23 फ़रवरी 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
अंधेरी रातों में -सुनसान राहों पर...
यह गीत हमारे पाठकों ने जरूर सुना होगा।फ़िल्म शहंशाह का यह गीत है। इस गीत पर इन दिनों अपने एंग्रीमैन अमल कर रहे है।अक्सर देर रात वह निकल जाते है। उन जगहों पर,जहाँ निर्माण कार्य चल रहे है। हालांकि वह अकेले नहीं होते है। सेट पर पहले ही संदेश चल जाता है।नतीजा बाकी अधिकारी भी पहुँच जाते है।काम देखकर वापस लौट जाते है।यही से टर्निंग पॉइंट है। एंग्रीमैन के जाते ही बाकी सब भी गायब और मशीन बंद हो जाती है। ऐसा शिवाजी भवन के सूत्रों का कहना है।मगर हमकों तो आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
E.. ऑफिस में फिसड्डी...
गुरुवार को बड़े साहब की वीसी थी। प्रदेश के सभी जिलों के मुखिया दहशत में थे।क्या पता साहब आज किस नई उपाधि से किसको नवाज दे। पिछली दफ़ा रिश्वतखोरी की उपाधि मिली थी। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। वीसी में E-office( डिजिटल ) को लेकर जरूर खुलासा हो गया। विकासपुरुष का गृह नगर डिजिटल के मामले में 39 नंबर पर था। जबकि संभाग तो फ़िसड्डी बताया गया। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस,आश्चर्य व्यक्त करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
चरणलाल जी की ख्वाहिश
अपने चरणलाल जी इन दिनों खुश है।उनकी यह खुशी दुगनी तब होगी।जब इस्तीफा मंजूर हो जाएगा।उप नेता प्रतिपक्ष का।अगर ऐसा हुआ तो चरणलाल जी की खुशी तिगुनी हो जाएगी। पंजाप्रेमी सोच रहे होंगे कि इस्तीफा मंजूर होने से चरणलाल जी का क्या लेना -देना। तो हम क्लियर कर देते है। बहुत कुछ लेना देना है। अगर इस्तीफा स्वीकार हुआ। तो चरणलाल जी इस कोशिश में है।
उनको उप नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। वह कई दफा कह चुके है। विकासपुरुष के गृहनगर में रहकर, उनसे लड़ाई करना हँसी खेल नही है। उप नेता बनने से उनको और ज्यादा"ताकत" मिलेगी। जिसके बाद वह ज्यादा खुलकर विकासपुरुष के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ सकते है।अंदरखाने की खबर है। उप नेता बनने की जुगाड़ में अपने चरणलाल जी लग गए है। देखना यह है कि बाबा महाकाल उनकी इस ख्वाहिश को पूरा करता है या नहीं?तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
कंबल ओढ़कर ....पीना
ऊपर लिखी कहावत का अर्थ हमारे पाठकगण अच्छी तरह से समझते है। इन दिनों 28 के निर्माण कार्यो एजेंसी से जुड़े मुखिया यही कर रहे है। उनके पॉवर इस कदर है कि बैठकों में भी गायब रहते है।शनिवार को हुई मीटिंग में यही हुआ। लोनिवि के मुख्य इंजीनियर गायब थे। वजह .किसी ख़ुशी के कारण नदारद थे। जबकि उम्मीद जी,उज्ज्वल जी, हिटलर जी ,आदि मौजूद थे। यह बैठक महत्वपूर्ण थी। कारण -विकास पुरुष के साफ निर्देश थे। 2028 के कामों को लेकर काउंट-डाउन शुरू कर दिया जाए।यानि उल्टी गिनती शुरू । इसके बाद भी गायब थे। जबकि अपने उज्ज्वल जी के घर भी गम औऱ खुशी का माहौल था। जब तराना कांड हुआ। तब उनके घर मे गमी का माहौल था। जब ख़ुशी का अवसर(शादी) का मौका आया। तो शिवरात्रि आ गई। जिसके चलते दोनो मौकों पर उन्हें मुख्यालय पर रहना पड़ा। मगर कंबल ओढ़कर घी पीने वाले मजा उठा रहे है। जब मर्जी हो हाजिर और गायब हो जाते है। उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।बात सच है। क्योंकि घी अकेले नहीं पीते है।ऊपर तक पकड़ रखते है।इसलिए सब चुप रहते है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
शादी बनाम सड़क..
