06 अप्रैल 2026 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
तीसरा हेलीपेड...
विकासपुरुष ने ठान लिया है। बाबा की नगरी में 2028 तक विकास चरम पर होगा। जिसमें एक और हेलीपेड जुड़ गया है। तभी तो उन्होंने पुलिस लाइन के हेलीपेड पर सवाल कर लिया। पहला सवाल यहाँ बन रहे लाउंज को लेकर था।जो काफी समय से बन रहा है, मगर अधूरा है! विकासपुरुष ने पूँछ लिया।कब तक पूर्ण होगा? उम्मीद जी ने जवाब दिया।1 महीने में। जिसके बाद तीसरे हेलीपेड का सवाल दाग दिया।जिसे सुनकर पीछे मौजूद अपने अल्फा जी ने पूछा। तीसरा हेलीपेड कहाँ? इसी सवाल को अपने उम्मीद जी ने रिपीट किया। तब विकासपुरुष ने बताया। आगर रोड पर हेलीपेड नहीं बनाओगे? इतना कहकर विकासपुरुष के चेहरे पर हँसी गई। साथ चल रहे उज्ज्वल जी भी मुस्कुरा दिए। इस दौरान की एक तस्वीर भी जारी हुई।जिसे देवीआहिल्या नगरी के खबरची संस्था के मुखिया ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया।जिसमें सवाल दागा है? इस तस्वीर को देखकर क्या समझ आ रहा आपको? वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होनें तस्वीर शेयर करके सवाल किया है।जिसका कोई तो अर्थ होगा। जिसे केवल वही जानते होंगे।लेकिन असली बात हेलीपेड से जुड़ी है। बाकी हमकों आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
सिंहस्थ बाद पूरा करोगे काम
अपने उज्जवल जी इन दिनों खतरनाक एक्टिव मोड़ पर है। कोई गलती बर्दाश्त नही कर रहे है।इधर गलती हुई -उधर फटकार तय है।शुक्रवार की बैठक में यही हुआ।सिंहस्थ समीक्षा बैठक में। जिसमे लोनिवि के दोनो टॉप बॉस हत्थे चढ़ गए।निर्माण कार्य मे प्रगति नही होने पर उज्जवल जी ने दोनो को आड़े हाथों लिया। एक पल की देर नहीं लगाई। कड़े शब्दों में कहाँ। काम जल्दी होना चाहिये, मगर लगातार देरी हो रही है। क्या सिंहस्थ के बाद काम पूरा करोगे। इस दौरान अपने उम्मीद जी नहीं थे। थोड़ी देर में वह हाजिर हो गए। जब उनकों लोनिवि की कार्यप्रणाली पता चली।तो उम्मीद जी ने उज्जवल जी से ज्यादा कठोर चेतावनी जारी कर दी। इस महीने के अंत तक अगर कार्य पूरे नही हुए तो D E ( विभागीय जांच) बैठा दूंगा,सभी की। जिसके बाद लोनिवि में हड़कंप मचा हुआ है। देखना यह है कि कमीशन में लगे अधिकारी इस चेतावनी को कितनी गम्भीरता से लेते है? तब तक हम आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
आईएएस अफसर की सक्रियता..
तीसरे माले पर विराजमान आईएएस अफसर इन दिनों सक्रिय नजर आ रहे है। खासकर उस घटना के बाद। जो उनके साथ हेलीपेड पर हुई थी। पिस्टल कांड नायक ने पिछले महीने उनसे विवाद कर लिया था। खुलकर ऐसी बाते बोल दी थी। जो आमतौर पर सार्वजनिक स्थान पर नहीं बोली जाती है। तब अपने कप्तान जी ने विवाद शांत किया था। जिसके बाद आईएएस अफसर का मन तीसरे माले से विरक्त हो गया है। वह जुगाड़ में है। किसी भी तरह से कोई जिला मिल जाए। इसी कारण से अब वह जब -जब विकासपुरुष आते और जाते है। हर वक्त हेलीपेड पर सक्रिय नजर आते है। देखना यह है कि उनकी इस सक्रियता का परिणाम उनकी इच्छानुसार निकलता है या विपरीत। फैसला विकासपुरुष को करना है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
इतना बड़ा गुलदस्ता...
