09 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |

09 जून 2025 (हम चुप रहेंगे)

पांव के छाले ...

किसी शायर ने खूब लिखा हैऐ मेरे पांव के छालो चलो लहू उगलो/ जमाना मुझसे सफर के निशान मांगेगा...। शायर की यह बात अपने दालवाले नेताजी पर सटीक बैठ रही है। कारण ... शिप्रा यात्रा में वह इस कदर पैदल चले कि पांव में छाले पड गये। बीच में वह यात्रा छोड़कर विकासपुरूष को लेने पहुंचे। विकासपुरूष की आदत है। अगर कोई मुख्य कार्य छोड़कर उन्हें रिसीव करने पहुंचे। तो उनको पसंद नहीं आता है। इसलिए उन्होंने हल्की नाराजगी दिखाई। मगर दालवाले नेताजी ने तत्काल अपने पांव के छाले की बात रख दी। जिसे सुनकर विकासपुरूष खुश हुए। दालवाले नेताजी की पीठ थपथपा दी। ऐसा अपने कमलप्रेमी बोल रहे है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

चमक से सहमी चटक ...

संकुल के गलियारों में पिछले सप्ताह हुई बैठक के बाद चर्चा है। अपने उज्जवल जी की चमक से चटक मैडम सहम गई है। तभी तो उन्होंने रामराज्य के आज्ञाकारी पात्र भरत की तरह बैठक ली। उस सिहासन (कुर्सी) पर नहीं बैठी। जिस पर वह एक दफा बैठकर बैठक ले चुकी है। उस वक्त अपने उज्जवल जी, जिले के मुखिया नहीं थे। दूसरे माले के तत्कालीन मुखिया के समय की घटना है। चटक मैडम जी, मुखिया की कुर्सी पर विराजमान हो गई थी। फिर तभी उठी थी। जब तत्कालीन मुखिया का आगमन हुआ था। मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ। उज्जवल जी अपने फटाफट जी के साथ भ्रमण पर गये थे। सिहासन खाली था। किन्तु मैडम जी ने बगल की कुर्सी संभाली। पूरी बैठक ली। तभी तो बैठक में शामिल अधिकारीगण बोल रहे है। उज्जवल की चमक से सहमी अपनी चटक मैडम जी। अधिकारियों की बात में दम है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

पन्ने किसने फाड़े ...

घटना एक कालेज की है। अप्रैल माह की। कालेज की एक महिला प्रोफेसर मई माह में रिटायर हो रही थी। उनकी सर्विस बुक प्राचार्य के कार्यालय में मौजूद थी। प्रोफेसर मैडम खुश थी। अचानक उनके ऊपर वज्रपात हो गया। जब यह जानकारी उनको मिलीमैडम की सर्विस बुक से करीब 13 पन्ने फाड लिए गये थे। किसने फाडे, यह किसी को पता नहीं चला। बस फिर क्या था। विवाद खूब बड गया। प्राचार्य पर मैडम ने आरोप लगाये। मामला वर्दी तक पहुंचाने की तैयारी हो गई थी। ताज्जुब की बात यह है। फाडने वाले को यह पता था। प्राचार्य कक्ष और गलियारे का सीसीटीवी बंद पडा है। उसका उसने फायदा उठाया। बाद में जांच समिति बनी। बयान लिए गये। मगर आरोपी का पता नहीं चल पाया है। यह वही कालेज है। जहां अपने विकासपुरूष ने पढाई की और अध्यक्ष भी बने। उसी कालेज के इन दिनों यह हाल है। प्राचार्य चापलूसी पसंद करते है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

उर्जा से भरपूर ...

विकासपुरूष की सामान्य चाल भी उर्जा से लबरेज रहती है। वह इतनी तेजी से चलते है कि साथ देने वालो को लगभग दौडना पड जाता है। शिप्रा तीर्थ यात्रा में भी यही हुआ। वाल्मिकीधाम से जो विकासपुरूष ने चलना शुरू किया। तो वह उनकी नार्मल चाल थी। लेकिन साथ चल रही वर्दी और कमलप्रेमी नेताओं को कदमताल मिलाने के लिए दौड लगानी पड गई। कप्तान भी साथ-साथ थे। जिसके बाद उन्होंने अपने हाइनेस कहा। बहुत दौडा देते है माननीय। जिसे सुनकर अपने हाइनेस क्या कहते। वह खुद दौड लगा रहे थे। इसलिए उन्होंने चुप रहना ही बेहतर समझा। ऐसा हम नहीं, वहां मौजूद कमलप्रेमियों का कहना है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

किस्मत हो तो ऐसी ...

