14 जूलाई 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
इज्जत देनी पडती है ...
दमदमा के गलियारों में डॉ. नदीम शाद की गजल सुनाई दे रही है। मगर खुलकर नहीं। बल्कि दबी जुबान से। वह सभी मातहत इस गजल का एक शेर गुनगुना रहे है। जो समय-समय पर बेइज्जत हुए हैं। अपनी चटक मैडम जी की भाषाशैली से। तभी तो मातहतों के बीच यह अशआर सुनाई दे रहा है। आप बड़े है बेशक साहब आप मगर यह भूल गये/ इज्जत करवाने से पहले इज्जत देनी पडती है...! कर्मचारियों की बात में दम है। किन्तु इतनी साधारण सी बात को अपनी चटक मैडम जी आजतक नहीं समझ पाई। जिसमें किसी का क्या दोष? इसीलिए तो मातहत बाबा महाकाल सहित विकासपुरूष से गुहार लगा रहे है। देखना यह है कि विकासपुरूष कब गुहार सुनते है और किसी ऐसे को कब लाते है। जो इज्जत देनी पडती है पर अमल करता हो। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
शपथ पत्र का खेल ...
20 हजारी कांड याद होगा। जिसमें संकुल के आपरेटरों से डिमांड की गई थी। एक मैडम के नाम का सहारा लेकर। जिसका खुलासा इसी कॉलम में किया गया था। मैडम की डिमांड शीर्षक से। नतीजा हडक़ंप मचा। उज्जवल जी ने फटाफट जी से तहकीकात करवाई। मामला सच पाया गया। जिसके बाद कंपनी ने एक नया खेल खेला। खुद को निर्दोष साबित करने के लिए। अपनी छबि सुधारने के लिए। शपथ पत्र का खेल। जिसमें कंपनी द्वारा यह लिखवाया गया है। मैं अपने होशोहवास में बिना किसी दबाव के यह बयान देता हूं कि कंपनी में फला पद पर कार्यरत था। इस नौकरी के लिए मैने किसी व्यक्ति/ संस्था/ गैर सरकारी संस्था/ कंपनी को पैसे नहीं दिये है और कंपनी से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने मुझसे पैसे नहीं लिए है और ना ही डिमांड की है। कंपनी के इस शपथ पत्र के बाद ऑपरेटरों का कहना है। हमारी मजबूरी थी। अगर कहना नहीं मानते तो नौकरी जाती। डिमांड तो हुई थी। चुप रहेंगे डॉटकॉम ने कंपनी और मैडम का खेल बिगाड दिया। मैडम को भी सजा मिली है। फिर भी अगर कंपनी खुद को ईमानदार बता रही है। तो हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
मैडम को मिली सजा ...
आखिरकार एसडीएम बनने के लिए बेताब प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मैडम एक कहावत का शिकार हो गई। चौबे जी - छब्बे जी बनने गये थे- दुबे जी बनकर लौटे। यह कहावत प्रभारी डिप्टी कलेक्टर पर सटीक साबित हो रही है। बेचारी मैडम ... कहां तो ग्रामीण इलाके खाचरौद में एसडीएम बनने की जुगाड में थी। मगर दाल नहीं गली। बदबू वाले शहर के माननीय डॉ. साहब ने भी बैरंग लौटा दिया था। इस बीच 20 हजारी कांड की पोल खुल गई। तो बची-खुची कसर अपने उज्ज्वल जी ने पूरी कर दी। कार्य विभाजन कर दिया। जिसमें मैडम जी से उस शाखा का प्रभार छीन लिया। जिसके कारण वह डिमांड कर पाती थी। यह शाखा छीनकर बदबू वाले शहर के एसडीएम को थमा दी। जो कि मैडम की सजा है। 20 हजारी डिमांड की। ऐसा हम नहीं बल्कि ऑपरेटर और संकुल में बैठने वाले बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
अनोखा कार्य विभाजन ...