शनिवार को जब डोंगला हेलीपेड पर विकासपुरुष का उड़नखटोला उतरा। तो प्रभारी बाऊ जी और ग्रामीण मुखिया ने स्वागत किया। इनके द्वारा दिए गए गुलदस्ते साइज़ में नार्मल थे। मगर ठीक सामने अपने उम्मीद जी के हाथों में बड़ा गुलदस्ता था। जिस पर विकासपुरुष की निगाह गई। मौका देखकर विकासपुरुष ने चुटकी लेने में देर नहीं लगाई। बोल दिया-इतना बड़ा गुलदस्ता। जिसे सुनकर अपने अपने उम्मीद जी ने अपनी मनमोहक मुस्कान बिखेर दी । इसकी गवाह तस्वीर भी है। जिसमे विकासपुरुष मंद मुस्कान के साथ अपने हाथों के गुलदस्ते और उम्मीद जी गुलदस्ते को देख रहे है। अब सवाल यह है। विकासपुरुष ने गुलदस्ते को लेकर पहली दफा कुछ बोला है। राज़ क्या है?वही बता सकते हैं। हम तो बस आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
दोषी या निर्दोष...
शिवाजी भवन के गलियारों में इन दिनों चर्चा है। उस इंजीनियर को लेकर। जो अपनी सेवा सलाहकार पद के लिए देने के लिए आवदेन कर चुके हैं। इनको शिवाजी भवन का हर कर्मचारी पीठ पीछे अश्वत्थामा बुलाता है। अब अश्वत्थामा को क्या श्राप भगवान कृष्ण ने दिया था। यह हमकों लिखने की जरूरत नहीं है। सभी को यह पौराणिक कथा पता है। शिवाजी भवन के यह सेवा निवृत्त इंजीनियर इस युग के असली अश्वत्थामा है। जिनका मोह केवल एक फ़िल्म अपना सपना money-money से जुड़ा है। तभी तो इतनी बदनामी के बाद भी पॉवर के कारण आवेदन कर दिया है। जबकि अंदरखाने की खबर है। महिला उत्पीड़न के प्रकरण में जांच का लिफाफा अपने एंग्रीमैन के पास पहुँच गया है। लिफाफे के अंदर दोषी/निर्दोष का परिणाम है। मगर शिवाजी भवन में फिलहाल एक अशआर सुनाई दे रहा है। खत का मजमून भांप लेते है लिफाफा देखकर ...! जिसका अर्थ यही निकलता है। जो सभी की समझ में आ रहा है। इंतजार है-लिफ़ाफ़ा खुलने का।जो सभी कर रहे हैं।तो हम उनमें शामिल होते हुए, आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
चाटुकारी में अव्वल-काम में फ़िसड्डी
अपने पँजाप्रेमी चरणलाल जी ने समीक्षा बैठक बुलाई थी। जिसमें ग्रामीण विकास के अधिकारी ने ग़ज़ब की चाटूकारिता दिखाई। वह लगभग 30 मिनिट तक माननीय-माननीय की रट लगाते रहे। पालन-प्रतिवेदन पर बोल रहे थे। जिसका सारांश यह था। आपके हर आदेश का पालन किया है। जबकि एक दिन पहले अपने उज्ज्वल जी ने दौरा किया था।तब इसी अधिकारी को फटकार लगाई थी। साफ कहाँ था।दौरे पर जाया करो। इसके पहले सोमवार की बैठक में इन्ही अधिकारी का 1 महीने का वेतन काटने का निर्देश उज्ज्वल जी ने दिया था। जिसके बाद तहसील में चर्चा है। सरकारी काम मे फ़िसड्डी - माननीय के काम करने अव्वल। यह चाटूकार ही कर सकता है। मातहतों की बात में दम है। मगर चुप रहना हमारा धर्म है।
उज्ज्वल जी की नजरें...
