02 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

02 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)

काम करेंगे उज्जवल ... 

अपने विकासपुरूष की दिली इच्छा है। सिहंस्थ 2028 के काम समय पर हों और उज्जवल हों। इसके लिए उन्होंने भरोसा किया। अपने उज्जवल जी पर। जिनको दूसरे माले का मुखिया बनाकर लाये है। इसके साथ ही आहिल्यानगरी से उम्मीद जी को भी ले आये। जिसके बाद संकुल के तीसरे व दूसरे माले पर चर्चा है। उम्मीद और उज्जवल की जुगलबंदी रंग लायेगी। सिहंस्थ के कामों को उज्जवल बनायेंगी। विकासपुरूष के सपनों को मूर्तरूप में लायेगी। ऐसा विश्वास संकुल के गलियारों में जताया जा रहा है। जिसके लिए हम भी अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है। 

नाराजगी तीसरे माले की ... 

संकुल के तीसरे माले और भरतपुरी के विकास भवन में खुलकर तलवारे खिच गई है। खतरनाक शीतयुद्ध चल रहा है। थर्ड फ्लोर के टॉप बॉस को अपने इंदौरीलाल जी किसी गिनती में नहीं ले रहे है। विकास भवन के मुखिया आजकल उस ऊंचाई पर विराजमान है। जिनको छूना मुश्किल ही नहीं, असंभव है। यह मकाम उन्होंने अपनी योग्यता से बनाया है। वह जो कुछ भी अंदर ही अंदर करते है। उसकी खबर केवल 3 लोगों को होती है। विकासपुरूष-उम्मीद जी और अपने उज्जवल जी। जबकि वर्तमान में विकास भवन के टॉप बॉस, थर्ड फ्लोर के मुखिया है। नाराजगी की वजह भी यही है। अपने इंदौरीलाल जी इस हाथ से किये गये काम को, दूसरे हाथ को पता नहीं चलने देते है। तो तीसरे माले वाले को क्यों बताये। नतीजा तीसरे माले के बॉस फूंफकार और फुनफुना रहे है। किन्तु उनकी फूंफकार में वो तासीर बची नहीं है। जो अपने इंदौरीलाल जी का कुछ बिगाड सके। इसलिए अपने दिन गिनते हुए चुप है। ऐसी संकुल से लेकर विकास भवन तक चर्चा है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

योग्यता बनी बाधक ... 

अच्छा काम करना भी उन्नति की राह में बाधक बन जाता है। अगर हमारी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है। तो अपने स्मार्ट पंडित जी से पूछ लीजिए। जो कि एक पैर पर तैयार है। शिवाजी भवन से जाने के लिए। मगर उनकी उत्तम कार्यशैली ही, राह में रोडा बन गई है। वजह यह है कि स्मार्ट पंडित की जगह किसको लाया जाये? उनके जैसी कार्यशैली वाला ही अफसर चाहिये। जो कि विरोधियों को अपने चतुर दिमाग से मार सके और कमलप्रेमियों को भी ऐसा लालीपाप थमाकर रखे। जिसके ऊपर ऐसा प्लास्टिक चढा हो, जो कि कोशिश के बाद भी नहीं खुले। ऐसे ही अधिकारी की तलाश है। जो फिलहाल मिल नहीं रहा है। जिसके चलते यह कयास लगाये जा रहे है। अब मानसून के बाद ही योग्यता वाली बाधा दूर होगी। बाकी बाबा महाकाल और विकासपुरूष की मर्जी। हमको तो बस आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

कप्तान पर भविष्यवाणी ... 

ऐसा आजतक सुना नहीं है। कम से कम वर्दी के बीच तो नहीं। जो अपने ही कप्तान को लेकर भविष्यवाणी करने लगे। इन दिनों वर्दी के बीच ज्योतिष और टेरोकार्ड की चर्चा है। गूगल बाबा और चेट-जीपीटी का सहारा लिया जा रहा है। टेरो के ... द-एम्परर-8 ऑफ बांडस और द - व्हील ऑफ फारच्यून का हवाला देकर भविष्यवाणी को सही साबित करने की कोशिश हो रही है। इन तीनों कार्डो का निष्कर्ष कप्तान जी की रवानगी से जुड़ा है। जिसकी संभावना 50-50 है। इधर अपने विकासपुरूष के एक विश्वसनीय ने संकेत दिये है। कप्तान जी की सम्मान पूर्वक विदाई जल्दी ही होगी। अब देखना यह है कि गूगल-बाबा और चेट-जीपीटी से निकला रिजल्ट सही साबित होता है या नहीं ? तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है। 

जनसुनवाई विकासपुरूष की ... 

प्रति मंगलवार जनसुनवाई होती है। पिछले मंगलवार को राजधानी में माननीयों की जनसुनवाई का दिन था। परेशानियों का निराकरण अपने विकासपुरूष ने किया। लगभग 3 घंटे तक जनसुनवाई की। इस दौरान जो-जो माननीय पहुंचे। उन सभी के हाथों में कागजों का पुलिंदा था। अधिकांश मामले अनुदान के थे। विकासपुरूष ने तत्काल डिमांड के अनुसार अनुदान स्वीकृत करने में कोई देर नहीं लगाई। जिसके बाद जनसुनवाई से निकले माननीय अपने विकासपुरूष का यशोगान मुक्तकंठ से कर रहे है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

कभी-कभी करनी पडती है ... 

