29 सितम्बर 2025 (हम चुप रहेंगे)
एक हुनर है चुप रहने का, एक ऐब है कह देने का |
हटा देना...हटा देंगे
राजनीति में कार्यकर्ता और नेता के बीच समन्वय जरूरी होता है। दोनो एक दूसरे के पूरक होते है। मगर सत्तादल में यह असन्तुलन लगातार बढता जा रहा है। शुक्रवार की शाम यही हुआ। अपने हाइनेस के निवास पर बैठक थी। कारण...कन्या पूजन को अंतिम रूप देना था। कमण्डल मुखिया मौजूद थे। इसमे दौलतगंज वाले कमण्डल मुखिया और हाइनेस के बीच तनातनी हो गई। वजह..संख्या निर्धारण को लेकर। जिसके लिए एक फार्म पर दस्तखत करने थे। कमण्डल मुखिया ने मना कर दिया। हाइनेस ने आक्रोश दिखाया। कमंडल मुखिया ने पलटवार किया। बोल दिया। आपका खास बंदा हर जगह बोलता है। तुझे हटा देंगें। आप तो मुझे हटा दो। नही रहना कमण्डल का मुखिया। यह बोलकर कागज वही पटक दिए। इधर हाइनेस ने भी बोल दिया। दो-चार दिन में तुझे हटा देंगे। ऐसा अपने कमलप्रेमी बोल रहे हैं। मगर हमकों तो बस चुप ही रहना है।
केवल 8 बोतल....
इन दिनों अपने कमलप्रेमी सेवा पखवाडा मना रहे हैं। जिसमे साफ सफाई से लेकर रक्तदान भी शामिल है। नमो जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में पखवाडा मनाया जा रहा है। हर साल मनाते हैं। जिसमें रक्तदान पर जोर रहता है। किंतु पहली दफा ऐसा हुआ। पखवाडे के तहत चरक में शिविर लगा। जिसमे मात्र 8 कमलप्रेमियो ने ही रक्तदान किया। इसमे भी चर्चित नाम केवल पिपली नाके के कमलप्रेमी ..रोज खाओ दाल बाटी वाले नेता का है। बाकी कोई शिविर तरफ झांका भी नहीं। जबकि 2 साल पहले का आंकडा हमेशा 70 से 100 के बीच का होता था। जब पहलवान खुद रक्तदान शिविर आयोजित करवाते थे। ऐसा हम नही,बल्कि पुल पार वाले कमलप्रेमी बोल रहे हैं। जिसमें हम क्या कर सकते हैं। बस अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं।
समीक्षा जरूरी है...
पूरा रायता फैला दिया है। इसको समेटेगा कौन! यह तंज भरी बैठक में कसने वाले एसीएस साहब आज बाबा की नगरी में आ रहे हैं। स्वागत है। सिंहस्थ को लेकर वह पहले ही एक बैठक में रायता फैला दिया..बोलकर अपनी राय जाहिर कर चुके है। इस पर एक औऱ नया मामला सामने आया है। जिसकी अभियंता वर्ग में खूब चर्चा है। यह मामला नदी पर 8 लेन पुल बनाने से जुडा है। रामघाट की छोटी रपट को 6 फीट ऊपर उठाकर 100 फीट चौडा करने की योजना है। जिसको लेकर यह संभावना व्यक्त की जा रही है। अगर ऐसा हुआ,तो सिंहस्थ के दौरान भक्तो की भीड और फिसलन से कोई दुर्घटना हो सकती है? इधर बाकी लगे घाट भी लेबल से नीचे हो जाएंगे। इसको बनाने वाला सेतु विभाग केवल लागत बढाकर, अपना निजी फायदा देख रहा है। तभी तो अभियंता वर्ग में सुगबुगाहट है। 8 लेन पुल की पुन: समीक्षा होनी चाहिए। खुद विकास पुरुष को इस योजना पर ध्यान देना होगा। अब देखना यह है कि रायता फैलाने का तंज कसने वाले साहब और उम्मीद जी,उज्ज्वल जी, इसकी समीक्षा करते हैं या नहीं। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
हडताल के संकेत...
विकास पुरूष के गृहनगर में हडताल के संकेत मिल रहे हैं। काम बंद करने के मूड में सबसे निचले स्तर के कर्मचारी है। जो सफाई करके शहर को हम सभी के जीने लायक बनाते हैं। मगर शिवाजी भवन के नए आलाकमान अपने अलग अंदाज में इनको हांक रहे हैं। 10 दिन पहले सडक से बांस उठाकर एक को चटका चुके हैं। वो मामला शांत ही हुआ था। एक दरोगा को सेवा मुक्ति दे डाली। पेट पर लात मार दी। जिससे सफाई कामगार और भडक गए है। ताज्जुब इस बात का है कि अपने उम्मीदजी के यह शिष्य उनसे कुछ भी नहीं सीखे है। उम्मीदजी ने हमेशा प्यार और डर दोनो का संतुलन बनाकर रखा। किसी के पेट पर लात नही मारी और न कभी हाथ उठाया। जिसके कारण आज भी सफाई कामगार उनके मुरीद है। मगर नए आलाकमान ने तो टेरर का तरीका अपनाया है। जो कि आगे चलकर विद्रोह की शक्ल लेने वाला है। अंदरखाने की खबर है। अगर व्यवहार में सुधार नहीं आया तो 1 दिन की हड़ताल होना तय है। कामगार संघ तैयारी में है। देखना यह रोचक होगा। हडताल होती है या व्यवहार सुधरता है। तब तक हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
किसी को कोई आपत्ति...
