25 अगस्त 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
1 वाहन में 6 आईएएस ...
आईएएस की आदत होती है। वह अपने वाहन में ड्रायवर और गनमेन के अलावा किसी को बैठाना पसंद नहीं करते है। अपनी बिरादरी (लॉबी) का हो तो बात अलग है। गुरूवार की घटना है। जब एक वाहन में 6 आईएएस एक साथ नजर आये। वाहन चला रहे थे। राजधानी से आये एसीएस स्तर के अधिकारी। उनकी बगल में अपने उज्ज्वल जी विराजमान थे। पीछे की सीट पर अहिल्यानगरी के उम्मीद जी, अपनी चटक मैडम, सबसे पीछे फटाफट जी और शिवाजी भवन के नवागत मुखिया (नामकरण बाकी है) मौजूद थे। अब अंदाजा लगाये? जब एक साथ 6 आईएएस वाहन में विराजमान हो। तो कुछ ना कुछ तो ऐसी खिचडी पकी होगी? जिसका स्वाद तीखा या फीका कुछ भी हो सकता है। इस खिचडी का जायका कैसा होगा। इसका पता भी आने वाले दिनों में चल ही जायेगा। तब तक हम खिचडी के स्वाद की कल्पना करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
भोजन बनाम ज्ञान ...
भोजन की टेबल पर जब वरिष्ठ आईएएस मौजूद हो। तो प्रोटोकॉल देखते हुए बाकी सभी आईएएस-जी सर- यस सर ही बोलते है। जबकि मौके का फायदा उठाकर वरिष्ठ आईएएस अपने ज्ञान और वीरगाथा काल के किस्से सुनाते रहते है। राजधानी से आये वरिष्ठ आईएएस लंच टेबल पर थे। उनके साथ उज्ज्वल जी, उम्मीद जी, चटक मैडम और पंचम-सुर वाली जोड़ी मौजूद थी। राजधानी से आये आईएएस ने वीरगाथा काल को याद किया या नहीं? हमको नहीं पता है। मगर इतना पता है। पंचम- सुर वाली जोड़ी ने थोडी देर बाद अपनी टेबल बदल ली थी। यह कदम क्यों उठाया गया? क्या भोजन के वक्त ज्ञान की बातें तकलीफ दे रही थी। इधर अपने कप्तान जी ने पहले ही भाप लिया था। खत का मजमून लिफाफा देखकर। इसलिए वह उस टेबल से दूर ही रहे। चुपचाप लंच किया और निकल गये। नजारा देखने वालो का तो यही कहना है। मगर हमको चुप ही रहना है।
निगरानीशुदा इंदौरीलाल ...
शीर्षक पढक़र हमारे पाठक गलत अर्थ नहीं निकाले? हमारा आशय वर्दी वाली निगरानी की तरफ नहीं है। हम तो इशारा कर रहे है। राजधानी और किसानों की निगरानी की तरफ। जो आजकल अपने इंदौरीलाल जी की हो रही है। अंदरखाने की खबर है। 400 खोखे के मॉल की निगरानी राजधानी से शुरू हो गई है। एक वीसी के बाद। तभी तो तत्काल कैमरे लगाये गये। ताकि निर्माण कार्य पर सीधे राजधानी से निगरानी रखी जा सके। दूसरी निगरानी किसानों की है। जिसमें इशारा लैंड-पुलिंग की तरफ है। जिसमें सर्वेसर्वा अपने इंदौरीलाल जी है। जिनसे जल्दी ही निगरानी का फायदा उठाते हुए विवाद किया जा सकता है। आशय यह है कि ... इंदौरीलाल जी के मुंह पर स्याही फेक दी जाये। ताकि राष्ट्रीय स्तर पर खबर बन जाये। तभी तो विकासभवन से संकुल तक अपने निगरानीशुदा इंदौरीलाल की चर्चा हो रही है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
तेल निकाल लेंगे...
बाबा तुलसी की चौपाई याद होगी। भय बिनु होई ना प्रीति गुसांई। शिवाजी भवन के गलियारों में यह चौपाई सुनाई दे रही है। इशारा अपने नये-नवेले मुखिया की तरफ है। जो कि ऑयल कार्पोरेशन में काम कर चुके है। इसलिए तेल निकालने में माहिर है। उस पर इंजीनियर है। हर बारिकी समझते है। तभी तो हथौडा लेकर प्रतिभा दिखा चुके है। नतीजा ... इंजीनियरों की टोली में भय व्याप्त हो गया है। जो कि वर्तमान और भूतकाल युग के अनुसार सही भी है। इसीलिए भय बिनु होई ना प्रीति गुसांई को याद करके तेल निकाल लेंगे का डर महसूस किया जा रहा है। ऐसा पहली दफा हो रहा है। जिसके लिए नये मुखिया को बधाई देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
दादा पर नजरें ...
