16 मार्च 2026 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

16 मार्च 2026 (हम चुप रहेंगे)

मुंगेरीलाल के सपने...
अपने चरणलाल जी के वित्तीय संकटहर्ता(फायनेंसर) का पहली दफा हम खुलासा कर रहे है। इनको पँजाप्रेमी दबी जुबान में मुंगेरीलाल बुलाते हैं।वर्तमान में सभी पंजाप्रेमियो के यह मुखिया है।लक्ष्मी जी की असीम कृपा है।उसी के कारण यह सपना देख रहे है।2028 में माननीय बनने का।तभी तो चरणलाल जी को पूरी तरह कब्जे में कर रखा है। ताकि अपने सपने को हकीकत में बदल सके।देखना यह है कि अपने चरणलाल जी,अपने वित्तिय संकट मोचक का सपना सच करते है या वक्त आने पर अपनी आदत के अनुसार पलटी मारते हैं। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं |

पायरो किसके आदेश पर...
गेर में हुई घटना और 6 लोगो के घायल होने के बाद, यह सवाल खड़ा हो रहा है। आखिर ऐसे घातक/ज्वलनशील पायरो लगाने का आदेश किसने दिया था?क्योंकि प्रशासन कालिदास तो हो नही सकता है। वह तो पहले ही विकासपुरुष के हर दौरे में सुरक्षा को लेकर टेंशन में रहता है। उससे ऐसी भयंकर गलती की उम्मीद रखना बेमानी है। मगर इसके उलट अंदर की बात यह है।जब जब विकासपुरुष का आगमन होता है। तो उनके कुछ करीबी प्रशासन पर हावी हो जाते है। बाकायदा निर्देश देते है। दूरभाष पर। व्यवस्था को लेकर। यह करना होगा-वह करना होगा। प्रशासन इनकी पहुँच से वाकिफ है। इसलिए जो निर्देश मिलते है। उस पर अमल करता है। गेर वाली घटना में पायरो लगाने के भी निर्देश देने वाला कोई तो होगा ही।ऐसी चर्चा संकुल से लेकर शिवाजी भवन तक सुनाई दे रही है। मगर वह कौन है? इसको लेकर कोई भी मुँह खोलने के लिए तैयार नहीं है। सब चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

गुस्सा भी जरूरी है..
शासन और प्रशासन हमेशा मोहब्बत दिखाने से नही चलता है। कभी-कभी भय दिखाना भी जरूरी होता है। वरना,मातहत मद-मस्त होकर काम करने लगते है।इसमे अव्वल नम्बर पर मरीज को बकरा समझने वाला विभाग है। इस विभाग के मुखिया अपने पाटला जी है। जो कि अपनी जेब गर्म करने के रास्ते तलाश करते रहते है। जिसका फायदा उनके सहयोगी उठाते हैं। सीधा फण्डा उनके सहयोगी अपनाते हैं। बगैर बताए गायब रहो -बस बॉस की जेब गर्म करते रहो। तभी तो चरक भवन में अराजकता का माहौल व्याप्त है। इस पर अपने उज्जवल जी की नजर पड़ गई । तो गुरुवार को पहुँच गए। क्लास लगा दी।जमकर फटकार लगाई। रजिस्टर चेक कर डाले।कार्यवाही भी कर दी। मगर होगा कुछ नहीं। दो-चार दिन असर रहेगा। क्योंकि भूत बातों का बुरा नहीं मानते है। इनका असली इलाज कुछ और है। ऐसा ईमानदारी से ड्यूटी करने वालों का कहना है। इनका एक सुझाव भी है। रोज कोई एक अधिकारी अचानक आए और चेकिंग करे। तभी व्यवस्था सुधर सकती है। वरना कितना भी डांट लो-वेतन काट लो। अव्यवस्था कायम ही रहेगी। कर्मचारियों की बात में दम है और चुप रहना ही हमारा कर्म है।

मेरी पत्रिका किसको दी है...
किसी के घर पर शादी है। तो यह उसकी मर्जी है। वह किसको पत्रिका दे-किसको नहीं। इसके लिए कोई भी इंसान खुद फोन लगाकर नहीं पूछता है। मेरी पत्रिका किसको दी है-मैं वहाँ से उठवा लूंगा।मगर अपने कमलप्रेमी बड़बोले पूर्व माननीय की बात अलग है। बी टेक-एम टेक से पराजित अपने बड़बोले नेताजी ने यही किया। जो पाठकों ने पढ़ा। ऐसा उस तहसील के कमलप्रेमी बोल रहे है। किसी कमंडल नेत्री के घर सम्पन्न हुई शादी को लेकर। कमंडल नेत्री का मन नही था। बड़बोले जी को बुलाने का। इसलिए उन्होंने पत्रिका नही भिजवाई थी। अपने कमलप्रेमियो का तो यही कहना है और हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप रहना है।