अपने दालवाले नेताजी की साफगोई मशहूर है। सीधी बात- नो बकवास। तभी तो उन्होंने हेलीपेड पर खुद बोला। कभी-कभी करनी पडती है दादागिरी भी। दरअसल उनका इशारा अंगारेश्वर पर हुई पूजा की तरफ था। अपने विकासपुरूष को शांति से पूजा करनी थी। जिसकी जिम्मेदारी दालवाले नेताजी ने उठाई। वह खुद प्रवेश द्वार पर खड़े हो गये। उन्हीं को प्रवेश दिया। जो कि इसके पात्र थे। बाकी कमलप्रेमियों को दादागिरी से रोक दिया। फिर वह पदाधिकारी हो या कार्यकर्ता। दालवाले नेताजी का यह रूख देखकर सभी कमलप्रेमी हैरान थे। मगर कर कुछ नहीं सकते थे। इसलिए चुप रहने में भलाई समझी। तो हम भी अपनी भलाई को ध्यान में रखकर आदत के अनुसार चुप हो जाते है। 

कीमत 20 प्रतिशत ... 

आपके पुराने बिल पेंडिग है ? कितना समय हो गया है? भुगतान करवाना है? तो आकर मिले। ऐसे फोन आजकल उन ठेकेदारों के पास पहुंच रहे है। जो बेचारे लंबे समय से परेशान है। जिनको फोन आ रहा है। वह ठेकेदार खुश होकर मिलने जाते है। जिसके बाद शुरू होता है। सौदे का खेल। 25 प्रतिशत की डिमांड की जाती है। लेकिन बातचीत में 15 से 20 प्रतिशत पर सौदा पट जाता है। एडवांस भी ले लिया जाता है। जैसे आठ पेटी के भुगतान में पहले 1 पेटी एडवांस लिया गया। 20 प्रतिशत में सौदा हुआ था। बाकी 60 हजारी बाद में देना था। ऐसा हम नहीं कह रहे है। बल्कि चरक भवन के गलियारों में इसकी जमकर चर्चा है। भुगतान की कीमत 20 प्रतिशत बिलकुल सच है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

हेलीपेड पर ठहाका ... 

शनिवार को राजधानी से विकासपुरूष का उडनखटोला हेलीपेड पर उतरा। हमेशा की तरफ उनका स्वागत करने के लिए अधिकारीगण आगे बढे। तभी जिले के प्रभारी बाऊजी की जोरदार आवाज गूंजी। सभी रूक जाये। बाऊजी की बुलंद आवाज सुनकर सब रूक गये। जिसके बाद बाऊजी बोले। आज पहले स्वागत मातृशक्ति करेगी। उनकी बात मान ली गई। मगर पीछे से किसी ने उनसे ज्यादा बुलंद आवाज में कहा। आज तो मंत्री जी, दालवाले नेताजी की भूमिका निभा रहे है। जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी ने जोरदार ठहाका लगाया। जिसमें बाऊजी भी शामिल थे। ऐसा यह नजारा देखने वालो का कहना है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

थोडी हिम्मत दिखाईये ... 

मंदिर के गलियारों में चर्चा है। थोडी हिम्मत दिखाईये। इशारा अपने फटाफट जी की तरफ है। जिन्होंने मीडिया को बयान दिया था। बाइक- राइडर दंपत्ति के साथ कोई बदतमीजी नही की गई थी। वह नियम विरूद्ध रील बना रहे थे। इसलिए रोका गया था। फटाफट जी की बात सही है। मगर मैडम ने आंसू बहाकर रील बनाई और अपलोड कर दी। नतीजा मंदिर की जमकर बदनामी हुई। जबकि गलती दंपत्ति की थी। तभी तो मंदिर वाले खुलकर बोल रहे है। झूठी अफवाह फैलाने वाली के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाना था। अगर प्रकरण नहीं करवा सकते तो कम से कम एक नोटिस ही भिजवा देते। ताकि मैडम जी को कोई सबक मिलता। आगे नियम तोडने से पहले 10 दफा सोचती? मगर हिम्मत दिखाई नहीं गई। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है। 

उम्मीद पर पानी ... 

पिछले सप्ताह शाम के समय अपने उम्मीद जी आये थे। दूसरे माले पर बैठक थी। जिसमें उज्जवल जी, चटक मैडम जी, स्मार्ट पंडित, इंदौरीलाल जी सहित आठ-दस लोग शामिल थे। इस बैठक में अपनी चटक मैडम जी ने काफी कोशिश की। उनके प्रस्तावों पर मोहर लग जाये। अपने उम्मीद जी से उत्तर-दक्षिण- पूरब-पश्चिम से आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर कई बार बहस कर ली। मगर अपने उम्मीद जी ने घाट-घाट का पानी पी रखा है। उन्होंने चटक मैडम जी के हर सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया। जो कंपनी इस पर काम कर रही है। उसको निर्देश दिये। नये सिरे से सबकुछ बनाकर प्रस्तुत करो। जिसके बाद संकुल के गलियारो में यह चर्चा सुनाई दे रही है। उम्मीद जी ने चटक मैडम की उम्मीद पर पानी फेरा। बात सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है। 

चलते-चलते ... 

कमलप्रेमियों में चर्चा है। अपने वजनदार जी और पिस्तौलकांड नायक के समर्थकों में खासतौर पर यह चर्चा है। दबी जुबान से बोल रहे है। दोनों कमलप्रेमी माननीय ने पिछले महीने ही बाले-बाले भूमिपूजन कर दिया था। घाट निर्माण को लेकर। चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में। इसके पहले पूजा भी की थी। सोशल मीडिया पर वीडियों भी अपलोड किया। अब कमलप्रेमियों की बात सच है या झूठ? हमको पता नहीं। इसलिए आदत के अनुसार चुप हो जाते है।