07 जूलाई 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

07 जूलाई 2025 (हम चुप रहेंगे)

मेरे अंगने में ...

शीर्षक पढक़र हमारे पाठकों के दिमाग में फिल्म लावारिस का गीत याद आ गया होगा। मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है। यह गीत इन दिनों सभी वरिष्ठ पंजाप्रेमी गुनगुना रहे है। जो कि एकजुट हो गये है। गीत के माध्यम से अपने चरणलाल जी पर निशाना साधा जा रहा है। जो कि अपने चेलो को जिला व शहर का मुखिया बनाना चाहते है। नतीजा पंजाप्रेमी उच्च स्तर पर शिकायत कर चुके है। अंदरखाने की खबर है। होटल वाले भय्या ने सबूत सहित शिकायत की है। जिसमें आडियों भी शामिल है। अपने बिरयानी नेताजी और भाभी जी भी साथ-साथ है। वर्तमान मुखिया बस वाले नेताजी को हटाने की पूरी कोशिश है। इसी तरह दूसरी मीठी गोली के नाम से प्रसिद्ध नेता के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। यह वही है जो कि 14 महीने की सरकार में एक बैंक के मुखिया बन गये थे। 10-10 पेटी देकर। 2023 मिशन में दूसरी मीठी गोली ने भय्या के खिलाफ काम किया था। यह चरणलाल जी के समर्थक है। इसीलिए सब मिलजुल कर चरणलाल जी को पटकनी देने की तैयारी में है। देखना यह है कि सफलता मिलती है या नहीं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

बाबू का जलवा ...

क्या यह संभव है। किसी बाबू को हटाने का विधिवत आदेश निकला हो। इसके बाद भी वह हटे नहीं। उल्टा एक साल तक आर्डर ही दबाकर बैठ जाये। ऐसी चर्चा संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है। इशारा निर्वाचन के एक बाबू की तरफ है। जिसको हटाने का आदेश पिछले साल 16 मई 2024 को निकला था। इस बाबू से लेखा शाखा का दायित्व लेकर दूसरे बाबू को देना था। तत्कालीन उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने आदेश निकाला था। किन्तु 1 साल से ज्यादा का समय हो गया। आज तक बाबू ने दायित्व नहीं सौंपा है। ताज्जुब की बात यह है कि इस बाबू का तबादला अपने विकासपुरूष ने ग्रामीण क्षेत्र में करवाया था। मगर जुगाड लगाकर बाबू ने निर्वाचन में अटैचमेंट करवा लिया। तभी तो बाबू के जलवे की तारीफ में हर कर्मचारी कसीदे पढ रहा है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

मेरे घर का काम नहीं है ...

अभी-अभी 3 पेटी का पुरूस्कार शिवाजी भवन के स्मार्ट पंडित को मिला है। विकासपुरूष के हाथों से। अपने प्रथमसेवक भी गये थे। उसके बाद एक कार्यक्रम गौशाला में हुआ। जहां पर दालवाले नेताजी से नाटे कद वाले नगरसेवक ने गुहार लगाई। स्मार्ट पंडित उनको फोन नहीं उठाते है। दालवाले नेताजी ने स्मार्ट पंडित को बोल दिया। इनकी बात सुन लेना। कार्यक्रम खत्म होने के बाद नाटे कद के नगरसेवक ने स्मार्ट पंडित से चर्चा की। कुछ काम बताये। इसी दौरान दोनों के बीच बहस हो गई। नाटे कद के नगरसेवक ने बोल दिया। मेरे घर के काम नहीं है। जनहित के काम है। विवाद बढता देख अपर आयुक्त और उपायुक्त पहुंच गये। जिसके बाद मामला शांत हो गया। ऐसा नजारा देखने वालो का कहना है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

किसी को पता है क्या ...

अपने उज्ज्वल जी को कतई अंदाजा नहीं था। उनके सवाल पर सभी चुप्पी साध लेंगे। सवाल बहुत सीधा था। जो उन्होंने बैठक में कर लिया। उज्ज्वल जी का सवाल यह था। क्या किसी को पता है कि सावन माह में दर्शन व्यवस्था कैसे संचालित होती है। इस सवाल के बाद बैठक में सन्नाटा छा गया। किसी ने भी हिम्मत नहीं दिखाई। व्यवस्था बताने की। आखिरकार सहायक सत्कार अधिकारी को इशारा किया गया। तब कहीं जाकर उज्ज्वल जी को अपने सवाल का जवाब मिला। ताज्जुब इस बात का है। मंदिर में इतना प्रशासनिक अमला लगा हुआ है। लेकिन किसी को भी दर्शन व्यवस्था की जानकारी नहीं है। जो कि शर्मनाक बात है। मगर हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप ही रह सकते है।

छुडवाकर ही माने ...

विकासपुरूष ने शहरी क्षेत्र में सोमरस बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके बाद अवैध सोमरस बिक्री का धंधा जोर पकड रहा है। इसमें कुछ कमलप्रेमी भी कूद गये है। तभी तो एक युवा कमलप्रेमी को छुडाने के लिए अपने स्वागत प्रेमी पहुंच गये थे। पिछले रविवार की घटना है। स्वागत प्रेमी ने भैरवगढ़ स्टेशन पहुंचकर हंगामा खड़ा कर दिया। वर्दी को कमलप्रेमी की जिद के आगे झुकना पड़ा। हालांकि 151 में कायमी के बाद छोडा गया। किन्तु सोमरस की अवैध बिक्री का मामला दबा दिया गया। ऐसा हम नहीं, बल्कि स्वागत प्रेमी के करीबी युवा कमलप्रेमियों का कहना है। मगर हमको तो अपनी आदत के अनुसार बस चुप ही रहना है।

आडिट ने पकडी गलती...