घर में शादी हो और घर के सामने की सड़क खोद डाली जाए। वह भी उस कमलप्रेमी नेता के घर की सड़क। जो खुद घोड़ी पर सवार होने वाला हो।बहादुर लोगो के मोहल्ले की घटना है। सीवरेज के कारण रातों रात सड़क उखाड़ दी।सुबह पूर्व कमंडल महामंत्री को पता चला। बस,फिर क्या था। आज के दिन ही घोड़ी पर होकर सवार गीत बजना था,मगर घोड़ी चलेगी कैसे? जब रास्ता ही नहीं है। पूर्व महामंत्री का दिमाग खराब हो गया। जायज भी है। बस,फिर उन्होंने वही किया।जो जरूरी था। खोदने वालों की लू उतार दी और इस कदर उतारी कि रातों रात खुदी हुई सड़क वापस बना दी गई। मतलब अब आज मेरे यार की शादी है गीत बजेगा ओर टल्ली होकर कमलप्रेमी झूमेंगे। ऐसा अपने कमलप्रेमियो का कहना है।मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
सुरक्षा में लापरवाही..
मंदिर की सुरक्षा के लिए निजी कम्पनी के सुरक्षाकर्मी अच्छी संख्या में तैनात है। इसके अलावा विशेष रूप से सुरक्षा अधिकारी तैनात है। जिनकी नियुक्ति विशेष कृपा के चलते हुई है। इसके बाद भी लापरवाही हो गई।शनिवार की अलसुबह। करीब 4 से 5 के बीच।जब एक व्यक्ति गाड़ी लेकर शंख द्वार तक घुस आया। जबकि विकासपुरुष की गाड़ी भी यहाँ तक नही जाती है।गाड़ी में जो युवक सवार था।वह नशे में धुत्त था। इसके पास एक बंदूक थी। जो इसने लहरा दी । कोई अनहोनी होती। इसके पहले युवक को दबोच लिया गया। मंदिर के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है। जो भी कार में था। उसको को तत्काल वर्दी के हवाले कर दिया गया। मगर सवाल यह है कि .कैसे एक युवक तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर अंदर तक घुस गया।ऐसे तो कोई भी अलसुबह जाकर सुरक्षा को तोड़ सकता है। ऐसी मंदिर के गलियारों में चर्चा है। देखना यह है कि इस घटना से मंदिर प्रबंधन क्या सबक लेता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
17 घूसखोर चिह्नित.. हटाए जाएंगे
पिछले दिनों राजधानी के बड़े साहब ने खुलकर बोल दिया था।एक वीसी में। सभी जिलों के मुखिया घूसखोर है और बगैर रिश्वत के काम नहीं होते है। अपनी इस बात में उन्होंने विकास पुरुष को भी लपेट लिया था।जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। इस घटना के बाद गुरुवार को फिर बड़े साहब की वीसी हुई।उसके एक दिन पहले तक आईएएस लॉबी में सुगबुगाहट थी। गुरुवार को कौनसा बम अब साहब फोड़ेंगे। मगर इस दफा बड़े साहब सतर्क थे। उन्होंने कोई विस्फोट नही किया,बल्कि अनमने ढंग से वीसी जल्दी खत्म कर दी। लेकिन वीसी के बाद एक बात निकलकर सामने आई है।जल्दी ही फेरबदल की एक टॉप sevntin की सूची जारी हो सकती है। जिसमे उनको जिले से हटाया जाएगा। जिनके जिले में रिश्वत के रेट सबसे ज्यादा है।इन जिलों के मुखिया की रवानगी पक्की मानी जा रही है।मगर कब तक रवानगी होगी। इसको लेकर राजधानी वाले फिलहाल चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
FOC पर प्रतिबंध...
अपने फटाफट जी ने वाकई हिम्मत वाला काम किया है। foc यानी मुफ्त दर्शन पर रोक लगा दी है। मंदिर प्रोटोकॉल में उनके इस कदम की चर्चा जोरों पर है।रोक भी उन वीवीआईपी लोगो की पर्ची पर लगाई है। जो विकासपुरुष के गेस्ट बताकर दिन में कई लोगो को दर्शन करवाते थे। वह भी मुफ्त में।इसको रोकने की जुर्रत किसी मे नही थी ।वाकई बहुत हिम्मत वाला कदम फटाफट जी ने उठाया।मगर देखना यह है कि foc पर लगाई रोक कब तक रहती है। अभी तो रोक लगाए एक सप्ताह भी नहीं हुआ है। फिर भी इस साहसिक कदम के लिए अपने फटाफट जी को बधाई देकर हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
हम आ रहे इंतजाम रखना..