पिछले 20 सालों में मामा-सरकार में कई कमलप्रेमियों ने जमकर मजे लूटे हैं। जिसमें अपने दादा भी है। जिन्होंने मामा सरकार में आराधना के नाम पर अपने निज हितों को साकार किया था। अपने कमलप्रेमी इनको पवित्र-दादा के नाम से पहचानते है। शुद्ध-पवित्र-भोजन वाले दादा। अब हमारे कमलप्रेमी पहचान गये होंगे? तो हम सीधे मुद्दे की बात पर आते है। अपने पवित्र दादा पर्दे के पीछे भूमिका निभा रहे थे। पुलिंग योजना में रोडा अटका रहे थे। जिसका खुलासा हो गया है। उनका मुखौटा उतर गया है। तभी तो नपती-नपती का खेल शुरू हो गया है। ऐसा हम नहीं कह रहे है। बल्कि शिवाजी भवन से लेकर कमलप्रेमी मुख्यालय के कमलप्रेमी बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
कमंडल के कारण अटकी ...
कमलप्रेमी बेचारे सोच-सोच कर परेशान है। आखिर संगठन की सूची कब जारी होगी। जबकि सबकुछ फाइनल हो चुका है। किन्तु घोषणा नहीं हो पा रही है। इसके पीछे आखिर कारण क्या है। तो कमलप्रेमियों के अनुसार एक कमंडल मुखिया के कारण घोषणा अटकी है। अपने हाइनेस इस कमंडल मुखिया को संगठन में लाना चाहते है। नगर जिला संगठन में। उपाध्यक्ष या मंत्री बना दो। जिसके बाद उनके ही करीबी सवाल उठा रहे है। अगर नगर जिला में ही पद देना था। तो कमंडल का दूसरी दफा मुखिया क्यों बनाया? अब सभी को अपने विकासपुरूष के आगमन का इंतजार है। जो कि 27 को आ रहे है। सभी कमलप्रेमियों की उम्मीदे विकासपुरूष पर टिकी है। उनकी सहमति के बाद ही संगठन की सूची जारी होगी। जिसका हमको भी इंतजार है। देखना यह है कि अपने हाइनेस की जिद पूरी होती है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
2 पाटन के बीच में ...
बाबा कबीर का यह दोहा तो हमारे सभी पाठकों को याद होगा। 2 पाटन के बीच में साबूत बचा ना कोए। इन दिनों इंजीनियर वर्ग इस दोहे को याद कर रहा है। कारण ... सिंहस्थ के काम देखने वाले उपयंत्रियों को अब दोहरी मार झेलनी होगी। उस पर मुसीबत यह है। जेब भी गर्म नहीं होगी। तभी तो उपयंत्री वर्ग राजधानी और शिवाजी भवन के पाट में फंसकर कराह रहा है। पहले बात राजधानी की करते है। जहां से एसीएस आये थे। वह दो-टूक चेतावनी दे गये। बैठक में खम ठोककर। अगर निर्माण गुणवत्ता में कमी मिली तो राजधानी से मोबाइल वेन जांच के लिए लाऊंगा। फिर किसी की खैर नहीं। इसके अलावा यह भी बोल गये। हर महीने बैठक होगी। किन्तु अगली बैठक में इतनी भीड नहीं चाहिये। विभाग प्रमुख और अधीक्षण यंत्री। बाकी फालतू कचरा नहीं चाहिये। इधर शिवाजी भवन के नये मुखिया भी हथौडा चलाकर साबित कर चुके है। गुणवत्ताहीन काम नहीं चलेंगे। तभी तो 2 पाटन के बीच वाला दोहा हर उपयंत्री गुनगुना रहा है। अब देखना यह रोचक होगा कि उपयंत्री खुद के लिए क्या नया रास्ता निकालते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
नजरें खोलती राज ....
