22 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

22 दिसम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)

एंग्रीमैन के नाम पर..
अपने एंग्रीमैन के नाम पर वसूली की कोशिश की जा रही है।ऐसी चर्चा उन ठेकेदारों के बीच है।जिनसे डिमांड की गई है। स्मार्ट गलियारों में तो यही बात दबी जुबान से बोली जा रही है।अगर इस पर यकीन किया जाए।तो एंग्रीमैन के नाम पर 3 प्रतिशत ओर खुद के लिए 2 प्रतिशत मांग की जाती है।अब सवाल यह है कि डिमांड कौन कर रहा है।तो यह वही है।जिनको 1 खोखे का वितीय अधिकार एंग्रीमैन ने दे रखा है।एक मामले में तो 8 प्रतिशत की मांग सुनकर ठेकेदार ने हाथ जोड़ लिए। जबकि एंग्रीमैन ने पहले ही क्लियर कर दिया था।सभी मातहतों को।उनके नाम से कोई कमीशन नहीं लेगा।इसके बाद भी डिमांड की गई।इतनी हिम्मत करने वाले ये अधिकारी अकसर इंस्टाग्राम पर अपनी रिल्स के कारण सुर्खियों में रहते है।कमीशन के इस लालची की सबको जानकारी है।नाम भी पता है।मगर जब सभी चुप है।तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

अतिथि देवो भव
हमारी संस्कृति कहती है।मेहमान का स्वागत दिल से करना चाहिए।फिर अगर वह अतिविशिष्टगण अतिथि अपने कप्तान जी के हो!तो वेलकम जोरदार ही होगा।जैसा शुक्रवार की दोपहर 12 बजकर 50 मिनिट पर हुआ।आगे आगे पायलट गाड़ी,उसके पीछे दो गाड़ी लाल-नीली बत्ती वाली,इनके बीच एक ब्लैक रंग की होंडा सिटी और फिर पीछे दो गाड़ी ।धीरे धीरे चलती हुई सीधे कप्तान के बंगले पहुँची।बंगले के गेट पहले से ही खुले थे।मक्सी रोड से आने वालों को वर्दीधारी ने रोक दिया।पायलट गाड़ी एक तरफ रुक गई।बाकी सभी वाहन सीधे अंदर गए।कप्तान जी अपने हाथ मे गुलाब का बुके लेकर उस ब्लैक वाहन के रुकने से पहले हाजिर थे।मगर यह अतिविशिष्टगण अतिथि कौन था?यह एक राज है।कोई बताने को राजी नहीं है।सब चुप है।तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

कुछ अलग हटकर काम ...
राजस्व अधिकारियों की आदत होती है। कुर्सी से चिपककर बैठ जाते है।फिर कभी यह कोशिश नही करते कि अगर प्रचलित प्रकरण में फील्ड में जाए।थोड़ी मेहनत और समझदारी दिखाए,तो मामले आसानी से खत्म किए जा सकते है।मगर इतनी मेहनत कौन करे।उस पर अगर ऐसा करने लगे तो जेब गर्म कैसे होगी।खासकर रास्तों के विवादों को आसानी से सुलझाया जा सकता है।जैसे इन दिनों दाल बिस्किट तहसील की सुंदर मैडम कर रही है।रास्ते विवाद के मामलों को लेकर वह खुद मौके पर चली जाती है।दोनो पक्षों को सुनती है।फिर अपनी समझदारी सलाह से ऐसे विवाद को मौके पर ही निपटा देती है।अपनी सुंदर मैडम जी करीब 4 से 5 मामले इसी तरीके से निपटा चुकी है।जिससे सभी खुश है।कुछ अलग हटकर काम करने की इस नीति के हम भी कायल है।इसलिए बधाई देते हुए,आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

