11 अगस्त 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
गाल जैसी सडक़ ...
शायद हमारे पाठकों को याद होगा। एक मुख्यमंत्री ने चुनाव में वादा किया था। वह अपने राज्य की सडक़े, उनके गालो जैसी बना देंगे। उनका इशारा एक फिल्मी अभिनेत्री की तरफ था। जो कि बसंती के नाम से मशहूर है। उनके निज सचिव इन दिनों भस्मार्ती के लिए परेशान हो रहे है। तभी तो अपने हिटलर जी को दूरभाष पर संपर्क कर रहे है। अपना परिचय भी दे रहे है। जाने किसने अपने हिटलर जी का नंबर निज सचिव को थमा दिया है। बेचारे हिटलर जी ने एक नंबर देकर अपनी जान बचाई है। ऐसी चर्चा सुनाई दे रही है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।
80 की सूची ...
अपने विकासपुरूष के विजन की कल्पना कोई नहीं कर सकता है। सन् 1980 में विकासपुरूष, स्कूली शिक्षा में ही अध्ययनरत होंगे। तभी से वह सिहंस्थ की व्यवस्था पर बारिकी से नजर रख रहे है। 80-92-2004 और 2016 की हर व्यवस्था से वाकिफ है। सन् 80 के दशक में उन्होंने सिंहस्थ में जो भी देखा। वही हमने भी देखा था। मगर 80 से ही अपने विकासपुरूष का विजन और मकसद क्लीयर था। जब वह सूबे के मुखिया बनेंगे। तब सिंहस्थ को लेकर मिसालें कायम करेंगे। तभी तो 80 के सिंहस्थ का पूरा प्लान तलब किया है। देखना यह है कि 80 के प्लान से क्या नया निकलकर आता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
हल्दी का दूध ...
अपने विकासपुरूष खान-पान में परहेज करते है। सूबे के मुखिया बनने से ही पहले। गुनगुना पानी पीते है। अगर भूख भी लगी हो तो कुछ भी नहीं खाते है। इंतजार करते है। जहां भरोसा हो, वही बोलते है। हल्दी वाला दूध लाना। जैसा उन्होंने ग्राम तालोद में किया। रक्षाबंधन मनाने पहुंचे थे। जहां उनकी मुलाकात ब्रजवासी दादा से हुई। शायद उस वक्त विकासपुरूष को हल्की भूख लग रही थी। तो उन्होंने ब्रजवासी दादा से कह दिया। मंच पर हल्दी वाला दूध लेकर आ जाना। बेचारे दादा ... 2 थर्मस दूध लेकर पहुंच गये। किन्तु ग्रीनरूम पर तैनात वर्दी ने रोक दिया। थर्मस ले जाने की इजाजत नहीं दी। जैसे-तैसे दादा को जाने दिया। वह भी सिफारिश पर। कार्यक्रम के बाद विकासपुरूष ग्रीनरूम में बैठे थे। कुछ देर के लिए। अचानक उनको दादा दिखाई दिये। तो बुलाया और दूध का पूछा। ब्रजवासी दादा ने कह दिया। वर्दी ने रोक दिया। उस वक्त अपने उज्ज्वल जी और कप्तान जी भी मौजूद थे। विकासपुरूष ने इशारा किया। तत्काल हल्दी वाला दूध थर्मस सहित आ गया। फिर खुद भी पिया और उज्ज्वल जी और कप्तान जी को भी इसका स्वाद चखाया। ऐसा यह नजारा देखने वालो का कहना है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
2 हजार दिये ...
अपने विकासपुरूष दरियादिल भी है। तभी तो तालोद से लौटते वक्त उन्होंने मजदूरी करने वाली एक दर्जन से ज्यादा लाडली बहनाओं को नगद 2 हजार दिये। तालोद जाते वक्त यह महिलाएं मजदूरी कर रही थी। वहां से वापस लौटे। हल्दी का दूध पीकर। तो कमलप्रेमियों ने उनका स्वागत किया। यही पर जिन महिलाओं को मजदूरी करते विकासपुरूष ने देखा था। वह सभी मौजूद थी। विकासपुरूष ने सभी से राखी बंधवाई। फिर पूछा ... कितनी बहना हो? तो जवाब मिला... 11 है हम। विकासपुरूष ने सभी को 100-100 रूपये देने के निर्देश दिये। इस पर एक लाडली बहना ने बोला। हम ज्यादा है। तो विकासपुरूष ने तत्काल 2 हजार रूपये देने को कहा। बहनाओं को बोला कि सभी आपस में बाट लेना। यह सुनकर कमलप्रेमी और लाडली बहनाएं खुश हो गई। तो हम भी इस खुशी में शामिल होते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
वसूली का अंदाज ....
