27 जनवरी 2025 (हम चुप रहेंगे)

एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का

27 जनवरी 2025 (हम चुप रहेंगे)

व्हीलचेयर ...

किसी भी इंसान को व्हीलचेयर पर देखकर क्या महसूस होता है। उस पर बैठा इंसान या तो बीमार है या फिर दिव्यांग। यह सच भी है। मगर मंदिर के अंदर अगर व्हीलचेयर पर कोई नजर आये। तो उसे सच में बीमार या दिव्यांग समझने की भूल मत करना। खासकर अलसुबह होने वाली आरती में। व्हीलचेयर पर बैठा इंसान स्वस्थ भी हो सकता है। किन्तु आगे बैठाने के चक्कर में कुछ कर्मचारियों ने इसको धंधा बना लिया है। जिसकी फीस 5 से 3 हजारी होती है। घटना 12 जनवरी के अलसुबह की है। सीनियर डाक्टरों का एक कार्यक्रम था। विभिन्न शहरों और विदेश से डॉक्टर आये थे। करीब 30 डाक्टरों ने आरती में भाग लिया। अपने कटप्पा जी ने अनुमति बनवाकर दी थी। सभी सीनियर सिटीजन थे। इनको खूब पैदल चलना पड़ा। एक कर्मचारी सीनियर हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास आया।  उनको व्हीलचेयर पर बैठाकर आगे-आगे बैठाने का वादा किया। इसके बदले 5 हजारी फीस मांगी। उन्होंने मना कर दिया। जिसके बाद प्रसिद्ध न्यूरो सर्जन से बात की। 3 हजारी में सौदा पट गया। न्यूरो सर्जन ने अपने दोस्तों से राशि लेकर कर्मचारी को दी। यह घटना पूरी तरह सच है। अब देखना यह है कि व्हीलचेयर के नाम पर चल रहे इस धंधे पर कब रोक लगती है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

पतंग ...

घटना 14 जनवरी की है। घटनास्थल उदयन मार्ग है। अपने नये-नवेले कमलप्रेमी मुखिया का स्वागत करने कमलप्रेमी उनके घर पहुंचे थे। कमंडल के  कुछ मुखिया भी शामिल थे। स्वागत के बाद अपने दाल वाले नेताजी ने अंदर चले गये। तब कमलप्रेमी संगठन के सोशल मीडिया नेताजी ने तंज कसा। एक कमंडल मुखिया को। उन्होंने कह दिया। तुमने तो सब की पतंग ही काट दी। इशारा उनकी नियुक्ति की तरफ था। यह सुनकर कमंडल मुखिया ने पलटकर जवाब दिया। आपकी पतंग तो बहुत पहले ही कट चुकी है।  कमंडल मुखिया का इशारा सोशल मीडिया नेताजी के निजी जीवन की तरफ था। बेचारे ... बगैर तलाक हुए जीवन काट रहे है। जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी कमलप्रेमी मुस्कुरा दिये। सोशल मीडिया नेताजी इस व्यंग्य को सुनकर झेंप गये। नतीजा चुप हो गये। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

शिकायत ...

घटना उस दिन की है। जब अपने विकासपुरूष टनल के अंदर गये थे। काम की प्रगति देखने । उनका वाहन सबसे पहले पहुंचा। वह तत्काल अंदर भी चले गये। उसके बाद प्रभारी बाऊजी, अपनी बहन जी सहित बाकी कमलप्रेमी पहुंचे। वर्दी ने इन सभी को रोक दिया। रोकने वाली पडोसी जिले से आई 3 स्टारधारी मैडम थी। उनको बताया भी गया। जिले के प्रभारी है। किन्तु जवाब मिला। कप्तान जी का आदेश है। किसी को नहीं जाने दिया जाये। यह सुनकर अपनी बहन जी ने तत्काल फोन लगाया। डेल्टा जी को। नसीहत दी। आगे से ड्यूटी पर ऐसे लोगों को लगाया जाये। जो जनप्रतिनिधि को पहचानते हो। ऐसा हम नहीं, बल्कि वर्दी के भरोसेमंद सूत्र बोल रहे है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते है।

चिराग ...

शीर्षक पढ़कर यह कयास नहीं लगाये। हम अलाउद्दीन वाले चिराग की कहानी लिखने वाले है। जिसमें चिराग रगड़ते ही ... क्या हुक्म.... मेरे आका...बोलते हुए जिन्न बाहर आता है। हमारा आशय तो उस कहावत की तरफ है। जिसमें चिराग तले अंधेरा होता है। संकुल के गलियारों में यह कहावत सुनाई दे रही है। इशारा नकल के लिए अक्ल लगाकर अपनी जेब गर्म करने से जुड़ा है। जो प्रतिदिन 5 से 10 हजारी है। यह धंधा संकुल के कक्ष क्रं. 109 में फल-फूल रहा है। इस काम को अंजाम देने वाली गैंग में चौकड़ी शामिल है। जो कि यूं तो नकल आवेदन पर लंबी तारीख देती है। मगर कोई अपनी जेब खाली करने को राजी हो जाये। फिर नकल अधिकतम 3 से 4 घंटे में मिल जाती है। अब देखना यह है कि दूसरे माले के मुखिया, चिराग तले अंधेरा वाली कहावत को कब गलत साबित करते है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।  

25 पेटी ...