अपने उज्ज्वल जी की अब नजरें इनायत मंदिर पर हो गई है। हर बारीकी व्यवस्था पर। वजह फटाफट जी का फोकस तो मंदिर की आय बढ़ाने पर रहा है। तभी तो दोनो आरतियां (संध्या-शयन) पर शुल्क लागू कर दिया। जबकि कई दशक से यह निःशुल्क थी। फटाफट जी ने आम दर्शनार्थियों के हित को लेकर कोई ऐसा कदम नहीं उठाया। जो उनके जाने के बाद याद रखा जाए।जिसके चलते खूब बदनामी हुई है।अब इसको सुधारने की दिशा में अपने उज्जवल जी ने कदम उठाया है। तभी तो मंदिर के सभी मुख्य मठाधीशों के साथ मंगलवार की दोपहर बैठक की। बंद कमरे में।सबसे उनका प्रभार और क्या-क्या काम करते हो। इसकी विस्तृत जानकारी ली। मीडिया को लेकर भी निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षा गार्ड की लापरवाही और दर्शन के नाम पर वसूली पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा-अधिकारी को नसीहत दी। इस दौरान अपने फटाफट जी अधिकांश समय चुप रहे। बहरहाल उज्जवल जी के इस प्रयास को लेकर मंदिर में खुशी व्याप्त है। जिसके लिए हम भी उनके प्रति आभार प्रकट करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
भीड़ रोको-कुर्सी बचाओ...
आज के दौर में अगर फील्ड में पदस्थ रहना है। तो इस काम मे भी महारथ होना जरूरी है। जब अचानक कार्यक्रम से जनता उठकर जाने लगे खासकर मातृशक्ति।तब उनको कैसे रोका जाएं। यह सवाल देवीआहिल्या नगरी के अफसरों में चर्चा का विषय है।कारण-एक प्रोग्राम में ऐसा ही हुआ। माता-बहने एकदम से उठकर जाने लगी। तब प्रशासन की जान हलक में आ गई थी। तत्काल जिला और नगरीय प्रशासन हरकत में आया।मैदान में उतर गया। खुद दोनो मुखिया औऱ अपने स्मार्ट पंडित सहित बाकी अधिकारी मान-मनुहार करते नजर आए। जिसके बाद अफसर वर्ग खुद यह कह रहा है।भीड़ रोको-कुर्सी बचाओ।वरना बोरिया-बिस्तरा बांध कर तैयार रहो। अफसरों की बात में बहुत दम है, लेकिन चुप रहना हमारा कर्म है।
झपकी और मन की बात
इन्सान का शरीर है। जो पंच तत्व से मिलकर बना है। इसी पंच तत्व में इसको विलीन होना पड़ता है। आम इंसान भले ही 8 से 10 घण्टे काम करता है।मगर राजनीतिक जीवन में काम करने वाले 18 घण्टे काम करते है। हालांकि यह उनका शोषण है। लेकिन जनसेवा का मेवा इनको मजबूर करता है। जिसके चलते शरीर है। थक जाता है। फिर सार्वजनिक स्थान पर भी झपकी आना सामान्य बात है। कुछ ऐसा ही मन की बात में हुआ। देवीआहिल्या नगरी में। विकासपुरुष सहित अपने 2 नम्बरी नेताजी और प्रथमसेवक विराजमान थे। मन की बात चल रही थी। स्क्रीन पर। जिसे सुनते-सुनते न जाने कब अपने 2 नम्बरी नेताजी को झपकी आ गई। उनके पास प्रथमसेवक बैठे थे। जिनके कंधे पर सिर टिक गया। थोड़ी देर तो प्रथमसेवक चुप रहे। मगर जब देखा कि वीडियो बन रहे है। तो उन्होंने हौले से 2 नम्बरी जी को जगा दिया और बता दिया। वीडियो बन रहे है। ऐसी चर्चा देवीआहिल्या नगरी में कार्यक्रम के बाद सुनाई दे रही है। मगर हमकों तो चुप ही रहना है।
भाषण से दुःखी..