जिले के एक अधिकारी ने वसूली का नया अंदाज निकाला है। खेती-बाडी किसान वाले विभाग के मुखिया है। ज्यादा समय नहीं हुआ है आए। अब विकासपुरूष का नगर है। तो ऊपरी कमाई हो नहीं सकती है। इसलिए व्यापारियों पर दबाव बनाया। अधिकारी का दावा है। 20 पेटी देकर आये है। इसलिए कमाई करनी जरूरी है। तभी तो फरमान जारी कर दिया। ब्लाक स्तर के अधिकारियों को यह लक्ष्य दिया गया है। वसूली करके लाओं। बता दे कि 1 हजारी व्यापारी और 40 बीज व्यापारी है। जिनसे वसूली की जानी है। जिसके चलते सभी परेशान है। यह विभाग संकुल के पीछे जाने वाले मार्ग पर स्थित है। अब देखना यह है कि वसूली का लक्ष्य पूरा होता है या नहीं? तब तक हम अपनी आदत के अनुसर चुप हो जाते है।
बस चलायेंगे ‘इंदौरीलाल’
शीर्षक पढक़र हमारे पाठक यह अंदाजा नहीं लगाये। अपने इंदौरीलाल जी, खुद बस ड्रायवर की सीट पर बैठकर बस चलायेंगे। ऐसा बिलकुल नहीं है। वह तो पूरे संभाग की बसों का संचालन करेंगे। क्योंकि जल्दी ही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को हरी झंडी मिलने वाली है। पूरे प्रदेश में यह योजना लागू होगी। इसके तहत हर प्रायवेट बस इस सेवा के अधीन होगी। इसकी कमान अपने इंदौरीलाल जी को मिलना पक्का है। क्योंकि वह परिवहन सेवा में पीएचडी धारक है। इस सेवा को हरी झंडी विकासपुरूष ही दिखायेंगे। बाबा और अहिल्यानगरी से इसकी शुरूआत होगी। यह पक्का है। जिसके लिए हम इंदौरीलाल जी को बस चलाने की शुभकामनाएं देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
उडनखटोले में हिटलर जी ...
अपने हिटलर जी से शायद हमारे पाठकगण ज्यादा परिचित ना हो? तो हम बता देते है। अपने विकासपुरूष के विशेष सहायक है। हमेशा पर्दे के पीछे रहकर काम करते है। यही कारण है कि बहुत कम लोग अपने हिटलर जी को जानते है। शनिवार को विकासपुरूष आये थे। बाबा की नगरी से बैजनाथ नगरी जाने वाले थे। उडनखटोले में बैठ चुके थे। अचानक उन्होंने अपने हिटलर जी को बुलवाया और अपने साथ बैठाकर उड गये। अब उडनखटोले में क्या चर्चा हुई होगी? यह हम विकासपुरूष से पूछ नहीं सकते है? क्योंकि वह हमारी रेंज से बाहर है, और हिटलर जी हमसे ज्यादा चुप रहते है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
फूलछाप अध्यक्ष ...
पंजाप्रेमियों में चर्चा है। नहीं चाहिये फूलछाप अध्यक्ष। इशारा अपनी दूसरी मीठी गोली की तरफ है। जिनको अपने चरणलाल जी जिले का मुखिया बनाना चाहते है। यह वही दूसरी मीठी गोली है। जिसने एक बैंक का मुखिया बनने के लिए 10 पेटी का वितरण किया था। जब पंजाप्रेमी सरकार थी। बहरहाल मुद्दे पर आते है। अपने पंजाप्रेमी पहचान गये होंगे। हम किसकी बात कर रहे है। इस दूसरी मीठी गोली को लेकर देश की राजधानी तक शिकायते गई है। मगर चरणलाल जी की मर्जी है। दूसरी मीठी गोली ही पंजाप्रेमी संगठन का मुखिया बने। नतीजा ... यह पक्का है। अगर चरणलाल जी को सफलता मिली। तो शहर के कई वरिष्ठ पंजाप्रेमी सहित कार्यकर्ता इस्तीफा देंगे? ठीक वैसे ही। जैसे देवी अहिल्यानगरी में हुआ था। ऐसा हम नहीं, बल्कि अपने पंजाप्रेमी बोल रहे है। मगर हमको अपनी आदत के अनुसार चुप ही रहना है।
हाथ जोडक़र गुहार ...