क्या किसी नौकरशाह को आसानी से बरगलाया जा सकता है? इतनी आसानी से कि वह फर्जी लोन की फाइल पर ही दस्तखत कर दे। यह सवाल इन दिनों मंदिर के गलियारों में सुनाई दे रहा है। इशारा अपने फटाफट जी की तरफ है। जिन्होंने 3 पेटी का ऋण स्वीकृत कर दिया। मंदिर के कर्मचारी को। जिसने बेटी के विवाह के लिए ऋण आवेदन दिया था। अपने फटाफट जी ने फटाफट दस्तखत कर दिये। लेकिन प्री-आडिट में गलती को पकड लिया गया। पुत्री की उम्र कम थी। नाबालिग है। इसलिए आपत्ति लगा दी। ताज्जुब इस बात का है कि स्वीकृति की फाइल पर दस्तखत करते वक्त फटाफट जी ने ध्यान नहीं दिया। अब जब गलती पकडी गई। तो 3 कर्मचारियों को नोटिस जारी किये है। देखना यह है कि तीनों कर्मचारियों पर कडी कार्रवाई होती है या फिर मामले को रफा-दफा किया जाता है। इसका सबको इंतजार है। तो हम भी इंतजार करते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

रिटायरमेंट के पहले ...

कोई भी शासकीय सेवक नहीं चाहता कि रिटायरमेंट के पहले ही उसको कामकाज से मुक्ति दे दी जाये। खासकर नौकरशाह। उनकी यही मंशा होती है। आखिरी दिन तक काम करे और बैठक ले। पिछले दिनों बैठक हुई। सिंहस्थ 2028 को लेकर। जिसमें अपने उम्मीद जी, हिटलर जी, उज्ज्वल जी, चटक मैडम, स्मार्ट पंडित, इंदौरीलाल व चुलबुल पांडे जी शामिल थे। बस शामिल नहीं थे तो अपने तीसरे माले के मुखिया। जो कि इसी महीने के अंतिम दिन सेवानिवृत्त होने वाले है। जो बैठक हुई। वह इसके चेयरपर्सन है। इसके बाद भी वह बैठक से गैरहाजिर थे। बैठक की तस्वीर जारी हुई। जिसे देखकर संकुल के गलियारों में चर्चा है। रिटायरमेंट के पहले ही रिटायर कर दिया। बोलने वालो की बात सच है। मगर हमको तो बस चुप ही रहना है।

रंगे हाथों पकडा गये ...

क्लीयर कर देते है। हम उस विभाग की बात नहीं कर रहे है। जो कि हाथ धुलवाता है तो गुलाबी रंग का पानी हो जाता है। हम तो कमलप्रेमियों के बीच चल रही आशिक मिजाज नेता की बात कर रहे है। जो कि रंगे हाथों पकडा गये थे। जनता के द्वारा। मई माह की घटना है। युवा नेताजी ने अपनी विवाहित प्रेमिका को हीरामिल गेट स्थित एक गार्डन से गाडी में बैठाया था। महिला के साथ उसकी पुत्री भी थी। जिसने अपनी मम्मी के गायब होने पर शोर मचा दिया था। बच्ची के शोर से सब लोग खोजबीन में लग गये। कार का पीछा किया। आगे जाकर कार को रोक लिया। मगर जैसे ही दरवाजा खुला। तो एक झोन के मुखिया को देखकर सभी ने चुप्पी साध ली थी। 2 महीने तक सब चुप थे। अब जाकर यह घटना कमलप्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। चटकारे लेकर कमलप्रेमी एक-दूसरे को सुना रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

सोच-समझकर बात करो ...

अपने इंदौरीलाल जी की आदत है। वह खुद की बुराई सुन सकते है। लेकिन अपनी संस्था और कार्यप्रणाली की नहीं। तभी तो वह आक्रोश में आ गये। जब मंदिर की बैठक में सेवानिवृत्त वर्दीधारी ने उनके कार्य पर सवाल खड़े कर दिये। मामला फाल्स-सीलिंग से जुड़ा है। जिसको लेकर इंदौरीलाल जी के तर्क थे। आयरन वाली सीलिंग नहीं गिरेगी। किन्तु मंदिर के सुरक्षाधिकारी अढ गये। गिरेगी-गिरेगी-गिरेगी। बस फिर क्या था। इंदौरीलाल जी ने पलटकर कह दिया। सोच समझकर बात करो। इतना कहकर वह चुप हो गये। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

बन-मस्का ...

अपने उज्ज्वल जी को आजकल मस्का लगाया जा रहा है। कारण ... उनको बन-मस्का डिश बहुत पसंद है। जो कि दशहरा मैदान की एक दुकान पर मिलता है। उनके जन्मदिन पर विशेषतौर पर बन-मस्का मंगाया गया था। इसी तरह मंदिर की बैठक में भी बन-मस्का मंगाने की कोशिश हुई। किन्तु इंतजार के बाद भी बन-मस्का नहीं पहुंचा। जिसके बाद दबी जुबान से यह चर्चा है। बन-मस्का खिलाकर, उज्ज्वल जी को मस्का लगाया जा रहा है। बोलने वाले की जुबान तो हम पकड नहीं सकते हैं। इसलिए हम खुद ही अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

मेरी पसंद ...

हमारे सामने अब तक जो यूँ खड़े हैं आप 

लिहाज ये हैं कि बस उम्र में बड़े हैं आप।

लडे है आप अभी तक सामने के दुश्मन से

जो आस्तीन में पले है उनसे कब लडे हैं आप ।