इंसान के दिल में क्या छुपा है। इसका राज इंसान की नजरें खोल देती है। मन के भाव समझ में आ जाते है। ऐसा अपने कमलप्रेमियों का कहना है। जो कि एक तस्वीर को देखकर नजरें और राज की बात कर रहे है। इशारा देवास रोड के सर्किट हाऊस पर खीची गई तस्वीर की तरफ है। यहां पर इंदौरी तुलसी का आगमन हुआ था। उनसे मिलने एक कमलप्रेमी नेत्री भी पहुंच गई। हाथों में गुलदस्ता लेकर। यह नेत्री लंबे समय बाद नजर आई। मामा सरकार में खूब दिखती थी। खैर .... उनको देखकर वहां मौजूद सभी कमलप्रेमी चौंक गये। फिर तस्वीर खिची। जिसमें अपने बाऊजी की नजरें इस नेत्री पर ही टिकी नजर आ रही है। तभी तो कमलप्रेमी अब तस्वीर को देखकर, नजरें खोलती राज की संज्ञा से विभूषित कर रहे है। तो कुछ कमलप्रेमी स्व. जगजीतसिंह की गजल ... आपको देखकर देखता रह गया... गुनगुना रहे है। मगर हमको तो अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
500 में बिक गई ...
हाइनेस की करीबी कमलप्रेमियों में चर्चा है। 500 में बिक गई। इशारा अलसुबह होने वाली आरती की अनुमति की तरफ है। जिसके बिकने की चर्चा अपने कमलप्रेमी कर रहे है। जबकि अपने हाइनेस को कुछ पता ही नहीं है। किसी अनुषांगिक संगठन की तरफ से पाइंट आया था। हाइनेस ने आगे फारवर्ड कर दिया। रूटीन बात थी। अनुमति भी बन गई। मगर जिसके पास पहुंची उसने 500-500 में बेच दी। यह बात उजागर भी हो गई। जिसकी चर्चा बप्पा- मूर्ति-निर्माण कार्यक्रम के दौरान कमलप्रेमियों में खूब चली। अब हम कमलप्रेमियों का तो मुंह पकड नहीं सकते है। इसलिए अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
वसूली अभियान ...
शासन द्वारा राजस्व अभियान चलाया जाता है। जनहित के लिए। मगर स्वहित के लिए वसूली अभियान भी चलाते है। विभाग के प्रमुख। जैसे खेती-बाडी वाले विभाग में चर्चा है। पिछले दिनों बदबूवाले शहर और उससे लगी दो तहसीलों के अधिकारियों को तलब किया गया। निर्देश दिये। वसूली अभियान शुरू करो। तीनों ने पलटकर पूछ लिया। सुरक्षा की ग्यारंटी कौन देगा? जिस पर विभाग प्रमुख ने कह दिया। फिर मुझे दूसरा तरीका भी आता है। अंदरखाने की खबर है। बदबूवाले शहर की एक खली की दुकान से और दाल-बिस्किट वाली तहसील स्थित दुकानों से भी हरे-हरे गांधी जी की वसूली की गई है। अब देखना यह है कि वसूली अभियान कब तक चलता है। तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
इंतजार खत्म होगा ?
मंदिर के गलियारों में चर्चा है। जल्दी ही इंतजार खत्म होगा। विकासपुरूष के राज में इंसाफ होगा। हालांकि आरोपी को कोई बड़ी या कडी सजा नहीं मिलने वाली है। वजह ... रसूखदार माननीय के साहबजादे है। इसी अकड में गर्भगृह के अंदर चले गये थे। मंदिर कर्मचारी की कालर पकड ली थी। जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। जांच समिति बनी थी। जिसने बयान लिए। रिपोर्ट पेश कर दी। जो कि फिलहाल फटाफट जी के कार्यालय में अति- गोपनीय दस्तावेज के रूप में धूल खा रही है। अंदरखाने की खबर है। जल्दी ही धूल झटकी जा सकती है। सांप भी मरे- लाठी भी ना टूटे... की तर्ज पर छोटी-मोटी सजा, माफी सहित दी जा सकती है। मंदिर के गलियारो में तो यही चर्चा है। देखना यह है कि इंतजार कब खत्म होता है और इंसाफ होता है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
मेरी पसंद
आएगा गुफ्तगू का सलीका कम से कम
शायर बहुत जरूरी है एक खानदान में
रहता है सिर्फ एक कमरे में आदमी
उसका गुरुर रहता है बाकी मकान में
जनाब महशर अफरीदी