हमारी मैडम के अंडर में ड्यूटी मत लगाओं। मैडम का बस नहीं चलता। वरना वह हमसे झाडू भी लगवा लेगी। यह गुहार करने वाले तीसरे डिप्टी कलेक्टर है। इसके पहले अपनी जिज्जी और 20 हजारी मैडम भी साफ इंकार कर चुकी है। इशारा अपनी चटक मैडम जी की तरफ है। जिनकी कार्य और भाषाशैली से दु:खी होकर अब तीसरे डिप्टी कलेक्टर ने गुहार लगाई है। जो कि दाल-बिस्किट वाली तहसील के मुखिया है। गुहार अपने उज्ज्वल जी और फटाफट जी से है। अब सुनवाई होगी या नहीं? हमको पता नही है। इसलिए आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
प्रेम- प्रसंग की चर्चा ...
अपने कमलप्रेमियों में चर्चा है। एक प्रेम-प्रसंग की। जो कि एक नगरसेवक का है। जिसके लिए वह बदनाम हो रहे है। नगरसेवक का दिल जिन पर फिदा हुआ है। वह अपना क्लीनिक चलाती है। तभी तो कमलप्रेमियों के बीच यह चर्चा जोरो पर है। नगरसेवक ने एक परिवार तोडकर अच्छा नहीं किया है। यही वजह है कि दु:खी पति ने फोटो और वीडियों तक बना लिए है। गोपनीय तरीके से। जो कि वायरल भी हो सकते है? अब इसमें कितना सच है-कितना झूठ? हमको नहीं पता है। मगर धुआं उठा है तो आग भी लगी होगी। किन्तु नगरसेवक कौन है? इसको लेकर सभी ने चुप्पी साध रखी है। भरोसा दिलाने पर भी नाम नहीं बता रहे है। पूछो तो बस चुप हो जाते है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
कर्जदार पंजाप्रेमी कौन ...
पंजाप्रेमियों के सोशल मीडिया ग्रुप में एक चेक की फोटो डाली गई है। जिसके बाद ग्रुप में सवालों की झडी लग गई है। चेक अपलोड करने वाले एक सुनार व्यापारी है। पुराने पंजाप्रेमी है। जो कि अपनी 30 हजारी वसूली के लिए चेक अपलोड करने पर मजबूर हो गये है। जब उनको फोन लगाकर पंजाप्रेमियों ने पूछा। आखिर किसने चेक दिया था। तो उन्होंने ग्रुप में लिखकर बताया। जिनको राशि दी थी, उस पंजाप्रेमी की इंदौर रोड पर होटल बन रही है। किन्तु वह उधारी चुकाने को तैयार नहीं है। तभी तो उन्होंने लिखा है। जल्दी ही नाम का खुलासा करेंगे। कर्जदार पंजाप्रेमी संस्था में बड़े पद पर रह चुके है। नतीजा ... पंजाप्रेमियों ने लिखकर सलाह दी है। आपस में बैठकर मामला सुलटा लो। अब यह देखना रोचक होगा। मामला सुलटता है या नाम का खुलासा होता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
तस्वीर खुद बोलती है...
इस तस्वीर को देखकर सभी कमलप्रेमी पहचान गये होंगे। आखिर यह कौन है। तभी तो यह कहा जाता है। तस्वीर खुद बोलती है। किसी शायर ने तभी यह लिखा है। आप जिस हाल में हैं, जिस रंग में हैं खुश रहिए/ सोचिएगा तो जमाने में हैं आजार बहुत... बाकी हमको चुप ही रहना है।