संकुल के गलियारों में चर्चा है। इस अनोखे कार्य विभाजन की। ऐसा कार्य विभाजन खुद हमने आज तक नहीं देखा है। जो अभी-अभी हुआ है। 4 पेज का आर्डर है। जिसमें 3 एसडीएम को फटाफट जी का सहयोगी बना दिया है। यह तीनों एसडीएम ग्रामीण इलाके में पदस्थ है। जो अब अपना काम छोडकर संकुल आयेंगे। फटाफट जी का काम करेंगे। इसके अलावा अपनी-अपनी तहसील का काम निपटाना भी इन्हीं की जिम्मेदारी है। ताज्जुब की बात यह है। रंगे हाथों पकडऩे वाले विभाग की गोपनीय कार्यवाही का दायित्व भी अब डिप्टी कलेक्टर को सौंप दिया गया है। जबकि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। वरिष्ठ अधिकारी को सहयोगी दिये जाते है। किन्तु वह सभी संकुल में ही पदस्थ रहते है। ताकि काम प्रभावित ना हो। पहली दफा ऐसा हुआ है। ग्रामीण इलाकों में पदस्थ डिप्टी कलेक्टरों को अतिरिक्त कार्य दिया गया है। अब ऐसा कार्य विभाजन क्यों किया गया। यह फटाफट जी जाने या उज्ज्वल जी। हमको तो बस आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
विकासपुरूष का संदेश ...
अपने विकासपुरूष ने संदेश दिया है। सीधे राजधानी से। वह भले ही सूबे के मुखिया है। किन्तु नियम-कानून के दायरे में वह भी आते है। तभी तो चौराहे पर लालबत्ती देखकर वाहन रूकवा दिया। आम नागरिक की तरह खरीददारी की। यह एक अघोषित संदेश है। प्रदेश के हर जिले के मुखिया और कप्तान के लिए। खासकर बाबा की नगरी के लिए। जो कि उनका गृहनगर है। जहां पर जब-जब आते है तो रास्ता बहुत पहले रोक दिया जाता है। जबकि विकासपुरूष का संदेश साफ है। उनके कारण आम जनता को तकलीफ नहीं होनी चाहिये। अब देखना यह है कि विकासपुरूष के गृहनगर में इस अघोषित संदेश को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कोई नहीं आयेगा ...
अपने विकासपुरूष जब-जब आते है। उनके पीछे गाडियों का काफिला पूरे दिन दौडता रहता है। वह कहीं भी जाये। कारकेट के अलावा कमलप्रेमी अपने-अपने वाहन दौडाते रहते है। किन्तु हर वक्त ऐसा नहीं होता है। जैसे शुक्रवार की रात्रि को हुआ। विकासपुरूष ने उज्ज्वल जी और कप्तान जी को मना कर दिया। उनके वाहन के पीछे कोई नहीं आयेगा। इसके बाद मात्र 3 वाहन वीआईपी गेस्टहाऊस से निकले। जो सीधे एक बिल्डर के घर पहुंचे। जहां पर राजनीतिक स्वामी रूके थे। विकासपुरूष के साथ केवल दालवाले नेताजी व उनके बालसखा थे। राजनीतिक स्वामी से करीब 60 मिनिट तक विकासपुरूष ने चर्चा की। भोजन भी किया। मगर क्या चर्चा हुई। इसका पता तो कोई माई का लाल नहीं लगा सकता है। तो हम किस खेत की मूली है। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
बोलोगे- मगर दोगे नहीं ...
अपने विकासपुरूष मौका मिलने पर मीडिया से मजाक करने का मौका कभी नहीं छोडते है। जैसे शनिवार की अलसुबह उन्होंने चुटकी ली। उस वक्त जब भस्मार्ती से निकले थे। सामने मीडिया को देखकर बयान दिया। 4 मिनिट तक। जिसके बाद उन्होंने एक न्यूज चैनल का नाम लेकर सवाल किया। वह कहां है। जवाब मिला। नहीं आया। तो विकासपुरूष ने हंसते हुए कहा। उस चैनल को यह वीडियों दे देना। फिर खुद ही बोल उठे। बोलोगे जरूर ... हां.... मगर दोगे नहीं। जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी ने ठहाका लगाया। खुद विकासपुरूष अपनी ही बात पर मुस्कुरा दिये। यहां यह लिखना जरूरी है। मीडिया को मंदिर आने से प्रशासन ने ही मना किया था। जिसके चलते वह न्यूज चैनल प्रतिनिधि मंदिर नहीं पहुंचा। जिसको लेकर विकासपुरूष ने पूछा था। ऐसा यह नजारा देखने वालो का कहना है। मगर मीडिया और विकासपुरूष के बीच हुए संवाद पर हमको तो चुप ही रहना है।
नहीं समझे इशारा ...