मैडम का जलवा
पिछले दिनों वन मेला लगा था। जिसमें पूरी मेहनत स्थानीय वन विभाग की थी। यह मेला हमेशा से राजधानी में ही लगता रहा है। पहली दफा राजधानी से बाहर लगा।वह भी विकासपुरुष की इच्छा के चलते।अब आगे भी अलग अलग संभागीय मुख्यालय पर आयोजित होगा। ऐसे निर्देश विकासपुरुष के है। शुरूआत बाबा की नगरी से हो गई है। मेले में राजधानी से आई मैडम जी ने खूब गदर मचाया। प्रोटोकॉल की भी परवाह नहीं की। यह वही मैडम जी है। जो कभी बाबा की नगरी में पदस्थ थी। तब इनके कार्यकाल में मगरमच्छ कांड हुआ था। जिसको उजागर भी चुप रहने वाले खबरची ने किया था।मैडम जी ,भविष्य के बड़े साहब की गृह मंत्री है। इसलिए अपने तेवर और नियमों की अनदेखी के लिए मशहूर है। अभी अभी भर्ती घोटाले में भी उनका नाम राजधानी में गूंज रहा है। यह हाल तब है। जबकि अभी बड़े साहब बनने पर मोहर लगनी बाकी है। जब मोहर लग जाएगी, तब मैडम जी का जलवा क्या होगा। इसकी कल्पना से आईएएस लॉबी अभी से  परेशान है। राजधानी के वन से लेकर वल्लभ भवन के गलियारों में तो यही चर्चा है। मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार बस चुप रहना है।

नही बोलूंगा मगर खड़ा मिलूंगा..
पिछले दिनों जब अपने हाइनेस को राजधानी तलब किया गया था। जहाँ उनकों नसीहत दी गई। उनके बयानों को लेकर। जिसके बाद यह खबर बाहर आई। हाइनेस ने वादा किया। 2028 के विकास कार्य को लेकर चुप रहूंगा। मगर अब ये बात सामने आ रही है। उन्होनें संगठन को यह भी कहा। अगर पिपलीनाका के मकान टूटे,तो मैं वहाँ पर खड़ा मिलूंगा! अब इस बात में कितनी सच्चाई है। यह संगठन जानता है या फिर अपने हाइनेस। मगर कमलप्रेमियो में इस बात की खूब चर्चा है। लेकिन दबी जुबान से। इसलिए हम इस बात को मानने का फैसला अपने सुधी-पाठकगण पर छोड़ कर, आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

सीधी बात-no बकवास
अपने पिस्तौल कांड नायक की आदत है। वह सीधा-साफ बोलते है। घुमाफिराकर बात नहीं करते। उनकी इस आदत के हम कायल है। रविवार को एक बैठक थी। कमलप्रेमी मुख्यालय पर। जिसमें जिले के प्रभारी बाऊ जी,वज़नदार जी,दालवाले नेताजी,बदबूदार शहर के ग्रामीण मुखिया(नामकरण जल्दी होगा) पिस्तौल कांड नायक आदि मौजूद थे। जिन्होंने एक तार्किक बात रखी बैठक में। उनका कहना था। जो पँजाप्रेमी अब कमलप्रेमी बन रहे है। उनको ज्यादा तवज्जो देने के बदले,निष्ठावान कमलप्रेमी कार्यकर्ता को ज्यादा  तवज्जो दी जाए। इस बात को लेकर ना जाने क्यों अपने वजनदार जी लगा। उन पर कटाक्ष किया है। जिसको लेकर माहौल में गर्माहट हो गई। घटना के बाद वजनदार जी यह कहकर निकल गए। उनको बदबूदार शहर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में जाना है। जिसको लेकर कमलप्रेमियो में चर्चा है। सीधी बात-no बकवास। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

कौन बनेगा एल्डरमैन...
राजधानी से निकलकर यह खबर आ रही है। आखिर शिवाजी भवन में जल्दी ही किसको बैठने का मौका मिलेगा। मतलब एल्डरमैन का खिताब किस कमलप्रेमी को मिलेगा। 8 कमलप्रेमियो की नियुक्ति होनी है। संघ परिवार के एक वरिष्ठ ने उत्तर और दक्षिण के नाम बताए है। उत्तर से मुकेश मालवीय(मिट्टी के गणपति बनाने वाले) मनीष खंडेलवाल, अशोक देवड़ा और अरविंद उपाध्याय के नाम भेजे गए है। जबकि दक्षिण से मुकेश चौधरी, मधुकर राव,धर्मेंद्र बरुआ और शैलेन्द्र यादव के नाम है। अब इन नामों में कितनी सच्चाई है। फैसला सूची जारी करने के बाद होगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

