तीसरी पारी की तैयारी...लेकिन तनाव-दबाव भी है भारी
आईएएस अधिकारी आशीष सिंह उज्जैन के नए संभागायुक्त बन गए हैं। सिंह की उज्जैन में ये तीसरी पारी है। पहली पारी निगमायुक्त के रुप में, दूसरी कलेक्टर के रुप में और अब संभागायुक्त। पहली दो पारियां तो खासी हिट रही हैं। काम किया और काम दिखा भी। लेकिन तीसरी पारी इतनी आसान नजर नहीं आती। कई कारण हैं। ऐसा नहीं है कि श्री सिंह की दक्षता पर कोई सवाल है, लेकिन परिस्थितियां अब थोड़ी गंभीर हैं, काम का दबाव और तनाव दूसरे लेवल पर होगा।
सबसे बड़ा चैलेंज है सिंहस्थ और उसके लिए होने वाले निर्माण कार्य। श्री सिंह पर सबसे ज्यादा दबाव सिंहस्थ को सफल बनाने का होगा। जनवरी से मार्च तक प्रयागराज में हुए महाकुंभ ने चिंताएं बढ़ाई हैं। लोगों का कुंभ जैसे इवेंट में दिलचस्पी लेना दिखाता है कि दो साल बाद जब उज्जैन में सिंहस्थ होगा, तब यहां कितनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। सरकार तैयारी भी कर रही है लेकिन अभी ज्यादातर काम अधूरे हैं। कुल जमा सितंबर 2027 तक का समय है, इसमें भी काफी सारा समय मानसून में निकलेगा। लगभग 7 से 8 महीने। ज्यादातर काम कागजों पर मजबूत हैं लेकिन जमीन पर उतने दिख नहीं रहे। श्री सिंह के पास जिम्मेदारी होगी कि इन सब को तय समय सीमा में पूरा करवाएं।
उज्जैन का बदलता नक्शा, सीएम सिटी होने का दबाव, महाकाल में दिन-ब-दिन बढ़ती भीड़, मौसम की अनिश्चितता और हर दिन सिंहस्थ की ओर आगे सरकता समय ये सारे फैक्टर हैं जो उनके लिए चुनौती होंगे। और इस बार अकेले उज्जैन जिले की जिम्मेदारी नहीं होगी। संभाग के दूसरे भी जिले हैं जहां उन्हें उतने ही समय में फोकस करना होगा। तो देखना दिलचस्प होगा कि उज्जैन की पिच पर दो पारियां खेल चुके आशीष सिंह, तीसरी पारी में कितनी धमाकेदार बल्लेबाजी करते हैं क्योंकि अबकी बार मैदान बड़ा है और लोगों की उम्मीदें भी।