फ़ाइल-रास्ता-गाड़ी-मोटर और फुलझड़ी...
मंदिर के गलियारों में इन दिनों ऊपर लिखे शब्द चर्चाओं में है।हर शब्द की एक अलग कहानी है।जो हमे अपने पाठकों को पढ़ानी है।
1 याद होगा दाल में कीड़े वाला कांड।शोध संस्थान वाला।जिसमें खानसामा को नोटिस दिया था।उससे जुड़ी फाइल अचानक गायब हो गई।जवाब देने से पहले।अब वैदिक धोती जी को डर सताया।तो फाइल वापस तैयार हो रही है।मगर फाइल गायब किसने की है।इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
2 अपने फटाफट जी ने सख्त कदम उठाया है।न्यास ट्रस्ट द्वारा संचालित स्टैंड के पास से मंदिर जाने वाले रास्ते को बंद कर दिया है।यह वाकई हिम्मत का काम है।ट्रस्ट को चुनौती देना।इस कदम से धंधे पर असर पड़ा है।
3 पिछले सप्ताह इसी कॉलम में लिखा था।बंटी-बबली की जोड़ी ने खुद के लिए ई-कार्ट आरक्षित कर रखी थी।इसका कोई दूसरा उपयोग नहीं कर सकता था।मगर एक सीएसपी लेकर चले गए।जिसके कारण बंटी-बबली को पैदल चलना पड़ा।बबली ने गुस्से में ड्राइवरों को फटकार लगा दी थी।इस मामले में फटाफट जी ने एक्शन लिया है।ई-कार्ट आरक्षण सुविधा छीन ली है
4 मंदिर और संस्कृति का संगम चार दिवसीय होने वाला है।अगले साल।अच्छा खासा खर्च होगा।मगर इस ठंड में एक बिगड़ी हुई  पानी की मोटर को सुधारने का फंड नहीं है।तभी तो शोध संस्थान के छोटे छात्रों को सुबह सुबह ठंड में पानी लेने हैंडपंप जाना पड़ रहा है।इसकी किसी को चिंता नही है।
5 हेडिंग का लास्ट पॉइंट  फुलझड़ी वाला है।जिसे पढ़कर दिवाली त्योहार पर जलने वाली फुलझड़ी मत समझेंयहाँ तो जवानी के दिनों को याद दिलाने वाली फुलझड़ी की तरफ इशारा है।जिस पर अपने बंटी जी का दिल पागल हो गया है।तभी तो आजकल यह फुलझड़ी ,उनके कार्यालय में अक्सर दिखाई देती है।मंदिर के गलियारों में तो यही दबी जुबान से बोला जा रहा है।अब यह सब पढ़कर ऊपर लिखी हेडिंग का हर पॉइंट चुप के पाठकगण समझ गए होंगे।इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

90 साल ...
एक समय था।जब बुजुर्गों से शतायु का आशीर्वाद  मिलता था।मगर अब  अगर 60 से 70 साल का जीवन ही इंसान को  बहुत होता है।बकौल शायर नदीम शाद।
तुम खुदा तो नहीं हो नदीम,एक दिन तुम भी मर जाओगे।
फिर तकुव्वर भला किसलिए, तुम कहाँ से अलग हो गए

ये अशआर इन दिनों आईएएस लॉबी में सुनाई दे रहा है।जिससे अपने इशारा जी की तरफ प्रश्न खड़े हो रहे है।ये वही है जिन्होंने दिव्यांग शादी   करवाकर बाबा की नगरी में इतिहास बनाया था।यह  पिछले सप्ताह आए थे।केंद्र अनुदान से बन रहे मॉल का निरीक्षण करने।जहाँ अपने उज्ज्वल जी,एंग्रीमैन, इन्दौरीलाल और कई मातहत हाजिर थे।यही पर अपने इशारा जी ने इंटर मॉडल स्टेशन( IMS) की भी समीक्षा कर डाली।ये स्टेशन देवासगेट बस स्टैंड पर बनाया जाना प्रस्तावित है।जिसके कारण पोस्ट ऑफिस और पुलिस स्टेशन का भी हटना पक्का है।यह योजना पीपी मॉडल पर आधारित है। इसको जिला प्रशासन 30 साल की लीज पर देने की शर्तों के साथ राजी है।मगर अपने इशारा जी की मर्जी कुछ अलग है।वह शतायु (90) के लिए अड़े हुए है।जिसके पीछे कारण कई हो सकते है।जो हम जैसे मामूली ख़बरची को कैसे पता हो सकते है।इसलिए फैसला विकास पुरूष पर छोड़कर, आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