दाल-बिस्किट वाली तहसील में चर्चा है। 25 पेटी लेकर काम करने की। मामला नामांतरण से जुड़ा है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। 2 भाईयों के बीच संपत्ति विवाद का मामला है। नियमानुसार नामांतरण नहीं हो सकता था। लेकिन 25 पेटी के लालच में नामांतरण कर दिया। नगरीय सीमा क्षेत्र का मामला है। दूसरे पक्ष ने अपील समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। मगर 25 पेटी किसने ली। इसको लेकर कोई भी खुलकर नहीं बोल रहा है। नगरीय प्रशासन की तरफ इशारा कर रहे है। इसलिए हम भी इशारा समझकर, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

इंतजार ...

दाल-बिस्किट वाली तहसील के एसडीएम को इंतजार है। इंतजार बंगला खाली होने का है। जो अभी तक खाली नहीं हुआ है। पुरानी एसडीएम मैडम ने बंगले पर ताला डाल रखा है। नतीजा उनकी जगह भेजे गये एसडीएम रेस्टहाऊस में डेरा डालकर इंतजार कर रहे है। बंगला खाली होने का। डॉ. हनुमान के भक्त एसडीएम अपनी अर्जी भगवान को भी लगा चुके है। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई है। देखना यह है कि उनका यह इंतजार कब खत्म होता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

गुहार ...

स्कूली बच्चे गुहार लगा रहे है। अपने दूसरे माले के मुखिया से। गुहार भूख से जुड़ी है। आदिवासी हास्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को सुबह 7 बजे नाश्ता दिया जाता है। जिसके बाद वह स्कूल जाते है। स्कूल के लंच टाईम में जब बाकी विद्यार्थी लंच करते है। तब यह सभी लंच करने वालो का मुंह देखते रहते है। दोपहर 2 बजे हास्टल पहुंचने पर लंच मिलता है। शाम 6 बजे तक डिनर दे दिया जाता है। जिसके चलते कई विद्यार्थियों को रात 9 से 10 के बीच भूख लगने लगती है। इन बच्चों की गुहार है कि सुबह का नाश्ता उनको लंच बाक्स में लाने की इजाजत दी जाये। शाम का खाना रात 8 बजे मिले। ताकि रात में उनको भूख नहीं सताए। उम्मीद है कि विद्यार्थियों की गुहार अपने दूसरे माले के मुखिया जरूर सुनेंगे। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

ऋण ...

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जिनको विकासपुरूष पिछले कई सालों से हम लिखते आ रहे है। उन्होंने फिर साबित किया कि कलमकार का उनके दिल में हमेशा सम्मान है। भले ही वह उनका आलोचक हो। तभी तो मेरे जैसे अदने कलमकार को सहायता देने में एक पल की देरी नहीं लगाई। इलाज का पूरा खर्च स्वेच्छानुदान मद से दिया। जिसके लिए चुप रहने वाला यह कलमकार उनका आजीवन ऋणी रहेगा। इसके साथ ही राजेश कुशवाह व डॉ. रवि सोलंकी का विशेष आभार। जिन्होंने दोस्ती का फर्ज निभाया। मेरे पत्रकार साथीगण शादाब अंसारी, अमृत बेंडवाल, आशीष सिसौदिया, धन्ना शर्मा, आनंद निगम, अजय पटवा आदि का भी आभार। जिन्होंने मंदिर में ही मुझे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। जनसंपर्क अधिकारी अरूण राठौर का विशेष आभार। जिन्होंने अस्पताल एडमिशन कराने में अपनी महत्ती भूमिका निभाई। इन सभी का हम चुप रहेंगे डॉटकाम दिल से आभार व्यक्त करता है।

अग्रिम बधाई ...

जनपद उज्जैन में कमल का खिलना पक्का है। वह भी र्निविरोध। ऐसा अपने कमलप्रेमी बोल रहे है। फिलहाल सभी कमलप्रेमी जनपद सदस्य अज्ञात यात्रा पर है। विकासपुरूष से मुलाकात करने के बाद। उनकी वापसी 28 को होगी। जिस दिन चुनाव होंगे। अध्यक्ष कौन होगा? इसका खुलासा उसी दिन होगा। इधर पंजाप्रेमियों ने इस बार चुनाव से दूर रहने का मन बना लिया है। ऐसी चर्चा कमलप्रेमियों के बीच है। फैसला 28 को होगा। तब तक हम अग्रिम बधाई देते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।

मेरी पसंद ...

रहता है सुकरात कोई मेरे अंदर/ जहर को भी सौगात समझ लेता हूं मैं...