23 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
आभार- धन्यवाद- साधुवाद ...
संकुल के गलियारों में इन दिनों आभार- धन्यवाद- साधुवाद की गूंज सुनाई दे रही है। यह तीन शब्द बोलने वाले अपने ऑपरेटर है। जो कि उज्जवल जी और फटाफट जी के लिए बोल रहे। इशारा 20 हजारी डिमांड की तरफ है। जो इनसे की गई थी। ठेकेदार के माध्यम से। मैडम की डिमांड थी। ऑपरेटरों को 8 हजारी भुगतान मिलता है। बेचारे डिमांड कैसे पूरी करते। तो इसी कॉलम में पिछले सप्ताह मैडम की डिमांड शीर्षक से चुटकी ली थी। जिसे उज्जवल जी और फटाफट जी ने गंभीरता से लिया। ऑपरेटरों से बात की। तब तक कुछ ने 5-5 हजारी जमा करा दिये थे। अपने फटाफट जी ने एक्शन लिया। राशि वापस कराई। लेकिन जिस मैडम की डिमांड थी। उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
एसडीएम बनवा दीजिए ...
संकुल में विराजमान एक मैडम इन दिनों परेशान है। लंबे समय से एक कमरे में बैठी हुई है। जो विभाग मिले हुए है। उनकी फाइले इधर-उधर बढाने के अलावा कोई काम नहीं है। मैडम जी फील्ड में जाना चाहती है। किसी भी अनुभाग का एसडीएम बनने के लिए बैचेन है। तभी तो बदबू वाले शहर के अपने माननीय डॉ. साहब से संपर्क किया। मुलाकात की। अपना प्रस्ताव रखा। मेरी सिफारिश कर दीजिए। जो भी आपका हिसाब बनेगा। समय पर दूंगी। बेचारे डॉ. साहब ठहरे फक्कड और ईमानदार। अगर कोई दूसरा यह ऑफर रखता तो शायद थप्पड जड देते। मगर महिला का सम्मान किया। देखते है... कहकर टाल दिया। ऐसी चर्चा बदबू वाले शहर में डॉक्टर के करीबी कमलप्रेमी कर रहे है। जिसकी गूंज संकुल के गलियारों में भी सुनाई दे रही है। मगर यह मैडम कौन है। तो सबने चुप्पी साध रखी है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
वन-टू-वन ...
अभी तक यही देखा है। अपने विकासपुरूष उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करते है। कुछ इसी तर्ज पर अपने फटाफट जी चल रहे है। अपने कार्यालय में कम से कम 50 लोगों से वन-टू-वन चर्चा की है। जिनसे उन्होंने बात की है। वह मंदिर के गलियारों में मगरमच्छ की उपाधि रखते है। वर्षो से ऊपरी कमाई वाली जगह पर ही पदस्थ है। इनसे अपने फटाफट जी 5 सवाल करते है। वर्तमान में कहां पदस्थ हो ? क्या काम कर रहे हो ? नौकरी कब लगी थी ? इस दौरान क्या-क्या काम किये? किस काम में रूचि है? जिसके चलते यह कयास लगाये जा रहे है। जल्दी ही मंदिर में बड़ा फेरबदल होने वाला है। जिससे मंदिर की बदनामी पर रोक लगेंगी। कोशिश अच्छी है। बस राजनीतिक दबाव से मुक्त रहे। जिसके लिए हम फटाफट जी को अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए, आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
माननीय मेहरबान ...
जिले के एक कमलप्रेमी माननीय मेहरबान है। अपनी ही कमलप्रेमी संस्था की 2 नेत्रियों पर। तभी तो दोनों नेत्रियों के परिचितों के नाम पर पट्टे आवंटित करवा दिए। वह भी एक नहीं, दो-दो। जबकि दोनों नेत्रियां अच्छी खासी संपन्न है। फिर भी तहसील के राजस्व अधिकारी ने माननीय के निर्देश पर पट्टे आवंटित कर दिये। इन माननीय को लेकर कमलप्रेमियों में यह भी चर्चा है। सुबह बूटी- दोपहर चिलम और शाम को सोमरस का सेवन इनके लिए जरूरी है। अब यह बात कितनी सच है। कमलप्रेमी ही जाने। क्योकि हमको तो चुप ही रहना है।
ईमानदारी का प्रमाण-पत्र ...