हदय परिवर्तन या राजनीति...
बहुचर्चित पुलिंग एक्ट की वापसी हो गई।अन्नदाताओं की जीत हो गई।मगर इसके ठीक पहले अपने हाइनेस का पत्र और वीडियो जारी होना।कमलप्रेमियो के लिए कई सवाल खड़े कर गया।वह इसलिए कि सदन के अंदर हाइनेस ने पुलिंग एक्ट के पक्ष में कसीदे पढ़े थे,जबकि चिंटू जी ने विरोध किया था।तब अन्नदाता अपने हाइनेस से खूब खफा थे।फिर आंदोलन हुआ।जिसके बाद सरकार ने वापसी का आदेश जारी किया।तब हाइनेस के साथ अन्नदाताओं का दल विकास पुरुष से मिला।धन्यवाद दिया।मगर आदेश में गोलमाल भाषा ने फिर  अन्नदाताओं को भड़का दिया।फिर आंदोलन की घोषणा हो गई।इधर सरकार एक्ट को पूरी तरह निरस्त का आदेश बनवा रही थी।तभी हाइनेस का हदय परिवर्तन हो गया।उन्होंने खुलकर विरोध कर दिया।ऐसा कैसे हुआ क्यो हुआ।इसको लेकर ही कमलप्रेमी सवाल उठा रहे है।कुछ का कहना है कि हाइनेस पर आराधना से दवाब था?कुछ उनके करीबी लोगों का अलग मत है।हाइनेस को वैसे तवज्जो नहीं मिल रही है और ना कोई शासन-प्रशासन में उनके काम होते है।नामांतरण रद्द होने का गम पहले से ही झेल रहे है।ऐसे में मौका देखकर उन्होंने खुलकर हिम्मत दिखा दी।भविष्य के लिए अपनी  राजनीति को चमका लिया है।वह अब राजनीति की शतरंज में केवल मोहरा बनकर नही चलना चाहते है।अब क्या सच है-क्या झूट।जितने मुँह-उतनी बातें।इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते।

बड़े साहब को फुर्सत नहीं...
यह तो देश की राजधानी से लेकर हर हिंदुस्तानी को पता है।2028 में बाबा की नगरी में जो मेला लगेगा।उसमें ऐसी भीड़ होगी।जिसकी कल्पना करना मुश्किल है।मगर यह बहुत कम को पता है।इस भीड़ के लिए अनंत व्यवस्था करनी है।जिसके लिए समय हाथ से निकला जा रहा है।व्यवस्था के लिए एक समिति बनी है।पर्यवेक्षण समिति।जिसके मुखिया अपने बड़े साहब है।जो प्रदेश की राजधानी में ही हमेशा रहते है।उनकी नैतिक जिम्मेदारी और यह*फर्ज* है कि वह इस समिति की बैठक को नियत तिथि पर सम्प्पन करे।क्योकि यही से बड़े निर्माण कार्य को स्वीकृति मिलती है।किन्तु बड़े साहब को फुर्सत नहीं मिलती है।अंदरखाने की खबर है।पिछले डेढ़ महीने से इस महत्वपूर्ण समिति की बैठक लगातार टाली जा रही है।फ़िल्म स्टार सन्नी देओल के  डायलॉग..जैसी तारीख पर तारीख मिल रही है।जिससे नवीन निर्माण कार्य की स्वीकृति पर असर पड़ रहा है।ऐसी चर्चा संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है।यही वजह है कि बड़े साहब को टाइट करने की बात दबी जुबान से सुनाई दे रही है।टाइट करने का काम विकास पुरूष का है।हमारा तो काम है।बस चुप रहना।