अपने स्मार्ट पंडित जी जैसी किस्मत हर किसी की नहीं होती है। बाबा और विकासपुरूष दोनों ही मेहरबान है। तभी तो पहली दफा उनका प्रकट उत्सव वैसा मना। जो आज तक कभी उन्होंने नहीं मनाया होगा। वह भी वीवीआईपी गेस्ट हाऊस में। जहां खुद अपने विकासपुरूष ने शाल-श्रीफल भेट करके स्मार्ट पंडित का अवतरण दिवस मनाया। यह नजारा वहां मौजूद सभी ने देखा। तभी तो सब बोल रहे है। किस्मत हो तो स्मार्ट पंडित जैसी। बात सच हैइसीलिए अपने पंडित जी इन दिनों सातवें आसमान पर सवार है। जिसमें हम क्या कर सकते है । बस अपनी तरफ से प्रकट उत्सव की शुभकामनाएं देकर, आदत के अनुसार चुप हो जाते है।  

तस्वीर की आड में ...

अपने विकासपुरूष जब-जब आते है। कई कमलप्रेमी केवल उनके साथ तस्वीरे खिचवाने जाते है। कुछ कमलप्रेमी जो विकासपुरूष तक नहीं पहुंच पाते। वह अपने दयालु दादा और बहन जी के साथ तस्वीरे खिचवाकर अपलोड करते है। मकसद ... केवल अधिकारी वर्ग में संदेश देना होता है। हमारी पकड है। इससे छोटे-मोटे कमलप्रेमी अपना रूतबा दिखाकर खर्चा पानी निकाल लेते है। तो कुछ बडे वाले है। वह सुपारी ले लेते है। तबादले की। एडवांस भुगतान तक रखवा लेते है। फिर टरकाते रहते है। एक घटना की चर्चा कमलप्रेमी कर रहे है। जिसमें पूर्व कमंडल मुखिया ने 4 पेटी एडवांस रखवा ली। मगर अभी तक काम नहीं हुआ है। कमलप्रेमी तो यही बोल रहे है। सच-झूठ का फैसला समझदार पाठकगण खुद कर ले। क्योंकि हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

मैडम जी का जलवा ...

अपने चटक मैडम ने भी दिखा दिया। उनका अपना भी जलवा और जुगाड है। तभी तो वीवीआईपी गेस्ट हाऊस में मैडम जी को बुलाया गया था। अपने विकासपुरूष ने बुलाया था। बंद कमरे में अधिकतम 120 सेकेंड की मुलाकात हुई। जिसके बाद मैडम जी बाहर आ गई। उनकी क्या चर्चा हुई। यह कोई नहीं बता सकता है। मगर कयास लगाये जा रहे है। चटक मैडम जी का नाम जल्दी ही जिले के मुखिया की सूची में आने वाला है। शायद मैडम जी ने अपनी मनपसंद जगह का आग्रह किया होगा। पीताम्बरापीठ वाले जिले के बदले किसी अन्य जिले की डिमांड की होगी। या फिर बाबा की नगरी छोडऩे का अभी मन नहीं होगा। फैसला सूची आने के बाद होगा। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

अभी नहीं उड सकते ...

अपने विकासपुरूष हेलीपेड पर पहुंच जाये। उडनखटोले में बैठने की तैयारी हो। ऐसे में कोई उनको मना कर सकता है क्या। मगर ऐसा हुआ। पायलेट ने सविनय निवेदन कर लियाउडनखटोला गर्म हो गया है। जब तक ठंडा नहीं होता। उडान नहीं भर सकते है। विकासपुरूष ने समस्या सुनी और समझी। जिसके बाद वह केन्द्र से आये अपने सखा को लेकर तत्काल सरकारी विश्रामगृह पहुंच गये। वहां पर इंतजार किया। जब उडनखटोला ठंडा होकर उडने लायक हो गया। तब जाकर विकासपुरूष ने उडान भरी। ऐसा हेलीपेड पर मौजूद यह नजारा देखने वालो का कहना है। किन्तु हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

रायशुमारी से खुलेगी पोल ...