कल्पना कीजिए। सोचिए। अगर केवल... किसी को कोई आपत्ति...बोलने से 1 पेटी का मुनाफा कमाया जा सकता है? तो हमारे पाठकगण, हमको बेवकूफ की उपाधि देने में देर नहीं करेंगे। मगर यह सच है। क्योंकि मामला प्राकृतिक खनिज संपदा का है। इसमें यही होता है। अनुमति को रिन्यू करवाते समय। बाकायदा संकुल का एक अधिकारी जाता है। जहाँ माइक पर केवल, किसी को कोई आपत्ति..बोलता है। सामने बैठने वाले उसी खदान के ही मजदूर होते हैं। बस,यह बोलकर रिनुअल करने के बदले 1 पेटी मिल जाती है। इसमें मुख्य भूमिका भरतपुरी का दूषित विभाग निभाता है। वही उगरानी करता है। जैसे पिछले दिनों तराना, घट्टिया, ओर पाटपाला में हुआ। 3 पेटी की कमाई हुई। ऐसी चर्चा दुषित विभाग से लेकर संकुल के गलियारों में सुनाई दे रही है। इसके बाद भी अगर पाठकगण हमको बेवकूफ की उपाधि देते हैं। तो हम उसको स्वीकार करते हुए, अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
नसीहत से सबक नहीं लिया...
अपने कमलप्रेमी इन दिनों खुलकर बोल रहे है। नसीहत से सबक नहीं लिया। काश..लेते तो यह घटना ही नहीं होती। इशारा अपने विकास पुरूष की तरफ है। जिन्होंने मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में संदेश दिया था। वैसे तो सभी के लिए संदेश था। मगर खासकर अपने दालवाले नेताजी के लिए था। विकास पुरूष ने साफ-साफ कहा था। अब पद पर हो, तो बोलने से पहले सोचकर बोलना बहुत जरूरी है। तब खूब तालियां बजी थी। अपने दालवाले नेताजी ने भी बजाई थी। किन्तु जैसे जैसे दिन गुजरे। वैसे वैसे सब इस संदेश को भूल गए। नतीजा सामने है। धर्म का नाश हो...बोल गए। पँजाप्रेमियो को मौका मिल गया। जिससे उच्च स्तर तक कमलप्रेमियो की किरकिरी हुई। जिसके बाद दबी जुबान से कमलप्रेमी बोल रहे हैं। अपने विकास पुरुष ने दूरभाष पर जमकर क्लास ली है। किसकी? यह हमको लिखने की जरूरत नहीं है। पाठकगण और कमलप्रेमी हमसे ज्यादा समझदार है। वह समझ ही गए होंगे। इसलिए हम अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
बेरिकेड्स किसने उठाए...
बेचारा लोनिवि । उसने कभी कल्पना नहीं की थी। हेलीपेड से उसके बेरिकेड्स कोई ले जा सकता है। पुलिस लाइन में होते हुए डर होना भी नही चाहिए। मगर ऐसा हो गया। कोई बाले बाले हमेशा लगे रहने वाले बेरिकेड्स उठा ले गया। खुलासा तब हुआ, जब रविवार को विकास पुरूष के आने के संकेत मिले। तो हेलीपेड पहुँचे। तब जो नजारा देखा। 1 दर्जन बेरिकेड्स गायब थे। लोनिवि के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई। खोजबीन हुई। तो क्लियर हुआ कि उस जगह पर रखे हैं। तत्काल उठाधरी करके मंगवाए गए। तब जाकर सांस में सांस आई लोनिवि की। मगर सवाल यह है कि किसके इशारे पर बेरिकेड्स ले जाए गए? इसको लेकर सब चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं।
ऐसा भी होता है...
पँजाप्रेमी बोल रहे हैं। ऐसा भी होता है। इशारा अपने होटल वाले भिया की तरफ है। जिनका जन्मदिन पिछले सप्ताह था। खास समर्थकों की आदत होती है। वह रात 12 बजे घर जाकर ढोल बजवा देते हैं। अपने नेताजी के। यहां भी ऐसा ही हुआ। मगर भिया को यह अंदाज पसन्द नही आया। वह घर से निकले और उन्होंने तबीयत से सबकी लू उतार दी। नाराजगी दिखाई। जिसके चलते आयोजकों ने दौड लगा दी। अब सुनने में आ रहा है। भिया सभी को पार्टी देने के मूड में है। ताकि नाराजगी दूर की जा सके। पँजाप्रेमी तो यही बोल रहे हैं। सच ओर झूठ का फैसला खुद पँजाप्रेमी कर लें। बाकी हमको चुप ही रहना है
हम तो वापस जा रहे....