अपने वजनदार जी और प्रभारी बाऊ जी में क्या समानता है।यह सवाल हमारा नहीं है।अपने कमलप्रेमियो का है। जिसके पीछे संकल्प अभियान की आड़ ली जा रही है। यहां पर दोनों ने जिस तरह से अपने भाषण से जनता को पकाया। उसके बाद अपने कमलप्रेमी एक बहुत पुरानी कविता को याद कर रहे है। वजह -तपती धूप में जनता बेहाल हो गई थी। हालांकि शिवाजी भवन ने टेंट लगाया था। मगर ऊपर सूर्य देवता और टेंट के अंदर हेलोजन लाइट। किन्तु दोनो माइक देखकर पिल पड़े। तभी तो अपने कमलप्रेमी यह कविता सुना रहे है। नेता भाषण देकर आया/घर जाते ही वो गुर्राया/पैर दबाओ रामलुभाया/ मैं आया हूँ थका-थकाया/ नोकर बोला मालिक/एक पते की बात बता दूं/भाषण से गला दुखा है/ आप कहे तो ....दबा दूँ। अपने कमलप्रेमियों की बात दम है। मगर आदत के अनुसार हम चुप रहने पर मजबूर है
गुटबाजी चरम पर...
कमलप्रेमी संगठन आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है। जिसको लेकर उत्साह का माहौल है।इस माहौल के बीच गुटबाजी सामने आई है। जो युवा कमल प्रेमियों के दो अलग -अलग msg से साफ जाहिर हो रहा है। जिसमें अभी -अभी प्रदेश संगठन में मंत्री बने युवा ने राजधानी चलने का आग्रह किया है। जबकि अपने स्वागतप्रेमी ने फ्रीगंज मुख्यालय पर एकत्रित होने का संदेश भेजा है। जिसके चलते युवा कमलप्रेमी इस गुटबाजी को लेकर अचरज में है। उनकी समझ नहीं आ रहा है।आखिर किसका साथ दें। राजधानी जाएं या फ्रीगंज मुख्यालय? इसका फैसला सोमवार को होगा! तब तक जैसे गुमसुम युवा जी,गोरे -चिट्टे जी चुप है। वैसे ही हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
गोपनीय बैठक ...
शनिवार को विकासपुरुष डोंगला उतरे थे। जहाँ उनकी राजनीतिक यात्रा को इस पड़ाव तक पहुँचाने वाले गुरु जी भी मौजूद थे। दोनों के बीच एकांत में चर्चा हुई। लगभग 30 मिनिट तक।इस दौरान पूरा प्रशासन बाहर खड़ा रहा। जब दोनों की बात खत्म हुई।तो अपने उम्मीद जी और उज्ज्वल जी को बुलाया गया। जिसके बाद यह बात सामने आई है। मामला वेधशाला के समीप स्थित एक स्कूल को शिफ्ट करने से जुड़ा है।स्कूल को हटाने से यहाँ पर कुछ नया निर्माण हो पाएगा। सीधी भाषा मे जमीन-एक्सचेंज करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का तो यही कहना है। बाकी आदत के अनुसार हमकों चुप रहना है।
शिखर दर्शनम-पाप नाशनम...