एक बार फिर उन्हीं माननीय की बात कर रहे है। जिन्होंने पट्टे आवंटित करवाएं है। इन्हीं माननीय ने तहसील में पदस्थ तहसीलदार मैडम को सार्वजनिक रूप से ईमानदारी का पट्टा दिया है। जबकि कमलप्रेमी से लेकर राजस्व अधिकारीगण भी इस सच से वाकिफ है। मैडम 1 पेटी से नीचे का कोई काम ही नहीं करती है। बेचारे ... अपने चुगलखोर जी से 4 कदम आगे है मैडम। मगर माननीय ने प्रमाण-पत्र दे दिया है। जिसको लेकर कमलप्रेमी कयास लगा रहे है। बंदी नियमित जा रही है। कमलप्रेमी तो यही बोल रहे है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
रूक जा भाई रूक जा ...
घटनास्थल डोंगला हेलीपेड है। जहां विकासपुरूष का उडनखटोला उतरा। यहां पर अपने बडबोले नेताजी ने शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश की। जमकर नारेबाजी करवाई। जब विकासपुरूष बेरिकेड्स के नजदीक पहुंचे थे। विकासपुरूष जिन्दाबाद। एक उत्साही कार्यकर्ता तो विकासपुरूष के कान के नजदीक ही जिन्दाबाद-जिन्दाबाद के नारे लगा रहा था। तो विकासपुरूष को बोलना पडा। रूक जा भाई रूक जा। तब कहीं जाकर वह चुप हुआ। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
भू-माफिया की शिकायत ...
अपने लेटरबाज जी याद है। वही जो कमलप्रेमी संस्था के मुखिया थे। शनिवार को अपने विकासपुरूष से मिले। डोंगला में। जहां उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। भू-माफिया द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण की। पंचक्रोशी मार्ग पर भू-माफिया सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे है। लेटरबाज जी का सुझाव भी था। सडक़ चौडीकरण करके भू-माफियाओं को हटाया जा सकता है। विकासपुरूष ने लेटरबाज जी की शिकायत सुनी। अब आगे क्या होगा? समय बतायेंगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
टॉप-सीक्रेट ...
देश और प्रदेश से जुड़ी गोपनीय जानकारी तो टॉप-सीक्रेट की श्रेणी में आती है। मगर अपने विकासपुरूष का सार्वजनिक कार्यक्रम कब से टॉप-सीक्रेट होने लगा है। यह सवाल संकुल के गलियारों में सुनाई दे रहा है। दरअसल शुक्रवार की देर रात विकासपुरूष का कार्यक्रम राजधानी से आया। जिसके बाद जिले का मिनिट-टू-मिनिट कार्यक्रम जारी होता है। जो कि सुबह हुआ। मगर इस हिदायत के साथ। यह टॉप-सीक्रेट है। इसे सार्वजनिक नहीं किया जाये। यह निर्देश फटाफट जी के कार्यालय से जारी हुए थे। जिसे पढक़र सब सोचने पर मजबूर हो गये। विकासपुरूष खुद चाहते है। ज्यादा से ज्यादा जनता उनके कार्यक्रम में आये। अगर उनका ही कार्यक्रम टॉप-सीक्रेट हो गया तो कैसे चलेगा। बात सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
जनता परेशान हुई ...
विकासपुरूष का डोंगला कार्यक्रम सफल रहा। भीड भी खूब थी। प्रशासन की मेहनत रंग लाई। विकासपुरूष का उडनखटोला तो सीधे उतर गया। मगर 3 किलोमीटर के कच्चे रोड पर जनता खूब परेशान हुई। पानी गिरने से कच्चा मार्ग कीचड और गड्डों में तब्दील हो गया था। बेचारी जनता लौटते वक्त प्रशासन को कोसती नजर आई। जनता का कहना था। इस 3 किलोमीटर पर चूरी आदि डलवा देते। हमको तो परेशानी नहीं होती। जनता की बात सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप रहना है।
ग्रामदेवता खुश ...
व्यंग्यकार स्व. हरिशंकर परसाई ने लिखा था। पटवारी, ग्राम का देवता होता है। देवता को खुश करना चांद से तारे तोडक़र लाने जैसा असंभव काम है। मगर इन दिनों 70 ग्रामदेवता अपनी खुशी नहीं छुपा पा रहे है। यह सब वह है, जिनको अभी इधर से उधर किया गया है। मनचाही पोस्टिंग मिली है। वह भी बगैर 1 पैसा खर्च किये हुए। ऐसा पहली दफा हुआ है। आवेदन किया-जगह मांगी-लिस्ट बनी। जिले के प्रभारी बाऊजी के पास पहुंची। जिन्होंने बगैर कांट-छांट के अनुमोदित कर दिया। किसी को भी 1 रूपया खर्च नहीं करना पड़ा। नतीजा विकासपुरूष और बाऊजी का ग्रामदेवता जमकर गुणगान कर रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
जुगाड में पंडित जी ...