आखिर कब लगेगी मोहर...
एक योजना बाबा की नगरी के लिए तैयार की गई थी।जिसे अधिकारियों ने नाम दिया है।विकास पुरुष का ड्रीम प्रोजेक्ट।जब से इसकी शुरुआत हुई।तब से आज तक राजधानी में इससे जुड़े 3 एसीएस,2 प्रदेश आयुक्त,1 संभाग आयुक्त,1 निगमायुक्त,1 कलेक्टर बदले जा चुके है।इस योजना से पानी के झंझट से आमरहवासियो को मुक्ति मिलेगी।प्रोजेक्ट का नाम हरियाखेड़ी है। इस पर अभी तक मोहर नहीं लग पाई है।जबकि समय रेत की तरह हाथ से निकलता जा रहा है।ऐसी चर्चा शहर के गणमान्य और शुभचिंतकों के बीच सुनाई दे रही है।इन सभी की विकास पुरुष से गुहार है।इस पर मोहर जल्दी से जल्दी लगवाएं।ताकि 2028 के पहले यह सपना पूरा हो जाए।देखना यह है कि विकास पुरूष नए साल में इस संकल्प को कब तक पूरा करवाते हैं।तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

विदेश यात्रा की चर्चा
एक माननीय की गोपनीय यात्रा देश के बाहर की इन दिनों चर्चाओं में है।हालांकि यात्रा पिछले माह के 17 से 23 के बीच की है।जब माननीय के साथ एक खनिज कारोबारी चुपचाप निकल गए।एक दिन दिल्ली रुके और फिर दोनों ने प्लेन पकड़ा और उड़ गए।यात्रा के प्रायोजक खनिज कारोबारी थे।माननीय को खुश रखना उनके लिए जरूरी है।वजह माननीय की विधानसभा क्षेत्र में ही उनका खनिज संपदा का साम्राज्य स्थापित है।कभी यह कारोबारी पँजाप्रेमी थे,मगर अब वक्त की नजाकत को देखकर कमलप्रेमी  बन गए है।माननीय को खुश रखने के लिए  वह हमेशा एक पैर पर तैयार रहते है।ऐसा मावा नगरी के कमलप्रेमियो का कहना है।मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप रहना है।

भावना बनाम अधिकरण अधिकारी
अपने उम्मीद जी ने बुधवार को 7 जिलों के आईएएस अधिकारियों की बैठक ली।जिसमे उन्होंने पहले ही सबको निर्देश दिए थे।किसी एक विषय पर नवाचार प्रजेंटेशन लेकर आना।संभाग के सबसे छोटा जिला रेगिस्तान राज्य से लगा हुआ है।उस जिले के मुखिया को हमेशा अंत में अवसर मिलता है।अपनी बात रखने का।मगर उम्मीद जी की आदत है।लीक से हटकर काम करने की।उन्होंने छोटे जिले को पहला अवसर दिया।यह सुनते ही जिले के मुखिया भावना में बह गए ,आंखे  भर आई ।बोलने से भी नहीं चूके कि आभारी हूँ, जो पहली दफा पहला मौका दिया।इधर मां चामुंडा नगरी से आए मुखिया का अपना दुखड़ा था।वह अधिग्रहण को लेकर आ रही परेशानी सुनाने लगे।जिसे सुनकर अपने उम्मीद जी चुटकी लेने से नहीं चूके।उन्होंने अपनी कातिलाना मुस्कान के साथ कहा।तुमको प्रदेश का अधिकरण अधिकारी बना दे।जिसे सुनकर चामुंडा नगरी के मुखिया चुप हो गए।तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

छुपे रुस्तम...
तो अब जाकर यह खुलासा हुआ है।अपने शिवाजी भवन के मुखिया छुपे रुस्तम है। इसमे कोई शक नहीं है।मिलनसार,मृदभाषी है।जिनको अपुन ने एंग्रीमैन का नाम दिया है।उस वक्त तक हमकों भी पता नहीं था।अपने एंग्रीमैन दरअसल में छुपे रुस्तम मतलब ऑल राउंडर है।ये तो आईएएस मीट में खुलासा हुआ।जब वह पिच पर उतरे।गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनो में माहिर निकले। तभी तो शिवाजी भवन के मैदान की पिच पर अपनी बैटिंग-बॉलिंग दोनो का संतुलन बनाकर काम कर रहे है।जिसके लिए बधाई के हकदार है।मगर यह भी सच है।उनकी यह पारी लंबी नहीं होगी?कारण..नए साल में जल्दी ही वह किसी जिले के मुखिया बन जाएंगे।जिसके लिए अभी से एंग्रीमैन को शुभकामनाएं देते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