आगामी 9 और 10 को रायशुमारी होने वाली है। पंजाप्रेमियों की। शहर व ग्रामीण मुखिया के लिए। राजधानी से 2 पर्यवेक्षक आ रहे है। इस रायशुमारी ने अपने चरणलाल जी की मुसीबत बडा दी है। कारण ... उन्होंने करीब 4 लोगों को आश्वासन दे रखा था। तुझे ही मुखिया बनायेंगे। मगर रायशुमारी में उनको अब अपने पत्ते खोलने होंगे। जिसका समर्थन करेंगे... वह खुश... बाकी नाराज होंगे। ऐसा अपने पंजाप्रेमी बोल रहे है। जिससे हमारा क्या लेना-देना। हमारा तो काम है। अपनी आदत के अनुसार चुप रहना।

विकासपुरूष का हुक्म ...

वेलनेस कार्यक्रम में शामिल होने विकासपुरूष आये थे। उनके साथ प्रशासन के टॉप बॉस बड़े साहब भी पधारे थे। बड़े साहब तो बड़े साहब है। कब मूड अच्छा है- कब बिगडा। कोई पता नहीं कर सकते है। उनको हुक्म भी केवल अपने विकासपुरूष ही दे सकते है। इसके अलावा किसी की मजाल नहीं है। कार्यक्रम के बाद बड़े साहब राजधानी जाने के मूड में थे। तभी विकासपुरूष ने हुक्म दिया। इन संतश्री के साथ मंदिर और रामघाट जाना है। बेचारे ... बड़े साहब फस गये। तभी तो यह कहने में नहीं चुके। विकासपुरूष ने बोला है... तो जाना पड़ेगा। उन्होंने यह बात 2 दफा कही। इस दौरान उनके साथ अपने उम्मीद जी भी मौजूद थे। जिन्होंने शायद बड़े साहब के यह उदगार सुने ही होंगे। मगर क्या कहते। वह चुप रहे। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

फेल हुआ लेजर शो ...

शिप्रा तीर्थ यात्रा समापन पर लेजर शो का कार्यक्रम रखा गया था। मंच पर विकासपुरूष मौजूद थे। बड़े साहब निकल गये थे। आकाश में लेजर शो के माध्यम से कोई आकृति बनानी थी। यही शो का मकसद था। जिसमें गडबडी हो गई। लेजर किरणें इधर-उधर भटक रही थी। जिसे देखकर अपने विकासपुरूष ने भी दांए-बांए-ऊपर-नीचे अपना सिर घुमाया। उन्हें कुछ नजर नही आया। यह देखकर अधिकारी वर्ग में हड़कंप मच गया। कोई पर्दे के पीछे भागा तो कोई जानकारी लेता नजर आया। जिसको यह काम दिया था। वह कोई आकृति नहीं बना पाया। तभी तो कमलप्रेमी बोल रहे है। लेजर शो फेल हुआ। बात सच है। मगर हमको आदत के अनुसार चुप ही रहना है।

सबक लिया ...   

किसी घटना को देखकर सबक लेना अपने उज्जवल जी से सीखा जा सकता है। ताजा मामला मधुमक्खी कांड वाला है। जिसमें एक वर्दीधारी स्वर्गीय हो गये। हमारी तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि। इस कांड से अपने उज्जवल जी ने तत्काल सबक लिया। उन्होंने संकुल के भवन पर जितने भी छत्ते थे। तत्काल हटाने के आदेश दिये। यहां यह लिखना जरूरी है पिछले साल जब विकासपुरूष बैठक लेने संकुल पहुंचे थे। तब मधुमक्खियां बिफर गई थी। नतीजा... विकासपुरूष को पीछे के गेट से दूसरे माले ले जाना पड़ा था। फिर यह कांड हो गया। जिससे उज्जवल जी ने सबक लिया। उसके लिए उनको साधूवाद देकर, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।