अपने विकासपुरूष की खासियत है। जब वह मंच पर मौजूद रहते है। तो इशारों में अपनी बात कहते है। बस उन्हें समझने वाला होना चाहिये। जैसे उविप्रा के कार्यक्रम विकासपुरूष ने इशारा किया। अपने हाइनेस को। इशारा यह था कि भाषण छोटा रखना। मगर अपने हाइनेस की आदत है। वह धाराप्रवाह उद्बोधन देते हुए भूल जाते है। कितना वक्त गुजर गया। उविप्रा के कार्यक्रम में यही हुआ। नतीजा अपने उज्ज्वल जी को जाकर रोकना पड़ा। कुछ ऐसा ही स्वागत उद्बोधन के वक्त हुआ। तीसरे माले के मुखिया ने इतना वक्त ले लिया। कि उज्जवल जी, इंदौरीलाल व स्मार्ट पंडित आश्चर्य में थे। उनको भी जाकर पर्ची थमाई गई। तब कहीं जाकर माइक छोड़ा। ऐसा हम नहीं, बल्कि यह नजारा देखने वाले बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
रिकार्ड रखते हो ...
विकासपुरूष कब, कहां, कौनसा सवाल कर दें? यह कोई नहीं जानता है। जैसे भस्मार्ती के बाद उन्होंने पूछ लिया। वीवीआईपी की भस्मार्ती का कोई रिकार्ड मंदिर रखा जाता है। यह सवाल उन्होंने अपने उज्ज्वल जी को बुलाकर किया था। उस वक्त जब मंदिर के महंतश्री से मिलने गये थे। विकासपुरूष के सवाल पर उज्ज्वल जी ने यही कहा। दिखवाता हूं। इस पर विकासपुरूष ने आगे कहा। सर्किट हाऊस पर एक शिलालेख लगा है। उसे जाकर देखना। तत्कालीन राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री भी भस्मार्ती कर चुके है। अब देखना यह है कि मंदिर प्रशासन वीवीआईपी की भस्मार्ती का कोई रिकार्ड तैयार कर पाता है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
पॉवर सेंटर ...
मंदिर के मंहतश्री आखिरकार फिर पॉवर में आ गये है। लंबे समय से उनके आश्रम में कोई भी वीवीआईपी नहीं आ रहा था। शनिवार को अपने विकासपुरूष ने मंहतश्री से मुलाकात की। मंच पर अपने नजदीक बैठाया। सम्मान भी किया। जिसके बाद मंदिर के गलियारों में चर्चा है। मंहतश्री फिर पॉवर में आ गये है। अब यह देखना रोचक होगा कि प्रशासन, मंहतश्री को अब कितनी तवज्जो देता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
गोपनीय चर्चा ...
अपने उज्ज्वल जी और विकासपुरूष के बीच गोपनीय चर्चा हुई है। वीवीआईपी गेस्ट हाऊस में। इस दौरान एक भी अधिकारी मौजूद नहीं था। कप्तान जी भी नहीं। जबकि अकसर कप्तान जी साथ ही रहते है। विकासपुरूष और उज्ज्वल जी के बीच क्या बातचीत हुई। यह अपने उज्ज्वल जी तो बताने वाले नहीं है और विकासपुरूष तक हमारी पहुंच नहीं है। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
उडनखटोले में गये ...
शीर्षक पढक़र पाठकगण सोच रहे होंगे। विकासपुरूष उडनखटोले में गये। इसमें क्या नई बात है। वह तो हर रोज उडनखटोले में घूमते है। मगर शनिवार की शाम उनके साथ पिस्तौलकांड नायक भी उडनखटोले में सवार हो गये। देवी अहिल्यानगरी तक गये। जिसकी कमलप्रेमियों में चर्चा है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
बधाई ...
शिवाजी भवन का माहौल कितना नकारात्मक है। यह किसी से छुपा नहीं है। स्मार्ट पंडित की टांग खीचने में हर कोई लगा रहता है। इस विरोधी माहौल में स्वच्छता का पुरूस्कार लाना वाकई बधाई का काम है। जिसके लिए स्मार्ट पंडित और उनकी टीम सहित देवास जिले की टीम को भी हम बधाई देते हुए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
सप्ताह का सुंदर चित्र...
लाडली बहना का अनोखा अंदाज/ इन सभी को है अपने भय्या पर नाज ... !