बाबा के कई अनन्य भक्त बरसों से इस बात पर यकीन करते है। शिखर दर्शनम-पाप नाशनम... अपने विकासपुरुष भी सैकड़ों दफ़ा शिखर-दर्शन करते रहे है। मगर इन दिनों निर्माण कार्य के चलते मंदिर तक पहुँचने में दिक्कतें हो रही हैं।जिसके चलते भक्तों ने नया रास्ता निकाला है। हरिफाटक ब्रिज की चौथी भुजा। जहाँ रात को भक्तगण जाते हैं। यहाँ से शिखर दर्शन तो होते है। लेकिन भारत-माता मंदिर का शिखर आड़े आ जाता है। जिसके चलते सही तरीके से दर्शन नहीं हो पाते है। अगर मंदिर प्रशासन केवल इतना कर दे। मंदिर शिखर के आसपास नीचे की तरफ हेलोजन लाइट लगा दे। तो दूर से ही शिखर नजर आएगा और भक्तों को भरम नहीं होगा? बहुत मामूली सा काम है। जो हींग लगे न -फिटकरी.. की तर्ज पर हो सकता है। अपने उम्मीद जी और उज्ज्वल जी से यह गुहार सभी भक्तों की तरफ से लगाते हुए, हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
छोटे साहब की व्यंग्यवाणी-सूत्रों की जुबानी...
राजधानी से 2028 सिंहस्थ कामों की समीक्षा करने छोटे साहब आए थे। जो अपनी हाजिरजवाबी और व्यंग्यवाणी के लिए चर्चित है। तभी तो रविवार को हुई बैठक में उन्होंने अपनी व्यंगवाण के कई विभागों के अफसरों को शर्मिंदा कर दिया। चुप के सूत्रों ने जो कुछ बताया है। उसे पढ़कर आनंद लीजिए।
1. जब छोटे साहब 2004 में सिंहस्थ करा रहे थे। तब करंट विभाग के एक अधिकारी उनके मातहत थे। तब इंजीनियर थे। अब वह इस विभाग के टॉप-बॉस हैं। उन्होंने 2004 की याद दिलाई।तो छोटे साहब ने व्यंग्य करते हुए कहा। तब भी आप अदृश्य थे ,औऱ आज भी। जिसके बाद ठहाका स्वाभाविक था।
2. प्रजेंटेशन चल रहा था। इस दौरान मां चामुंडा नगरी के नाम से चर्चित जिला गायब था। जिसकों लेकर टिप्पणी करने में पीछे नहीं रहे। क्या यह दावोस(विदेशी शहर) है?
3. मेडिसिटी के टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिया। उन्होंने सीधे तंज कसा। क्या आने वालों को दरी पर बैठाओगे?कारण - टेंडर में फर्नीचर का कोई उल्लेख नहीं है। तभी वह यह कहने मजबूर हो गए। दरी पर बैठाओगे क्या!
4. इसके बाद लोनिवि 2 कारणों से उनके हत्थे चढ़ गया। पहले नम्बर पर सिंहस्थ में अस्थाई कार्यो को लेकर। जिसकी 5पेटी प्रति हेक्टेयर की दर सुनकर वह बोल उठे। यह जमीन खरीदी की दर है यह समतलीकरण की। स्मगलिंग कर रहे हो? दूसरे नंबर पर कच्ची रोड को लेकर बनाने पर व्यंग्य करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने यह तक कह दिया। हड़प्पा संस्कृति में भी मुर्र्म का उपयोग होता था।
5. उनका अंतिम तंज सिंहस्थ क्षेत्र में बनने वाले करीब डेढ़ लाख शौचालय पर था। जिसको लेकर उन्होंने साफ लफ़्ज़ों में कहा। जब bairricate में गेट लगा हो ,उसको barrigate कहते है। मगर जब वो हिलते है कई दफा ,तो डर के मारे अंदर बैठा इंसान वो नहीं कर पाता। जिसके लिए वह शौचालय गया था। ऐसा हम नहीं, बल्कि भरोसेमंद सूत्र कह रहे है। मगर हमकों अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना हैं।
मेरी पसंद
वो जान-बूझ के नाख़ुन बढ़ा के रखते हैं
ये चाहते ही नहीं हैं कि ज़ख़्म भर जाएँ
❗आहया भोजपुरी❗