वक्त कब किसको किस पद पर बैठा दे। खासकर राजनीति में। यह कोई नहीं बता सकता है। कल तक जिसको आदेश दिए जाते थे। वह अगर अचानक बॉस बन जाए। तो उन युवा कमलप्रेमी नेताओं को कैसा महसूस होगा।यह तो अपने गुमसुम नेताजी और गोरे -चिट्टे युवा कमलप्रेमी बता सकते है।जिन्होंने पिछले दिनों दर्जी जी के स्वागत में पूरी ताकत झोंक दी। गोरे-चिट्टे नेताजी के मंच पर तो बैलून कांड हो गया। भले कोई हादसा नहीं हुआ। लेकिन यह सच है। एक वक्त था। जब दोनों अपने दर्जी जी को फोन पर हुक्म देते थे। हम आ रहे है-इंतजाम रखना-कोई चूक न हो। बेचारे दर्जी जी हुक्म का पालन करते थे। अब वक्त बदल गया और हुक्म देने वाले जी-हुजूरी में लगे थे। इसी को वक्त कहते है। ऐसा अपने युवा कमलप्रेमी बोल रहे है। बोल भी सच रहे है। इसलिए हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
बिखरा रायता समेटो..
पिछले दिनों विकास पुरुष ने बैठक ली थी। 2028 की समीक्षा थी। इसमे वह एसीएएस भी शामिल थे। जिन्होंने 2025 में भविष्यवाणी कर दी थी। इतना रायता फैला तो दिया-इसको समेट पाओगे। उनका इशारा निर्माण कार्यों की प्रगति की तरफ था। उनकी दूरदृष्टि सही साबित हुई है। यह बात अब अपने विकास पुरूष के दिमाग मे घर कर गई है। तभी तो उन्होंने बैठक में सख्त तेवर दिखाए थे। जिसका नतीजा अब साफ नजर आ रहा है।विकासपुरुष ने अब नए कामो पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।अब कोई नया प्रोजेक्ट स्वीकार नही होगा।बल्कि जितने पुराने काम चल रहे है। उनको पूरी तरह से समेटा जाए।बहुत जरूरी प्रोजेक्ट को ही अब सहमति मिलेगी। ऐसा उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है।मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना हैं।
हंगामा है क्यों बरपा....
इन दिनों प्रदेश की आईएएस लॉबी से लेकर sas लॉबी में हंगामा बरपा हुआ है। सोशल मीडिया पर अलग खबरे चल रही है। तीसरी शादी-तीसरी शादी। तो ऐसा क्या हो गया। अपने सूरज जी ने तीसरी दफ़ा शादी कर ली तो। इसके पहले भी जो शादिया हुई थी। मियां-बीबी राज़ी की तर्ज पर ही हुई थी।विधिवत आपसी रजामंदी से हुई थी।फिर नही बनी तो अलग हो गए।अब फिर दिल मिल गया। जिसकी शुरुआत उज्जैन से हुई थी। इसको लेकर हंगामा क्यो बनाना। बल्कि शुभकामनाएं बनती है। तो नव जोड़े को अनंत आशीर्वाद देते हुए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
अच्छे शौक पूरे करने..
अपनी वर्दीवालों के बीच इन दिनों अच्छे शौक की चर्चा सुनाई दे रही है। जिसमे इशारा उस मैडम की तरफ है। जो कि रामायण के पात्र बाली की यात्रा पर गई थी। अब इतना खर्च करके कोई जाए। तो रील बनाना जरूरी है। मैडम जी ने भी अपना यह शौक पूरा किया।ऐसी रील बनाकर डाली।उनके विभाग के दिलजलों को मिर्ची लग गई। रील में मैडम जी ,किसी फिल्म स्टार से कम नहीं लग रही है। यह बात कई वर्दीवालों को खल रही है। जिसमे हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
ग्रामदेवता की इश्क में कुटाई..
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक Msg वायरल हो रहा है। जो कि शिवाजी भवन से लेकर संकुल के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मैसेज में एक उपयंत्री मैडम और ग्रामदेवता के इश्क का उल्लेख है। मैडम जी का नाता शिवाजी भवन से है और ग्राम देवता का संकुल से। उपयंत्री मैडम पहले भी इश्क का शिकार हो चुकी है। अब फिर हो गई। ग्रामदेवता की अर्धागिनी उच्च पद पर विराजमान है। जिन्होंने अपने परमेश्वर ग्रामदेवता को रंगे हाथों पकड़ लिया। जिसके बाद क्या होना चाहिये?वही हुआ! जो होना चाहिए । सौतन और देवता की कुटाई । इसमे कितना सच है-कितना झूट। खुद फैसला करें, मगर फैसला लेने से पहले यह जरूर सोचें...धुंआ तभी दिखता है, जब आग लगी हो। बाकी आप सभी पाठकगण समझदार हैं और हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
मेरी पसंद
फलों पर हक जताने आए हो तो ये भी बतला दो तुम
मैं जब पौधों को पानी दे रहा था तब कहाँ थे तुम
जुबेर अली ताबिश