हेलीपेड, आजकल कमलप्रेमियो का मुख्यालय बन गया है। जब जब विकास पुरूष आते है। अंदर इस कदर भीड होती है कि सारे नियम कायदे ताक में रखे रह जाते है। रविवार को भी यही हुआ। अंदर हर बार की तरह भीड। उस पर विकास पुरुष को धन्यवाद देने आए किसान बाहर लाइन में। भावन्तर योजना को लेकर अन्नदाता आए थे। होर्डिंग्स लेकर। इस बीच अन्नदाताओं को यह बात अखर गई। हर रोज आने वाले अंदर और हम बाहर। सुगबुगाहट शुरू हो गई। वापस चलो..वापस चलो। यह बात अपने दालवाले नेताजी तक पहुँची। वह तत्काल बाहर आए और सभी को अंदर ले गए। अंदर ही ढोल भी बज रहे थे। जिसे देखकर एक वर्दीधारी ने कहा। हेलीपेड है या कमलप्रेमी मुख्यालय। जिसे सुनकर वहाँ मौजूद सभी ने ठहाका लगाया और फिर चुप हो गए। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते है।
पंडित जी की मुलाकात...
अपने स्मार्ट पंडित जी तो पाठको को याद होंगें। वैसे यह सच है। आजकल किसी को भूलने में देर नहीं लगती है। जब प्रेमी युगल एक-दूसरे को भूल जाते है। बकौल डॉ बशीर बद्र। दूसरी कोई लडकी जिंदगी में आएगी/कितनी देर लगती है उसको भूल जाने में..! यह नियम सभी पर लागू होता है। तो फिर स्मार्ट पंडित जी को कौन याद रखेगा। इन दिनों लूप लाइन में है। कभी शिवाजी भवन का पत्ता भी उनकी इजाजत बगैर नहीं खडकता था। वही स्मार्ट पंडित पिछले दिनों आए थे। किसी को कोई खबर नहीं लगी। बाबा के दर्शन किए और फिर अपनी बहनजी से मुलाकात की। जिसके बाद इस मुलाकात को लेकर चर्चा है। सब अपने अपने कयास लगा रहे है। कोई कह रहा है कि मुलाकात का मकसद था। खुद का सही जगह पर पुनर्वास करवाना था, तो कुछ कह रहे है कि औपचारिक मुलाकात थी। सच क्या है। यह केवल अपने स्मार्ट पंडित जी ही जानते है। जो कि चुप है। तो हम भी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
आवास की लडाई ...
उदयन मार्ग पर स्थित एक बंगले की लडाई अब आर-पार की हो गई है। यह बंगला आवंटित तो इंडस्ट्री विभाग के मुखिया को हुआ है। जो कि अपर कलेक्टर है। अपने उम्मीदजी के कार्यालय से उनके नाम पर ऑर्डर निकला है। मगर इस पर कब्जा नगर सैनिक मुखिया ने कर रखा है। जो कि खाली करने को तैयार नहीं है। उल्टे सुरक्षा के लिए सैनिक लगा दिए है। मृदभाषी अपर कलेक्टर कई कोशिश कर चुके है। मगर सफलता नहीं मिली है। अब अपने उम्मीदजी ही कोई जादू दिखा सकते है। वरना बंगला खाली होने के आसार कम ही है। जिसमें हम क्या कर सकते है। बस, अपनी आदत के अनुसार चुप रह सकते हैं
गाडी से उतर..
रविवार को विकास पुरुष हेलीपेड पर उतरे थे। उसके बाद सीधे कन्या पूजन के कार्यक्रम में पहुँचे। जो कि अपने हाइनेस ने करवाया था। इस कार्यक्रम के खत्म होने पर अगली जगह जाना था। विकास पुरुष के वाहन में एक पूर्व महामंत्री मौका देखकर घुस गए। थोडी देर बाद अपने दालवाले नेताजी का आगमन हुआ। वाहन में पूर्व महामंत्री को देखकर वह आश्चर्य में पड गए। कुछ पल के लिए। बस, फिर उन्होंने अपनी स्टाइल में फटकार लगाकर भूतपूर्व को उतार दिया। उनकी स्टाइल कैसी होती है। इससे हर कमलप्रेमी वाकिफ है। ऐसी चर्चा, वह कमलप्रेमी कर रहे है। जिन्होंने यह नजारा देखा। कुछ कलमप्रेमी भी इसके गवाह है। जिसके बाद पूर्व महामंत्री चुपचाप उतर गए और चुप है। तो हम भी अपनी आदत के अनुसार चुप हो जाते हैं
मेरी पसंद ...
या तो हमसे यारी रख/ या फिर दुनियादारी रख।
खुद पर पहरेदारी रख/ अपनी दावेदारी रख।
जीने की तैयारी रख/ मौत से लडना जारी रख।
लहजे में गुलबारी रख/ लफ्जों में चिंगारी रख।
जिससे तू लाचार न हो/ इक ऐसी लाचारी रख।
विज्ञान व्रत