ठेकेदार की राशि काटो...
अपने इशारा जी का आगमन हुआ। उम्मीद जी,उज्ज्वल जी,एंग्रीमैन और इन्दौरीलाल जी ने wellcome किया। रात में ही आ गए थे। सुबह मीडिया को खबर की गई। निर्माण कार्य देखेंगे। नगरीय क्षेत्र में करीब 32 काम चल रहे है। उन्होंने रामघाट देखा,फिर एक झोन  कार्यालय गए और यूनिटी मॉल देखा। बैठक भी ली। जिसके बाद शिवाजी भवन में चर्चा है। इतने सारे काम चल रहे है। मॉल में ही दिलचस्पी दिखाई। यह तक बोल गए। ठेकेदार की राशि काटो। जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे है। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा। क्योंकि बिना कारण तो वह ऐसा बोलने से रहे? मगर सभी आश्चर्य में है। कयास लगाया जा रहा है कि जब ठेकेदार को पता चलेगा। तो वह राजधानी दौड़ लगाएगा। यह तो पक्का है। लेकिन सवाल यह है कि  मुलाकात के बाद राशि कितनी काटी जाएंगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। विकास कार्यालय में इसको लेकर सब चुप है,तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

नदी में गिराओगे क्या...
अपने उम्मीद जी विदेश यात्रा से लौटते ही काम पर लग गए। निर्माण कार्य की प्रगति देखने। हालांकि उनकी गैरमौजूदगी में अपने उज्ज्वल जी और एंग्रीमैन सक्रिय रहे। इतने ज्यादा कि दिन तो ठीक रात को भी 11 के बाद दौरे करते रहे। अपने एंग्रीमैन तो दो कदम आगे है। देर रात भी निकल जाते है। मगर यह  दोनो संजीदा रहकर दौरे करते है। जबकि उम्मीद जी का दौरे में मस्ती-मज़ाक चलता रहता है। छोटी रपट का निरीक्षण कर थे। साथ मे अपने हिटलर जी भी थे। तभी किसी मीडियाकर्मी ने आग्रह किया। उम्मीद जी से। उस मिट्टी के टीले पर खड़े हो जाए। अच्छा फ़ोटो बन जाएगा। उम्मीद जी हाजिर जवाब है। पलटकर बोले। उस पर खड़ा करवाकर,क्या नदी में गिरवाओगे। उम्मीद जी की बात सुनकर सभी अधिकारियों ने ठहाका लगाया और मीडियाकर्मी भी मुस्कुराया। तो हम भी मुस्कुराते हुए आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

हाइनेस कौन होते है....
यह सवाल पिछले दिनों शिवाजी भवन के सदन में उठा। उठाने वाले विपक्षी थे। मामला वार्ड 3 से 17 में शिफ्ट करने से जुड़ा है। 50 पेटी से बनने वाले सामुदायिक भवन को लेकर सदन में काफी बवाल मचा। सबसे पहले शिवाजी भवन की बीमारी ने हाइनेस को लेकर उठे सवाल पर आपत्ति ली। उन्होंने कहा कि वह माननीय हैं। उनको लेकर ऐसा सवाल उठाना..हाइनेस कौन होते है।यह गलत है। जिसको कमलप्रेमी नगरसेवक दूसरे नजरिए से तौल रहे है। दबी जुबान से बोल रहे है। बीमारी जी ने कर्ज उतारा है। जब बीमारी जी को हटाने की तैयारी हो गई थी। तब हाइनेस ने उनको बचा लिया था। अब भवन की बात। 17 में शिफ्ट करने पर 3 के सेवक ने आपत्ति ली। फिर राजी हो गए। लिखित अनुमति जमा करा दी। मगर लंच टाइम बाद फिर उनको किसी ने कान में मंत्र फूंक दिया। नतीजा जब सदन शुरू हुआ। तो उन्होंने फिर गुहार लगाई। भवन तो 3 में ही बनेगा। जबकि हाइनेस ने 17 की सिफारिश की है। प्रस्ताव अब वापस प्रथमसेवक की कैबिनेट में गया है।सारी लड़ाई कमीशन से जुड़ी है। ऐसी सदन के बाद शिवाजी भवन में चर्चा है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस ,आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।

आपदा में अवसर 
इन दिनों युद्ध के कारण देश मे किल्लत गैस सिलेंडर की है।कुछ दिनों की  आपदा है।जिसको शहर के एक एजेंसी संचालक ने अवसर के रूप में देख लिया है।तभी तो बाले बाले प्रति सिलेंडर 2 हजारी वसूल कर रहे है। इनका गोदाम इंदौर रोड पर है।जहाँ पर यह खेल चल रहा है।एजेन्सी संचालक अपने कमलप्रेमी पहलवान के काफी करीबी माने जाते है। इसीलिए आपदा में अवसर देखकर माल कमा रहे है। ऐसा कमलप्रेमियो का कहना है।मगर हमकों तो चुप ही रहना है।

विकास की सौगात...
अपने विकासपुरुष कल यानि मंगलवार फिर बाबा की नगरी आ रहे है। उनका आगमन हमेशा बाबा की नगरी में विकास की सौगात लेकर आता है। कल शहर को कितनी सौगाते मिलेंगी। यह उनके आगमन पर पता चलेगा। तब तक हम सौगातों के लिए साधुवाद देकर अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।

मेरी पसंद
आप कमजर्फ है गाली पर उतर आते है |
खुद पे अफसोस हुआ आपकी इज्जत करके ||