कार्यवाही का मुहूर्त कब...
पिछले सप्ताह एक आदेश जारी हुआ।सरकार के कोषालय वाले विभाग से।जिसको सरकारी भोंपू ने ख़बरची वाले ग्रुप में डाला।आदेश में अधिनियम 1899 और प्रदेश के रूल्स 1942 का जिक्र था।आदेश यह था कि जमीन की खरीदी-बिक्री,अनुबंध आदि में काम आने वाले पेपर को ज्यादा मूल्य पर बेचना अपराध है।जिसमे 6 माह का कारावास 500 रु जुर्माना और लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।इसमे सबसे हास्यास्पद लाइन यह वाली लिखी थी।अधिक मूल्य पर बेचने सम्बन्धी जानकारी विभाग को दी जा सकती है।जबकि विभाग के बाहर ही यह धंधा लंबे समय से चल रहा है।विभाग को भी पता है।खुद यह गंदगी अंदर तक फैली है।कमीशन लेकर ही यह कीमती पेपर मिलता है।फिर भी चुप रहेंगे  ने बुधवार की शाम 5 बजे 10-10 वाले यह 5 कागज खरीदे।जिसके बदले 100 रुपये ऑन लाइन भुगतान करना पड़ा।अब देखना यह है कि कार्यवाई का मुहूर्त कभी निकलता है या नहीं?तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं

मैडम का जलवा...
इंसान अपनी तासीर कभी नहीं बदल सकता है।भले ही उसका पद बदल जाए।मूल स्वभाव और कार्यशैली वैसी ही रहती है।अपनी दमदमा वाली चटक मैडम को पाठकगण भूले तो नहीं होंगे।दमदमा के विकास भवन के गलियारों में आज भी उनको याद किया जाता है।उनके जाने की खुशी में बस ढोल ही नहीं बजे थे।अब चटक मैडम जी एक जिले की मुखिया है।तो हमको उम्मीद थी।व्यवहार और कार्यशैली में बदलाव आएगा।मगर उस जिले से जो खबरें आ रही है।वह तो तांडव मचाने वाली है।बेचारे..मातहत जो कुछ भी बता रहे है।उसे सुनकर हमकों ही पीड़ा महसूस होने लगती है। मगर जब हम यहाँ उनके रहते हुए ,कुछ बिगाड़ नहीं पाए। तो  संभाग के बाहर क्या बिगाड़ सकते है। इसलिए उस जिले के सभी मातहतों के लिए बाबा से प्रार्थना करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

एक आईएसएस मित्र की पसंद

अब के बरस भी क़िस्से बनेंगे कमाल के
पिछ्ला बरस गया है कलेजा निकाल के

फिरते थे जिन के काँधों पे हम हाथ डाल के
वो दोस्त हो गए हैं सभी साठ साल के

अपनी तरफ़ से सब की दलीलों को टाल के
मनवा ले अपनी बात को सिक्का उछाल के

ये ख़त किसी को ख़ून के आँसू रुलाएगा
काग़ज़ पे रख दिया है कलेजा निकाल के

माना कि ज़िंदगी से बहुत प्यार है मगर
कब तक रखोगे काँच का बर्तन सँभाल के

ऐ मीर-ए-कारवाँ मुझे मुड़ कर न देख तू
मैं आ रहा हूँ पाँव से काँटे निकाल के

तुम को नया ये साल मुबारक हो दोस्तो
मैं ज़ख़्म गिन रहा हूँ अभी पिछले साल के

ग़म की तरह ख़ुशी में न रोना पड़े कहीं
रखना 'ख़लील' एक दो आँसू सँभाल के


शायर :खलील धनतेजवी