदिर के जिम्मेदारों को फोन भी लगाए गए। मगर किसी ने नही उठाये। वैसे भी अपने फटाफट जी फोन नही उठाने के लिए मशहूर है।यही आदत उनके मातहतों ने अपना ली है। सुबह 4 पर एक सहायक प्रशासक जरूर पहुँचे। जो मत्स्य विभाग के कर्मचारी है। बहरहाल सवाल यह है कि मंदिर की इस अव्यवस्था के लिए दोषी कौन है? इस सवाल पर मंदिर के व्यवस्थापक मौन है। इसलिए हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

विकासपुरुष के सखा...
गेर की एक और घटना है। जिसकी खबर बहुत कम लोगो को है। पायरो से घायल होने वालों का तो सबको पता है। मगर रंग दूर तक फेकने वाली वॉटर केनन से भी एक घटना हुई। जिसके प्रहार से शहर की शान और विकासपुरुष के सखा अपने स्वामी जी मंच पर ही बेहोश हो गए थे। यह घटना तब हुई जब विकासपुरुष मंच से जा चुके थे। वह जाने से पहले इस प्रेशर मशीन का उपयोग नही करने का बोल कर गए थे। फिर भी उनके समर्थक ने इसको चालू किया और सीधा निशाना मंच पर साधा। जहाँ स्वामी जी मस्ती में डांस कर रहे थे। 5 फीट की दूरी से पानी का प्रेशर सीधे उनके कान पर लगा और वह अर्ध -मूर्छित हो गए।जब वापस होश में आए तो लड़खड़ाते हुए खड़े हुए। उनको आसपास के लोगों ने संभाला। डॉ के पास जाना पड़ा।उनका दायां कान चोटिल हो गया। जिसका इलाज चल रहा है और अब कम सुनाई देता है। जिसमे अपने स्वामी जी आखिर क्या कर सकते है। अपनी पीड़ा किसको बताएं। इसलिए चुप है। तो हम भी उनकी तरह चुप हो जाते हैं।

गलती का दोषी कौन...
पिछले सप्ताह चुप ने पायरो किसके आदेश पर लिखा था। जिसमें 6 लोग आगजनी के शिकार हुए थे। वह भी विकासपुरुष की मौजूदगी में। उस वक्त 650 मीटर लंबी गेर निकल रही थी।तभी धमाका हुआ था। इसे सीधे -सीधे विकासपुरुष की सुरक्षा में लापरवाही की संज्ञा दी जा सकती है। यहाँ लाख टके का सवाल यह है। भले ही किसी के भी आदेश पर पायरो लगाए गए! मगर सुरक्षा की जिम्मेवारी केवल और केवल वर्दी की होती है। अपने कप्तान जी ने एक रात पहले और अगले दिन सुबह गेर क्षेत्र का दौरा भी किया होगा? क्योंकि वह सुरक्षा को लेकर हमेशा गम्भीर रहते है और कोई चूक  बर्दाश्त नहीं करते है।तो क्या उनकी निगाह से यह चूक हुई या फिर उन्होंने देखकर भी अनदेखी की? यह सवाल इन दिनों वर्दीवालों से लेकर आईपीएस अधिकारियों के बीच सुनाई दे रहा है। सवाल जायज है।मगर यह भी बोल रहे हैं। कुछ नहीं होगा? वजह..कार्यवाही निचले स्तर पर होती है-उच्च स्तर पर नहीं। इसलिए यह सलाह मानकर हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

अपनी तो जैसे तैसे...
फ़िल्म लावारिस का शायद यह गीत हमारे पाठकों को याद होगा। big-b पर फिल्माया यह song खूब चर्चित हुआ था। अब एक बार फिर चर्चाओं में है। मगर हमारे संभाग के उस जिले में। जो कि नमकीन और गोल्ड के जाना जाता है। यहाँ की मुखिया आईएएस मैडम जी ने जमकर रंगों का पर्व मनाया। अपने मातहतों के साथ जमकर मस्ती में डांस किया। जिस गीत पर मैडम जी थिरकी वह उसी फ़िल्म का गीत है। जो पाठकगण ऊपर पढ़ चुके है। इसमे टिविस्ट केवल इतना है। मैडम जी ने अभी -अभी उस आईएएस अफसर से छुटकारा लिया है। जिन्होंने पिछले दिनों तीसरी दफ़ा सात जन्मों का बंधन स्वीकार किया है। नतीजा - स्वर्ण नगरी में इस गीत की अंतिम लाइन..*आपका क्या होगा जनाबे अली..के कारण खूब चर्चा है। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

5 खोखे का जुर्माना...
पिछले दिनों अपने इशारा जी आए थे। जिन्होंने सबसे ज्यादा तवज्जो उस मॉल को दी थी। जहाँ वाकई में माल है। अपने इन्दौरीलाल जी को इशारा कर गए थे। ठेकेदार की राशि काटो। इसी शीर्षक से चुप ने बहुत कुछ इशारा किया था। मगर तब यह पता नहीं चला था। राशि कितनी काटनी है। जिसका अब खुलासा हो गया है। अपने इन्दौरीलाल जी ने 5 खोखे जुर्माना का नोटिस थमा दिया है। अब देखना यह है कि मॉल के ठेकेदार, इससे बचने के लिए राजधानी जाकर कितना माल अपनी अंटी से ढीला करते है। ऐसी चर्चा विकास भवन के गलियारों में सुनाई दे रही है। इधर देवीआहिल्या नगरी के एक बिल्डर ने तो खुलकर मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर अपने इशारा जी के नाम सीधे लिखकर पोस्ट अपलोड की है। जिसमे लाखों ₹ की डिमांड का आरोप लगाया है। इसके अलावा राजधानी के वल्लभ भवन से एक नई बात सामने आई है। जिसमे करीब 50 खोखे निकायों के देने के नाम पर वसूली के संकेत मिल रहे हैं।   मामला उच्च लेबल का है और कयास लगाये जा रहे है। जब भी राजधानी ने सूची जारी होगी। इशारा जी की वर्तमान विभाग से छुट्टी हो सकती है। फैसला सूची आने पर होगा। तब तक  हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

कचरा गाड़ी चलाने वाले भी इंसान है..
यह वीडियो चुप के एक पाठक ने हमकों भेजी। उसका दर्द यह है कि कचरा लेने आने वाले भी इंसान हैं। पाठक के  इस दुःख से हम सहमत है। शहर में इतना विकास हो रहा है। क्या कचरा उठाने वाले के लिए बेहतर वाहन की व्यवस्था नहीं हो सकती है। ताकि वह भी खुद को इंसान समझते हुए यह  गर्व महसूस कर सकें कि विकासपुरुष के गृहनगर के निवासी हैं। आगामी 25 को विकासपुरुष का जन्मदिन है। चुप की तरफ से शुभकामनाएं अग्रिम देते हुए गुहार करते है कि वह अपने जन्मदिन पर नई कचरा गाड़ियों की सौगात इन सफाईकर्मियों को जरूर देंगे। जिनके दामन में दुआओं के सिवा कुछ भी नहीं उन गरीबों की दुआओं में असर होता है। बाकी हम अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहेंगे।

मेरी पसंद
आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं सोचता।

आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता।

कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी मर जाता है।

उदय प्रकाश