अपने स्मार्ट पंडित जी इन दिनों जुगाड में है। किसी भी तरह से। आने वाली तबादला सूची में उनका नाम जुड जाये। हर हाल में जाने की इच्छा रखते है। मगर सही जुगाड नहीं मिल रही है। शनिवार को उन्होंने विकासपुरूष के खास सलाहकार से बातचीत की। सलाहकार हमेशा विकासपुरूष के साथ रहते है। विदेश दौरे में भी साथ जाते है। यह कोई अधिकारी नहीं है। मगर विकासपुरूष के विश्वसनीय है। लंबे समय से। स्मार्ट पंडित और सलाहकार के बीच हुई चर्चा को इसी नजरिए से प्रशासन देख रहा है। हेलीपेड पर सभी ने यह नजारा देखा। तो सुगबुगाहट शुरू हो गई। जुगाड में पंडित जी की। बात सच भी हो सकती है। मगर हमको चुप ही रहना है।
रास्ते से हट जाओं ...
अपने विकासपुरूष को हवाई यात्रा कराने वाले पायलेट ने कभी ऐसा नहीं किया होगा। उसको विंडस्क्रीन में से हाथ हिलाकर इशारा करना पड़े। हवाई पट्टी से हट जाओं। विमान है। चोट लग सकती है। घटना शनिवार की है। जब विकासपुरूष का जहाज उतर रहा था। हवाई पट्टी पर ही कई कमलप्रेमी जमा हो गये। यह सब वह कमलप्रेमी है। जो हवाई पट्टी के अंदर जाना अपनी शान समझते है। मगर विमान तेजी से उतरता है और उसे मोडना पड़ता है। ताकि विकासपुरूष उसी तरफ से उतरे। जिधर भीड है। भीड के कारण विमान को मोडने में तकलीफ आती है। कोई घायल भी हो सकता है। तभी तो पायलेट ने हाथ से इशारा किया था। पट्टी से हट जाओं। घटना सच है। मगर कमलप्रेमियों को कोई नहीं समझा सकता है। इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
ऐसा भी होता है ...
मंदिर से अभी-अभी एक को हटाया गया है। अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। सीधी भाषा में उनको मूल अपनी जगह भेज दिया गया है। गणपति बप्पा वाली जगह पर। लेकिन जो आदेश जारी हुआ। उसकी भाषाशैली अचंभित करने वाली है। आज तक ऐसी भाषाशैली में कोई आदेश नहीं हुआ है। जिसमें ऐसा लिखा हो। कार्य की अधिकता- काम में असमर्थता - निवेदन को मान्य कर मुक्त किया जाता है। ऐसी विनम्र भाषाशैली को पढक़र हर कोई आश्चर्य में है। क्योंकि ... सच सबको पता है। क्यों हटाया गया है। मंदिर की बदनामी का डर है। इसलिए कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। सब चुप है। तो हम भी आपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
अकेले छोड़ा ...
आमतौर पर कभी भी ऐसा नहीं होता है। अखिल भारतीय सेवा वाले कभी भी अपनी बिरादरी के साथी को अकेला नहीं छोडते है। कैसी भी कार्यशैली हो या भाषाशैली। हमेशा साथ निभाते है। मगर दमदमा के गलियारों में चर्चा है। चटक मैडम जी अकेली हो गई है। 2028 से जुड़ी बैठकों में बुलाने से बचा जा रहा है। इसके पीछे क्या कारण है। यह अखिल भारतीय सेवा की लाबी ही बता सकती है। जो कि चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
चलते-चलते ...
हेलीपेड पर उडनखटोले में विकासपुरूष बैठ चुके थे। उडने की तैयारी थी। डोंगला के लिए। अचानक उनको वजनदार जी की याद आर्ई। उनको सम्मान सहित बुलाया गया। जब वजनदार जी उडनखटोले के नजदीक पहुंचे। तो पीछे से किसी ने चुटकी ली। इनको बैठाने के लिए 2 लोगों को उतारना होगा। जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी मुस्कुराये और चुप हो गये। तो हम भी मुस्कुराते हुए चुप हो जाते है।